बलिदान दिवस: 1857 में हजारीबाग विद्रोह के नायक माधव पर था उस जमाने में एक हजार का इनाम

…………………………………………………………… चरित्र-निर्माण, समाज-सुधार तथा राष्ट्रवादी जन-चेतना के लिए समर्पित *मातृभूमि सेवा संस्था* (राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत) आज देश के ज्ञात व अज्ञात राष्ट्रभक्तों को उनके अवतरण, स्वर्गारोहण व बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन करती है।🙏🙏🌹🌹🌹🌹 ………………………………………………………………………………………………………………………..
🌹🙏 *माधब सिंह जी*🙏🌹


निसंदेह देश की स्वतंत्रता के लिए लाखों क्रांतिकारियों ने बलिदान दिए हैं। अनेक बलिदानियों को हम जानते हैं, अनेक बलिदानों के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है तथा कुछ ऐसे भी बलिदानी हैं जिनके जीवन के विषय में बहुत कम जानकारी उपलब्ध हैं। आज हम एक ऐसे ही क्रांतिकारी के जीवन के विषय में जानने का प्रयास करेंगे, जिन्होंने सन् 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

📝 साथियों मैं बात कर रहा हूं माधब सिंह की, जिनके जन्म स्थान, माता-पिता के विषय में मेरे पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। माधब सिंह ब्रिटिश सेना के रामगढ़ बटालियन (झारखंड) में जमादार पद (designation/ post) पर कार्यरत थे। ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियों से असंतुष्ट माधब सिंह विद्रोह की तैयारी में थे। उन्हें सन् 1857 के रांची विद्रोह का प्रमुख नायक माना जाता है। 31 जुलाई, 1857 को जब कमांडिंग ऑफिसर ने उनकी बटालियन को हजारीबाग (झारखंड) की और कूच (marching) करने को कहा तो माधब सिंह ने इंकार कर दिया। इन्होंने गुप्त रूप से विद्रोह कर दिया और अपने सिपाही साथी कुतुब सिंह को अपने संदेश के साथ विश्वनाथ साही के पास भेजा, जिसमें लिखा था, “मैंने विद्रोह कर दिया है, अब आगे क्या करें ?”

📝कमांडिंग ऑफिसर ने कुछ देर के बाद पुनः आदेश दिया की हजारीबाग कूच करना है। माधब सिंह ने कहा कि बटालियन के पास आगे के दो दिनों के लिए खाने को कुछ नहीं है। कमांडर ने उन्हें भोजन उपलब्ध कराया और आगे बढ़ने को कहा। बटालियन ने अधिकारियों को मौत के घाट उतारने की शपथ ली और आगे बढ़ चले।
*ब्रिटिश अधिकारी कैप्टन ई टी डाल्टन कि दिनांक 05.08.1857 की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि* माधब सिंह जो ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में जमादार के पद पर था, वहीं हजारीबाग विद्रोह का नायक था। माधब सिंह जी अनेक प्रयास के बाद भी जब पकड़े नहीं गए तो उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाने वाले को *सन् 1857 में 1,000 रुपए की इनाम राशि देने की घोषणा की गई।* साथियों इस इनाम राशि के बाद उन्हें पकड़ने का कार्य और तेज हुआ। ऐसा माना जाता है कि इनाम की घोषणा के कुछ दिनों बाद वे किसी लड़ाई में बलिदान हुए।

मातृभूमि सेवा संस्था ऐसे गुमनाम क्रांतिवीरों के महान बलिदान को कोटि कोटि नमन करती हैं, जिन्होंने हमें *’स्वतंत्रता’* नामक सबसे प्रिय उपहार दिया है।
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*🇮🇳 मातृभूमि सेवा संस्था 9891960477 🇮🇳*

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