स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर का निधन हुआ था आज

26 फरवरी का इतिहास

दोस्तों, हम हर बार सुनते हैं कि हमारा इतिहास बहुत पुराना हैं, लेकिन हमें हमारे देश और दुनिया के इतिहास की पूरी जानकारी नहीं इसलिए हम यहाँ हमारा एक छोटा सा प्रयास कर रहे हैं जो आपको पूरे देश और दुनिया की इतिहास की और आज के इतिहास की जानकारी मिल सके ताकि आपका ज्ञान और बढ़ सके। तो चलिए दोस्तों आज जानते हैं 26 फरवरी के इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारें मे,

26 February History

 चंद्रगुप्त प्रथम को 320 में पाटलिपुत्र का शासक बनाया गया।
  • आज ही के दिन सन 1832 में पोलैंड के संविधान को हटाया गया।
  • पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में पहला सैन्य विद्रोह।
  • असम शाही परिवार काे फिर से गद्दी दिलाने के प्रयासों के कारण 1858 में पियाली बरूआ और दीवान मणिराम दत्ता काे फांसी पर चढाया गया।
  • अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने 1863 में अमेरिकी मुद्रा अधिनियम पर हस्ताक्षर किये।
  • जापान में सेना ने 1936 में तख्तापलट किया।
  • वर्धा के निकट अरवी में स्थित विक्रम अर्थ सेटेलाइट स्टेशन 1972 में भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरि ने देश को समर्पित किया।
  • गुजरात के अहमदाबाद में 1975 में देश का पहला पतंग संग्रहालय ‘शंकर केन्द्र’ स्थापित किया गया।
  • सद्दाम हुसैन ने कुवैत से अपने सैनिकों को 1991 में इराक़ी रेडियो पर वापसी की घोषणा की।
  • आज ही के दिन सन 1993 में न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर बम हमले में छह लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हो गए थे।
  • कॉपीराइट मुद्दे पर 1995 में चीन तथा सं.रा. अमेरिका के मध्य समझौता।
  • पांच ग्रैमी अवार्ड जीतकर रैप गायिका लॉरिन हिल ने 1999 में नया रिकार्ड बनाया।
  • आतंकवादी संगठन तालिबान ने 2001 में अफगानिस्तान के बामियान में बुद्ध की दो विशाल मूर्तियों को नष्ट कर दिया।
  • परमाणु परिशोधन पर 2006 में रूस और ईरान में समझौता।
  • अल्जीरिया के राष्ट्रपति ने अरब देशों की बदलती राजनीतिक स्थिति के कारण देश में 19 साल पहले लगाए गए आपातकाल को 2011 में आधिकारिक रूप से समाप्त किया।

26 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति 

  • फ्रेंच लेखक विक्टर ह्यूगो का 1802 में जन्म।
  • एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिज्ञ बेनेगल नरसिंह राव का 1887 में जन्म।
  • भारत के दसवें मुख्य न्यायाधीश कैलाश नाथ वांचू का 1903 में जन्म।
  • बांग्ला साहित्यकार लीला मजूमदार का 1908 में जन्म।
  • अमेरिकी अर्थशास्त्री विलियम बौमॉल का 1922 में जन्म।
  • ब्रिटिश अभिनेत्री मार्गरेट लीटन का 1922 में जन्म।
  • इसरायली प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन का 1928 में जन्म।
  • अमेरिका के महान गायक जॉनी कैश का 1932 में जन्म।
  • पत्रकार एवं साहित्यकार मृणाल पाण्डे का 1946 में जन्म।
  • महिला टेनिस खिलाड़ी ली ना का 1982 में जन्म।

