टेलीग्राफ का आविष्‍कार और लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर का जन्म हुआ था आज

27 नवंबर का इतिहास

इतिहास में आज के दिन यानि 7 मार्च के दिन की प्रमुख घटनाएं घटी जैसे अलेक्‍जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीग्राफ का आविष्‍कार किया था। अन्य प्रमुख घटनाएं घटी वह इस प्रकार है……

27 November History

  • पोप अर्बन द्वितीय ने 1095 में पहले क्रूसेड (धर्मयुद्ध) का उपदेश दिया।
  • सन 1795 में  पहले बांग्ला नाटक का मंचन हुआ।
  • पुर्तग़ाल के शाही परिवार ने 1807 में नेपोलियन की सेना के भय से लिस्बन छोड़ा।
  • पोलैंड साम्राज्य ने 1815 में संविधान अपनाया।
  • अल्फ्रेड नोबेल ने 1895 में नोबेल पुरस्कार की स्थापना की।
    अलेक्ज़ांडर ग्राहम बेल

    अलेक्जेंडर ग्राहम बेल (Alexander Graham Bell) (3 मार्च 1847 – 2 अगस्त 1922) को पूरी दुनिया आमतौर पर टेलीफोन के आविष्कारक के रूप में ही ज्यादा जानती है। बहुत कम लोग ही यह जानते हैं कि ग्राहम बेल ने न केवल टेलीफोन, बल्कि कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई और भी उपयोगी आविष्कार किए हैं। ऑप्टिकल-फाइबर सिस्टम, फोटोफोन, बेल और डेसिबॅल यूनिट, मेटल-डिटेक्टर आदि के आविष्कार का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। ये सभी ऐसी तकनीक पर आधारित हैं, जिसके बिना संचार-क्रंति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।म नहीं होती, लेकिन ग्राहम बेल ने अपंगता को अभिशाप नहीं बनने दिया। दरअसल, ग्राहम बेल की मां बधिर थीं। मां के सुनने में असमर्थता से ग्राहम बेल काफी दुखी और निराश रहते थे, लेकिन अपनी निराशा को उन्होंने कभी अपनी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी निराशा को एक सकारात्मक मोड देना ही बेहतर समझा। यही कारण था कि वे ध्वनि विज्ञान की मदद से न सुन पाने में असमर्थ लोगों के लिए ऐसा यंत्र बनाने में कामयाब हुए, जो आज भी बधिर लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

  • बधिरों से खास लगाव

    अगर यह कहें कि ग्राहम बेल ने अपना पूरा जीवन बधिर लोगों के लिए कार्य करने में लगा दिया, तो शायद गलत नहीं होगा। उनकी मां तो बधिर थीं हीं, ग्राहम बेल की पत्नी और उनका एक खास दोस्त भी सुनने में असमर्थ था। चूंकि उन्होंने शुरू से ही ऐसे लोगों की तकलीफ को काफी करीब से महसूस किया था, इसलिए उनके जीवन की बेहतरी के लिए और क्या किया जाना चाहिए, इसे वे बेहतर ढंग से समझ सकते थे। हो सकता है कि शायद अपने जीवन की इन्हीं खास परिस्थितियों की वजह से ग्राहम बेल टेलीफोन के आविष्कार में सफल हो पाए हों।

    आविष्कारों के जनक

    ग्राहम बेल बचपन से ही ध्वनि विज्ञान में गहरी दिलचस्पी रखते थे, इसलिए लगभग 23 साल की उम्र में ही उन्होंने एक ऐसा पियानो बनाया, जिसकी मधुर आवाज काफी दूर तक सुनी जा सकती थी। कुछ समय तक वे स्पीच टेक्नोलॉजी विषय के टीचर भी रहे थे। इस दौरान भी उन्होंने अपना प्रयास जारी रखा और एक ऐसे यंत्र को बनाने में सफल हुए, जो न केवल म्यूजिकॅल नोट्स को भेजने में सक्षम था, बल्कि आर्टिकुलेट स्पीच भी दे सकता था। यही टेलीफोन का सबसे पुराना मॉडल था।

