फैक्ट चैक: निलंबित डीएसपी दविंदर पर रवीश कुमार ने बोला सफेद झूठ

रवीश कुमार और निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह
रवीश कुमार ने डीएसपी दविंदर सिंह के बारे में बोला झूठ, चार्जशीट दाखिल नहीं होने की वजह से ‘जेल से बाहर’ घूम रहे
इसके साथ ही रवीश कुमार ने भारत में पुलिस तंत्र पर आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़ों को अंजाम देना, निर्दोष लोगों के खिलाफ फर्जी आतंकी आरोप लगाना, उन्हें 10-20 साल के लिए जेल में बंद करना और इसी तरह की गतिविधियों को अंजाम देना भारतीय पुलिस का मजबूत पक्ष है।
एनडीटीवी पर अपने प्राइम टाइम शो में पत्रकार रवीश कुमार ने निलंबित पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह के बारे में झूठ बोला कि मामले में चार्जशीट दायर न होने के कारण उन्हें जेल से रिहा किया गया था।
इसके साथ ही रवीश कुमार ने भारत में पुलिस तंत्र पर आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़ों को अंजाम देना,निर्दोष लोगों के खिलाफ फर्जी आतंकी आरोप लगाना,उन्हें 10-20 साल के लिए जेल में बंद करना और इसी तरह की गतिविधियों को अंजाम देना भारतीय पुलिस का मजबूत पक्ष है।
रवीश कुमार ने कहा कि भारतीय पुलिस ने अपने खुद के एक अधिकारी देविंदर सिंह को बचाने में दक्षता हासिल की, जिन्हें कड़े गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के एक साल बाद भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया।
उन्होंने आगे कहा, “चार्जशीट दायर नहीं होने के कारण देविंदर सिंह को रिहा कर दिया जाता है। उन्हें जमानत दे दी जाती है। आतंकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस के अनगित भाषण आप कहीं पढ़े और सुने होंगे।” रवीश कुमार ने पीएम मोदी के आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर देते हुए यह बातें कही।
हालाँकि, सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और उनकी आतंकी गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता पर संदेह जताने को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने में व्यस्त रवीश कुमार ने निलंबित डीएसपी देविंदर सिंह के खिलाफ दर्ज मामले के विवरण को आसानी से नजरअंदाज कर दिया।
अदालत ने देविंदर सिंह और वकील इरफान शफी मीर को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा उनके खिलाफ दायर मामले में जमानत दे दी। अदालत ने गौर किया कि 90 दिनों की अनिवार्य वैधानिक अवधि बीत जाने के बाद भी आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया था। जिसकी वजह से उन्हें डिफॉल्ट जमानत मिल गई। उन्हें एक लाख रुपए के निजी बांड और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर यह राहत दी गई।
मामले में आईओ ने अदालत के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश की और कहा, “मामले की जाँच अभी तक समाप्त नहीं हुई है, इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।” यहाँ पर उल्लेखनीय है कि देवंदर सिंह को दिल्ली पुलिस द्वारा दायर मामले में ही अदालत द्वारा जमानत दी गई थी।
उनके खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज किए गए मामले पर उन्हें जमानत नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल वह जेल में ही हैं। फिलहाल देविंदर सिंह अभी जेल में ही रहेंगे क्योकि वे एनआईए के केस में भी आरोपित हैं। तो रवीश कुमार का दावा कि देविंदर सिंह ‘जेल के बाहर’ घूम रहे हैं, गलत है।
हालाँकि, रवीश कुमार ने भारतीय पुलिस और केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने के उत्साह में, अपने आरोपों को सत्यापित करने की जहमत नहीं उठाई और व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से इस खबर को उठाया कि दिल्ली पुलिस मामले में जमानत मिलने के बाद देविंदर सिंह जेल से बाहर घूम रहे हैं.

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