कोरोनिल: परेशानी आयुर्वेद और भगवा तो नहीं?

दर्द कोरोनिल नहीं,आयुर्वेद: वामपंथी गैंग को चाहिए गोरों का सर्टिफिकेट,रामदेव से इनका गुर्दा छिल जाता है
अनुपम कुमार सिंह | 24 June, 2020
दर्द कोरोनिल नहीं, आयुर्वेद की सफलता है
कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में पूरी दुनिया है। एक तरफ भारत में ग्लेनमार्क और सिप्ला ने अपनी दवाओं को बाजार में उतारा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर में वैक्सीन को लेकर रिसर्च जारी है। इजरायल, रूस और अमेरिका जैसे देशों ने आंशिक सफलता का दावा भी किया है। अब बाबा रामदेव की दिव्य फार्मेसी ने ‘कोरोनिल’ नामक दवा उतार कर संक्रमितों को ठीक करने का दावा किया है।
इसकी लॉन्चिंग की खबर आते ही अंधविरोध भी शुरू हो गया। विरोध सिर्फ़ इसीलिए किया गया क्योंकि भारत में आयुर्वेद और योग के प्रचारक ने वो कर दिखाने का दावा किया,जिसके लिए पूरी दुनिया प्रयासरत है।
वामपंथी गिरोह ने दवा में कोई खोट की वजह से विरोध नहीं किया। न ही उन्होंने इस दवा का परीक्षण किया। उनका विरोध तो केवल इसे लेकर है कि इससे पतंजलि,दिव्य फार्मेसी,बाबा रामदेव और आयुर्वेद का नाम जुड़ा है।
उदाहरण को अमेरिका स्थित साउथ डकोटा की एक बॉयो मेडिकल कम्पनी ने दावा किया कि गायों के शरीर में बने एंटीबॉडी से कोरोना का इलाज हो सकता है और ये प्लाज्मा थैरेपी से 4 गुना बेहतर है। इसका ट्रायल भी हुआ। बताया गया कि एक गाय की एंटीबॉडी से सैकड़ों मरीजों को ठीक किया जा सकता है। ‘साइंस’ मैगजीन ने भी इस ख़बर को जगह दी।
क्या आपने किसी भी भारतीय लिबरल या वामपंथी गैंग को इसका विरोध करते हुए सुना? अगर यही दावा किसी आयुर्वेदिक कम्पनी या फिर भारत में स्थित किसी व्यक्ति ने किया होता तो शायद इसे लेकर न जाने कितने मीम्स बनते और मजाक उड़ाया जाता। इसका विरोध इसीलिए नहीं किया गया क्योंकि दावा विदेशी कम्पनी ने किया था। लिबरल गैंग को गोरों के सर्टिफिकेट आवश्यक है,किसी भी चीज को प्रामाणिक मानने को।
इसी तरह बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने जैसे ही घोषणा की कि उन्होंने कोरोना वायरस की पहली‘एविडेंस बेस्ड’आयुर्वेदिक औषधि के निर्माण में सफलता प्राप्त की है,लिबरल गिरोह चालू हो गया। पतंजलि आयुर्वेद का दावा है कि इसे पूरे साइंटिफिक ट्रायल और डॉक्यूमेंट्स के साथ लॉन्च किया गया। बाबा रामदेव ने कहा कि ‘कोरोनिल श्वसारी वटी’के लॉन्च से आयुर्वेद की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
‘ऑल्ट न्यूज़’के प्रतीक सिन्हा को तो इससे भी दिक्कत थी कि न्यूज़ चैनल बाबा रामदेव की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखा ही क्यों रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि सारे चैनलों को बाबा रामदेव से एडवर्टाइजमेंट मिलते हैं,इसीलिए वो लगातार उनकी दवा‘प्रोमोट करने’लगे हैं। उन्होंने दवा को फर्जी करार कहा कि उसके बारे में बात करने वाले मीडिया संस्थानों का समर्थन न करें।
उन्हें ये मौक़ा मिला आयुष मंत्रालय के बयान से जिसमें था कि उसे पतंजलि के दावों और अध्ययन के बारे में जानकारी नहीं है। मंत्रालय ने दवा के विज्ञापन के तरीकों पर आपत्ति जताई और साथ ही इसके बारे में सारी सूचनाएं साझा करने को कहा था। सरकारी प्रक्रिया तो सबके लिए समान है। जो लोग इस सरकार को दिन-रात कोसते हैं,वही कह रहे कि मंत्रालय ने आपत्ति जताई तो कुछ गड़बड़ी जरूर है।
