कहां बनेगा राम मंदिर और कहां होगी मस्जिद?

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जानें हर सवाल का जवाब,अयोध्या Case फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने पूरी विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया है.सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने ऐतिहासिक फैसले में सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) को 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है.
नई दिल्ली. अयोध्या (Ayodhya) पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण (Ram temple construction) पर फैसला दिया है. इसी के साथ सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) को 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है. सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने कहा कि ये पांच एकड़ जमीन या तो अधिग्रहित जमीन से दी जाए या फिर अयोध्या में कहीं भी.CJI ने रामलला के वकील के पराशरण और सी एस वैद्यनाथन, हरिशंकर जैन की सराहना की.
कोर्ट ने शिया वक्‍फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी. चीफ जस्टिस ने कहा कि मीर बाकी ने बाबर के वक्‍त बाबरी मस्जिद बनवाई थी. 1949 में दो मूर्तियां रखी गईं. बाबरी मस्जिद को गैर-इस्‍लामिक ढांचे पर बनाया गया. बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. पुरातत्‍व विभाग (ASI) की रिपोर्ट से साबित होता है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. ASI की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. खुदाई में इस्‍लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले. अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरे की पूजा हिंदू करते थे.
कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की ये आस्था कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ है, इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि 1885 से पहले राम चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार था. अहाते और चबूतरे पर हिंदुओं का अधिकार साबित होता है. 18वीं सदी तक नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं हैं. सीता रसोई की भी पूजा अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू करते थे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में विवादित जमीन को तीन हिस्‍सों में बांटने का जो फैसला दिया वो तार्किक नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का सूट मेनटेबल नहीं है. यह ‘सेवियत’ राइट के खिलाफ है. उन्हें शेबेट के अधिकार प्राप्त नहीं हैं. देवता न्यायिक व्यक्ति होता है. मूर्ति भी न्यायिक व्यक्ति होती है. मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे. सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित क्षेत्र पर अपना मालिकाना हक और प्रतिकूल कब्जा साबित करने में नाकाम रहा है.
सीजेआई ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए, साथ ही केंद्र सरकार तीन महीने में इसकी योजना बनाए. फैसला देते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने कई अहम सवालों के सिलसिलेवार जवाब भी दिए. पांच जजों की बेंच ने अयोध्या विवाद से जुड़े हर एक बिंदु को समझाने की कोशिश की. आइए जानते हैं कि कोर्ट ने किसी सवाल का क्या जवाब दिया.
विवादित जमीन पर किसका होगा मालिकाना हक?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर थी कि आखिर 2.77 एकड़ विवादित भूमि किसे मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने विवादित भूमि पर मंदिर निर्माण का निर्णय दिया है. कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के मालिकाना हक को खारिज कर दिया है लेकिन वह ट्रस्ट में महत्वपूर्ण पक्ष होगा.
एआईएस की रिपोर्ट में क्या तथ्य आए समाने?
एएसआई की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. खुदाई में मिला ढांचा गैर इस्लामिक था. हालांकि एएसआई ने ये नहीं कहा कि मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी. एएसआई की रिपोर्ट में जमीन के भीतर मंदिर होने के सबूत दिए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बाबृरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं हुआ था.प्राचीन यात्रियों ने क्या दावे किए पेश?
सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि प्राचीन यात्रियों ने जन्मभूमि का जिक्र किया है. कोर्ट ने कहा कि इन प्राचीन यात्रियों के ऐतिहासिक तथ्य इस बात का प्रमाण देते हैं कि अयोध्या में ही भगवान राम का जन्मस्थान था.
विवादित स्थल में ही हुआ था भगवान राम का जन्म?
इस पूरे मामले से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या विवादित स्थल में ही भगवान राम का जन्म हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवादित स्थल को भगवान राम का जन्म स्थान मानते रहे हैं. सीजेआई ने कहा कि सबूतों से साबित होता है कि भगवान राम का जन्म विवादित स्थल पर ही हुआ था. एएसआई की रिपोर्ट में बाबरी ढांचे के नीचे मंदिर के सबूत मिले हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं का यह विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और इस पर किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है.
विवादित स्थल कब बनाई गई थी मस्जिद?
सीजेआई ने कहा कि मस्जिद कब बनाई गई, इसका वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद नहीं है. सीजेआई ने कहा कि हम सबके लिए पुरातत्व, धर्म और इतिहास जरूरी है लेकिन कानून सबसे ऊपर है. सभी धर्मों को समान नजर से देखना हमारा कर्तव्य है. देश के हर नागरिक के लिए सरकार का नजरिया भी यही होना चाहिए.
