मोदी का आर्थिक पैकेज प्रसारण देखा 19 कऱोड 30 लाख ने : बार्क

मुंबई, 14 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से संबंधित संबोधन को 19.3 करोड़ लोगों ने देखा। कोविड-19 महामारी के बाद से मोदी ने पांच बार टीवी पर देश को संबोधित किया है। इस सप्ताह के उनके संबोधन को दर्शकों ने सबसे अधिक समय तक देखा। प्रसारण दर्शक अनुसंधान परिषद (बार्क) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बार्क के अनुसार कुल मिलाकर आठ मई को समाप्त सप्ताह हुये सपताह के दौरान टीवी दर्शकों की संख्या में गिरावट जारी रही। कोरोना वायरस की वजह से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन 25 मार्च से शुरू हुआ। इसे अब 17 मई तक बढ़ाया जा चुका है। बंद की वजह से लोग अपने घरों में बंद हैं जिसके चलते टीवी देखने वाले दर्शको की संख्या में लॉकडाउन के दौरान भारी इजाफा हुआ है। विभिन्न क्षेत्रों की बात की जाए तो समाचार और फिल्म देखने वाले दर्शकों की संख्या काफी बढ़ी है। लेकिन पौराणिक कथाओं पर आधारित रामायण के प्रसारण से मनोरंजन चैनलों की दर्शक संख्या में काफी बढ़ोतरी की है, जो अभी तक नए कार्यक्रम नहीं आने की वजह से संघर्ष कर रहे थे। मोदी के 33 मिनट का संबोधन आत्म-निर्भर भारत पर केंद्रित था। इसे 19.3 करोड़ लोगों ने देखा। हालांकि, उनके इससे पिछले संबोधन को 20.3 करोड़ लोगों ने देखा था। हालांकि, दर्शक मिनट के हिसाब से बात की जाए, तो इसे 4.3 अरब प्रदर्शन मिनट तक देखा गया। यह प्रधानमंत्री के पांचों संबोधनों में सबसे अधिक है। बार्क ने कहा कि उनके इस संबोधन का प्रसारण 197 चैनलों ने किया। इससे पिछले संबोधन का प्रसारण 199 चैनलों ने किया था।
कृषि विशेषज्ञों व संगठनों की मिश्रित प्रतिक्रिया
कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों और संगठनों ने कोरोना वायरस महामारी के जारी संकट के दौरान बिना बाधा के कृषि कार्य में किसानों की मदद के लिये बृहस्पतिवार को घोषित प्रोत्साहन पैकेज की दूसरी किस्त में किये गये उपायों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता धर्मराज मलिक ने एक बयान में कहा, “फसल ऋण की किस्तें चुकाने में राहत को और बढ़ाने तथा अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रदान करने के अलावा किसान समुदाय के लिये कोई बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित नहीं किया गया है।” उन्होंने कहा कि इन उपायों से किसानों को आत्मनिर्भर होने में मदद नहीं मिलेगी, “इसके बजाय वे आत्महत्या करने के लिये मजबूर होंगे।” उन्होंने कहा कि किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष टी आर केशवन ने कहा, “कृषि मूल्य श्रृंखला पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है और फार्म मशीनीकरण उद्योग के साथ इसे देश में आवश्यक सेवा माना जाना चाहिये।” उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और अधिक आबादी वाले देश के लिये कृषि महत्वपूर्ण है। यह खाद्य सुरक्षा के लिये आत्मनिर्भरता को लेकर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने भविष्य में सरकार से और उपायों की अपेक्षा जाहिर की। हालांकि फिक्की तथा अन्य उद्योग मंडलों और संगठनों , पीडब्ल्यूसी इंडिया, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईवी) आदि ने फैसलों की सराहना करते हुए कहा कि यह किसानों को बड़ा समर्थन प्रदान करेगा।

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