स्वच्छता सर्वेक्षण: उत्तराखंड को तीन पुरस्कार, नंदप्रयाग को पब्लिक फीडबैक प्रथम पुरस्कार

देहरादून, उत्‍तराखंड के निकायों ने शानदार प्रदर्शन कर स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण -2020 में राष्ट्रीय स्तर पर तीन पुरस्‍कार प्राप्‍त किए हैं। उत्‍तराखंड ने 100 से कम शहरी निकायों वाले राज्यों की श्रेणी में बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट में तीसरा स्थान प्राप्त किया। छावनी क्षेत्र अल्मोड़ा ने सिटिजन फीडबैक श्रेणी में तीसरे स्थान पर रह कर राज्य को तीसरा पुरस्कार दिलवाया। इसके अलावा नगर पंचायत नंदप्रयाग ने देशभर की एक लाख से कम आबादी वाली निकायों में से सिटिजन फीडबैक श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

गुरुवार को स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 के परिणामों और स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 का टूलकिट जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री आवसन और शहरी कार्य मंत्रालय हरदीप सिंह पुरी ने वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुरस्कार वितरित किए। वर्षभर चलने वाली इस राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया में देशभर के 4242 नगरों और 62 कैंट बोर्ड ने भाग लिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने ये पुरस्कार प्राप्त किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले निकायों को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि निकायों को इसी मनोयोग से आगे कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों व निकायों की रैंकिंग में अच्छा सुधार हुआ है। इसमें और बेहतर प्रदर्शन किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत मिशन अभियान को आगे बढ़ाने के लिए स्वचछता पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे स्वच्छता के जरिए हम कई बीमारी से बचाव कर सकते हैं।

स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए किए जाएं कार्य

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों के लिए कार्य कर रही है। निकायों को कहा गया है कि स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए कार्य किए जाएं। यहां तक कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत निकायों को प्रदान किए जाने वाले अनुदान को भी सबसे पहले स्वच्छता कार्यों के लिए उपलब्ध करवाने संबंधी स्पष्ट दिशा – निर्देश जारी किए गए। इसका सीधा असर स्वच्छ सर्वेक्षण में पड़ा।

उत्तराखण्ड का स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में लगातार सुधार

एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में उत्तराखंड का स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। वर्ष 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षण में देहरादून का स्थान 384, रुड़की का 281,काशीपुर का 304,हल्द्वानी का 350, हरिद्वार का 376 एवं रुद्रपुर का 403वां स्थान था। जबकि 2020 में देहरादून 124वां, रुड़की 131वां,काशीपुर 139, हल्द्वानी 229,हरिद्वार 244 और रुद्रपुर ने 316 स्थान पाया।

50 हजार से अधिक और एक लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों की स्थिति

50 हजार से अधिक और एक लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में रामनगर का नॉर्थ जोन के शहरों में 18वां, जसपुर का 56वां एवं पिथौरागढ़ का 58वां स्थान आया है। 25 हजार से 50 हजार से तक की जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में नॉर्थ जोन में नैनीताल का 68वां व सितारगंज को 106वां स्थान प्राप्त हुआ है। 25 हजार से कम जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में मुनिकीरेती 12वां,उखीमठ 41वां, भीमताल 50वां और नरेंद्र नगर ने 58वां स्थान हासिल किया। देशभर के कुल 92 गंगा निकायों में उत्तराखंड से गौचर ने तीसरा,जोशीमठ ने चौथा,रूद्रप्रयाग ने पांचवा,श्रीनगर ने छठा, गोपेश्वर ने आठवां,मुनिकीरेती ने 11वां,बड़कोट ने 12वां, कर्णप्रयाग ने 13वां,कीर्तिनगर ने 18वां,देवप्रयाग ने 20वां,नंदप्रयाग ने 22वां,जबकि टिहरी ने 28 वां स्थान प्राप्त किया।

इन्‍हें मिले पुरस्‍कार

शहरी विकास मंत्री ने राज्य की निकायों को बेहतर मार्गदर्शन करने और स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020 में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राज्य स्तरीय पीएमयू टीम को भी पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर अपर निदेशक शहरी विकास अशोक कुमार पाण्डे,संयुक्त निदेशक कमलेश मेहता,अधीक्षण अभियंता रवि पाण्डेय, राज्य मिशन प्रबंधक रवि शंकर बिष्ट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व आइईसी विशेषज्ञ कमल भट्ट, एमआइएस विशेषज्ञ राकेश कुमार, कनिष्ठ सहायक उपेंद्र सिंह तड़ियाल और अनुज गुलाटी को यह पुरस्कार प्रदान किए गए।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में इंदौर लगातार चौथे साल टॉप पर


केंद्र सरकार ने देशभर के शहरों में साफ-सफाई से संबंधित ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2020’ के परिणामों की घोषणा की जिसमें एक बार फिर से पहले पायदान पर इंदौर रहा। वहीं, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने सूरत को देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया। बता दें कि इससे पहले चार बार इस तरह का सर्वेक्षण हो चुका है। केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘स्वच्छ महोत्सव’ नाम के इस कार्यक्रम में कुल 129 शहरों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
पहले खबर थी कि प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन शहरी मे काम करने वाले देशभर के चुनिंदा लाभार्थियों , स्वच्छाग्रहियों और सफाईकर्मियों के साथ बातचीत भी करेंगे। मगर किसी कारण वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।
दुनिया के इस सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण में 4242 शहरों, 62 छावनी बोर्डों और 92 गंगा के समीप बसे कस्बों की रैंकिंग जारी की गई। इन क्षेत्रों में करीब 1 करोड़ 90 लाख आबादी रहती है। सर्वेक्षण के पहले संस्करण में भारत में सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मैसुरू ने हासिल किया था, जबकि इसके बाद इंदौर लगातार तीन साल तक (2017, 2018,2019) शीर्ष स्थान पर रहा ।
करीब एक महीने चले इस सवेर्क्षण के दौरान एक करोड़ 70 लाख नागरिकों ने स्वच्छता ऐप पर पंजीकरण किया है। सोशल मीडिया पर 11 करोड़ से अधिक लोग इससे जुड़े। साढे पांच लाख से अधिक सफाई कर्मचारी सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़े और ऐसे 21 हजार स्थानों की पहचान की गई,जहां कचरा पाये जाने की ज्यादा संभावना है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ साथ विभिन्न शहरों के मेयर,निगम आयुक्त और अन्य पक्षधारक इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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