क्या मस्जिद के नीचे मंदिर था?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित ढांचे की खुदाई के नीचे मंदिर के कई ऐसे अवशेष मिले हैं, जिससे पता चलता है विवादित जमीन पर मंदिर था. कोर्ट ने माना कि एएसआई की रिपोर्ट में मस्जिद के नीचे गैर-इस्लामिक अवशेष मिलने की बात कही गई है.
विवादित स्थल पर क्या किया जाता था?
कोर्ट ने कहा कि हिंदू मुख्य गुंबद को ही राम का जन्म स्थान मानते हैं जबकि 1856 से पहले मुस्लिम उस जगह नमाज अदा करते थे. सीजेआई ने कहा, विवादित स्थल के अंदरूनी हिस्से में हमेशा से पूजा होती थी. बाहरी चबूतरा, राम चबूतरा और सीता रसोई में भी पूजा होती थी.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की 10 प्रमुख बातें…
1. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामलला विराजमान को देने का फैसला सुनाया.
2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलला विराजमान को जमीन के लिए ट्रस्‍ट बनाया जाए. केंद्र सरकार 3 महीने में मंदिर के लिए योजना तैयार करे.
3. 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर सरकार का हक रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मभूमि एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हैं.
4. विवादित जमीन को लेकर बनने वाले ट्रस्‍ट में निर्मोही अखाड़े को जगह दी जाए. हालांं‍कि जमीन को लेकर निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे खारिज किए गए.
5. एएसआई की रिपोर्ट में जमीन के नीचे मंदिर के सबूत मिले. प्राचीन यात्रियों ने जन्‍मभूमि का जिक्र किया है.
6. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान को कानूनी मान्यता दी. लेकिन राम जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना. सीजेआई रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि खुदाई में मिला ढांचा गैर इस्लामिक था.
7. अंदरूनी हिस्‍सा विवादित है. हिंदू पक्ष ने बाहरी हिस्‍से पर दावा साबित किया है.
8. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतिहास जरूरी है, लेकिन इन सबमें कानून सबसे ऊपर है, सभी जजों ने आम सहमति से फैसला लिया है. आस्‍था पर जमीन के मालिकाना हक का फैसला नहीं.
9. संविधान की नजर में सभी आस्‍थाएं समान हैं. कोर्ट आस्‍था नहीं सबूतों पर फैसला देती है.
10. सीजेआई रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि सभी धर्मों को समान नजर से देखना सरकार का काम है. अदालत आस्था से ऊपर एक धर्म निरपेक्ष संस्था हैं.
मुस्लिम पक्ष ने कहा- ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हैं, लेकिन संतुष्‍ट नहीं’
अयोध्‍या फैसला: मुस्लिम पक्ष ने कहा- ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हैं, लेकिन संतुष्‍ट नहीं’ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है.
सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने अयोध्‍या केस (Ayodhya Verdict) के फैसले में कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान (Ramlala) को दी जाए. अयोध्‍या केस (Ayodhya Land Dispute Verdict) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया. सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने फैसले में कहा कि विवादित जमीन रामलला (Ramlala) विराजमान को दी जाए. साथ ही उन्‍होंने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड (Sunni waqf board) को अयोध्‍या (Ayodhya) में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने का फैसला दिया. इस पर सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी (Zafaryab Jilani) ने असंतुष्टि जताई. उन्‍होंने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हैं. लेकिन हम इससे संतुष्‍ट नहीं है. इसे लेकर हम आगे की कार्रवाई के संबंध में विचार करेंगे.’
जफरयाब जिलानी ने कहा कि अगर हमारी कमेटी सहमत होगी तो हम इस पर पुनिर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. य‍ह हमारा अधिकार है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट का नियम भी है.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शनिवार को कहा कि वह विवादित जमीन को मंदिर के लिए देने से जुड़े फैसले से असंतुष्ट है और इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार किया जाएगा. बोर्ड के सचिव और वकील जफरयाब जिलानी ने संवाददाताओं से कहा, ‘ फैसले के कुछ बिंदुओं खासकर जमीन देने की बात से हम अंसतुष्ट हैं. हम विचार करेंगे कि पुनर्विचार याचिका दायर करनी हैं या नहीं.’
उन्होंने मस्जिद के लिए पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन देने को लेकर कहा कि मस्जिद की कोई कीमत नहीं हो सकती. जिलानी ने कहा कि यह मुकदमा किसी की जीत और हार नहीं है और सभी को शांति बनाए रखनी चाहिए.

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