नई दिल्ली, ।  सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। सीबीआई प्रमुख पद से हटाकर आलोक वर्मा को फायर सर्विसेस का डीजी बनाया गया था। इधर अलोक वर्मा की ओर से जारी किए गए सभी ट्रांसफर आदेशों को सीबीआइ के अंतरिम चीफ नागेश्वर राव ने पलट दिया है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि पद पर बहाली के बाद आलोक वर्मा द्वारा किए गए सभी ट्रांसफर आदेशों को रद्द किया गया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद दो दिन पहले ही आलोक वर्मा ने सीबीआइ निदेशक का पदभार संभाला था, लेकिन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय चयन समिति ने उन्हें दोबारा पद से हटाने का फैसला लिया। इन दो दिनों के भीतर आलोक वर्मा ने कई ट्रांसफर के फैसले लिए, जिन्हें अब रद्द कर दिया गया है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले सीबीआई  निदेशक का पद संभालते ही आलोक वर्मा ने सबसे पहले एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए लगभग सभी ट्रांसफर ऑर्डर को निरस्त कर दिया। इसके एक दिन बाद यानी गुरुवार को उन्होंने पांच अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया। आलोक वर्मा ने जिन अधिकारियों का ट्रांसफर किया है, उनके नाम- जेडी अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गउबा, जेडी मुरुगसन और एके शर्मा है। अब अलोक वर्मा के पद से हटाने जाने के बाद नागेश्वर राव ने उनके द्वारा किए सभी ऑर्डर को रद्द कर दिया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के सरकारी आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया था। आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच तकरार शुरू होने के बाद सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था और उनके सारे अधिकार छीन लिए गए थे। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजने के बाद 1986 बैच के ओडिशा काडर के आइपीएस अधिकारी नागेश्वर राव को 23 अक्टूबर, 2018 को सीबीआइ निदेशक के दायित्व और कार्य सौंपे गए थे। अधिकारियों के अनुसार, दायित्व मिलते ही अगली सुबह राव ने बड़े पैमाने पर तबादले किए। उनमें अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने वाले अधिकारी जैसे डीएसपी एके बस्सी, डीआईजी एम के सिन्हा, संयुक्त निदेशक एके शर्मा भी शामिल थे। जब अलोक वर्मा की पद पर बहाली हुई, तो उन्होंने उन्होंने भी बड़े स्तर पर तबादले किए।  एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि आलोक वर्मा ने बुधवार को अपना दायित्व संभाल लिया और राव द्वारा किए गए सभी तबादले रद कर दिए थे।

 दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्थाना के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इंकार

CBI VS CBI: Delhi High Court refuses to cancel the FIR against Asthana दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को रिश्वत के आरोपों पर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इंकार कर दिया. जस्टिस नाजमी वजीरी ने सीबीआई के उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार और कथित बिचौलिये मनोज प्रसाद के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से भी इंकार किया.

हाई कोर्ट ने यह फैसला अस्थाना, कुमार और प्रसाद की याचिकाओं पर सुनाया. इन तीनों ने उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी. अस्थाना पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धाराओं के तहत आपराधिक कदाचार, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप हैं. हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना ने एक मामले में राहत पाने के लिए कथित रूप से रिश्वत दी थी. सना की शिकायत पर ही FIR दर्ज हुई है. सना ने अस्थाना पर भ्रष्टाचार, रंगदारी और गंभीर कदाचार के आरोप लगाये थे.

बता दें कि गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों की सिलेक्ट कमेटी ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया. आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार और काम में लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं. वर्मा का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा था.