ऐसा नहीं कि पतंजलि आयुर्वेद ने मंत्रालय की माँगी सूचनाओं से आँख बंद कर ली। बयान जारी कर हर बात जनता को बताई। कम्पनी के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन व गौरव दे रही है। कम्युनिकेशन गैप दूर हो गया है। इसके बाद पतंजलि ने सरकार को बताया कि उसने सारे तय मानक और Randomised Placebo कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल्स पूरे किये है।
पतंजलि का दावा है कि दवा के परीक्षण से सभी मरीज 3 से 14 दिनों में कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हो गए और एक भी मृत्यु नहीं हुई। यह भी कि जल्द ही किसी अंतरराष्ट्रीय साइंस रिसर्च जर्नल में इसका शोधपत्र प्रकाशित होगा। किसके नेतृत्व में क्लिनिकल अध्ययन हुए,किन शहरों में इसे अंजाम दिया गया,कम्पनी ने सोशल मीडिया पर ये सब बताया। ‘पतंजलि’ने बताया:“ये औषधियाँ मनुष्य के फेफड़ों से लेकर पूरे शरीर की इम्युनिटी को त्वरित रूप से बूस्ट करती है और कोरोना के संक्रमण चैन को तोड़ती है। कोरोना से अन्य सिम्प्टम्स और बीमारियों को ख़त्म करने में भी ये औषधियाँ अहम भूमिका निभाती है। शरीर की ऊर्जा को संतुलित और जागृत करती है। ये औषधि ऋषियों के तप के साथ-साथ वैज्ञानिकों के प्रयासों का संयुक्त फल है। कोरोना से मुक्ति दिलाने को यह सफल अनुसंधान है।”
लेखक सुमैया शेख ने तो ‘इंडिया टीवी’ की ही आलोचना करते हुए पूछा कि उसने बाबा रामदेव को बोलने बुलाया ही क्यों? प्रतीक सिन्हा ने इसका समर्थन किया। ये वही लोग हैं जो आतंकियों का भी पक्ष दिखाने को प्रयासरत रहे हैं। इन्होने आरोप लगा दिया कि ये ड्रग अटेस्टेड है,लोगों के जीवन से खिलवाड़ है और चैनलों को बाबा रामदेव को बोलने को जगह तक नहीं देनी चाहिए।
पतंजलि ने आयुष मंत्रालय के बयान के बाद स्पष्टीकरण भी जारी किया
दरअसल,अगर इसी तरह का कोई दावा कोई छोटी सी विदेशी कम्पनी यूरोप या अमेरिका में कर दे तो यही लोग नाचने-कूदने लगेंगे। इन्हें दिक्कत दवा से नहीं बल्कि बाबा रामदेव और आयुर्वेद से है। हमारी पुरातन प्रणाली पाश्चात्य से श्रेष्ठ हो सकती है,वो कभी ऐसा मान ही नहीं सकते।
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन से लेकर अन्य ड्रग्स तक,दुनिया भर में हुए विभिन्न अध्ययनों में अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए हैं। ये मेडिकल एक्सपर्ट्स और विशेषज्ञ तय करेंगे कि किसके दावों में कितना दम है और वास्तविकता सामने आ ही जाएगी ,जब इसका इस्तेमाल होगा(इजाजत मिलने के बाद)। लेकिन ,बिना किसी आधार के किसी कम्पनी या दवा को सिर्फ़ इसी लिए फ्रॉड बता देना कहाँ तक सही है,क्योंकि वो भारतीय संस्कृतिज है?
वैसे भी उस इकोसिस्टम पर कैसे विश्वास करें जो शुरू से पतंजलि आयुर्वेद या बाबा रामदेव के खिलाफ जहर उगलता रहा है? वो इकोसिस्टम,जिसके लोग बाबा रामदेव को बदनाम करने के लिए उनकी दवाओं में हड्डी होने से लेकर उन पर लोगों से रुपए ठगने तक के झूठे इल्जाम लगाते रहे हैं? क्या ऐसी ही स्क्रूटनी विदेशी कंपनियों की होती है? क्या उनके साथ इस तरह का मीडिया ट्रायल होता है?

