राफेल डील पर सरकार को बड़ी राहत, सुको में सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज

राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार को राहत (फोटो-रॉयटर्स)
इन आधारों पर सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई राफेल पर पुनर्विचार याचिका,सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की दलीलें खारिज हमें नहीं लगता एफआईआर दर्ज होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार के लिए दाखिल की गई थीं 3 याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को राफेल डील को लेकर दाखिल की गई 3 पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया. शीर्ष अदालत ने इस मामले पर फैसला पढ़ते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की सभी दलीलें खारिज कर दीं.
राफेल डील पर मोदी सरकार को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सभी पुनर्विचार याचिकाएं
राफेल डील पर मोदी सरकार को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सभी पुनर्विचार याचिकाएंराफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पुनर्विचार याचिकाएं की खारिज
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राफेल डील (Rafale Deal) मामले में दायर की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है.
नई दिल्ली, 14 नवंबर ! सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राफेल डील Rafale Deal) मामले में मोदी सरकार को बड़ी राहत मिली है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अगुवाई वाली बेंच ने राफेल मामले में दायर की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने 14 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को वैध मानते हुए 14 दिसंबर, 2018 के अपने फैसले को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं की सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की दलीलों को खारिज कर दिया है.
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हमें ऐसा नहीं लगता कि इस मामले में किसी तरह की कोई जांच होनी चाहिए. बेंच ने कहा कि हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि अभी इस मामले में कॉन्ट्रैक्ट चल रहा है. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के हरफनामे में हुई भूल को भी स्वीकार किया है.
बता दें कि राफेल सौदे मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशंवत सिन्हा और अरुण शौरी की ओर पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थी.इनमें 14 दिसंबर, 2018 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी, जिसमें फ्रांस की कंपनी ‘दसॉ’ से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के केंद्र के राफेल सौदे को क्लीन चिट दी गई थी.
पुनर्विचार याचिका में क्या था
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाए गए थे. ‘लीक’ दस्तावेज का हवाला देते हुए आरोप लगाए गए कि इस डील में पीएमओ ने रक्षा मंत्रालय को भी भरोसे में नहीं लिया. कोर्ट में विमानों की कीमत को लेकर भी याचिका डाली गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह ठोस सबूतों के बगैर इस मामले में दखल नहीं देगी.
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई,जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस संजय किशन कौल ने सुनाया फैसला
इस मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने फैसला सुनाया है. पीठ ने इस मामले में 10 मई को ही सुनवाई पूरी कर ली थी. पीठ ने कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को राफेल डील को लेकर दाखिल की गई 3 पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया. शीर्ष अदालत ने इस मामले पर फैसला पढ़ते हुए याचिकाकर्ताओं द्वारा सौदे की प्रक्रिया में गड़बड़ी की दलीलें खारिज कर दीं. कोर्ट की ओर से याचिका खारिज करने का सबसे बड़ा आधार उनकी कमजोर दलील माना गया.
पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इन याचिकाओं में कोई दम नहीं है और कोर्ट उनकी दलीलों पर सहमत नहीं था.सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हमें ऐसा नहीं लगता कि इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज होनी चाहिए या फिर किसी तरह की जांच की जानी चाहिए. कोर्ट ने आगे कहा कि हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि अभी इस मामले में एक कॉन्ट्रैक्ट चल रहा है.
किन-किन लोगों ने की थी याचिका दाखिल?
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे में हुई भूल को स्वीकार किया है. राफेल विमान डील मामले में शीर्ष अदालत के दिसंबर 2018 के आदेश पर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी तथा वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के अलावा विनीत भांडा, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की ओर से पुनर्विचार के लिए 3 याचिकाएं दाखिल की गई थीं.पुनर्विचार याचिका पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने फैसला सुनाते हुए इसे खारिज कर दिया. कोर्ट पहले ही फैसला दे चुका था कि डील को लेकर किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई थी.
अब जांच की जरूरत नहींः सुप्रीम कोर्ट
फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुरुवार को कहा कि इस मामले में किसी तरह की जांच की जरूरत नहीं है. डील में मोदी सरकार की भूमिका नहीं है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इन याचिकाओं में कोई दम नहीं है. हम नहीं समझते कि एफआईआर या राफेल डील को लेकर किसी तरह की जांच के आदेश दिए जाएं.