26 फ़रवरी को हुए निधन 

  • सन 1712 में आज ही के दिन बहादुर दिल्ली का सातवाँ मुग़ल बादशाह शाह प्रथम का निधन।
  • सन 1886 में आज ही के दिन गुजराती भाषा के युग प्रवर्तक माने जाने वाले रचनाकार नर्मद का निधन।
  • सन 1887 में आज ही के दिन भारत की प्रथम महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी का निधन।
  • सन 1966 में आज ही के दिन स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर का निधन।विनायक दामोदर सावरकर  Savarkar3xt.jpg(जन्म: २८ मई १८८३ – मृत्यु: २६ फ़रवरी १९६६) भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्हें प्रायः स्वातंत्र्यवीर वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है। हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा (हिन्दुत्व) को विकसित करने का बहुत बडा श्रेय सावरकर को जाता है। वे न केवल स्वाधीनता-संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे। वे एक ऐसे इतिहासकार भी हैं जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढँग से लिपिबद्ध किया है। उन्होंने १८५७ के प्रथम स्वातंत्र्य समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास गदर नहीं, अपितु भारत के स्वातन्त्र्य का प्रथम संग्राम  द इण्डियन वार ऑफ इण्डिपेण्डेंस : १८५७  लिखकर ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था।वे एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार थे। उन्होंने परिवर्तित हिंदुओं के हिंदू धर्म को वापस लौटाने हेतु सतत प्रयास किये एवं आंदोलन चलाये। सावरकर ने भारत के एक सार के रूप में एक सामूहिक “हिंदू” पहचान बनाने के लिए हिंदुत्व का शब्द गढ़ा। उनके राजनीतिक दर्शन में उपयोगितावाद, तर्कवाद और सकारात्मकवाद, मानवतावाद और सार्वभौमिकता, व्यावहारिकता और यथार्थवाद के तत्व थे। सावरकर  नास्तिक और कट्टर तार्किक व्यक्ति थे जो सभी धर्मों में रूढ़िवादी विश्वासों का विरोध करते थे ।

    प्रारंभिक जीवन

    विनायक सावरकर का जन्म महाराष्ट्र (तत्कालीन नाम बम्बई) प्रान्त में नासिक के निकट भागुर गाँव में हुआ था। उनकी माता का नाम राधाबाई तथा पिता का नाम दामोदर पन्त सावरकर था। इनके दो भाई गणेश (बाबाराव) व नारायण दामोदर सावरकर तथा एक बहन नैनाबाई थीं। जब वे केवल नौ वर्ष के थे तभी हैजे की महामारी में उनकी माता का देहान्त हो गया। इसके सात वर्ष बाद सन् १८९९ में प्लेग की महामारी में उनके पिता  भी स्वर्ग सिधारे। इसके बाद विनायक के बड़े भाई गणेश ने परिवार के पालन-पोषण का कार्य सँभाला। दुःख और कठिनाई की इस घड़ी में गणेश के व्यक्तित्व का विनायक पर गहरा प्रभाव पड़ा। विनायक ने शिवाजी हाईस्कूल नासिक से १९०१ में मैट्रिक की परीक्षा पास की। बचपन से ही वे पढ़ाकू तो थे ही अपितु उन दिनों उन्होंने कुछ कविताएँ भी लिखी थीं। आर्थिक संकट के बावजूद बाबाराव ने विनायक की उच्च शिक्षा की इच्छा का समर्थन किया। इस अवधि में विनायक ने स्थानीय नवयुवकों को संगठित करके मित्र मेलों का आयोजन किया। शीघ्र ही इन नवयुवकों में राष्ट्रीयता की भावना के साथ क्रान्ति की ज्वाला जाग उठी।सन् १९०१ में रामचन्द्र त्रयम्बक चिपलूणकर की पुत्री यमुनाबाई के साथ उनका विवाह हुआ। उनके ससुर जी ने उनकी विश्वविद्यालय की शिक्षा का भार उठाया। १९०२ में मैट्रिक की पढाई पूरी करके उन्होने पुणे के फर्ग्युसन कालेज से बी०ए० किया।विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    लन्दन प्रवास

