लौट के बुद्धू… बुलावे पे पायलट मिले राहुल-प्रियंका से, सुलह फार्मूला मुश्किल

फाेटो ठीक डेढ़ साल पुरानी है। 10 जनवरी 2019 को सीएम अशोक गहलोत के बुलावे पर राहुल गांधी ने जयपुर में किसानों को संबोधित किया था। सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री थे और उन्होंने राहुल को साफा बांधा था।
सचिन पायलट को मैसेज- वापसी करना चाहें तो एडजस्टमेंट के लिए कुछ समय इंतजार करना होगा
गहलोत के खिलाफ बगावत के बाद पायलट समर्थक विधायक दिल्ली और हरियाणा के होटलों में ठहरे हुए हैं

नई दिल्ली: राजस्थान में 14 अगस्त से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। इसके पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को सचिन पायलट ने दिल्ली में राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। पायलट की कांग्रेस में वापसी का फॉर्मूला तलाशा जा रहा है, लेकिन पार्टी ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री पद के बारे में कोई बात नहीं होगी। पायलट अगर लौटना चाहें तो एडजस्टमेंट के लिए कुछ समय इंतजार भी करना पड़ेगा।

दो तरह के फॉर्मूले पर बात होने की चर्चा
पहला-सचिन पायलट से कहा गया है कि दिल्ली आकर पार्टी संगठन में कोई जिम्मेदारी संभालें।
दूसरा-पायलट गुट से कोई और नेता उपमुख्यमंत्री बना दिया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, पायलट कांग्रेस के प्रमुख नेताओं से पहले से संपर्क में थे। राहुल से मुलाकात की पहल खुद आलाकमान की ओर से की गई थी। पायलट गुट के सभी विधायक भी लगातार कह रहे हैं कि हमारी नाराजगी पार्टी से नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि सचिन पायलट लगातार पार्टी नेतृत्व के साथ संपर्क में हैं। पार्टी ने भरोसा दिया है कि राजस्थान में सरकार का संकट सुलझा लिया जाएगा।

सुलह की 3 वजहें बताई जा रही हैं
पहली- विधायक-खरीद फरोख्त मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। दूसरी- राष्ट्रद्रोह का मामला हटने से विधायकों को राहत मिली है। तीसरी- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक में संकेत दिए थे कि आलाकमान का फैसला उन्हें मंजूर होगा।
भाजपा ने 11 अगस्त को विधायक दल की बैठक बुलाई
इस बीच, भाजपा ने 11 अगस्त को विधायक दल की बैठक बुलाई है। पार्टी गुजरात गए अपने 18 विधायकों को भी वापस बुलाएगी। मंगलवार को शाम 4 बजे जयपुर के होटल क्राउन प्लाजा में विधायक दल की बैठक होगी।

गहलोत ने सभी विधायकों को भावुक चिट्ठी लिखी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को सभी दलों के विधायकों को एक भावुक चिट्ठी लिखकर कहा था कि आप सरकार गिराने की साजिश का हिस्सा नहीं बनें। अंतरात्मा क्या कहती है, उसके आधार पर फैसला करें। चिट्ठी जारी करने के कुछ देर बाद ही गहलोत जैसलमेर पहुंचे, वहां उनके अलग ही तेवर दिखे। वे कहते हैं कि भाजपा विधायकों में फूट पड़ गई, इसलिए 3-4 जगह बाड़ेबंदी की जा रही है। भाजपा विधायकों की पोल खुल गई है। विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग हो रही थी, इसलिए उन्हें बाड़ेबंदी करनी पड़ी। भाजपा के नेता बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन अब वे चार्टर विमानों से विधायकों को भेजकर बाड़ेबंदी कर रहे हैं।
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32 दिन बाद हुई इस मुलाकात से यह तय है कि गहलोत सरकार पर संकट के बादल छंट गए हैं
चर्चा है कि पायलट गुट के बागी विधायकों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा
राहुल गांधी और सचिन पायलट की मुलाकात बाद राजस्थान के राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। 32 दिन बाद हुई इस मुलाकात से यह तय है कि गहलोत सरकार पर संकट के बादल छंट गए हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर एक महीने से अपनी मांगों पर अड़े सचिन पायलट क्यों मान गए? क्या पायलट के सामने रास्ते बंद हो गए थे या फिर आलाकमान पायलट की कुछ शर्तों को मान गया।

अब आगे क्या हो सकता है?

1. गहलोत सरकार आसानी से बच जाएगी
दिल्ली में राहुल गांधी और सचिन पायलट की मुलाकात के बाद यह माना जा रहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी फिलहाल कुछ महीने के लिए बच सकती है। यानी मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि बागी विधायक सदन में गहलोत सरकार का समर्थन करेंगे।

2.तुरंत नहीं,लेकिन कुछ महीनों बाद गहलोत को कुर्सी छोड़नी होगी
राजनीतिक जानकार और कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि राहुल-पायलट की मुलाकात में यह साफ हो चुका है कि कांग्रेस तुरंत मुख्यमंत्री बदलने को राजी नहीं है, क्योंकि इससे गलत संदेश जाएगा, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने पायलट से वादा किया कि है कुछ महीनों बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री बदला जाएगा। कांग्रेस ने पायलट से कहा है कि एडजस्टमेंट के लिए थोड़ा इंतजार करें।

3. सचिन के हाथ भी नहीं लगेगा मुख्यमंत्री पद
राहुल-पायलट की मुलाकात के बाद यह तो तय हुआ है कि कुछ महीने बाद राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलेगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि नए फार्मूले में सचिन के हाथ मुख्यमंत्री का पद आना मुश्किल है, क्योंकि गहलोत खेमा उनके मुख्यमंत्री बनने का विरोध करेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री कोई तीसरा ही बन सकता है।

4.बागी विधायकों में से जो मंत्री थे,वे फिर मंत्री बनेंगे
यह भी चर्चा है कि बागी विधायकों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। यह वादा भी किया गया है कि पायलट खेमे के जो बागी मंत्री थे, उन्हें फिर मंत्री पद दिया जाएगा। भले ही यह तुरंत न हो,लेकिन इसके लिए जल्द मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा।

सुलह की बातचीत के लिए क्यों मान गए पायलट?
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बागी तेवर के बाद भी अंदरखाने पायलट की वापसी के प्रयास चल रहे थे। पायलट को उम्मीद थी कि उनके साथ 30 विधायक आ जाएंगे, लेकिन उन्हें सिर्फ 22 विधायकों का ही समर्थन मिला। भाजपा में वसुंधरा राजे की चुप्पी से भी पायलट को संदेश गया कि वे गहलोत सरकार गिराने के पक्ष में नहीं हैं। 32 दिनों के घटनाक्रम के बाद कोई हल न निकलता देख पायलट खेमे के कुछ विधायक भी सुलह का दबाव बना रहे थे।

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