देहरादून, । वर्ष 2010 से अटके हरिद्वार-दून राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य को पूरा करने के लिए दोबारा टेंडर से चयनित कंपनियों ने मोर्चा संभाल लिया है। काम शुरू करने के लिए कंपनियों ने अपने स्थानीय कार्यालय खोल दिए हैं। साथ ही मशीनरी स्थापित करने के लिए राजमार्ग के इर्द-गिर्द स्थानों की तलाश भी शुरू की जा चुकी है।

राजमार्ग के चौड़ीकरण में हीलाहवाली बरतने पर एरा इंफ्रा को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद अवशेष काम को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सेतु निगम व एटलस कंपनी का अक्टूबर माह में चयन कर लिया गया था। इसके बाद कुछ समय उन बैंकों के चलते मामला लटका रहा, जिनसे एरा इंफ्रा ने कर्ज लिया था। इस पर कार्यदायी संस्था राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने तय किया था कि एरा इंफ्रा ने करीब 300 करोड़ रुपये का जो काम किया है, उसका भुगतान बैंकों को कर दिया जाएगा। इस सहमति के बाद बैंकों ने भी हामी भर ली और प्राधिकरण मुख्यालय से भी अनुमति पत्र प्राप्त हो गया था। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सेतु निगम ने हरिद्वार में कार्यालय शुरू कर दिया है, जबकि एटलस कंपनी ने भानियावाला के पास फतहेपुर में कार्यालय स्थापित किया है।Image result for हरिद्वार-दून राजमार्ग चौड़ीकरण

मकर संक्रांति के बाद निकला मुहूर्त

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक प्रदीप गुसाईं ने बताया कि काम शुरू करने को दोनों कंपनियों के साथ अनुबंध किया जाना है। कंपनियों ने इसके लिए मकर संक्रांति के बाद मुहूर्त निकालने की बात कही है। शुभ मुहूर्त पर जब भी काम शुरू किया जाएगा, उसके एक साल के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा।

593 करोड़ के काम को बैंक गारंटी करानी होगी जमा

राजमार्ग चौड़ीकरण में अब 593 करोड़ रुपये का काम अवशेष है। इसके लिए दोनों कंपनी को कुल काम की 10 फीसद बैंक गारंटी जमा करानी होगी। उत्तर प्रदेश सेतु निगम को 350 करोड़ रुपये के काम के सापेक्ष 35 करोड़ और एटलस कंपनी को 243 करोड़ रुपये के सापेक्ष 24.3 करोड़ रुपये की गारंटी देनी है।Image result for हरिद्वार-दून राजमार्ग चौड़ीकरण

इस हिस्से पर इन्हें काम 

  • हरिद्वार से लालतप्पड़ के बीच का काम उत्तर प्रदेश सेतु निगम करेगा।
  • इससे आगे मोहकमपुर तक के काम की जिम्मेदारी एटलस कंपनी को दी गई है।

2.50 किलोमीटर घटेगी दूरी

वतर्मान में हरिद्वार से देहरादून के बीच की दूरी 39.025 किलोमीटर है, जबकि चौड़ीकरण के बाद यह दूर घटकर 36.52 किलोमीटर रह जाएगी। इसकी वजह यह है कि कई मोड़ समाप्त हो जाएंगे, साथ ही परियोजना में मेजर ब्रिज समेत बड़े स्तर के रेलवे अंडरब्रिज, एलीफैंट अंडरपास बनाए जाने हैं। जिनकी कुल संख्या पांच है।