    १९०४ में उन्हॊंने अभिनव भारत नामक एक क्रान्तिकारी संगठन की स्थापना की। १९०५ में बंगाल के विभाजन के बाद उन्होने पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे में भी वे राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ओजस्वी भाषण देते थे। बाल गंगाधर तिलक के अनुमोदन पर १९०६ में उन्हें श्यामजी कृष्ण वर्मा छात्रवृत्ति मिली। इंडियन सोशियोलाजिस्ट और तलवार नामक पत्रिकाओं में उनके अनेक लेख प्रकाशित हुये, जो बाद में कलकत्ता के युगान्तर पत्र में भी छपे। सावरकर रूसी क्रान्तिकारियों से ज्यादा प्रभावित थे।१० मई, १९०७ को इन्होंने इंडिया हाउस, लन्दन में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्वर्ण जयन्ती मनाई। इस अवसर पर विनायक सावरकर ने अपने ओजस्वी भाषण में प्रमाणों सहित १८५७ के संग्राम को गदर नहीं, अपितु भारत के स्वातन्त्र्य का प्रथम संग्राम सिद्ध किया। जून, १९०८ में इनकी पुस्तक द इण्डियन वार ऑफ इण्डिपेण्डेंस : १८५७ तैयार हो गयी परन्त्तु इसके मुद्रण की समस्या आयी। इसके लिये लन्दन से लेकर पेरिस और जर्मनी तक प्रयास किये गये किन्तु वे सभी प्रयास असफल रहे। बाद में यह पुस्तक किसी प्रकार गुप्त रूप से हॉलैंड से प्रकाशित हुई और इसकी प्रतियाँ फ्रांस पहुँचायी गयीं। इस पुस्तक में सावरकर ने १८५७ के सिपाही विद्रोह को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतन्त्रता की पहली लड़ाई बताया। मई १९०९ में इन्होंने लन्दन से बार एट ला (वकालत) की परीक्षा उत्तीर्ण की, परन्तु उन्हें वहाँ वकालत करने की अनुमति नहीं मिली।विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    इण्डिया हाउस की गतिविधियां

    वीर सावरकर ने लंदन के Gray’s Inn law college में दाखिला लेने के बाद India House में रहना शुरू कर दिया था। इंडिया हाउस उस समय राजनितिक गतिविधियों का केंद्र था जिसे पंडित श्याम प्रसाद मुखर्जी चला रहे थे। सावरकर ने Free India Society का निर्माण किया जिससे वो अपने साथी भारतीय छात्रों को स्वतंत्रता के लिए लड़ने को प्रेरित करते थे। सावरकर ने 1857 की क्रांति पर आधारित किताबे पढी और “The History of the War of Indian Independence” विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणामनामक किताब लिखी। उन्होंने 1857 की क्रांति के बारे में गहन अध्ययन किया कि किस तरह अंग्रेजो को जड़ से उखाड़ा जा सकता है।

    लंदन और मार्सिले में गिरफ्तारी

    लन्दन में रहते हुये उनकी मुलाकात लाला हरदयाल से हुई जो उन दिनों इण्डिया हाउस  की देखरेख करते थे। १ जुलाई १९०९ को मदनलाल ढींगरा द्वारा विलियम हट कर्जन वायली को गोली मार दिये जाने के बाद उन्होंने लन्दन टाइम्स में एक लेख भी लिखा था। १३ मई १९१० को पैरिस से लन्दन पहुँचने पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया परन्तु ८ जुलाई १९१० को एस०एस० मोरिया नामक जहाज से भारत ले जाते हुए सीवर होल के रास्ते ये भाग निकले। २४ दिसम्बर १९१० को उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गयी। इसके बाद ३१ जनवरी १९११ को इन्हें दोबारा आजीवन कारावास दिया गया। इस प्रकार सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने क्रान्ति कार्यों के लिए दो-दो आजन्म कारावास की सजा दी, जो विश्व के इतिहास की पहली एवं अनोखी सजा थी। सावरकर के अनुसार –

