आईएमए परेड में तीन नेपाली बने भारतीय सैन्य अफसर, विदेशियों में सबसे ज्यादा 48 अफगानी

भारतीय सेना को मिले 333 युवा अफसर, 90 विदेशी कैडेट भी हुए पासआउट
देहरादून,। भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में आज सुबह पासिंग आउट परेड में रिव्यूइंग आफिसर थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे परेड की सलामी ली।
आइएमए के ऐतिहासिक चेटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर मार्कर्स कॉल के साथ परेड शुरू हुई। कंपनी सार्जेट मेजर अभिमन्यु कौशिक,रोहित कुमार,सूरज राय,प्रिंस राज,नितिन सुरेश व आजिंक्य कलसे ने ड्रिल स्क्वायर पर अपनी-अपनी जगह ली। सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर एडवांस कॉल के साथ ही छाती ताने देश के कर्णधार असीम उत्साह के साथ कदम बढ़ाते परिमल पराशर के नेतृत्व में परेड को पहुंचे। इसके बाद परेड कमांडर शिव कुमार सिंह चौहान ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली।
तब आइएमए की पीओपी के मुख्य अतिथि भारतीय सेना प्रमुख जनरल मुकुंद नरवणे परेड मैदान में पहुंचे। जेंटलमैन कैडेट्स ने उनका अभिवादन स्वागत किया। परेड की अनुमति देने के बाद उन्होंने निरीक्षण किया। आइएमए परेड में इस बार कोरोना काम हर स्तर पर सावधानी दिखी। हर टुकडी में सामान्यतया 10 कैडेट एक लाइन में होते हैं,पर इस बार इनकी संख्या आठ रखी गयी ताकि कैडेटों के बीच दो मीटर की दूरी बनी रहे। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार न ही जेंटलमैन कैडेटों के परिजन परेड देखने को पहुंचे और ना ही देश-विदेश के गणमान्य लोग व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी। इस बार परेड सादगी से हुई।
पीपिंग व ओथ सेरेमनी के बाद पासिंग आउट बैच के 423 जेंटलमैन कैडेट लेफ्टिनेंट बन देश-विदेश की सेना का अभिन्न अंग बन गए। इनमें 333 युवा सैन्य अधिकारी भारतीय थलसेना को मिलें,जबकि 90 युवा सैन्य अधिकारी नौ मित्र देशों अफगानिस्तान,तजाकिस्तान,भूटान,मॉरीशस,मालद्वीव, फिजी, पपुआ न्यू गिनी,श्रीलंका व वियतनाम की सेना का अभिन्न अंग बने। इसके बाद देहरादून स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी के नाम देश-विदेश की सेना को 62 हजार 562 युवा सैन्य अधिकारी देने का गौरव जुड़ गया। इनमें मित्र देशों को मिले 2503 सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं।
ये बने श्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ
स्वार्ड आफ आनर-आकाशदीप सिंह ढिल्लों स्वर्ण-शिवकुमार सिंह चौहान। सिल्वर-सक्षण राणा। ब्रांज-सूरज सिंह। टैक्निकल ग्रेजुएट सिल्वर-भरत योगेंद्र। सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट-डोनवान सोन वियतनाम। चीफ आफ आर्मी स्टाफ बैनर-अलामिन/सिंहगढ कंपनी
वीरभूमि उत्तराखंड
उत्तराखंड को वीरों की भूमि यूं ही नहीं कहा जाता। यहा के लोकगीतों में शूरवीरों की जिस वीर गाथाओं का जिक्र मिलता है,पराक्रम के वह किस्से देश-विदेश तक फैले हैं। देश की सुरक्षा और सम्मान को देवभूमि के वीर सपूत हमेशा ही आगे रहे हैं। भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होने जा रहे जेंटलमैन कैडेटों के आंकड़े इसके गवाह हैं। जनसंख्या घनत्व के हिसाब से देखें तो उत्तराखंड देश को सबसे ज्यादा जांबाज देने वाले राज्यों में शुमार है।
उत्तराखंडी युवाओं में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है। हर छह माह बाद भारतीय सैन्य अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड (पीओपी) में इसकी झलक मिलती है। पिछले एक दशक के दौरान शायद ही ऐसी कोई पासिंग आउट परेड हुई है,जिसमें कदमताल करने वाले युवाओं में उत्तराखंडियों की संख्या अधिक न रही हो।
प्रदेश की जनसंख्या देश की जनसंख्या का 0.84 प्रतिशत है। यदि इसकी तुलना आइएमए से कुल पासआउट 333 भारतीय कैडेटों से करें तो राज्य के सहयोग का स्तर 31 कैडेटों के साथ नौ प्रतिशत से ऊपर बैठता है। इस मुकाबले बड़े राज्य भी उत्तराखंड के आगे पानी भरते नजर आए। उत्तर प्रदेश के कैडेटों की संख्या भले ही सबसे अधिक 66 है,मगर इसकी तुलना वहां की जनसंख्या से करें तो देश को रक्षक देने में उत्तराखंड ही शीर्ष पर है क्योंकि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या का 16 प्रतिशत है,जो उत्तराखंड से कई गुणा ज्यादा है।