सरकार ने कहा-इम्युनिटी बूस्टर बनाने का था लाइसेंस,नोटिस,आयुष ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी से पतंजलि को नोटिस
पतंजलि की ओर से कोरोना की दवा बताकर लांच की गई कोरोनिल और श्वासारि दवा विवादों में घिर गई है। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने और उत्तराखंड सरकार से इस संबंध में जवाब-तलब करने के बाद प्रदेश सरकार ने पल्ला झाड़ लिया। प्रदेश के आयुष विभाग का कहना है कि पतंजलि को इम्युनिटी बूस्टर बनाने का लाइसेंस था। कोरोना की दवा कैसे बना ली और दवा की किट का विज्ञापन क्यों किया गया, पता लगाया जाएगा। इस पर आयुष ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी की ओर से पतंजलि को नोटिस जारी किया गया।
आयुर्वेद ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी के प्रभारी डॉक्टर वाईएस रावत का कहना है कि पतंजलि को इम्युनिटी बूस्टर और बुखार,खांसी की दवा बनाने का लाइसेंस दिया गया था। कोरोना दवा बनाने का लाइसेंस नहीं दिया गया है। इस पर पतंजलि को नोटिस जारी किया जाएगा।
लॉन्च होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी बाबा रामदेव की कोरोनिल दवा,ऐसे करती है काम

पतंजलि इस दवा का कोई विज्ञापन नहीं कर सकती है। वहीं,केंद्रीय आयुष मंत्रालय की ओर से दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगाने के संबंध में आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि हमारी दवा और दावा दोनों पूरी तरह सही हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इनसे जुड़ी कुछ जानकारियां मांगी थीं,जो उपलब्ध करा दी गई हैं।

आयुष मंत्रालय की ओर से दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगाने के संबंध में हमारी दवा और किया गया दावा दोनों पूरी तरह सही हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इनसे जुड़ी कुछ जानकारियां मांगी थीं, जो उपलब्ध करा दी गई हैं। -आचार्य बालकृष्ण
आयुष मंत्रालय से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। पतंजलि को इम्युनिटी बूस्टर बनाने का लाइसेंस दिया गया था। मंत्रालय की ओर से लाइसेंस संबंधित दस्तावेज मांगें गए हैं। वहीं,विभाग की ओर से पतंजलि को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा।
-आनंद स्वरूप, निदेशक, आयुर्वेद विभाग