    “मातृभूमि! तेरे चरणों में पहले ही मैं अपना मन अर्पित कर चुका हूँ। देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है, यह मानकर मैंने तेरी सेवा के माध्यम से भगवान की सेवा की।”

    आर्बिट्रेशन कोर्ट केस

    परीक्षण और सज़ा

    सावरकर ने अपने मित्रो को बम बनाना और गुरिल्ला पद्धति से युद्ध करने की कला सिखाई। 1909 में सावरकर के मित्र और अनुयायी मदन लाल धिंगरा ने एक सार्वजनिक बैठक में अंग्रेज अफसर कर्जन की हत्या कर दी। धींगरा के इस काम से भारत और ब्रिटेन में क्रांतिकारी गतिविधिया बढ़ गयी। सावरकर ने धींगरा को राजनीतिक और कानूनी सहयोग दिया, लेकिन बाद में अंग्रेज सरकार ने एक गुप्त और प्रतिबंधित परीक्षण कर धींगरा को मौत की सजा सुना दी, जिससे लन्दन में रहने वाले भारतीय छात्र भडक गये। सावरकर ने धींगरा को एक देशभक्त बताकर क्रांतिकारी विद्रोह को ओर उग्र कर दिया था। सावरकर की गतिविधियों को देखते हुए अंग्रेज सरकार ने हत्या की योजना में शामिल होने और पिस्तौले भारत भेजने के जुर्म में फंसा दिया, जिसके बाद सावरकर को गिरफ्तार कर लिया गया। अब सावरकर को आगे के अभियोग के लिए भारत ले जाने का विचार किया गया। जब सावरकर को भारत जाने की खबर पता चली तो सावरकर ने अपने मित्र को जहाज से फ्रांस के रुकते वक्त भाग जाने की योजना पत्र में लिखी। जहाज रुका और सावरकर खिड़की से निकलकरविनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणामसमुद्र के पानी में तैरते हुए भाग गए, लेकिन मित्र को आने में देर होने की वजह से उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। सावरकर की गिरफ्तारी का फ्रेंच सरकार ने ब्रिटिश सरकार का विरोध किया।

    सेलुलर जेल में

    पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल के सामने वीर सावरकर की प्रतिमा

    नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें ७ अप्रैल, १९११ को काला पानी की सजा पर सेलुलर जेल भेजा गया। उनके अनुसार यहां स्वतंत्रता सेनानियों को कड़ा परिश्रम करना पड़ता था। कैदियों को यहां नारियल छीलकर उसमें से तेल निकालना पड़ता था। साथ ही इन्हें यहां कोल्हू में बैल की तरह जुत कर सरसों व नारियल आदि का तेल निकालना होता था। इसके अलावा उन्हें जेल के साथ लगे व बाहर के जंगलों को साफ कर दलदली भूमी व पहाड़ी क्षेत्र को समतल भी करना होता था। रुकने पर उनको कड़ी सजा व बेंत व कोड़ों से पिटाई भी की जाती थीं। इतने पर भी उन्हें भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था।।सावरकर ४ जुलाई, १९११ से २१ मई, १९२१ तक पोर्ट ब्लेयर की जेल में रहे।

    दया याचिका

    1920 में वल्लभ भाई पटेल और बाल गंगाधर तिलक के कहने पर ब्रिटिश कानून ना तोड़ने और विद्रोह ना करने की शर्त पर उनकी रिहाई हो गई।

    स्वतन्त्रता संग्राम

    रत्नागिरी में प्रतिबंधित स्वतंत्रता

    १९२१ में मुक्त होने पर वे स्वदेश लौटे और फिर ३ साल जेल भोगी। जेल में उन्होंने हिंदुत्व पर शोध ग्रन्थ लिखा। इस बीच ७ जनवरी १९२५ को इनकी पुत्री, प्रभात का जन्म हुआ। मार्च, १९२५ में उनकी भॆंट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक, डॉ॰ हेडगेवार से हुई। १७ मार्च १९२८ को इनके बेटे विश्वास का जन्म हुआ। फरवरी, १९३१ में इनके प्रयासों से बम्बई में पतित पावन मन्दिर की स्थापना हुई, जो सभी हिन्दुओं के लिए समान रूप से खुला था। २५ फ़रवरी १९३१ को सावरकर ने बम्बई प्रेसीडेंसी में हुए अस्पृश्यता उन्मूलन सम्मेलन  की अध्यक्षता की।

