सिराजुद्दौला से युद्ध को राॅबर्ट क्लाईव ने 1757 में मुर्शिदाबाद को कूच किया था आज

13 जून आज का इतिहास

दोस्तों आज जानते हैं 13 जून का इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारें मे, उन लोगों के जन्मदिन के बारे में जिन्होंने दुनिया में आकर बहुत बड़ा नाम किया साथ ही उन मशहूर लोगों के बारें मे जो इस दुनिया से चले गए।

13 June History

  • जलालुद्दीन फ़िरोजशाह 1420 में दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
  • ब्रिटेन के राजा हेनरी प्रथम ने 1625 में फ्रांस की राजकुमारी हिनरीती से विवाह किया था।
  • इंग्लैंड ने 1721 को मैड्रिड के साथ संधिपत्र पर हस्ताक्षर किया।
  • सिराजुद्दौला से युद्ध के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के राॅबर्ट क्लाईव ने 1757 में मुर्शिदाबाद के लिए कूच किया।राबर्ट क्लाइव (१७२५-१७७४ ई.) भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का संस्थापक। २९ सिंतबर, १७२५ को स्टाएच में जन्म हुआ। पिता काफी दिनों तक मांटगुमरी क्षेत्र से पालमेंट के सदस्य रहा। बाल्यकाल से ही वह निराली प्रकृति का था। वह एक स्कूल से दूसरे स्कूल में भर्ती कराया जाता किंतु वह खेल में इतना विलीन रहता कि पुस्तक आलमारी में ही धरी रह जाती।Image result for क्लाइव १८ वर्ष की आयु में मद्रास के बंदरगाह पर क्लर्क बनकर आया। यहीं से उसका ईस्ट इंडिया कंपनी का जीवन आरंभ होता है। १७४६ में जब मद्रास अंग्रेजों के हाथ से निकल गया तब उसे बीस मील दक्षिण स्थित सेंट डेविड किले की ओर भागना पड़ा। उसे वहाँ सैनिक की नौकरी मिल गई। यह समय ऐसा था जब भारत की स्थिति ऐसी हो रही थी कि फ्रांसीसी और अंग्रेजों में, जिसमें भी प्रशासनिक और सैनिक क्षमता दोनों होगी, भारत का विजेता बन जाएगा। औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात्‌ के ४० वर्षों में मुगल साम्राज्य धीरे धीरे उसके सूबेदारों के हाथ आ गया था। इन सूबेदारों में तीन प्रमुख थे। एक तो दक्षिण का सूबेदार जो हैदराबाद में शासन करता था; दूसरा बंगाल का सूबेदार जिसकी राजधानी मुर्शिदाबाद थी और तीसरा थी अवध का नवाब बजीर। बाजी डूप्ले और क्लाइव के बीच थी। डूप्ले मेधावी प्रशासक था किंतु उसमें सैनिक योग्यता न थी। क्लाइव सैनिक और राजनीतिज्ञ दोनों था। उसने फ्रांसीसियों के मुकाबिले इन तीनों ही सूबों में अंगरेजों का प्रभाव जमा दिया। किंतु उसकी महत्ता इस बात में है कि उसने अपनी योग्यता और दूरदर्शिता से इन तीनों ही सूबों में से सबसे धनी सूबे पर अधिकार करने में सफलता प्राप्त की।Image result for क्लाइव

    क्लाइव ने सेंट डविड के किले में आने के बाद रेजर लारेंस की अधीनता में कई छोटी मोटी लड़ाइयों में भाग लिया ही था कि १७४८ में फ्रांस और इंग्लैंड के बीच समझौता हो गया और क्लाइव को कुछ काल के लिये पुन: अपनी क्लर्की करनी पड़ी। उसे उन्हीं दिनों जोरों का बुखार आया फलस्वरूप वह बंगाल आया। जब वह लौटकर मद्रास पहुंचा, उस समय दक्षिण और कर्नाटक की नवाबी के लिये दो दलों में संघर्ष चल रहा था। चंदा साहब का साथ कर्नाटक का नवाब बन गया। मुहम्मद अली ने अंग्रेजों से समझौता किया, सारे कर्नाटक में लड़ाई की आग फैलगई, जिसके कारण कर्नाटक की बड़ी क्षति हुई। तंजोर और मैसूर के राजाओं ने भी इसमें भाग लिया। मुहम्मद अली त्रिचनापल्ली को काबू में किए हुए थे। चंदा साहब ने उस पर आक्रमण किया। अंग्रेंजों ने मुहम्मद अली को बचाने के लिये क्लाइव के नेतृत्व में एक सेना आर्काट पर आक्रमण करने के लिये भेजी। क्लाइव ने आर्काट पर घेरा डाल दिया और डटकर मुकाबला किया। चंदा साहब की फ्रांसीसी सेनाओं की सहायता प्राप्त थी, फिर भी वह सफल न हो सके। इसी बीच डूप्ले को वापस फ्रांस बुला लिया गया। अंग्रेजों की सहायता से मुहम्मद अली कर्नाटक के नवाब बन गए।