महाराष्ट्र,राजस्थान व पंजाब जैसे राज्य संख्याबल में भी उत्तराखंड से कहीं पीछे रहे। कैडेटों की संख्या में बिहार उत्तराखंड के बराबर है,जबकि बिहार की जनसंख्या उत्तराखंड से साढ़े नौ करोड़ ज्यादा है। देश को सैन्य अफसर देने के मामले में हरियाणा भी आगे है। देश की 2.09 प्रतिशत जनसंख्या वाले इस राज्य से करीब 12 प्रतिशत युवा सैन्य अफसर बने।
अकादमी में ही रहेंगे पास आउट विदेशी कैडेट
भारतीय सैन्य अकादमी पासिंग आउट परेड में पुरानी के साथ ही कुछ नई परंपराएं भी जुडी। कैडेट जहां अंतिम पग के बाद प्रथम पग भी रखेंगे,अकादमी से पास आउट होने के बाद वह अपनी-अपनी यूनिट ज्वाइन करेंगे जबकि मित्र देशों के कैडेट फिलहाल अकादमी में ही रहेंगे। कोरोना संकट के चलते अकादमी रक्षा मंत्रालय व अकादमी प्रबंधन को यह निर्णय लेने पड़े हैं।
बता दें,सैन्य अकादमी में भारत के अलावा मित्र देशों के कैडेटों को भी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। इस बार भी अकादमी से नौ मित्र देशों के 90 जेंटलमैन कैडेट पास आउट हुए। इनमें सबसे अधिक 48 कैडेट अफगानिस्तान के हैं जबकि तजाकिस्तान के 18 व भूटान के 13 कैडेट भी पास आउट हुए। इसके अलावा मालद्वीव व मारीशस के तीन-तीन, फिजी के दो और पपुआ न्यू गिनी,श्रीलंका व वियतनाम का एक-एक कैडेट पास आउट हुआ। लेकिन पास आउट होने के बाद भी ये सभी विदेशी कैडेट अभी अकादमी में ही रहेंगे। अकादमी के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार कोरोनाकाल में अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा बंद है। कुछ ही देशों के लिए कुछ फ्लाइट हैं। ऐसे में विदेशी कैडेटों को उनके देश वापस भेजना अभी संभव नहीं है। इस संदर्भ में संबधित देशों के दूतावास से बात हो चुकी है। जब तक कोरोना संकट खत्म नहीं हो जाता है और अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा शुरू नहीं होती है तब तक विदेशी कैडेट अकादमी में ही रहेंगे। इस बीच यदि संबंधित देश विशेष फ्लाइट की व्यवस्था करते हैं तो कैडेटों को भेजा दिया जाएगा।
आइएमए के इतिहास में नया अध्याय,अफसर बनने के बाद घर नहीं;सीधे यूनिट में जाएंगे कैडेट
कोरोना संक्रमण के चलते जहां इस बार भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) की वर्षों पुरानी कई परंपराएं बदलने जा रही हैं। साथ ही कुछ नई परंपराओं की नींव भी पड़ेगी। हर बार पासिंग आउट परेड के बाद कैडेट ‘अंतिम पग’ पार कर भारत मां की सेवा में अग्रसर होते हैं,लेकिन इस बार अकादमी के इतिहास में एक नया अध्याय जुड गया। पीपिंग सेरेमनी के बाद अकादमी में पहली बार जेंटलमैन कैडेटों को ‘प्रथम पग’ से भी गुजरे । ऐसा इसलिए कि इस बार अफसर बनने के बाद कैडेट घर नहीं बल्कि सीधे अपनी-अपनी यूनिट में जाएंगे।
इस बार आइएमए की पासिंग आउट परेड का स्वरूप भव्य नहीं बल्कि औपचारिक रहा। जेंटलमैन कैडेटों के अभिभावक-संबंधियों परेड में सम्मिलित नहीं हुए। अन्य लोगों की संख्या भी सीमित रही। एक तरफ जहां कैडेट मास्क लगाकर कदमताल करते, वहीं हर स्तर पर शारीरिक दूरी का भी पालन किया गया। परेड व शपथ के बाद कैडेटों के कंधों पर सितारे स्वजन ही लगाते थे, लेकिन ये पहला मौका है, जब यह जिम्मेदारी उनके गुरुजनों ने निभाई।

कोरोना के मोर्चे पर आइएमए तैयार
कोरोनाकाल में आइएमए ने एक तरफ अपने काम करने के तरीके को बदला, वहीं हर स्तर पर एहतियात भी बढ़ाई है। अकादमी में एक ऐसी मशीन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके होते कोरोना भीतर नहीं घुस सकता।
थ्री लेयर सिक्योरिटी वाली इस मशीन में पहले बॉक्स में बिना किसी सामान को हाथ लगाए पूरे शरीर को सैनिटाइज किया जाता है। हूटर बजने के बाद दूसरे बॉक्स में जाना होता है। जहां उसके मोबाइल या दूसरे सभी सामानों को अल्ट्रावायलेट किरणों से गुजरना होता है। इसके बाद तीसरे चरण में 45 डिग्री से ज्यादा तापमान वाले बॉक्स में रहना होता है। इन प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही किसी को आइएमए में प्रवेश दिया जाता है।

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