    १९३७ में वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के कर्णावती (अहमदाबाद) में हुए १९वें सत्र के अध्यक्ष चुने गये, जिसके बाद वे पुनः सात वर्षों के लिये अध्यक्ष चुने गये। १५ अप्रैल १९३८ को उन्हें मराठी साहित्य सम्मेलनका अध्यक्ष चुना गया। १३ दिसम्बर १९३७ को नागपुर की एक जन-सभा में उन्होंने अलग पाकिस्तान के लिये चल रहे प्रयासों को असफल करने की प्रेरणा दी थी। २२ जून १९४१ को उनकी भेंट नेताजी सुभाष चंद्र बोस से हुई। ९ अक्टूबर १९४२ को भारत की स्वतन्त्रता के निवेदन सहित उन्होंने चर्चिल को तार भेज कर सूचित किया। सावरकर जीवन भर अखण्ड भारत के पक्ष में रहे। स्वतन्त्रता प्राप्ति के माध्यमों के बारे में गान्धी और सावरकर का एकदम अलग दृष्टिकोण था। १९४३ के बाद दादर, बम्बई में रहे। १६ मार्च १९४५ को इनके भ्राता बाबूराव का देहान्त हुआ। १९ अप्रैल १९४५ को उन्होंने अखिल भारतीय रजवाड़ा हिन्दू सभा सम्मेलनकी अध्यक्षता की। इसी वर्ष ८ मई को उनकी पुत्री प्रभात का विवाह सम्पन्न हुआ। अप्रैल १९४६ में बम्बई सरकार ने सावरकर के लिखे साहित्य पर से प्रतिबन्ध हटा लिया। १९४७ में इन्होने भारत विभाजन का विरोध किया। महात्मा रामचन्द्र वीर नामक (हिन्दू महासभा के नेता एवं सन्त) ने उनका समर्थन किया।विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    हिंदू राष्ट्रवाद

    वीर सावरकर 20वीं शताब्दी के सबसे बड़े हिन्दूवादी रहे। विनायक दामोदर सावरकर को बचपन से ही हिंदू शब्द से बेहद लगाव था। वीर सावरकर ने जीवन भर हिंदू हिन्दी और हिंदुस्तान के लिए ही काम किया। वीर सावरकर को 6 बार अखिल भारत हिंदू महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 1937 में उन्हें हिंदू महासभा का अध्यक्ष चुना गया, जिसके बाद 1938 में हिंदू महासभा को राजनीतिक दल घोषित कर दिया गया।

    हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय सावरकर को जाता है। उनकी इस विचारधारा के कारण आजादी के बाद की सरकारों ने उन्हें वह महत्त्व नहीं दिया जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

  • स्वातन्त्र्योत्तर जीवन

    मित्रो के साथ । खड़े हुए : शंकर किस्तैया, गोपाल गौड़से, मदनलाल पाहवा, दिगम्बर बड़गे

