‘क्या इस्लामिक शिक्षाओं से सिर्फ अल्लाह की ही इबादत होती है, और किसी की नहीं?’

जस्टिस बोबड़े ने राजीव धवन से सवाल करते हुए पूछा- क्या इस्लामिक शिक्षाओं के मुताबिक सिर्फ अल्लाह ही पवित्र या दिव्य है, सिर्फ उनकी ही इबादत होती है और किसी की नहीं? ऐसे में बाकी वस्तु व जगह क्‍या पवित्र मानी जा सकती है. क्या मस्जिद की अपने आप में दिव्यता को लेकर किसी इस्लामिक विद्वान ने कुछ कहा है?डेडलाइन एक दिन घटाई, अब दोनों पक्षों को 17 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी बहस
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस की डेडलाइन एक दिन और घटा दी है। शीर्ष अदालत ने अब हिंदू और मुस्लिम पक्षों को 17 अक्टबूर तक जिरह पूरी करने को कहा है। कोर्ट ने पहले 18 अक्टूबर की डेडलाइन तय की थी।
अयोध्‍या: वकील की दलील, ‘T-20 मैच की तरह हो रही सुनवाई’, CJI ने कहा…
‘खुदाई में मिली कमल की आकृति…वह संरचना मंदिर ही थी’
मुस्लिम पक्ष की बहस का जवाब देते हुए रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैद्यनाथन ने ASI की रिपोर्ट पर दलीलें दीं.
नई दिल्ली:अयोध्या विवादित जमीन मामले में सुनवाई की तारीख आज सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन कम कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिन का वक्त कम करते हुए संबंधित पार्टियों को बहस 17 अक्टूबर तक खत्म करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई का दिन कम करते हुए सभी पक्षों से कहा कि उनकी अदालत से जो भी समाधान की उम्मीद है वह 17 तारीख तक अपने तर्कों के जरिए रख दें। अयोध्या मामले (Ayodhya Case) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 37वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा कि वह इनटरवीनर, मठ, लिमिटेशन पर दलीलें देंगे. उन्‍होंने कहा कि न्यायिक व्यक्ति का मामला उठाकर हिन्दू मुख्य मामले से भटकाना चाह रहे हैं. हिन्दू पक्ष का कहना है कि जन्म स्थान आने आप में न्यायिक व्यक्ति होता है.मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने जवाब दिया कि एक मस्जिद हमेशा पवित्र और दिव्य है. ये वो जगह है जहां कोई अपने ख़ुदा की इबादत करता है. यहां पांचों वक़्त नमाज पढ़ी जाती है. जिस चीज़ के जरिये खुदा की इबादत हो, वो अपने आप में हर चीज़ पवित्र है.
राजीव धवन ने कहा कि हिंदुओं ने हमारी मस्जिद को गिरा दिया और हिंदुओं ने उलटा कहा कि उनको प्रताड़ित किया गया. दो राष्ट्र की बात कही गई. धवन ने कहा कि वक़्फ़ को अंग्रेजों ने भी अप्रूवल दिया था. धवन ने निर्मोही अखाड़ा की याचिका का अंश पढ़ते हुए कहा कि याचिका में कहा गया है कि वहां पर तीन गुम्बद की कोई मस्जिद नहीं थी. भारतवर्ष में इस्लामिक कानून लागू नहीं होता. यह भी कहा गया कि गुम्बद वैदिक समयकाल से मिलता-जुलता है और बाबर ने नहीं मीर बाकी ने मन्दिर को गिराया. उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह एक फकीर से बहुत प्रभावित था…
राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष मुस्लिमों पर सांप्रदायिक हिंसा का आरोप लगाता रहा है. वो मुस्लिम बादशाहों के हमले व विध्वंस की बात करते हैं लेकिन 6 दिसंबर 1992 को क्या हुआ, जब बाबरी मस्जिद गिरा दी गई. सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए ज़िम्मेदार वो भी है और ये कोई मुगलकाल की बात तो है नहीं…
जस्टिस बोबड़े ने राजीव धवन से सवाल करते हुए पूछा- क्या इस्लामिक शिक्षाओं के मुताबिक सिर्फ अल्लाह ही पवित्र या दिव्य है, सिर्फ उनकी ही इबादत होती है और किसी की नहीं? ऐसे में बाकी वस्तु व जगह क्‍या पवित्र मानी जा सकती है. क्या मस्जिद की अपने आप में दिव्यता को लेकर किसी इस्लामिक विद्वान ने कुछ कहा है?अयोध्या मामले (Ayodhya Case) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 36वें दिन की सुनवाई में हिन्‍दू पक्षों को आज अपनी जिरह पूरी करनी है. इस पृष्‍ठभूमि में मुस्लिम पक्ष की बहस का जवाब देते हुए रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैद्यनाथन ने ASI की रिपोर्ट पर दलीलें दीं. उन्‍होंने तस्वीरों के जरिये यह बताया कि विवादित ढांचे के नीचे पिलर था. विवादित ढांचे के नीचे एक संरचना मौजूद थी. वकील वैद्यनाथन ने अलग-अलग सबूतों के जरिये यह बताया कि केंद्रीय गुम्बद (सेंट्रल डॉम) ही भगवान राम का जन्मस्थान है.
