सर्वर रूम से शुरू हुआ विवाद, जाने लेफ्ट-एबीवीपी में क्यों हुई भिड़ंत?

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर लंबे समय से प्रोटेस्ट चल रहा है. बताया जा रहा है कि शनिवार को जेएनयू छात्र संघ ने सर्वर रूम को लॉक कर दिया था. इसको लेकर एबीवीपी और लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स में हल्की झड़प हुई थी.जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर हिंसा की घटना हुई है. जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने दावा किया है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने हिंसा को अंजाम दिया है. वहीं, ABVP ने लेफ्ट विंग पर मारपीट करने का आरोप लगाया है.
जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर लंबे समय से प्रोटेस्ट चल रहा है. बताया जा रहा है कि शनिवार को जेएनयू छात्र संघ ने सर्वर रूम को लॉक कर दिया था. इसको लेकर एबीवीपी और लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स में हल्की झड़प हुई थी. रविवार को जेएनयू छात्र संघ की ओर से साबरमती हॉस्टल से मार्च निकाला जाना था. इस दौरान यहां हिंसा हुई.
जेएनयू एबीवीपी प्रेसिडेंट दुर्गेश कुमार ने कहा कि लिफ्ट विंग के छात्रों ने एबीवीपी के छात्रों के साथ मारपीट की है, जो बेहद ही निंदनीय घटना है. रविवार को रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था. एबीवीपी के छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए गए थे, लेकिन इंटरनेट बंद होने के चलते चलते रिजस्ट्रेशन नहीं पाया.
11 छात्र लापता होने का आरोप लगाया
उन्होंने इसके विरोध में एबीवीपी के छात्र विवेकानंद मूर्ति के पास रजिस्ट्रेशन की मांग कर रहे थे. इस बीच लेफ्ट के लोग आकर एबीवीपी के लोगों पर हमला कर दिया. दुर्गेश ने कहा कि पुलिस कैंपस में नहीं आ रही है. एबीवीपी से जुड़े 11 छात्र भी लापता है. हमारी मांग है कि हमें सुरक्षा दी जाए. कैंपस में डर का माहौल है.लेफ्ट नेता ने भीड़ को उकसाया, हिंसा के वक्त हमारा कोई छात्र नहीं था: ABVP
एबीवीपी का आरोप है कि वामपंथी छात्र संगठन आईसा के सतीश चंद यादव ने भीड़ को उकसाया, और डंडों से छात्रों की पिटाई की.
लेफ्ट नेता ने भीड़ को उकसाया, हिंसा के वक्त हमारा कोई छात्र नहीं था: एबीवीपी
रविवार 5 जनवरी की शाम को नकाबपोश उपद्रवियों ने जेएनयू में हिंसा की थी.
नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में रविवार शाम को हुई हिंसा के मामले में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अपना पक्ष रहा. एबीवीपी का कहना है कि रविवार शाम को हुई हिंसा में हमारा कोई भी छात्र शामिल नहीं था. एबीवीपी ने कहा कि वामपंथियों ने प्रायोजित तरीके से हिंसा की. विद्यार्थी परिषद ने कहा कि जेएनयू हिंसा में जामिया के भी कुछ लोग शामिल हैं.
एबीवीपी का आरोप है कि वामपंथी छात्र संगठन आईसा (AISA) के सतीश चंद यादव ने भीड़ को उकसाया, और डंडों से छात्रों की पिटाई की. वामपंथी छात्र लगातार जेएनयू में गतिरोध बनाए हुए थे. उन्होंने रजिस्ट्रेशन करवा रहे छात्रों के हाथों से फार्म छीनकर फाड़ दिए.
कोड वर्ड से रची गई थी हिंसा की साजिश
बता दें कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में हुई हिंसा के बाद एक के बाद एक मामले की परतें खुल रही हैं. सूत्रों के मुताबिक जेएनयू में एबीवीपी और लेफ्ट विंग के छात्रों के बीच पिछले 2-3 दिनों से तनाव चल रहा था. लेकिन जब लेफ्ट विंग के छात्रों ने रजिस्ट्रेशन के सर्वर को डैमेज किया तो तनाव और ज्यादा बढ़ गया. उसके बाद छात्रों के बीच झगड़ा हुआ. पेरियार होस्टल पर कल करीब 4 बजे के बाद मामला बढ़ता चला गया. अंदर करीब 10 पुलिसकर्मी सादा वर्दी में थे. उनके साथ भी हाथापाई हुई. इसकी पीसीआर कॉल भी हुई थी.
वॉट्स एप ग्रुप पर हुई बदला लेने की प्लानिंग
सूत्रों के मुताबिक उसके बाद कुछ वॉट्स एप ग्रुप बनाये गए और बदला लेने की प्लॉनिंग हुई. फिर बाहर से नकाबपोश लोग आए. उनको कोड वर्ड दिया गया जिसके जरिये हमलवार अपने लोगों की पहचान कर पाएं और उन्हें न पीटें. करीब 6 बजे लाठी डंडों से लैस नकाबपोश भीड़ ने हमला कर दिया उस समय अंधेरा था इसलिए कौन ‘राइट’ और कौन ‘लेफ्ट’ वाला है उसकी पहचान करना मुश्किल था. इसलिए कोड वर्ड के जरिये हमलावरों ने किसे मारना है, किसे नहीं मारना है उसे पहचाना.
7 बजे के आसपास वीसी की परमीशन लेकर पुलिस अंदर गई. लेकिन तब तक हमलवार भाग गए थे. हमलावरों में कुछ जेनएयू के छात्र भी शामिल बताए जाते हैं. ज्यादातर बाहरी हैं. जहां हिंसा हुई वहां कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं. कुछ हमलावरों की पहचान हो गई है.
