स्वदेशी जागरण मंच की मोदी को चिट्ठी, आरबीआई बोर्ड से हटाए डा. मोर

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) की गतिविधियां संदिग्ध हैं और डा.मोर बीएमजीएफ के पूर्णकालिक भारत प्रतिनिधि हैं , केंद्र की नीतियों पर बोला हमला स्वदेशी जागरण मंच ने

स्वदेशी जागरण मंच ने पीएम को लिखी चिट्ठीस्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली, 16 अप्रैल ! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड सदस्य डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर को हितों में टकराव के आधार पर बोर्ड से हटाने की मांग की है. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्वदेशी जागरण मंच की तरफ से सह संयोजक अश्विनी महाजन Image result for स्वदेशी जागरण मंचने कहा कि आरबीआई बोर्ड में डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है.

स्वदेशी जागरण मंच के सह – संयोजक अश्विनी महाजन ने मोदी को लिखे गए पत्र में कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड में डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है. यह हितों में टकराव का फिट मामला है, क्योंकि उनके प्रधान नियोक्ता बीएमजीएफ को विदेशी फंड प्राप्त होता है और आरबीआई फंड का नियामक है.’

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ)Image result for बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन Image result for बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं. पत्र में कहा गया, ‘हम आपसे सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं, ताकि सभी को संदेश जाए कि वे भारत को हल्के में नहीं ले सकते.’

बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम कर रहा है बीएमजीएफ 

महाजन ने अपने पत्र में कहा कि डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर बीएमजीएफ के पूर्णकालिक भारत प्रतिनिधि हैं. बीएमजीएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय की सख्त निगरानी में है और विदेशी स्रोतों से सक्रियता से धन प्राप्त कर रहा है.

उन्होंने कहा कि बीएमजीएफ का आरबीआई की अनुमति से भारत में काम करना हितों में टकराव का स्पष्ट मामला है. एसजेएम ने कहा कि गृह मंत्रालय बीएमजीएफ पर इन आरोपों के कारण नजर रख रहा है कि यह फाउंडेशन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम कर रहा है ताकि स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों में सरकारी नीतियों को उनके पक्ष में प्रभावित कर सके.

डाक्टर मोर बीएमजीएफ के पूर्णकालिक भारत प्रतिनिधि हैं 

एसजेएम ने मांग की है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा नीति आयोग, भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और केंद्रीय कृषि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालयों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे ऐसे संगठनों एवं उनके प्रतिनिधियों से दूरी बनाए रखें.

डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर अभी बीएमजीएफ – इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक हैं. वह आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य भी हैं.

महाजन ने कहा कि हाल में मीडिया में कुछ खबरें आई थीं जिनमें आरोप लगाए गए थे कि बीएमजीएफ ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज (जीएचएस) नाम के एक एनजीओ की फंडिंग कर रहा है ताकि वह भारत में वैश्विक तौर पर व्यर्थ दवाएं इस्तेमाल करने के लिए जरूरी प्रयास करे.

जागरण मंच के मुताबित  डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर का बोर्ड में बना रहना हितों में टकराव का स्पष्ट मामला है क्योंकि वह बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के लिए काम करते हैं और इस संस्था की विदेश से फंडिंग की जाती है. वहीं रिजर्व बैंक देश में विदेशी फंड के नियामक के तौर पर भी काम करता है. लिहाजा, संभब है कि  डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर का आरबीआई में काम पूरी तरह निष्पक्ष न हो.

स्वदेशी जागरण मंच ने यह भी आरोप लगाया है कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की गतिविधियां संदिग्ध हैं. महाजन के मुताबिक यह संस्था गरीबों के लिए हेल्थ, सेनीटेशन, एग्रीकल्चर और फाइनेंशियल सर्वेसेज के क्षेत्र में काम करती है और पूर्व में फाउंडेशन के कामकाज पर सवाल उठाया जा चुका है. लिहाजा, जागरण मंच ने मांग की है कि जल्द से जल्द  डाक्टर नचिकेत मधूसूदन मोर को आरबीआई बोर्ड से बाहर करते हुए संस्था को स्पष्ट संदेश दिया जाए कि देश को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में जागरण मंच ने यह भी दावा किया है कि पूर्व में लगे आरोपों और संदिग्ध गतिविधियों के चलते बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन पर गृह मंत्रालय नजर रख रहा है. जागरण मंच ने दावा किया है कि यह फाउंडेशन मल्टीनैशनल कंपनियों के हितों के लिए भारत में कृषि और स्वास्थ क्षेत्र की सरकारी नीतियों को प्रभावित करने का काम करती है.

इसके अलावा जागरण मंच ने यह भी मांग की है कि केन्द्र सरकार अपने अन्य मंत्रालय जैसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नीति आयोग, इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल और परिवार कल्याण को भी निर्देश जारी करे कि वे ऐसे संगठनों को अपने काम काज में शरीक न होने दे और उनसे पर्याप्त दूरी बनाकर रखें.

