एक दुर्घटना पूरे परिवार को उजाड़ देती है। कामकाजी व्यक्ति की मौत पूरे परिवार को चौराहे पर लाकर खड़ा कर देती है। ऐसे तमाम मामले सामने हैं, लेकिन फिर भी लोग सुधरने को तैयार नहीं हैं। ये बात भी सच है कि बीमारियों और रंजिश से ज्यादा क्षति सड़क दुर्घटनाएं  पहुंचा रही हैं। देश में सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक संख्या औसतन छह लाख है और मौतें दो लाख के आसपास हैं। यमुना एक्सप्रेस पर रोज पाच दुर्घटनाएं हो रही हैं। हर दूसरे दिन एक मौत व हर रोज एक घायल हो रहा है। यमुना एक्सप्रेस वे पर विश्वस्तरीय सुविधाएं और हाईटेक सिस्टम है। इसके बाद भी इस मार्ग पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। इनमें से बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं के कारण खुद वाहन चालक ही हैं। कोई ओवर स्पीड कर झपकी लेता है तो कई कमजोर टायर वाली गाड़ी से फर्राटा भरता है। चालकों की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।

यमुना एक्सप्रेस वे के 165 किमी लंबे सफर में पिछले वर्ष में हुए आकड़े डरावने हैं। हर वर्ष होने वाले दुर्घटनाओं में से करीब 23 फीसद दुर्घटनाएं ओवरस्पीड में झपकी और 12 फीसद दुर्घटनाएं टायर फटने के कारण होती हैं। इनके लिए सीधे तौर पर खुद हम जिम्मेदार हैं। एक्सप्रेस वे पर चढ़ते ही गाड़ी टॉप गियर में आ जाती है। स्पीडोमीटर की सुई नीचे नहीं उतरती। ऐसे में रास्ते में ब्रेक लेने की जरूरत भी नहीं समझते। लगातार दुर्घटनाएं  हो रही हैं। इसके बाद भी हम न गति सीमा का ध्यान रखते हैं और न ही गाड़ी के रखरखाव का। जबकि एक्सप्रेस वे पर सुरक्षित सफर करने को सावधानी ही एकमात्र विकल्प है।

ये बरतें सावधानिया

– एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने से पहले टायर और उनके एयर प्रेशर की जाच करा लें। कई पेट्रोल पंप पर नाइट्रोजन भरने की व्यवस्था है। इसकी निर्धारित मात्रा टायर में भरवा लें। इससे टायर फटने की संभावना कम होती है।

– 165 किमी के सफर में कम से कम तीन स्थानों पर पाच-पाच मिनट का ब्रेक लें।

– नींद आने पर गाड़ी न चलाएं। किसी उचित स्थान पर रोककर आराम कर लें।

इन सुधारों की जरूरत

– ओवरस्पीड के चालान के लिए यातायात पुलिस में नोडल अधिकारी नामित किया जाए।

– यमुना एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए। इसमें दुर्घटना के प्रति उन्हें सचेत किया जाए।

– घिसे हुए टायरों वाले वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी जाए।

– सभी ओवर स्पीड वाहनों का स्थल पर ही ई चालान हो।

– दुर्घटनाओं के कारण व दुर्घटनाओं पर वार्षिक रिपोर्ट जारी हो और प्रत्येक दुर्घटना की तकनीकी समीक्षा की जाए। गति सीमा के हिसाब से चलें लेन में

एक्सप्रेस-वे पर गति सीमा के हिसाब से लेन हैं। इसमें डिवाइडर की तरफ की पहली लेन ओवरटेक करने वाले वाहनों के लिए है। इसके बराबर वाली दूसरी लेन कार के लिए और तीसरी लेन ट्रक या बस के लिए है। जबकि चौथी लेन धीमी गति से वाहनों के चलने को बनाई गई है। दुर्घटनाओं के आकड़े

वर्ष,             ओवरस्पीड और झपकी,                    टायर फटने से,                                      कुल दुर्घटनाएं

2012,               75,                                              64,                                                             280

2013,              239,                                           118,                                                             896

2014,               208,                                          71,                                                             771

2015,                233,                                        120,                                                             919

2016,                233,                                         151,                                                             1219

2017,                156,                                          60,                                                              763

2018,               160,                                          150,                                                              815

छह माह गई 94 जान

यमुना एक्सप्रेस-वे पर पिछले छह माह में हादसों में 94 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 120 लोग घायल हो गए।

एक्सप्रेस-वे के तीन ब्लैक स्पॉट

यमुना एक्सप्रेस-वे पर तीन ब्लैक स्पॉट्स बताए गए हैं। यह ग्रेटर नोएडा से आने पर यमुना एक्सप्रेस-वे पर 8.5 किमी, 15 किमी व 61-62 किमी पर है। वहा हादसों को कम करने के लिए रंबल स्ट्रिप लगाई गई हैं। यमुना एक्सप्रेस वे पर संरक्षा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। अगर लोग खुद सावधानी से चलेंगे तो निश्चित तौर पर सफर सुरक्षित होगा।

मेजर मनीष, इंचार्ज, कॉरीडोर कंट्रोल यमुना एक्सप्रेस-वे