विवाद / मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताने वाले आतिश तासीर से छिनी भारत की विशेष नागरिकता

आतिश तासीर (बाएं) ने टाइम मैगजीन में प्रधानमंत्री मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताया था।
गृह मंत्रालय ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा था कि तासीर ने अपने पिता के पाकिस्तानी होने की जानकारी छिपाई
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा- क्या हमारी सरकार इतनी कमजोर है कि एक पत्रकार से डरने लगी
नई दिल्ली. इस साल आम चुनाव से ठीक पहले टाइम मैगजीन के लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले आतिश तासीर से भारत की विशेष नागरिकता छीन ली गई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार रात ट्वीट कर कहा कि तासीर 1955 के नागरिकता कानून के तहत ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड रखने के लिए अयोग्य हैं। उन्होंने इसके लिए आधारभूत जरूरतें पूरी नहीं कीं और कुछ जानकारियां छिपाईं। तासीर ने यह जानकारी नहीं दी कि उनके पिता एक पाकिस्तानी नागरिक हैं।
इस पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार की आलोचना करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “सरकार के एक आधिकारिक प्रवक्ता को गलत दावा करते देखना दर्दनाक है। ऐसा दावा जिसका आसानी से खंडन किया जा सकता है। ज्यादा दुखद यह है कि एक लोकतंत्र में ऐसा हो रहा है। क्या हमारी सरकार इतनी कमजोर है कि एक पत्रकार से डरने लगी।’’
क्या है ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया?
नागरिकता कानून के तहत भारत में दोहरी नागरिकता मान्य नहीं है। हालांकि, लगातार उठती मांगों के बाद इसके विकल्प के तौर पर ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया कार्ड शुरू किया गया था। इसके जरिए भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को भारत में बिना वीजा आने और अनिश्चितकाल तक काम करने की अनुमति मिल जाती है। आतिश तासीर भी ओसीआई कार्डधारक थे।
विदेश मंत्रालय के ट्वीट पर तासीर ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि तासीर को जवाब देने के लिए पूरा समय दिया गया। हालांकि, तासीर ने ट्वीट कर इसे झूठा दावा बताया। उन्होंने कान्स्युल जनरल के ईमेल की फोटो पोस्ट की और जवाब में लिखा, “मुझे प्रतिक्रिया देने के लिए 21 दिन का नहीं बल्कि सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया। इसके बाद से ही मंत्रालय ने मेरी बातों का जवाब नहीं दिया।” दरअसल, ब्रिटेन में जन्मे लेखक व पत्रकार आतिश अली तासीर ने भारत सरकार से जो जरूरी सूचना छुपाई, वह यह थी कि उसके पिता पाकिस्तानी मूल के थे।
गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, तासीर ओसीआई कार्ड के लिए अयोग्य हो गया है, क्योंकि ओसीआई कार्ड के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में वो असमर्थ रहा। उसने अपने पिता के पाकिस्तानी होने की बात अधिकारियों व सरकारी रिकॉर्ड में छिपाई।
बता दें कि ओसीआई कार्ड के नियम 7A में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति या उसके माता-पिता या दादा-दादी या परदादा-परदादी पाकिस्तान, बांग्लादेश या ऐसे देश जो भारत सरकार के आधिकारिक गजट में अनुसूचित हैं, का नागरिक है, तो वह ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड के पंजीकरण के योग्य नहीं है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी गुरूवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने धोखे से, फर्जीवाड़ा करके या फिर तथ्य छुपा कर ओसीआई कार्ड हासिल किया है, तो ओसीआई कार्ड धारक के रूप में उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। ओसीआई के मुताबिक उस व्यक्ति का पंजीकरण रद्द करने के साथ ही भविष्य में उसके भारत में प्रवेश करने पर भी रोक लग जाएगी।
आतिश तासीर ने टाइम मैगजीन के 20 मई के संस्करण में एक कवर स्टोरी लिखी थी। इसमें तासीर ने पीएम मोदी को ‘डिवाइडर इन चीफ’ कहते विवादास्पद सवाल किया था- क्या विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र फिर से मोदी को 5 साल का मौका देने को तैयार है? इस लेख में कहा गया था कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र पहले से काफी बँट गया है। साथ ही आतिश ने पीएम मोदी पर धार्मिक राष्ट्रवाद का जहर भरने जैसे तमाम आरोप लगाए थे। हास्यास्पद यह है कि द प्रिंट के पत्रकार ने मनगढ़ंत पत्रकारिता करते हुए यह लिख मारा कि आतिश पर सरकार ने एक्शन इसलिए लिया क्योंकि उसने पीएम मोदी के खिलाफ लेख लिखा था।
सरकार द्वारा आतिश के ओसीआई को रद्द किए जाने पर मीडिया हाउस ‘द प्रिंट’ ने दावा किया कि तासीर के टाइम मैगजीन में इस लेख के लिखने के बाद से ही उसके ओसीआई को रद्द किए जाने पर विचार किया जा रहा था। हालाँकि, विदेश मंत्रालय ने मीडिया हाउस के फैलाए जा रहे झूठ को पूरी तरह से नकार दिया। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि ‘द प्रिंट’ की रिपोर्टिंग पूरी तरह से गलत और तथ्यरहित है।
बता दें कि तासीर के पिता सलमान तासीर, पंजाब (पाकिस्तान में) के गवर्नर थे और उस देश के सबसे हाई प्रोफाइल राजनेताओं में से एक थे। तासीर को पहला पीआईओ कार्ड 1999 में और इसके बाद 2016 में जारी किया गया था। इसके अलावा आतिश तासीर के पास ब्रिटिश पासपोर्ट और अमेरिका का ग्रीन कार्ड भी है।

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