    शिक्षा

    एक छोटे बच्चे के रूप में, बेल, अपने भाइयों की तरह, अपने पिता से घर पर अपने प्रारंभिक स्कूली शिक्षा प्राप्त की। एक कम उम्र में, हालांकि, उन्होंने कहा कि वह केवल पहले चार रूपों को पूरा करने, स्कूल 15 साल की उम्र में छोड़ दिया है जो रॉयल हाई स्कूल, एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड, में नामांकित किया गया था।  उनके स्कूल रिकॉर्ड, न सुलझा था अनुपस्थिति और भावशून्य ग्रेड द्वारा चिह्नित। वह अपने मांग की पिता की निराशा करने के लिए, उदासीनता के साथ स्कूल के अन्य विषयों का इलाज किया है, जबकि उनका मुख्य ब्याज।, विज्ञान, विशेष रूप से जीव विज्ञान में बने  स्कूल छोड़ने पर, बेल अपने दादा, अलेक्जेंडर बेल के साथ रहने के लिए लंदन की यात्रा की। लंबे समय तक गंभीर चर्चा और अध्ययन में खर्च के साथ वह अपने दादा के साथ बिताए वर्ष के दौरान सीखने की एक प्रेम पैदा हुआ था। बड़े बेल अपने युवा छात्र, विशेषताओं उनके छात्र एक शिक्षक खुद बनने की जरूरत है कि स्पष्ट रूप से और विश्वास के साथ बात करने के लिए सीखना है करने के लिए काफी प्रयास ले लिया।  16 साल की उम्र में, बेल एक “स्टूडेंट-टीचर ‘के रूप में एक स्थान सुरक्षित एल्गिन में वेस्टन हाउस अकादमी, मोरे, स्कॉटलैंड में भाषण और संगीत की। वह लैटिन और ग्रीक में एक छात्र के रूप में नामांकित किया गया था, वह बोर्ड के लिए वापसी और सत्र पाउंड प्रति 10 में कक्षाएं खुद को निर्देश दिए  अगले वर्ष, वह एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में भाग लिया। पिछले वर्ष वहां दाखिला लिया था जो उनके बड़े भाई मेलविल में शामिल होने। वह अपने परिवार के साथ कनाडा के लिए रवाना होने से पहले 1868 में, लंबे समय तक नहीं, aleck अपनी मैट्रिक परीक्षा पूरी की और लंदन विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए स्वीकार कर लिया गया।

  • अल्बानिया ने 1912 में राष्ट्रीय ध्वज अपनाया।
  • पोलैंड और तत्कालीन सोवियत संघ ने 1932 में अनाक्रमण समझौते पर हस्ताक्षर किया।
  • पेरिस में पुलिस ने 1947 में कम्युनिस्ट समाचार-पत्र के कार्यालय पर कब्जा कर लिया।
  • जबलपुर के निवासियों ने 1949 में चंदा इकट्ठा करके नगरपालिका प्रांगण में सुभद्रा कुमारी चौहान जी की आदमकद प्रतिमा लगवाई जिसका अनावरण कवयित्री और उनकी बचपन की सहेली महादेवी वर्मा ने किया।
  • अमरीका के विख्यात ड्रामा लेखक पूजीन ओ नील का 1953 में की आयु में निधन हुआ।
  • उरुग्वे ने 1966 में संविधान अपनाया।
  • फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने 1967 में फिर दोहराया कि वह ब्रिटेन की सामूहिक बाजार की कोशिशों का विरोध करेंगे.
  • गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के सह-संस्थापक रॉस मैक्विर्टर की 1975 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
  • मिर वेनेजुएला जौकेलीन एग्वीलेरा मार्कानो ‘मिस वर्ल्ड’ 1995 चुनी गईं।
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अध्यक्ष जुआन सोमाविया 2004 में भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे।
  • पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने 2007 में अपने सैनिक साथियों से विदाई ली।
  • छठा वेतन आयोग देने वाला उत्तर प्रदेश 2008 में देश का पहला राज्य बना।

27 नवंबर को जन्मे व्यक्ति

  • जर्मनी के विख्यात इतिहासकार और अध्ययनकर्ता थियोडर मोमसेन का 1817 में जन्म हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार एवं पुरातत्त्व के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान काशी प्रसाद जायसवाल का 1881 में जन्म हुआ।
  • प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर गणेश वासुदेव मावलंकरका 1888 में जन्म हुआ। गणेश वासुदेव मावलंकर (अंग्रेज़ीGanesh Vasudev Mavalankar, जन्म: 27 नवम्बर1888; मृत्यु: 27 फ़रवरी1956) प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और भारत की स्वाधीनता के पश्चात लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष बने थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई संसदीय परम्पराएँ स्थापित की थीं। उन्हें ‘दादा साहेब’ के नाम से भी जाना जाता है। गणेश वासुदेव मावलंकर ने एक अधिवक्ता के रूप में अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया था। उन्होंने कई ग्रंथों की भी रचना की। आप कई भाषाओं के जानकार थे।

