पुण्य स्मरण:कांग्रेस भवन अंग्रेजी कब्जे से छुड़ाने में गोलियों का शिकार हुई भोगेश्वरी

… चरित्र-निर्माण, समाज-सुधार तथा राष्ट्रवादी जन-चेतना के लिए समर्पित *मातृभूमि सेवा संस्था* (राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत) आज देश के ज्ञात व अज्ञात राष्ट्रभक्तों को उनके अवतरण, स्वर्गारोहण व बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन करती है।🙏🙏🌹🌹🌹🌹
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🔥 *भोगेश्वरी फूकनानी * 🔥
✍️ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में, जहाँ हर वर्ग ने चाहे किसान हो, व्यापारी हो, मजदूर हो, शिक्षाविद हो, सभी ने निस्वार्थ भाव से देश की आजादी में अपना अनाम उत्सर्ग किया । वहीं महिलाएं भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, घर की दहलीज को लांग कर स्वतंत्रता के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया उनके अंदर तनिक भी डर नहीं था कि अंग्रेजों की बंदूकें गोलियाँ उन्हें निशाना बना सकती हैं, उनके अंदर तो सिर्फ एक जुनून था देश की आजादी का। कई महिलाओं को हम स्वतंत्रता सेनानी के नाम जानते हैं जिनके नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज है, लेकिन कुछ नाम ऐसे भी हैं जिन्होंने नींव बनना स्वीकार किया। ऐसी एक क्रांतिकारी के जीवन चरित्र से आप सभी को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। भोगेश्वरी फुकनानी ऐसी ही एक वीरांगना हैं जिस ने बिना किसी स्वार्थ के अंग्रेजों के आगे सिर्फ इसलिए तन गई कि माँ भारती की आजादी के लिए वह समर्पित थी। दुर्गा बन अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने के लिए तत्पर तैयार थी। महात्मा गाँधी ने कहा था कि मां- बहनों के सहयोग के बगैर यह संघर्ष जीत पाना संभव नहीं है। चूड़ी वाले हाथों ने कभी तलवार उठाई, तो कभी रोटी बेलने वाले हाथों ने पिस्तौल चलाने में भी हिचक नहीं दिखाई। कुछ ऐसे नाम जिनके बारे में हमारी युवा पीढ़ी नहीं जानती, हमारा प्रयास ऐसी वीरांगनाओं के जीवन चरित्र से सबको जोड़ें ।

📝भोगेश्वरी फूकनानी , जिनका जन्म सन् 1885 में असम के नौगाँव में हुआ। आपके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी होने के बाद भी चाहे पत्नी के रूप में, चाहे माँ के रूप में, या बहू के रूप में उन सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने के बाद भी आप अंग्रेजी शासन के विरुद्ध होने वाले हर आंदोलनों में खुद भी भाग लेती थी तथा महिलाओं को भी संगठित कर उन्हें भी आंदोलन से जोड़े रखती थी। भोगेश्वरी फूकनानी  ने 1930 के सत्याग्रह में भाग लिया था तथा गिरफ्तार भी हुई । सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने 05 लोगों को बलिदान किया तो स्थानीय लोगों ने उन्हें बलिदानी घोषित कर उनके सम्मान में विजय जुलूस निकाला। बरहामपुर का कांग्रेस कार्यालय जिस पर अंग्रेजों ने कब्जा जमा रखा था, उनकी यह सोच थी कि इसी कार्यालय से आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाती है, उस विजय जुलुस के दौरान उस कार्यालय को अंग्रेजों के अधिकार से मुक्त करा लिया। भोगेश्वरी फूकनानी  ने उस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अंग्रेजों ने उस आंदोलन को दबाने के लिए कैप्टन फिनिश के नेतृत्व में सेना भेजी। अंग्रेजों व देशभक्तों के बीच आमने-सामने की जंग छिड़ी, कैप्टन फिनिश ने देशभक्तों की ओर रिवाल्वर तान दी।

📝 भोगेश्वरी फूकनानी ने फुर्ती दिखाते हुए जो झंडे का डंडा था उसका जोरदार प्रहार कैप्टन फिनिश पर किया एक समय वह लड़खडा गए , लेकिन संभल कर उन्होंने रिवाल्वर की गोली भोगेश्वरी फूकनानी  के शरीर में उतार दी और देशभक्त महिला भोगेश्वरी फूकनानी  लहूलुहान होकर गिर पड़ी, उनके मुँह से फिर भी इंकलाब जिंदाबाद, वंदे मातरम गूंज रहा था। जख्मी भोगेश्वरी फूकनानी  03 दिन बाद यानी 20 सितंबर 1942 को बलिदान हाे गईं।
लेकिन उनके समर्पण ने देश के स्वतंत्र आंदोलन में ऊर्जा का काम किया। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। आज हम उनके देश के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, और सभी नारी शक्ति के सम्मान में यह कहना चाहेंगे कि ….

*नारी शक्ति है सम्मान है,*
*नारी गौरव है अभिमान है,*
*नारी ने ही रचा यह विधान है,*
*भोगेश्वरी जैसी हर नारी शक्ति को,*
*शत शत प्रणाम है !*

*शत शत प्रणाम है !*

✍️ *सुनील कुमार शर्मा*
वरिष्ठ शासकीय शिक्षक बारा राजस्थान
*प्रभारी* बारां, मातृभूमि सेवा संस्था *9414403937*

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