    बैठे हुए: नारायण आप्टे, वीर सावरकर, नाथूराम गोडसे, विष्णु रामकृष्ण करकरेविनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    १५ अगस्त १९४७ को उन्होंने सावरकर सदान्तो में भारतीय तिरंगा एवं भगवा, दो-दो ध्वजारोहण किये। इस अवसर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुझे स्वराज्य प्राप्ति की खुशी है, परन्तु वह खण्डित है, इसका दु:ख है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सीमायें नदी तथा पहाड़ों या सन्धि-पत्रों से निर्धारित नहीं होतीं, वे देश के नवयुवकों के शौर्य, धैर्य, त्याग एवं पराक्रम से निर्धारित होती हैं। ५ फ़रवरी १९४८ को महात्मा गांधी की हत्या के उपरान्त उन्हें प्रिवेन्टिव डिटेन्शन एक्ट धारा के अन्तर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। १९ अक्टूबर १९४९ को इनके अनुज नारायणराव का देहान्त हो गया। ४ अप्रैल १९५० को पाकिस्तानी प्रधान मंत्री लियाक़त अली ख़ान के दिल्ली आगमन की पूर्व संध्या पर उन्हें सावधानीवश बेलगाम जेल में रोक कर रखा गया। मई, १९५२ में पुणे की एक विशाल सभा में अभिनव भारत संगठन को उसके उद्देश्य (भारतीय स्वतन्त्रता प्राप्ति) पूर्ण होने पर भंग किया गया। १० नवम्बर १९५७ को नई दिल्ली में आयोजित हुए, १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के शाताब्दी समारोह में वे मुख्य वक्ता रहे। ८ अक्टूबर १९५९ को उन्हें पुणे विश्वविद्यालय ने डी०.लिट० की मानद उपाधि से अलंकृत किया। ८ नवम्बर १९६३ को इनकी पत्नी यमुनाबाई चल बसीं। सितम्बर, १९६५ से उन्हें तेज ज्वर ने आ घेरा, जिसके बाद इनका स्वास्थ्य गिरने लगा। १ फ़रवरी १९६६ को उन्होंने मृत्युपर्यन्त उपवास करने का निर्णय लिया। २६ फ़रवरी १९६६ को बम्बई में भारतीय समयानुसार प्रातः १० बजे उन्होंने पार्थिव शरीर छोड़कर परमधाम को प्रस्थान किया।विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    महात्मा गाँधी की हत्या में गिरफ्तार और निर्दोष सिद्ध

    सावरकर साहित्य

    वीर सावरकर ने १०,००० से अधिक पन्ने मराठी भाषा में तथा १५०० से अधिक पन्ने अंग्रेजी में लिखा है।विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस – १८५७’ सावरकर द्वारा लिखित पुस्तक है, जिसमें उन्होंने सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिख कर ब्रिटिश शासन को हिला डाला था। अधिकांश इतिहासकारों ने १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक सिपाही विद्रोह या अधिकतम भारतीय विद्रोह कहा था। दूसरी ओर भारतीय विश्लेषकों ने भी इसे तब तक एक योजनाबद्ध राजनीतिक एवं सैन्य आक्रमण कहा था, जो भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के ऊपर किया गया था।                               à¤µà¤¿à¤¨à¤¾à¤¯à¤• दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणामविनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणामविनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    इतिहास

    • १८५७चे स्वातंत्र्यसमर
    • भारतीय इतिहासातील सहा सोनेरी पाने
    • हिंदुपदपादशाही

    कथा

    • सावरकरांच्या गोष्टी भाग – १
    • सावरकरांच्या गोष्टी भाग – २

    उपन्यास

    • काळेपाणीविनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम
    • मोपल्यांचे बंड अर्थात्‌ मला काय त्याचे

    आत्मचरित्र

    • माझी जन्मठेप
    • शत्रूच्या शिबिरात
    • अथांग (आत्मचरित्र पूर्वपीठिका)

    हिंदुत्ववाद

    • हिंदुत्व
    • हिंदुराष्ट्र दर्शन
    • हिंदुत्वाचे पंचप्राण

    लेख संग्रह

    • मॅझिनीच्या आत्मचरित्राची प्रस्तावना – अनुवादित
    • गांधी गोंधळ
    • लंडनची बातमीपत्रे
    • गरमागरम चिवडा
    • तेजस्वी तारे
    • जात्युच्छेदक निबंध
    • विज्ञाननिष्ठ निबंध
    • स्फुट लेख
    • सावरकरांची राजकीय भाषणे
    • सावरकरांची सामाजिक भाषणे