पतंजलि ने दवा लांच कर यह किया दावा
मंगलवार सुबह पतंजलि ने जयपुर की निम्स यूनिवर्सिटी से मिलकर बनाई गई दवा को कोरोना के इलाज के दावे के साथ लांच किया। दावा है कि कोरोना के मामलों में यह तीन दिन में करीब 69 प्रतिशत और सात दिनों में शत प्रतिशत सकारात्मक परिणाम देती है। इस दौरान स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण समेत निम्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रोफेसर बलबीर सिंह तोमर मौजूद रहे।
आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया कि दवाओं की क्लिनिकल केस स्टडी दिल्ली,अहमदाबाद और मेरठ से लेकर देश के विभिन्न शहरों में दो स्तरों पर सरकारी और निजी तौर पर की गई है। क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआई) से अप्रूवल लेकर सरकार के सभी मानकों का पालन कर दवा का सफल ट्रायल किया गया है। निम्स यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉक्टर बलवीर एस तोमर ने कहा कि इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी की संस्तुति से लेकर रजिस्ट्रेशन और क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल की सभी औपचारिकताएं पूरी की गई। कोरोना के 100 मरीजों पर इसका सफल परीक्षण किया गया।
पतंजलि के करीब चार हजार स्टोरों पर दवा उपलब्ध होगी। डिमांड एप भी लांच किया जाएगा,जिससे दवा घर मंगाई जा सकेगी। जो लोग इसकी धनराशि देने में सक्षम न हों,उन्हें दवा निशुल्क दी जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूछा बताएं क्या मिलाया
कोरोना वायरस से मरीजों को स्वस्थ करने के दावों को ले केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद से जवाब मांगा है। मंगलवार को मंत्रालय की ओर जारी बयान में कहा है कि पतंजलि के दावों को ले मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं है। खबरों के माध्यम से मंत्रालय को पता चला। इसलिए मंत्रालय ने दवा के दावों के प्रचार पर तत्काल रोक का आदेश दिया है।
मंत्रालय के अनुसार पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से दवा में मिलाने वाले अवयवों की पूरी जानकारी,रिसर्च,प्रोटोकॉल, मरीजों की पहचान (जिन पर अध्ययन हुआ),सीटीआरआई पंजीयन,अध्ययन के परिणाम इत्यादि की जानकारी जल्द देने को कहा है। उत्तराखंड राज्य लाइसेंस प्राधिकरण से लाइसेंस और दवा को मंजूरी देने संबंधी कागजात मांगे हैं। साथ ही जब तक दस्तावेजों की जांच पूरी न हो जाये,तब तक दवा के प्रचार पर तत्काल प्रतिबंध लगाया है।

आयुष मंत्री डाक्टर हरक सिंह रावत
आयुर्वेद विभाग ने भेजा नोटिस
कोरोना वायरस का उपचार करने वाली दवा कोरोनिल और कोरोना किट पर पतंजलि की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आयुर्वेद विभाग ने इसे लेकर दिव्य फार्मेसी को नोटिस जारी किया है। इसमें पूछा गया है कि दिव्य फार्मेसी ने कोरोना की जो दवा बनाने का दावा किया है उसका आधार क्या है? फार्मेसी ने कोरोना किट बनाने और इसके प्रचार-प्रसार की स्वीकृति कहां से ली? अगर फार्मेसी ने नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो विभाग ने इम्यूनिटी बूस्टर का जारी लाइसेंस निरस्त भी किया जा सकता है। ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत भी उस पर कार्रवाई की जाएगी। । आयुष मंत्रालय का कहना था कि बिना आइसीएमआर की प्रमाणिकता के फार्मेसी ऐसा दावा कैसे कर सकती है। केंद्र ने उत्तराखंड के आयुर्वेद विभाग को भी पत्र भेजकर मामले से जुड़ी सारी पत्रावलियां तलब की थीं। आयुर्वेद विभाग के लाइसेंसिंग अधिकारी डॉक्टर यतेंद्र सिंह रावत
के अनुसार कोरोनिल टेबलेट को इम्यूनिटी बूस्टर व श्वासारि वटी को सर्दी-खांसी और श्वसन संबंधी समस्या के लिए मंजूरी प्रदान की गई थी। दिव्य फार्मेसी ने अपने आवेदन में कोरोना का कहीं उल्लेख ही नहीं किया था। न कोरोना किट के निर्माण की कोई स्वीकृति ली है। जबकि कोरोनिल टेबलेट के लेबल पर कोरोना वायरस का चित्र लगाया गया है। ऐसे में फार्मेसी ने ड्रग एंड मैजिक एक्ट-1954 और ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट-1940 की धारा-170 और 161 का भी उल्लंघन है।
अगर फार्मेसी ने नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो विभाग से जारी लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। फार्मेसी को कोरोना किट के प्रचार पर भी तत्काल रोक लगाने व लेबल संशोधित करने का आदेश है। अन्यथा उस पर ड्रग एंड मैजिक एक्ट और ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में भी कार्रवाई होगी।

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