12-13 दिन में 3 गुना बढ़ी कैश की निकासी, 500 के नोटों की छपाई 5 गुना करने की तैयारी

नई दिल्ली : देश के विभिन्न हिस्सों से कैश की कमी की लगातार आ रही खबरों से हरकत में आई सरकार की तरफ से आर्थिक मामलों के सचिव एस. सी. गर्ग ने आज बताया कि पिछले 15 दिनों में सामान्य से 3 गुना ज्यादा नोटों की निकासी हुई है। उन्होंने बताया कि 500 के नोटों की छपाई पहले के मुकाबले तेजी से हो रही है और आने वाले कुछ दिनों में इसे 5 गुना करने की तैयारी है। आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा, ‘हम हर दिन 500 करोड़ रुपये के मूल्य के 500 के नोटों की छपाई करते हैं। हमने नोटों की छपाई को 5 गुना करने के लिए कदम उठाया है। अगले कुछ दिनों में हम हर दिन 2,500 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति करने लगेंगे। इस तरह एक महीने में हम 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति करने लगेंगे।’

गर्ग ने कहा कि जहां आम तौर पर प्रति माह 20 हजार करोड़ करंसी की खपत होती है, वहीं इस महीने 12-13 दिनों में ही 45 हजार करोड़ नोट निकाले जा चुके हैं। हालांकि, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश में नोटों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी करीब 2 लाख करोड़ रुपये का भंडार है और पिछले 10-15 दिनों से 500 रुपये के नोटों की छपाई की रफ्तार भी बढ़ा दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल भी नोटों की कमी को 3 दिन में दूर करने का भरोसा दिला चुके हैं।

बेतहाशा बढ़ी मांगः गर्ग
कुछ राज्यों में एटीएम खाली होने की बात पर गर्ग ने कहा कि देशभर में हर महीने 20 हजार करोड़ रुपये के नोटों की सामान्य मांग रहती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कुछ इलाकों में नोटों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘इस महीने के 12-13 दिनों में ही 45 हजार करोड़ करंसी की खपत हो चुकी है।’ नोटों की अचानक बढ़ी मांग के कारणों का जिक्र करते हुए गर्ग ने कहा कि लोग अफवाह का शिकार होकर जल्दबाजी में पैसे निकाल रहे हैं कि आनेवाले दिनों में नोटों की कमी हो जाएगी। गर्ग ने कहा, ‘हम लोगों को भरोसा दिलाते हैं कि नोटों की कोई कमी नहीं है। नोटबंदी के वक्त 17.50 लाख करोड़ मूल्य के नोट सर्कुलेशन में थे, लेकिन अभी 18 लाख करोड़ के नोट हैं, यानी जरूरत से ज्यादा।’

नोटों की छपाई 5 गुना करने की तैयारी
गर्ग ने कहा कि 10-15 दिन पहले तक हम हर दिन 500 रुपये के 500 करोड़ रुपये मूल्य के नोट प्रिंट कर रहे थे। लेकिन हमने इसकी प्रिंटिंग बढ़ा दी है और अगले कुछ दिनों में 500 रुपये के रोजाना 2.5 हजार करोड़ रुपये मूल्य के नोट छपने लगेंगे यानी, महीने में 70 से 75 हजार करोड़ रुपये मूल्य के सिर्फ 500 रुपये के नोट ही छापे जाएंगे। इसके अलावा 200 रुपये के नोटों की छपाई की रफ्तार भी अच्छी है। वहीं, 100 रुपये, 50 रुपये, 20 रुपये के नोट हमारे पास स्टॉक में है और थोड़ी-थोड़ी छपाई भी हो रही है। इसलिए, नोटों की मांग कितनी भी ज्यादा हो, नोटों की कमी नहीं होने दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि अब 2000 रुपये के नोट नहीं छापे जा रहे हैं।

स्थानीय प्रबंधन की समस्याः गर्ग
गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, ‘देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।’

