300 फोन बाद बीफ फेस्टिवल रद्द,नाम बदल किया था ‘बीप फेस्टिवल’

प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ने धमकियों के बाद इसका नाम ‘बीप फेस्टिवल’ किया था
  • यह फेस्टिवल 23 जून को कोलकाता के एक होटल में कराया जाना था

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 23 जून को होने वाले बीफ फेस्टिवल को रद्द कर दिया गया है। इसके आयोजकों को अब तक 300 धमकीभरे फोन और फेसबुक पर सैकड़ों मैजेस आ चुके हैं। आयोजकों ने धमकियों के बाद बीफ शब्द हटाकर इसका नाम भी ‘कोलकाता बीप फेस्टिवल’ कर दिया था। इस फेस्टिवल का आयोजन 23 जून को मध्य कोलकाता के सुद्दर स्ट्रीट में किया जाना था।फेस्टिवल का आयोजन करने वाली कंपनी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘हम डर है क्योंकि हमें हर तरफ से धमकियां मिल रही हैं। चीजें अब हमारे नियंत्रण में नहीं हैं। इन सभी कारणों की वजह से कोलकाता बीप फेस्टिवल को रद्द किया गया है। हमारी टीम में से एक सदस्य को 300 से ज्यादा टेलीफोन कॉल मिले। इनमें से अधिकतर हमारे समर्थन में थे लेकिन इनमें से कई में सीधे-सीधे धमकी दी गई थी।’

आयोजन करने वाली कंपनी के एक सदस्य ने  बताया, ‘मुझे लगातार फोन आ रहे हैं जिस वजह से मुझे अपने सोशल मीडिया अकाउंट को भी निष्क्रिय करना पड़ा। मुझे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य जगहों से कॉल आ रहे थे। घटना का राजनीति या धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।’ एक फेसबुक यूजर ने लिखा, ‘मैं एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हूं … मेरी खाने की आदत ऐसा कहती है … मैंने कई बार पोर्क और बीफ एक साथ खाया था … सिर्फ धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिए।’

इस फेस्टिवल का आयोजन करने वाली टीम के एक सदस्य अर्जुन कर के फेसबुक पेज पर मौजूद पर एक यूजर ने लिखा है, ‘जल्‍द से जल्‍द बीफ फेस्टिवल का आयोजन कैंसल कर दो वरना इस पेज पर मौजूद हर कोई इसकी शिकायत कर देगा।’ बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीफ बेचने और खाने पर कोई पाबंदी नहीं है।

कंपनी को टीम की सुरक्षा की चिंता

  1. फेस्टिल को कोलकाता की एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी करा रही थी। कंपनी ने फेसबुक पोस्ट में कहा है कि शुक्रवार को अर्जुन को 300 से ज्यादा फोन आए। कुछ लोगों ने फेस्टिवल का समर्थन भी किया। हमें अपनी टीम की सुरक्षा की चिंता है। हमें डर है कि उनके साथ कुछ भी गलत हो सकता है। अब हालात हमारे नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। इसलिए फेस्टिवल को रद्द करना ही सही है।
  2. कंपनी ने कहा कि राजनीतिक तनाव के हालात न बनें, इसके लिए हमने चुनाव के बाद ही फेस्टिवल कराने का निर्णय लिया था। अगर यह राजनीतिक तनाव है तो हम चाहते हैं कि इसे नहीं किया जाए, क्योंकि हम चाहते हैं फेस्टिवल शांतिपूर्ण तरीके से हो और सभी लोग इसमें शामिल हो सकें।लोग इस फेस्टिवल के आयोजन के पीछे राजनीतिक साजिश भी बता रहे हैं।

    इसके अलावा इस बार यह आयोजन किसी बड़ी जगह पर किया जाएगा। बताया जा रहा है कि पहले जहां यह फेस्टिवल होता था, वहां स्‍थान की थोड़ी समस्‍या थी जिसकी वजह से ज्‍यादा लोग कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाते थे। इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाली इवेंट मैनेजमेंट फर्म के अर्जुन कर के दिमाग में आइडिया आया कि क्‍यों ना एकदिवसीय ऐसा कोई फेस्टिवल हो जहां खाने के शौकीन लोगों को बीफ, पोर्क (सुअर का मांस) और ऐसी फिश डिश परोसा जाए जो उन्‍हें आसानी से ना उपलब्‍ध होती हो। पहले बीफ फेस्टिवल दक्षिण कोलकाता में प्रिया सिनेमा बिल्डिंग में मौजूद एक रेस्ट्रॉन्ट में आयोजित किया जाता था। à¤¬à¥€à¤« फेस्टिवल के लिए इमेज परिणाम

    परोसे जाएंगे बीफ बैक रिब्‍स, पास्‍ता और बर्गर्स 
    अर्जुन कर बताते हैं, ‘ज्‍यादातर बंगाली लोगों की तरह मैं भी खाने का बहुत शौकीन हूं। अपने दोस्‍तों के साथ व्‍यंजनों की चर्चा करने के दौरान मेरे दिमाग में विचार आया कि क्‍यों न कोलकाता के लोगों को भी इनका स्‍वाद चखाया जाए। हाल फिलहाल मिली धमकियों के मद्देनजर मैंने इस कार्यक्रम का नाम अब कोलकाता मीट फेस्टिवल कर दिया है पर मैन्‍यू में कोई परिर्वतन नहीं है। मेहमानों को बीफ बैक रिब्‍स, बीफ बॉल्‍गनीज पास्‍ता और बर्गर्स परोसे जाएंगे।’ à¤¬à¥€à¤« फेस्टिवल के लिए इमेज परिणाम

    सोशल मीडिया पर मिल रहीं धमकियां 
    दूसरी ओर, विभिन्‍न सोशल मीडिया प्‍लैटफार्म्‍स पर अर्जुन कर को धमकियां मिल रही हैं कि वह तत्‍काल बीफ फेस्टिवल के आयोजन को रद्द कर दें। अर्जुन कर के फेसबुक पेज पर मौजूद पर एक यूजर ने लिखा है, ‘जल्‍द से जल्‍द बीफ फेस्टिवल का आयोजन कैंसल कर दो वरना इस पेज पर मौजूद हर कोई इसकी शिकायत कर देगा।’ à¤¬à¥€à¤« फेस्टिवल के लिए इमेज परिणाम

    बंगाल में बीफ बेचना गैरकानूनी नहीं 
    बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीफ बेचना और खाना गैरकानूनी नहीं है। कोलकाता के कई रेस्ट्रॉन्ट के मेन्‍यू में बीफ मौजूद है। अर्जुन कर कहते हैं कि इस फेस्टिवल का मकसद सिर्फ खाने के शौकीन लोगों को तरह-तरह के व्‍यंजन उपलब्‍ध कराना है। इसके पीछे कोई राजनीतिक सोच नहीं है। मैं फेस्टिवल का नाम बदलने का भी पक्षधर नहीं हूं पर अपने मेहमानों की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए मैं ऐसा कर रहा हूं।

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