    नाटक

    • संगीत उ:शाप
    • संगीत संन्यस्त खड्‌ग
    • संगीत उत्तरक्रिया
    • बोधिसत्व- (अपूर्ण)

    कविता

    महाकाव्य

    • कमला
    • गोमांतक
    • विरहोच्छ्वास
    • सप्तर्षी

    स्फुट काव्य

    • सावरकरांच्या कविता

    पुस्तक एवं फिल्मविनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    सावरकर पर भारत सरकार द्वारा जारी डाक-टिकट
    जालस्थल

    इनके जन्म की १२५वीं वर्षगांठ पर इनके ऊपर एक अलाभ जालस्थल आरंभ किया गया है। इसका संपर्क अधोलिखित काड़ियों मॆं दिया गया है। इसमें इनके जीवन के बारे में विस्तृत ब्यौरा, डाउनलोड हेतु ऑडियो व वीडियो उपलब्ध हैं। यहां उनके द्वारा रचित १९२४ का दुर्लभ पाठ्य भी उपलब्ध है। यह जालस्थल २८ मई, २००७ को आरंभ हुआ था।विनायक दामोदर सावरकर के लिए इमेज परिणाम

    चलचित्र
    • १९५८ में एक हिन्दी फिल्म काला पानी (1958 फ़िल्म) बनी थी। जिसमें मुख्य भूमिकाएं देव आनन्द और मधुबाला ने की थीं। इसका निर्देशन राज खोसला ने किया था। इस फिल्म को १९५९ में दो फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार भी मिले थे। इंटरनेट मूवी डाटाबेस पर काला पानी
    • १९९६ में मलयालम में प्रसिद्ध मलयाली फिल्म-निर्माता प्रियदर्शन द्वारा निर्देशित फिल्म काला पानी बनी थी। इस फिल्म में हिन्दी फिल्म अभिनेता अन्नू कपूर ने सावरकर का अभिनय किया था। इंटरनेट मूवी डाटाबेस पर सज़ा-ए-काला पानी
    • २००१ में वेद राही और सुधीर फड़के ने एक बायोपिक चलचित्र बनाया- वीर सावरकर। यह निर्माण के कई वर्षों के बाद रिलीज़ हुई। सावरकर का चरित्र इसमें शैलेन्द्र गौड़ ने किया है।
    • इनके नाम पर ही पोर्ट ब्लेयर के विमानक्षेत्र का नाम वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है।

    सामाजिक उत्थान

    जीवन के अन्तिम समय में वीर सावरकर

    सावरकर एक प्रख्यात समाज सुधारक थे। उनका दृढ़ विश्वास था, कि सामाजिक एवं सार्वजनिक सुधार बराबरी का महत्त्व रखते हैं व एक दूसरे के पूरक हैं। उनके समय में समाज बहुत सी कुरीतियों और बेड़ियों के बंधनों में जकड़ा हुआ था। इस कारण हिन्दू समाज बहुत ही दुर्बल हो गया था। अपने भाषणों, लेखों व कृत्यों से इन्होंने समाज सुधार के निरंतर प्रयास किए। हालांकि यह भी सत्य है, कि सावरकर ने सामाजिक कार्यों में तब ध्यान लगाया, जब उन्हें राजनीतिक कलापों से निषेध कर दिया गया था। किंतु उनका समाज सुधार जीवन पर्यन्त चला। उनके सामाजिक उत्थान कार्यक्रम ना केवल हिन्दुओं के लिए बल्कि राष्ट्र को समर्पित होते थे। १९२४ से १९३७ का समय इनके जीवन का समाज सुधार को समर्पित काल रहा।

    सावरकर के अनुसार हिन्दू समाज सात बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।।