जस्टिस चन्दचूड़ ने पूछा कि ये कैसे साबित होगा कि ढांचे के नीचे जो खंभों के आधार मिले थे, वो एक ही समय के हैं? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ASI रिपोर्ट में इसका जिक्र है कि 46 खम्भे एक ही समय के हैं. उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिम पक्ष खाली जगह पर मस्जिद निर्माण की बात कह रहा था. अब वो ईदगाह पर मस्जिद निर्माण की बात कह रहे है.
खुदाई में मिली कमल की आकृति, सर्कुलर श्राइन, परनाला सब वहां मन्दिर को मौजूदगी को साबित करते है और ये सब संरचना उत्तर भारतीय मंदिरों की खासियत है. वैद्यनाथन ने अपनी जिरह पूरी की. उसके बाद मुख्य याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने जिरह की. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने एक बार फिर साफ कहा कि हिन्दू पक्ष को आज शाम चार बजे तक ही सुनेंगे. इसके बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को सुनेंगे.
जस्टिस चन्दचूड़ ने रामलला के वकील से पूछा कि आस्था और विश्वास अपने आप में एकदम अलग तर्क है, अलग बहस का विषय है. लेकिन हम यहां पुख्ता सबूतों की बात कर रहे हैं जिनसे मन्दिर की मौजूदगी साबित हो सके. जस्टिस चन्दचूड़ ने फिर पूछा कि आपने जिन सरंचनाओं का जिक्र किया है, वो बौद्ध विहार में भी तो हो सकती है. आप कैसे ये साबित करेंगे कि वो बौद्ध विहार न होकर मन्दिर ही होगा. वैद्यनाथन ने कहा कि ये जगह हमेशा हिंदुओं के लिए पवित्र रही है.बौद्धधर्मियों के लिए ये कभी अहम नहीं रही है और ये साबित करता है कि मन्दिर ही था.
गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को जवाब देने के लिए बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला. लंच के बाद रामलला के वकील नरसिम्हन को 10 मिनट का समय मिला.
20 मिनट के अंदर 2 हिन्दू पक्षकारों की दलील समेटने के बाद जब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने निर्मोही अखाड़े के वकील से कहा कि आपके पास डेढ़ घंटे का समय है तो अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि सुनवाई 20-20 मैच की तरह चल रही है. इस पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं.
दरअसल निर्मोही अखाड़े के वकील द्वारा सुनवाई की तुलना 20-20 मैच से करने पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं. हमने आपको 4-5 दिन विस्तार से सुना है फिर भी आप इस तरह की बात कर रहे हैं. सुशील जैन ने अपने बयान के लिए खेद जताया. हिन्दू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला था जवाब देने के लिए. रामलला के वकील नरसिम्हन को 15 मिनट का समय मिला था…
रामललला विराजमान के वकील पी नरसिम्हा ने स्कंद पुराण का हवाला देते हुए कहा कि स्कंद पुराण में भी श्रीरामजन्म स्थान का जिक्र है और हिंदुओ का ये विश्वास रहा है कि यहां दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है. पुरातत्व विभाग के सबूत भी हमारे विश्वास की ही पुष्टि करते है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुशील जैन से पूछा कि उनको अपनी दलील पूरी करने में कितना समय लगेगा? जैन ने कहा कि मैं कोर्ट का एक मिनट भी बर्बाद नही करूंगा. जल्द से जल्द अपनी बात रखूंगा. निर्मोही अखाड़ा के वकील ने कहा कि वी आर वेरी पुअर पार्टी इन दिस केस. मैं जानता हूं कि आपके पास फैसला लिखने का समय नहीं लेकिन मेरी बात सुने बिना आपका फैसला अधूरा रहेगा, क्योंकि मेरा पूरा केस कब्ज़े पर आधारित है.
35वें दिन की सुनवाई
इससे पहले एक अक्‍टूबर को 35वें दिन की सुनवाई में हिन्दू पक्ष के वकील परासरन ने भगवत गीता के कुछ श्लोक को पढ़ा था और एक न्यायिक व्यक्ति के रूप में माने जाने वाले स्थान पर जोर दिया. खुदाई में मिली कमल की आकृति, सर्कुलर श्राइन, परनाला की उपस्थिति ये साबित करता है कि वह संरचना मंदिर ही थी क्योंकि यह उत्तर भारतीय मंदिरों की विशेषताएं हैं.
‘यदि विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्‍य शक्ति है, इसको न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है’
परासरन ने कहा था कि अगर लोगों का विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्‍य शक्ति है तो इसको न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है, जिसका दिव्य अभिव्यक्ति से कोई अंतर न हो. परासरन ने कुड्डालोर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा था कि कुड्डालोर मंदिर में भी कोई मूर्ति नहीं है और केवल एक दीया जलता है, जिसकी पूजा की जाती है. राजीव धवन ने परासरन की दलील पर टोकते हुए कहा था कि इनके सभी उदाहरण में मंदिर था, यह एक मंदिर के रूप में बताया गया है.

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