शीतकालीन सत्र / संसद में शिवसेना अब विपक्ष में,सर्वदलीय बैठक में मोदी भी

संसद सत्र 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलेगा, सरकार के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक पास कराना चुनौती
मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में नागरिकता विधेयक लोकसभा में पास हुआ, पर राज्यसभा में अटक गया था
नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में पूर्वोत्तर के राज्यों विशेषकर असम में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे
नई दिल्ली. संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलेगा। महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए एनडीए से अलग हुई शिवसेना अब विपक्ष में बैठेगी। शनिवार को सूत्रों ने बताया कि शिवसेना के सांसद संजय राउत और अनिल देसाई के लिए इसी सत्र से राज्यसभा में बैठक व्यवस्था बदली जाएगी। दूसरी ओर, राउत ने कहा है कि शिवसेना सत्र से पहले एनडीए की किसी बैठक में शामिल नहीं होगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल हुए।
केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के उद्देश्य से नागरिकता (संशोधन) विधेयक समेत कई अहम बिल पेश करेगी। नागरिकता कानून में बदलाव के जरिए सरकार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के बाद भारत आकर बसे गैर-मुस्लिमों जैसे- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों को स्थाई नागरिकता देना चाहती है।
विपक्षी नागरिकता विधेयक के विरोध में है
मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में भी नागरिकता विधेयक को संसद में पेश किया था, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। विपक्षी दलों ने धार्मिक आधार पर भेदभाव के रूप में बिल की आलोचना की थी। यह बिल जनवरी में लोकसभा से पारित हो गया था, लेकिन राज्यसभा से पारित नहीं हो पाया था। बिल को लेकर असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों ने आपत्ति जताई थी और कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
6 साल भारत में गुजारने वालों को भी नागरिकता मिलेगी
नागरिकता बिल के जरिए 1955 के कानून को संशोधित किया जाएगा। इसमें नागरिकों को 12 साल की बजाय सिर्फ छह साल भारत में गुजारने और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी। पूर्वोत्तर के लोगों का विरोध है कि यदि यह बिल पास होता है तो इससे राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत खत्म हो जाएगी। इस बिल के माध्यम से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। जबकि असम समझौते के अनुसार 1971 से पहले आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान था।

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