14 दिसंबर 2018 को शीर्ष अदालत ने करीब 58,000 करोड़ रुपये के इस समझौते में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जांच का मांग कर रही याचिकाओं को खारिज कर दिया था. कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए काफी राहत भरा है क्योंकि कांग्रेस ने इस करार को लोकसभा में चुनावी मुद्दा बनाया था.
राफेल पर कांग्रेस ने झूठ फैलाया, देश से माफी मांगें राहुल गांधी : रविशंकर प्रसाद
राफेल विमान सौदे (Rafale deal) से जुड़े आपराधिक अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने राहुल गांधी की माफी स्‍वीकार कर ली. साथ ही इस डील से जुड़ी सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इस फैसले के बाद बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद (Ravi shankar prasad) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्‍होंने कहा कि राफेल डील पर कांग्रेस ने झूठ फैलाया. राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सत्‍य की जीत है.
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके हाथ पूरी तरह से भ्रष्टाचार में रंगे हैं. देश की सुरक्षा से जिन्होंने खिलवाड़ किया है. वो अपने प्रायोजित राजनीतिक कार्यक्रम को कोर्ट में न्याय की गुहार से रूप में प्रस्तुत कर रहे थे. उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले पर पूरी प्रक्रिया को जांचा और उसे सही बताया. दाम की प्रक्रिया को भी जांचा और सही बताया. सुप्रीम कोर्ट ने ऑफसेट की प्रक्रिया को भी सही ठहराया है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने झूठ में फ्रांस के पूर्व और मौजूदा प्रधानमंत्री का नाम भी शामिल किया.
‘प्रधानमंत्री के खिलाफ अभियान चलाया’
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब ये (कांग्रेस) सुप्रीम कोर्ट से हार गए तो इन्होंने इसे लोकसभा चुनाव में अपना मुख्य मुद्दा बनाया. राहुल गांधी ने तो यहां तक कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारे लोकप्रिय और ईमानदार नेता को चोर कहा है. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस ने झूठ बोला है. हमारे ईमानदार प्रधानमंत्री के खिलाफ अभियान चलाया. भारत की विदेश में साख को घटाने की कोशिश की.
‘वो कौन सी ताकतें थीं, जो राहुल के पीछे खड़ी थीं’
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इसलिए आज राहुल गांधी को देश से माफी मांगने की जरूरत है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आज मानहानि मामले पर माफी मांगने पर उनको छोड़ा है. उन्‍होंने कहा कि कोर्ट से बचने के लिए राहुल गांधी ने माफी मांगी. कोर्ट ने तो माफ़ी मांगने पर आपको छोड़ दिया, लेकिन क्या देश की जनता से आंख मिलाने के लिए माफी मांगेंगे आप? उन्‍होंने कहा कि आज देश यह जानना चाहता है कि वो कौन सी ताकतें थीं, जो राहुल गांधी के पीछे खड़ी थीं.
राजनाथ सिंह ने भी बोला हमला
वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्‍वागत किया है. उन्‍होंने कहा कि यह हमारी सरकार के कदम का समर्थन है. फैसले लेने की हमारी सरकार की पारदर्शिता को सुप्रीम कोर्ट से स्‍वीकृति मिली है. राजनाथ सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि रक्षा से जुड़े मामलों पर कोई भी राजनीति नहीं होनी चाहिए. लेकिन दुर्भाग्‍यवश कुछ लोगों ने निजी फायदे के लिए ऐसा किया. उन्‍होंने प्रधानमंत्री को बदनाम करना चाहा. मैं कहना चाहूंगा कि ऐसा खासतौर पर वरिष्‍ठ कांग्रेस नेताओं के द्वारा किया गया.
मीनाक्षी लेखी ने दायर की थी याचिका
बता दें कि राहुल गांधी पर आरोप था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए राफेल डील (Rafale Deal) मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तोड़-मरोड़कर पेश किया. इससे कोर्ट की अवमानना हुई. बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है.
इस याचिका में राहुल गांधी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए राफेल डील मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत तरीके से लोगों के सामने रखने की कोशिश की. राहुल गांधी ने राफेल के मामले को जिस तरह से लोकसभा चुनाव के समय गलत तरीके से पेश किया उससे कोर्ट की अवमानना हुई है.

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