    गणेश वासुदेव मावलंकर का जन्म 27 नवम्बर, 1888 ई. में बड़ोदरा में हुआ था। उनके पूर्वज महाराष्ट्र में रत्नागिरि के निवासी थे। मावलंकर अपनी उच्च शिक्षा के लिए 1902 ई. में अहमदाबाद आ गये थे। उन्होंने अपनी बी.ए. की परीक्षा ‘गुजरात कॉलेज’ से उत्तीर्ण की थी और क़ानून की डिग्री ‘मुंबई यूनिवर्सिटी‘ से प्राप्त की। अपनी शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने अहमदाबाद से अपनी वकालत प्रारम्भ की और साथ ही सार्वजनिक कार्यों में भी भाग लेने लगे। शीघ्र ही वे सरदार वल्लभ भाई पटेल और गांधीजी के प्रभाव में आ गए। उन्होंने खेड़ा सत्याग्रह में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था।

    वासुदेव मावलंकर ने अपना जीवन एक वकील के रूप में प्रारंभ किया। 1921 में वे असहयोग आंदोलन में सम्मिलित हुए। उन्होंने वकालत छोड़ दी तथा ‘गुजरात विद्यापीठ’ में एक अवैतनिक प्राध्यापक के रूप में नौकरी करने लगे। 1921 की अहमदाबाद कांग्रेस की स्वागत-समिति के वे सचिव थे। ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी’ के भी वे सचिव रहे थे। ‘नमक सत्याग्रह‘ में अपनी भूमिका के लिए उन्हें कारावास जाना पड़ा था। वह सविनय अवज्ञा आंदोलनव्यक्तिगत सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी अनेक बार जेल गए तथा जेल में दुर्दम्य अपराधियों को सुधारने का कार्य किया। वे अहमदाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे। 1937 में आप बम्बई व्यवस्थापिका परिषद के सदस्य चुने गए तथा इसके अध्यक्ष भी बने। 1946 में गणेश वासुदेव मावलंकर केंद्रीय व्यवस्थापिका के सदस्य चुने गए। पंढरपुर के प्रसिद्ध मंदिर में हरिजनों के प्रवेश के लिए हुए सत्याग्रह के नेता मावलंकर ही थे। खादी आदि रचनात्मक कार्यों में इनका निरंतर सहयोग रहा।

    लोकसभा अध्यक्ष

    वासुदेव मावलंकर 1937 ई. में मुंबई विधान सभा के सदस्य और उसके अध्यक्ष चुने गए। 1945 ई. तक वे इस पद पर बने रहे। उसके बाद उन्हें केन्द्रीय असेम्बली का अध्यक्ष बना दिया गया। स्वतंत्रता के बाद 1947 ई. में उन्हें सर्वसम्मति से लोकसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) चुना गया। 1952 ई. में पहले सार्वजनिक चुनाव के बाद उन्हें पुनः अध्यक्ष का आसन मिला। अपनी अध्यक्षता की इस दीर्घ अवधि में मावलंकर ने सदन के संचालन में नए मानदंडों की स्थापना की।

    ग्रन्थ रचना

    मावलंकर ने साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए अहमदाबाद में आगे बढ़कर भाग लिया। वे संविधान सभा के प्रमुख सदस्य थे। ‘कस्तूरबा स्मारक निधि’ और ‘गांधी स्मारक निधि’ के अध्यक्ष के रूप में भी इनकी सेवाएँ स्मरणीय हैं। उन्होंने मराठीगुजराती और अंग्रेज़ी भाषा में अनेक ग्रन्थ भी लिखे हैं।

    निधन

    वासुदेव मावलंकर के विचारों पर श्रीमद्भागवदगीता का बड़ा प्रभाव था। भारत की इस महान् विभूति का 27 फ़रवरी1956 ई. को निधन हो गया।

  • प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन का 1907 में जन्म हुआ।
  • मार्शल आर्ट के महानायक ब्रुस ली का 1940 में जन्म हुआ।
  •  हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का 1952 में जन्म हुआ।
  • भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना का का 1986 में जन्म हुआ।

27 नवंबर को हुए निधन

  • मराठी उपन्यासकार, आलोचक तथा पत्रकार गजानन त्र्यंबक माडखोलकर का निधन 1976 में निधन हुआ।
  • भारत की प्रख्यात समाज सुधारक लक्ष्मीबाई केलकर का निधन 1978 में निधन हुआ।
  • प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि शिवमंगल सिंह सुमन का निधन 2002 में निधन हुआ।
  • विश्वनाथ प्रताप सिंह, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री का निधन 2008 में निधन हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध सारंगी वादक और शास्त्रीय गायक सुल्तान ख़ान का निधन 2011 में निधन हुआ।

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