क्राइम ब्रांच कर रही जांच
उधर JNU हिंसा की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के तुरंत बाद क्राइम ब्रांच एक्शन में आ गया है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की जांच टीम को 3 हिस्सों में बांटा गया है, सबका काम अलग अलग है. एक यूनिट इस वक़्त JNU कैंपस में मौजूद है, जो कैंपस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज एकत्र करने पहुंची है जोकि हिंसा की जांच में अहम सबूत होंगे. दूसरी यूनिट पहचाने गए आरोपियों की धरपकड़ में लगी है.
तीसरी यूनिट वायरल वीडियो और Whatsapp ग्रुप में हिंसा के दौरान छात्रों को उकसाने और इकट्ठा होने की बात कर रहे आरोपियों को चिन्हित कर रही है.
सबसे अहम है नकाबपोशों की पहचान, फिलहाल इसमे कोई खास कामयाबी अभी तक जांच टीम को नहीं मिली है. अधिकारियों का कहना है कि कुछ की गिरफ्तारी के बाद नकाबपोशों के वीडियो को दिखाकर पहचान की कोशिश की जाएगी.
योगेंद्र यादव ने क्यों किया 1983 का जिक्र, जेएनयू में क्या हुआ था उस साल
मामले की शुरुआत हुई थी एक स्टूडेंट के हॉस्टल ट्रांसफर से लेकिन बाद में मामला बिगड़ता चला गया.
रविवार रात को हुई हिंसा के बारे में योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) का कहना है कि जेएनयू में ऐसी हिंसा कभी नहीं हुई थी.जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हिंसा (JNU Violence) के बीच राजनीतिक विचारक और स्वराज पार्टी के चीफ योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) ने 1982 की एक घटना का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है कि पुलिस उस दौरान भी कैंपस में घुसी थी लेकिन कभी ऐसे हालात नहीं बने थे. योगेंद्र यादव का कहना है कि जेएयू में ऐसी हिंसा कभी नहीं हुई थी. दरअसल योगेंद्र यादव ने जिस घटना का जिक्र किया है वो 1982 नहीं 1983 की है.
जून 1983 में छपी इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट का कहना है कि उस समय जेएनयू में भयानक दंगों के बाद जैसे हालात थे. पूरे यूनिवर्सिटी कैंपस में सिर्फ पुलिस और सीआरपीएफ के जत्थे दिखाई दे रहे थे. पूरे कैंपस में वायरलेस के सेट बजते हुए सुनाई दे रहे थे.
हॉस्टल ट्रांसफर के बाद हुआ विवाद
मामले की शुरुआत हुई थी एक स्टूडेंट के हॉस्टल ट्रांसफर से लेकिन बाद में मामला बिगड़ता चला गया. तब यूनिवर्सिटी के झेलम हॉस्टल में रह रहे जलीस अहमद नाम के छात्र का ट्रांसफर गंगा हॉस्टल में कर दिया गया था. ये ट्रांसफर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत किया गया था. मामले को लेकर जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष एन.आर.मोहंती और दूसरे पदाधिकारियों ने जसील अहमद के झेलम स्थित रूम का ताला तोड़ दिया जो प्रशासन ने लगवाया था.
इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई. तब के जेएनयू के वाइस चांसलर पी.एन.श्रीवास्तव ने छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जिसका कोई जवाब नहीं दिया गया. इसके बाद छात्रों की बैठक हुई और करीब 100 के आस-पास छात्र वाइस चांसलर के दफ्तर में घुस गए. उनके घर के बिजली और फोन के कनेक्शन काट दिए गए. वाइस चांसलर और रेक्टर का घेराव किया गया.
आक्रोशित छात्रछात्र और आक्रोशित हुए और उन्होंने यूनिवर्सिटी के तीन अधिकारियों को करीब 50 घंटे तक कुर्सी पर ही बिठाए रखा. ऐसी अपमानजनक स्थिति में बैठे रहने के कारण अध्यापकों ने सिर्फ एक बार खाना खाया. डिहाइड्रेशन और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत के बावजूद जब डॉक्टर अध्यापकों की जांच करने आए तो उनकी बेइज्जती की गई. इसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त रुख्त अख्तियार किया. वाइस चांसलर ने छात्र संघ के पदाधिकारियों से जवाब मांगा. प्रशासन का कहना था कि या तो छात्र माफी मांगें या फिर किसी पूर्व हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के निर्देशन में जांच के लिए तैयार रहें. इसके बाद कैंपस में पुलिस लगा दी गई. तब दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर जगमोहन हुआ करते थे.
उन तीन अधिकारियों को छुड़ाने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. इस लाठी चार्ज में कई छात्र घायल हुए थे. 37 छात्र गिरफ्तार हुए. इसके बाद पूरे यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों ने जमकर तांडव किया. कई अध्यापकों के घर पर पथराव शुरू कर दिए गए. झेलम हॉस्टल के वॉर्ड हरजीत सिंह के घर पर भी पथराव किया गया. कई अध्यापकों के घर में आग लगा दी गई. इसके बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया. काफी छात्र जेल भेजे गए जिन्हें दिल्ली की तिहाड़ सहित अन्य जेलों में रखा गया. इस दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस बंद करा दिया था. कैंपस में सेक्शन 144 लगा दिया गया. सभी छात्रों को यूनिवर्सिटी कैंपस छोड़ने के आदेश दे दिए गए थे. विश्वविद्यालय के हालात सामान्य होने में करीब 2 महीने का वक्त लग गया था.

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