क्यों कम हो रहे 2000 रुपये को नोट?
एक सवाल के जवाब में गर्ग ने माना कि 2000 रुपये के नोटों की कमी आई है, लेकिन फिर से काला धन जमा होने की आशंका खारिज कर दी। उन्होंने कहा, ‘अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ रुपये मूल्य के नोट हैं। यह संख्या पर्याप्त से ज्यादा है। हमें भी पता है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में घटे हैं। इसकी कोई जांच तो नहीं कराई है। लेकिन, अनुमान यह है कि बड़े नोट जमा करने में आसानी होती है। इसलिए लोग बचत की रकम 2000 रुपये के नोटों में ही जमा कर रहे हैं।’

ATM और बैंकों में कैश की कमी के क्या हैं बड़े कारण

देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत की खबरें आने के बाद सरकार हरकत में आ चुकी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली, आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग और एसबीआई चेयरमैन रजनीश सिन्हा ने कैश की कमी के कई कारण गिनाए। आइए जानते हैं कि क्यों ATM सूखे हैं और बैंक खाली…

इस बिल से भी उड़ी अफवाह

इस बिल से भी उड़ी अफवाह

प्रस्तावित फाइनैंस रेजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (FRDI) बिल, 2017 की वजह से अफवाह उड़ी कि इस बिल के कानून का रूप ले लेने पर बैंकों में जमा किया पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकार की ओर से इसका खंडन करने के बावजूद लोग एटीएम से पैसे निकालने दौड़ पड़े।

बैंक फर्जीवाड़े से डर का माहौल

बैंक फर्जीवाड़े से डर का माहौल
 पंजाब नैशनल बैंक की मुंबई शाखा से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों के लिए अवैध तरीके से जारी लेटर्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoU) की जानकारी सामने आने एवं कई अन्य कंपनियों के लोन वापस नहीं किए जाने की खबरों से भी लोगों के मन में डर पैदा हुआ कि बैंकिंग सिस्टम फेल हो रहा है। बैंकों से भरोसा उठने की वजह से लोग कैश डिपॉजिट करने से बचने लगे और पहले से जमा रकम भी निकालने लगे। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसी डर से लोग पैसे निकालने लगे।

लोग निकाल नहीं रहे 2000 रुपये के नोटः सरकार

लोग निकाल नहीं रहे 2000 रुपये के नोटः सरकार

एक सवाल के जवाब में आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने माना कि 2000 रुपये के नोटों की कमी आई है, लेकिन फिर से काला धन जमा होने की आशंका खारिज कर दी। उन्होंने कहा, ‘अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ नोट हैं। यह संख्या पर्याप्त से ज्यादा है। हमें भी पता है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में घटे हैं। इसकी कोई जांच तो नहीं कराई है। लेकिन, अनुमान यह है कि बड़े नोट जमा करने में आसानी होती है। इसलिए लोग बचत की रकम 2000 रुपये के नोटों में ही जमा कर रहे हैं।’

बैंक डिपॉजिट में कमी

बैंक डिपॉजिट में कमी

एटीएम खाली होने का एक कारण बैंक जमा में वृद्धि दर में गिरावट भी है। वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक डिपॉजिट ग्रोथ घटकर 6.7% पर आ गई जो साल 2016-17 के दौरान 15.3% रही थी। इसके उलट बैंकों से पैसे ज्यादा निकले। वित्त वर्ष 2016-17 में बैंक क्रेडिट में 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई थी जो 2017-18 में बढ़कर 10.3 प्रतिशत रही।

किसानों को भुगतान भी एक कारणः SBI चेयरमैन

किसानों को भुगतान भी एक कारणः SBI चेयरमैन

 एसबीआई के चेयरमैन रजनीश सिन्हा ने कहा है कि अचानक नोटों की कमी का कारण किसानों को भुगतान की रकम बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। एक विभाग इस तरह के मामलों पर नजर रखता है।

चार गुना बढ़ी नोटों की निकासीः सरकार

चार गुना बढ़ी नोटों की निकासीः सरकार

गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, ‘देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।’

स्थानीय प्रबंधन में खामी

गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, ‘देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।’

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