फिर इतिहास रचेगा अयोध्या, 5 लाख 51 हजार दीपों से बनेगा विश्व कीर्तिमान

योगी सरकार के उत्तर प्रदेश की गद्दी संभालने के बाद से ही अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जा रहा है। पिछली बार अयोध्या में तीन लाख से अधिक दिए जलाकर विश्व कीर्तिमान बनाया गया था।
नई दिल्ली। हर गली में मंदिर, हर मंदिर में महंत, एक दूजे को अवधि भाषा में संबोधन करते हुए कुशल क्षेम का वार्तालाप.. और दूर दराज से आने जाने वालों के मुंह से रामधुनी का सस्वर पाठ.. अयोध्या में इन दिनों यही नजारा है। 26 अक्टूबर के मद्देनजर पूरे अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया जा चुका है। ये तीसरा मौका है जब राम जन्मभूमि पर दीपोत्सव मनाया जा रहा है। योगी सरकार कुछ दिन पहले ही इसे ‘राज्य मेले’ का दर्जा कैबिनेट के मार्फत दे चुकी है। प्रशासन का पूरा अमला तीन दिन के दीपोत्सव में जुटा है, जिसके तीसरे दिन यानी कि शनिवार 26 अक्टूबर को अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचेगा।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम यहां ‘राम की पौड़ी’ पर नजरें गढ़ाए रहेगी, क्योंकि प्रशासन का दावा है वो 5 लाख 51 हजार दिए जलाकर नया कीर्तिमान बनाएंगे। ‘राम की पौड़ी’ का जीर्णोद्धार का काम अंतिम समय तक जारी है। रंग रोगन, लाइट, पेंट सब में अंतिम समय तक अधिकारी कर्मचारी जुटे पड़े हैं। हर रोज अफसरों, नेताओं के दौरे हो रहे हैं, 26 अक्टूबर को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस दीपोत्सव में शरीक होंगे। योगी सरकार के उत्तर प्रदेश की गद्दी संभालने के बाद से ही अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जा रहा है। ये तीसरा मौका है। पिछली बार अयोध्या में तीन लाख से अधिक दिए जलाकर विश्व कीर्तिमान बनाया गया था, इस बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी है।
राम जन्मभूमि पर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। अयोध्या के प्राचीन मंदिरों की गलियों से लेकर दीपोत्सव स्थली सरयू तट तक उत्तर प्रदेश पुलिस मोर्चा संभाले है, तो वहीं राम लला की जन्मभूमि पैरा मिल्ट्री फोर्सेज के हवाले हैं। सुरक्षा इतनी कड़ी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता, हां पर श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की सेना यानी वानरों का आतंक है। हाथ में खाने की कोई चीज दिखी नहीं, कि बंदरों का हमला होना तय है। बंदरों से बचते हुए, करीब सात-आठ बार सुरक्षा घेरे से गुजरते हुए राम लला के दर्शन हुए। टैंट में झूले पर श्रीराम विराजमान हैं।
तकरीबन 20 फीट की दूरी से उनके दर्शन कराए जाते हैं। पुजारी प्रेम तिवारी से चंद मिनट बात भी हुई। पूरा इलाका अति संवेदनशील घोषित है। प्रशासक की नियुक्ति है, उन्हीं की देखरेख में दर्शन, पुजारी आदि व्यवस्था चलती हैं। कोई बदलाव कोर्ट की अनुमति के बगैर संभव नहीं. अधिग्रहित क्षेत्र में फोटो, वीडियो बनाने तक पर पाबंदी है। बल्कि फोन, कैमरा ले जाना ही वर्जित है।
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या जमीन विवाद पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। सर्वोच्च अदालत कभी भी फैसला सुना सकती है। ऐसे में अयोध्या के क्या मिजाज हैं ये जानने हम अयोध्या पहुंचे। अयोध्या में सौहार्द्र और कौमी एकता बदस्तूर कायम है। हर संप्रदाय के लोग चौराहों पर, चौक-चौपालों पर बतियाते मिल रहे हैं। फैसले के बाद क्या होगा, से ज्यादा यहां फैसला कब आएगा, इस पर चर्चा है।
बहरहाल जिस तैयारी में अयोध्या जुटा है, उस मुद्दे पर लौटते हैं। इस बार दीपोत्सव में नेपाल, फिलीपीन्स, श्रीलंका समेत कई देशों की रामलीला का मंचन होगा। हेलीकॉप्टर से राम, सीता को सरयू तट पर लाया जाएगा, उनका तिलक होगा और फिर दीपोत्सव में दिए जलाए जाएंगे। हिन्दुस्तान के साथ विदेशों में भी 27 अक्टूबर को दीपावली मनाई जाएगी। उससे ठीक एक दिन पूर्व 26 अक्टूबर को अयोध्या विश्व कीर्तिमान रचेगी, इसे लेकर अयोध्यावासी भी रोमांचित हैं।

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