ड्रेगन का घेराव: ई कामर्स कंपनियों को बताना होगा निर्माता देश का नाम

ई-कॉमर्स साइट पर नहीं बिक पाएंगे Made in China उत्पाद, ड्रैगन को चौतरफा घेरने की तैयारी
देश भर में चल रही चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम के बीच अब सरकार को व्यापारी संगठन ने एक सुझाव दिया है.
खास बातें
ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियों पर चीनी उत्पादों को बेचा जा रहा है
सरकार को व्यापारी संगठन ने एक सुझाव दिया है
कंपनियों के लिए ऐसा करने का प्रावधान जरूरी किया जाए
नई दिल्लीः देश भर में चल रही चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम के बीच अब सरकार को व्यापारी संगठन ने एक सुझाव दिया है.कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार से कहा है कि ऑनलाइन कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले उत्पादों पर भी इस तरह का जिक्र होना चाहिए कि वो किस देश में बना है.कैट का कहना है कि ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियों पर चीनी उत्पादों को बेचा जा रहा है.

इनको दिया सुझाव
व्यापारी संगठन ने केंद्रीय कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल को इस बात का सुझाव देते हुए कहा है कि इन कंपनियों के लिए ऐसा करने का प्रावधान जरूरी किया जाए.वेबसाइट zeebiz.com के अनुसार,कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इससे ग्राहकों को सामान खरीदने या नहीं खरीदने को निर्णय लेने में आसानी होगी.संगठन के मुताबिक ज्यादातर ई-कॉमर्स पोर्टल चीन में बने उत्पाद बेचते हैं.लेकिन ग्राहकों को इस बात की जानकारी नहीं होती. ऐसे में चीनी सामान का बहिष्कार करने की इच्छा रखने वाले ग्राहक ऐसा नहीं कर पाते हैं.

बना लिया है सरकार ने नियम
केंद्र सरकार ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक नया नियम ला रही है.हालांकि इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसमें कंपनियों को बेचे जाने वाले अपने सभी उत्पादों पर यह लिखना होगा कि वे भारत में बने हैं या किसी अन्य देश में.
भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार चीन को चौतरफा घेरने की तैयारी हो गई है.इसके लिए आर्थिक मोर्चे पर चीन को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई जाएगी.इसके लिए सरकार की तरफ से पूरा खाका भी तैयार किया गया है.इसके साथ ही भारत में आने से पहले चीन की कंपनियों की कड़ी जांच पड़ताल होगी.
बुलेट प्रुफ जैकेट के लिए चीन से कच्चे माल का आयात रोके सरकार
नीति आयोग के सदस्य सारस्वत ने कहा कि सेना के लिए बुलेट प्रुफ जैकेट बनाने वाली कंपनियां अन्य स्रोतों से कच्चा माल मंगा सकती हैं।…
नीति आयोग के सदस्य वी के सारस्वत ने सोमवार को कहा कि सेना के जवानों के लिए बुलेट प्रुफ जैकेट बनाने वाली भारतीय कंपनियों को चीन से कच्चा माल मंगाने से बचना चाहिए। सारस्वत ने चीन से आने वाले कच्चे माल की गुणवत्ता में एकरूपता नहीं होने को इसकी वजह करार दिया। पिछले सप्ताह गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हिंसक झड़प के बाद चीन से आयातित वस्तुओं के बहिष्कार की मांग तेज हुई है। ऐसे समय में नीतिय आयोग के सदस्य का यह बयान खासा महत्व रखता है।
सारस्वत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख रह चुके हैं। सारस्वत ने कहा कि सेना के लिए बुलेट प्रुफ जैकेट बनाने वाली कंपनियां वास्तविक उपकरण विनिर्माता (ओईएम) उत्पादन एजेंसियों जैसे अन्य स्रोत से कच्चा माल मंगा सकती हैं।
सारस्वत ने पीटीआई से कहा,’कई बार चीन से आयातित कच्चे माल (बुलेट प्रुफ जैकेट के निर्माण) की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है…कच्चे माल की गुणवत्ता में एकरूपता नहीं होने के कारण हमें चीनी स्रोतों से आयात से बचना चाहिए।”
प्रधानमंत्री कार्यालय ने नीति आयोग को हल्के बॉडी ऑर्मर्स और प्रोटेक्टिव गियर्स बनाने वाली घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने को कहा है। भारतीय मानक ब्यूरो ने भारतीय बलों द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले बॉडी आर्मर्स की गुणवत्ता से जुड़े मानकों को अंतिम रूप दे दिया है।
जाने-माने वैज्ञानिक ने जोर देकर कहा, ”हमारी समिति ने बहुत स्पष्ट सिफारिशें की हैं, हमें जहां तक संभव हो स्वदेशी मैटेरियल का इस्तेमाल करना चाहिए, जहां भी स्वदेशी मैटेरियल उपलब्ध ना हो और आयात की जरूरत पड़े तो गुणवत्ता में एकरूपता नहीं होने की वजह से हमें चीन से आयात से बचना चाहिए।”

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