चीफ जस्टिस रमेश रंगनाथन उत्तराखंड में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंतित, जरूरत बताई समवेत अभियान की

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश में नशा लगातार अपनी जड़ें जमा रहा है. नशे को लेकर अपनी गहरी चिंता जताते हुए हाई कोर्ट चीफ जस्टिस ने इस अभियान की पहल की है. जजों ने शुरू किया ‘संकल्प नशामुक्त देवभूमि’ नाम से अभियान शुरू
प्राधिकरण की मांग, 13 जिलों में नि शुल्क नशा मुक्ति केंद्र हो स्थापित
देहरादून, 28 सितंबर ! हाईकोर्ट के जजों ने देवभूमि उत्तराखंड को नशा मुक्त करने की मुहिम शुरू की है. इस मुहिम के लिए नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश रंगनाथन नें ‘संकल्प नशा मुक्ति देवभूमि’ अभियान की शुरुआत की. यह पहली बार है जब नशे के खिलाफ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सहित जज सुधांशु धुलिया, लोकपाल सिंह के द्वारा यह पहल की गई है.
नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन ने उत्तराखंड में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर न्यायपालिका सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा।
देहरादून,। कौलागढ़ रोड स्थित ओएनजीसी के एमएन घोष सभागार में संकल्प नशा मुक्ति देवभूमि अभियान का शुभारंभ करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन ने उत्तराखंड में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर न्यायपालिका, सरकार और समाज को साथ मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश मे 40 फीसद लोग अल्कोहल का सेवन करते हैं, जबकि युवाओं में हेरोइन, गांजा, भांग आदि की प्रवृति बढ़ती जा रही है। उत्तराखंड नशा मादक पदार्थों की सप्लाई का हब बनता जा रहा है, जो बेहद चिंतनीय है।
यहां पर 18.8 प्रतिशत लोग अल्कोहल का सेवन करते हैं, जबकि 6.2 प्रतिशत लोग इंजेक्शन के द्वारा नशे का सेवन करते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि नैनीताल, अल्मोड़ा उधमसिंह नगर व देहरादून में स्थिति काफी गंभीर है। एक बात और यहां नशा करने वाले सत्तर प्रतिशत लोग कमजोर तबके के हैं, जिनके पुनर्वास के लिए और नशा छुड़ाने के लिए सरकार को भी कदम बढ़ाना होगा।
संकल्प नशामुक्त देवभूमि की शुरुआत?
ओएनजीसी सभागार से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अन्य मुख्य जजों के साथ मिलकर ‘संकल्प नशामुक्त देवभूमि’ नाम से अभियान शुरू किया. नशे के खिलाफ चीफ जस्टिस के इस अभियान का पुलिस विभाग, कई शिक्षण संस्थानों सहित तमाम संस्थानों ने सहयोग किया है. इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, DG, LO अशोक कुमार सहित तमाम पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी भी मौजूद रहे. इन सभी लोगों इस अभियान के तहत देव भूमि को नशा मुक्त करने का संकल्प लिया.
प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉक्टर ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदेश में नशा लगातार अपनी जड़ें जमा रहा है. नशे को लेकर अपनी गहरी चिंता जताते हुए हाई कोर्ट चीफ जस्टिस ने इस अभियान की पहल की है. ज्ञानेन्द्र शर्मा के मुताबिक अभी तक प्राधिकरण के जरिए कराए गए सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 5 साल के मासूम बच्चे से लेकर 15 साल के नाबालिग युवक नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं.
नशे की सप्लाई की जड़ से हों खत्म
इसके अलावा स्कूल कॉलेजों शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाला युवा वर्ग आज नशे से ग्रसित है जो अपने आप में चिंताजनक है. अभियान के पहले 20 कार्य दिवस के दौरान इस बात का प्रयास रहेगा कि सिर्फ नशे से पीड़ित व्यक्ति जेल ना जांए. वहीं इसकी जगह नशे का सामान परोसने वाले जो असली गुनहगार हैं छोटा या बड़ा वो सलाखों के पीछे हों.
डॉक्टर ज्ञानेंद्र के मुताबिक अभियान का पहला प्रमुख उद्देश्य नशे की सप्लाई की जड़ तक जाकर डिमांड वाले हिस्से तक चोट पहुंचाने का है जिससे इस काले कारोबार पर प्रभावी अंकुश लग सके. प्राधिकरण ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में नि शुल्क नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि नशे से ग्रस्त 70% गरीब लोगों का सही रूप से उपचार कर उनका पुनर्वास किया जा सके.
पुनर्वास कार्यक्रम में नशे के कारण शिक्षा से वंचित होने वाले और रोजगार से पिछड़ने वाले लोगों को इस तरह से पुनर्वास किया जाएगा जिससे वह समाज की मुख्यधारा में जुड़ सकें.
वहीं, न्यायाधीश सुधांशु धूलिया ने नालसा की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि नशा दुनिया का पेट्रोलियम और हथियार के बाद तीसरा सबसे बड़ा कारोबार बन गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। इसलिए न्यायपालिका ने संकल्प नशा मुक्त देवभूमि अभियान की शुरुआत की है। जिसका असर दूरगामी होगा।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य जिला जज जी के शर्मा ने बताया कि नशे के खिलाफ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण प्रदेश भर में व्यापक अभियान चलाएगा. जिसके लिए उनके द्वारा जिलों में टास्कफोर्स का गठन किया गया है. जिसमें पुलिस, वन, राजस्व, न्यायिक, प्रशासनिक, एनजीओ और नशा मुक्ति केंद्र के संचालकों को रखा गया है. जो नशे की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करेगा.पढ़ें-उत्तरकाशी हेलीकॉप्टर क्रैश: कैप्टन रंजीत लाल को मिला था ‘हिल रत्न’ अवॉर्ड, जानिए क्यों ?साथ ही नशे के कारोबार को रोकने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जिसमें स्थानीय लोग नशे के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करवा सकेंगे. वहीं अब तक नशे को जड़ से खत्म करने के लिए प्रदेशभर के जिलों में करीब 900 के आसपास वॉलिंटियर इस अभियान से जुड़ चुके हैं. जो ड्रग्स, स्मैक समेत अन्य नशे की वस्तुओं को बेचने खरीदने और फैलाने वालों को चिन्हित करने का काम कर रहे हैं. इस दौरान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य एवं जिला जज जी के शर्मा ने बताया कि नशे की प्रवृत्ति सबसे ज्यादा गरीब तबके के बच्चों में देखने को मिल रही है.क्योंकि इन बच्चों को नशे के सौदागर अपना निशाना बना रहे हैं. जिसके बाद यही बच्चे नशीला पदार्थ खरीदने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं. साथ ही इसी वजह से समाज में अपराध भी बढ़ रहे हैं, इसीलिए नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को गंभीरता से लेते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन ने ये बीड़ा उठाया है.

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