स्वदेशी जागरण मंच ने केंद्र की नीतियों पर बोला हमला

यशवंत के बाद केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर स्वदेशी जागरण मंच ने भी उठाए सवालयशवंत के बाद केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर स्वदेशी जागरण मंच ने भी उठाए सवाल 

बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के लेख ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत पर  बहस खड़ी कर दी . राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली पर सीधा हमला बोला और देश की आर्थिक हालत को लेकर प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री से इस्तीफा मांगा है.पार्टी नेतृत्व यशवंत के आरोपों पर सीधे टिप्पणी करने से बच रहा है. सिन्हा के बाद स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं.

स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी कुमार ने कहा कि मौजूदा आर्थिक नीतियों में कुछ चीजें हैं जिन्हें बदलना जरूरी है. रोजगार इस देश में एक राजनीतिक नारा बन गया है. जीएसटी के कारण छोटे कारोबारी प्रभावित हुए हैं.

उन्होंने कहा कि यशवंत सिन्हा की राय से मैं पूरा सहमत नहीं हूं लेकिन मौजूदा आर्थिक नीतियों में बदलाव की जरूरत है. सरकार को रोजगार पैदा करने की जरूरत है, वरना यह राजनीतिक नारा बना रहेगा. जरूरत इस बात की है कि दीन दयाल उपाध्याय के विचारों पर अमल किया जाए.

यशवंत से उलट है भारतीय मजदूर संघ की राय   

भारतीय मजदूर संघ के महासचिव बृजेश उपाध्याय का कहना है कि यशवंत सिन्हा एक राजनीतिक व्यक्ति हैं. मैं देश की अर्थव्यवस्था के बारे में अलग-अलग अर्थशास्त्रियों के अलग-अलग विचार पढ़ता रहता हूं. मेरा यह मानना है कि अर्थशास्त्री लोग एकमत नहीं हैं, जिन मुद्दों का यशवंत सिन्हा ने जिक्र किया है वह नोटबंदी हो या जीएसटी हो. इसमें मजदूर क्षेत्र का होने के नाते हमारा अलग प्रकार का अनुभव आ रहा है. इन विषयों पर अभी से कोई निर्णायक मत बनाना बहुत जल्दी है.

‘नोटबंदी और जीएसटी से मजदूरों को फायदा’

उन्होंने कहा, ‘मैं मजदूर फ्रंट पर देखता हूं कि नोटबंदी के बाद एक करोड़ 27 लाख नए लोग प्रोविडेंट फंड में रजिस्टर हुए हैं. सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आए हैं. फार्मूलॉइज हो रहा है, मजदूर तो इनफॉर्मल सेक्टर में था. उसको सोशल सिक्योरिटी और बाकी सुविधाएं नहीं मिलती थी. इस सुविधा के कारण इस दायरे में आ रहा है. इससे टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा. इस सबसे 46-47 करोड़ मजदूरों को लाभ मिलने जा रहा है.

भारतीय मजदूर संघ के महासचिव का कहना है कि आर्थिक हालात खराब हुए ऐसा मुझे कहीं नहीं दिख रहा है. 70 साल से अर्थव्यवस्था का मैं विश्लेषण कर रहा हूं. ऐसी कोई बात दिखाई नहीं देती. जीएसटी या नोटबंदी से बहुत अच्छा हुआ है, इस प्रकार के निर्णय पर जाना अभी ठीक नहीं है.

बेकार की फिलॉसफी है जीडीपीः उपाध्याय

जीडीपी के बारे में बृजेश उपाध्याय का कहना है कि जीडीपी के बारे में हमारा पहले दिन से मत है कि जीडीपी का वास्तविक प्रकृति से इसका कोई रिश्ता नहीं है. यह बेकार की फिलॉसफी है. प्रगति का मापन करना इसके आधार पर कोई पैमाना नहीं है. कोई कारण नहीं है.

पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत है अर्थव्यवस्थाः गोयलImage result for भारतीय मजदूर संघ के महासचिव बृजेश उपाध्याय

इन सबके बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार का बचाव किया और कहा कि दुनिया देख रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले तीन सालों में भारत की अर्थव्यवस्था ने तेजी से विकास किया है. उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में संभवतः पहली बार भारत वैश्विक विकास को ड्राइव कर रहा है.

गोयल ने कहा कि इस सरकार ने अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर बड़े सुधार किए हैं, किसी ने सोचा नहीं था कि इतने बड़े देश में जीएसटी जैसे सुधार लागू करना संभव हो सकता है. भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में है जिसने जीएसटी लागू किया है. सब के पास अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है लेकिन सच्चाई ये है कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले अब कहीं ज्यादा मजबूत है.

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