करप्शन पर बड़ा प्रहार, पकड़े जाने पर अब होगा ये एक्‍शन

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने उठाया कदम.
मोदी सरकार (Modi Government) में विभागों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल किया जा रहा है.
नई दिल्‍ली. केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) की नजर करप्ट अफसरों पर है. विभागों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल किया जा रहा है. दिल्ली में आज एक कार्यक्रम के दौरान शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Urban Development Minister Hardeep Singh Puri) ने कहा कि तकनीक से भ्रष्टाचार का खात्मा हो रहा है, तो वहीं विभाग के सेक्रेटरी ने बड़े एक्शन की बात करते हुए हिदायत भी दे डाली है.
शहरी विकास मंत्रालय के सचिव ने दी हिदायत
शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने कहा कि विभागों में कुछ भी गलत करने वालों के लिए अब उनको पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाएं. उन्‍होंने कहा कि कई विभागों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाया है. कुछ अधिकारियों की जरूरतें पूरी नहीं होने पर वो गड़बड़ी करते हैं. दिल्ली के विज्ञान भवन में कार्यक्रम में सचिव ने यहां तक कहा कि मैं CPWD के चीफ को अधिकार देता हूं कि भ्रष्ट अधिकारियों पर सीधे कार्यवाई करें.
मोदी सरकार करप्‍ट अधिकारियों को दे रही है मैसेज
मोदी सरकार ने दूसरी पारी शुरू करते ही भ्रष्ट अफसरों को डायरेक्ट मैसेज दे दिया था कि करप्शन किया तो बख्शा नहीं जाएगा. हाल ही में सेंट्रल बोर्ड ऑफ इन्डायरेक्ट टैक्सेज़ एंड कस्टम्स (CBIC) के 15 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया. इतना ही नहीं इनकम टैक्स के भी 12 अधिकारियों की छुट्टी कर दी गई थी. आरोप है कि ये अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त थे. जाहिर है कि मोदी सरकार के निशाने पर वो लोग हैं जो पैसों का काला कारोबार करने में जुटे हैं और करोड़ों-अरबों का गबन कर रहे हैं.भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम के वायदे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार पिछले तीन सालों में ऊंचे स्तर पर फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में तो कामयाब रही, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में आम जनता को निचले स्तर से भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलना बाकी है। कालेधन प एसआइटी का गठन, नोटबंदी, बेनामी संपत्ति कानून और आयकर कानून के प्रावधानों को कड़ा कर मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने का ठोस कदम जरूर उठाया, लेकिन लोकपाल के गठन में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल भी खड़ा किया है।
सत्ता संभालते ही कैबिनेट की पहली बैठक में कालेधन के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसआइटी के गठन को हरी झंडी देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस पर काम करेगी। पिछले तीन साल में सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगना इसे सही साबित भी कर दिया है। इससे भ्रष्टाचार के पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय रैकिंग में भारत का स्थान भी ऊंचा हुआ। लेकिन विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस लाने में विफलता के लिए मोदी सरकार को आरोपों का सामना भी करना पड़ा। यही कारण है कि पिछले साल जुलाई मेंमाईगोव डाट कॉम पर मोदी सरकार की उपलब्धियों पर कराए गए अपने सर्वेक्षण में लोगों ने भ्रष्टाचार और कालेधन पर सरकार की कार्रवाई को बहुत अंक नहीं दिया था।
पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री ने जब कालेधन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान करते हुए 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया, तो इसे भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के रूप में देखा गया। जनता ने नोटबंदी के फैसले को हाथोंहाथ लिया। इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिशों और तमाम तकलीफों के बावजूद आम जनता मोदी सरकार के साथ खड़ी दिखी। लेकिन धीरे-धीरे यह भी साफ हो गया है कि दशकों से जड़ जमाए कालेधन और भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए सिर्फ नोटबंदी ही काफी नहीं है।
भ्रष्ट बैंक अधिकारियों की मदद से कालेधन के कुबेर पुराने नोटों को नए नोटों में बदलवाने में भी सफल रहे। इसकी काट के लिए मोदी सरकार ने 28 सालों से ठंडे बस्ते में पड़े बेनामी संपत्ति कानून को बाहर निकालकर लागू कर दिया। बेनामी संपत्ति कानून के तहत पिछले चार महीने 400 संपत्तियों की पहचानकर 530 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
मोदी सरकार के तीन साल में यह भी साबित हो गया है कि कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मौजूदा प्रयास पर्याप्त नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में आम आदमी को भ्रष्टाचार से निजात दिलाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा। वैसे यह भी साफ है कि आम आदमी को जिन कामों के लिए रिश्वत देने पड़े रहे हैं, उनमें अधिकांश राज्य सरकारों के अधीन आते हैं। इसके लिए केंद्र की तरह राज्यों में भी सीबीआइ और ईडी की तर्ज पर मजबूत भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां खड़ी करनी होगी। अब जबकि अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकार है। इस दिशा में काम शुरू किया जा सकता है

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