    1. स्पर्शबंदी: निम्न जातियों का स्पर्श तक निषेध, अस्पृश्यता
    2. रोटीबंदी: निम्न जातियों के साथ खानपान निषेध
    3. बेटीबंदी: खास जातियों के संग विवाह संबंध निषेध
    4. व्यवसायबंदी: कुछ निश्चित व्यवसाय निषेध
    5. सिंधुबंदी: सागरपार यात्रा, व्यवसाय निषेध
    6. वेदोक्तबंदी: वेद के कर्मकाण्डों का एक वर्ग को निषेध
    7. शुद्धिबंदी: किसी को वापस हिन्दूकरण पर निषेध

    अंडमान की सेल्यूलर जेल में रहते हुए उन्होंने बंदियों को शिक्षित करने का काम तो किया ही, साथ ही साथ वहां हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु काफी प्रयास किया। सावरकरजी हिंदू समाज में प्रचलित जाति-भेद एवं छुआछूत के घोर विरोधी थे। बंबई का पतितपावन मंदिर इसका जीवंत उदाहरण है, जो हिन्दू धर्म की प्रत्येक जाति के लोगों के लिए समान रूप से खुला है।। पिछले सौ वर्षों में इन बंधनों से किसी हद तक मुक्ति सावरकर के ही अथक प्रयासों का परिणाम है।

    मराठी पारिभाषिक शब्दावली में योगदान

    भाषाशुद्धि का आग्रह धरकर सावरकर ने मराठी भाषा को अनेकों पारिभाषिक शब्द दिये, उनके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं –

    मराठी शब्द (हिन्दी शब्द, अंग्रेज़ी शब्द)

    • दिनांक (तारीख, डेट)
    • क्रमांक (नंबर, नंबर)
    • बोलपट (, टॉकी)
    • नेपथ्य
    • वेशभूषा (, कॉश्च्युम)
    • दिग्दर्शक (, डायरेक्टर)
    • चित्रपट (, सिनेमा)
    • मध्यंतर (, इन्टर्व्हल)
    • उपस्थित (हजर, प्रेसेन्ट)
    • प्रतिवृत्त (, रिपोर्ट)
    • नगरपालिका (, म्युन्सिपाल्टी)
    • महापालिका (, कॉर्पोरेशन)
    • महापौर (, मेयर)
    • पर्यवेक्षक (, सुपरवायझर)
    • विश्वस्त (, ट्रस्टी)
    • त्वर्य/त्वरित (, अर्जंट)
    • गणसंख्या (, कोरम)
    • स्तंभ (, कॉलम)
    • मूल्य (, किंमत)
    • शुल्क (, फी)
    • हुतात्मा (शहीद, )
    • निर्बंध (कायदा, लॉ)
    • शिरगणती (खानेसुमारी, )
    • विशेषांक (खास अंक, )
    • सार्वमत (, प्लेबिसाइट)
    • झरणी (, फाऊन्टनपेन)
    • नभोवाणी (, रेडिओ)
    • दूरदर्शन (, टेलिव्हिजन)
    • दूरध्वनी (, टेलिफोन)
    • ध्वनिक्षेपक (, लाउड स्पीकर)
    • विधिमंडळ (, असेम्ब्ली)
    • अर्थसंकल्प (, बजेट)
    • क्रीडांगण (, प्लेग्राउंड)
    • प्राचार्य (, प्रिन्सिपॉल)
    • मुख्याध्यापक (, प्रिन्सिपॉल)
    • प्राध्यापक (, प्रोफेसर)
    • परीक्षक (, एक्झामिनर)
    • शस्त्रसंधी (, सिसफायर)
    • टपाल (, पोस्ट)
    • तारण (, मॉर्गेज)
    • संचलन (, परेड)
    • गतिमान
    • नेतृत्व (, लिडरशीप)
    • सेवानिवृत्त (, रिटायर)
    • वेतन (पगार, सॅलेरी)
  • सन2001 में आज ही के दिन क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी सर डॉन ब्रैडमैन का निधन।
  • सन 2004 में आज ही के दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण का निधन।
  • सन 2004 में आज ही के दिन मकदुनिया के राष्ट्रपति बेरिस ट्रेज कोवस्की की विमान दुर्घटना में मृत्यु।

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