    आर्काट के घेरे के कारण यूरोप में क्लाइव की धाक जम गई। वलियम पिट ने उसे स्वर्ग से जन्में सेनापति कह कर सम्मानित किया। ईस्ट इंडिया कंपनी के संचालक मंडल ने उसे ७०० पाउंड मूल्य की तलवार भेंट करनी चाही तो उसने उसे तब तक स्वीकार नहीं किया जब तक उसी रूप में लारेंस का सम्मान नहीं हुआ।

    दस वर्ष भारत रहने के बाद वह १७५३ के आरंभ में स्वदेश लौटा। दो वर्ष वह अपने घर रह पाया था तभी भारत की स्थिति ऐसी हो गई कि कंपनी के संचालक मंडल ने उसे भारत आने को विवश किया। वह १७५६ ई. में सेंट फोर्ट डेविड का गवर्नर नियुक्त किया गया और उसे सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया। वह मद्रास पहुंच कर अपना पद ग्रहण कर भी न पाया था कि इसी बीच अंग्रेजों की शक्ति बंगाल में डांवाडोल हो गई, क्लाइव को बंगाल आना पड़ा।Image result for प्लासी का युद्ध

    ९ अप्रैल १७५६ को बंगाल और बिहार के सूबेदार की मृत्यु हो गई। १७५२ में अल्लावर्दी खाँ ने सिराजुद्दौला को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। अल्लावर्दी खाँ की मृत्यु के पश्चात्‌ सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना। १८वीं शताब्दी के आरंभ में ही अंग्रजों ने फोर्ट विलियम की नींव डाली थी और १७५५ तक उसके आसपास काफी लोग बस चुके थे, इसी लिये उसने नगर का रूप ले लिया था जो बाद में कलकत्ता कहलाया। बंगालन में फोर्ठ विलियम अंगेजी कंपनी का केंद्र था। सिराजुद्दौला ने नवाबी पाने के बाद ही अपने एक संबंधरी सलामन जंग के विरुद्ध सैनिक कार्रवाई आरंभ की और पुर्णिया पर आक्रमण किया। २० मई १७५६ को राजमहल पहँुचने के पश्चात्‌ उसने अपना इरादा बदल दिया और मुर्शिदाबाद लौट आया और कासिम बाजारवाली अंग्रेजी फैक्ट्री पर अधिकार कर लिया। यह घटना ४ जून १७५६ को घटी। ५ जून को सिराजुद्दौला की सेना कलकत्ते पर आक्रमण करने को रवाना हुई और १६ जून को कलकत्ता पहुंची। १९ जून को कलकत्ता के गवर्नर, कमांडर और कमेटी के सदस्यों को नगर और दुर्ग छोड़कर जहाज में पनाह लेना पड़ा। २० जून को कलकत्ता पर नवाब का कब्जा हो गया। जब इसकी खबर मद्रास पहुंची तो वहां से सेना भेजी गई, जिसका नेतृत्व क्लाइव के हाथ में था।Image result for प्लासी का युद्ध

    दिसंबर में क्लाइव हुगली पहुंचा। उसकी सेना की संख्या लगभग एक हजार थी। वह नदी की ओर से कलकत्ते की तरफ बढ़ा और २ जनवरी १७५७ को उसपर अपना अधिकार कर लिया। सिराजुद्दौला को जब इसकी खबर मिली तो उसने कलकत्ते की ओर बढ़ने का प्रयत्न किया मगर असफल रहा और संधि करने पर विवश हुआ। इस संधि से अंग्रेजों को अधिक लाभ हुआ। सिराजुद्दौला ने कलकत्ते की लूटी हुई दौलत वापस करने का वादा किया; कलकत्ता को सुरक्षित करने की इजाजत दी और वाट को मुर्शिदाबाद में अंग्रेजी प्रतिनिधि के रूप में रखना स्वीकार किया।

    इसी बीच यूरोप में सप्तवर्षीय युद्ध आरंभ हो गया। इसका प्रभाव भारत की राजनीति पर भी पड़ा। यहां भी अंग्रेजों और फ्रांसीसियों में लड़ाई छिड़ गई। बंगाल में चंद्रनगर पर फ्रांसीसियों का प्रभाव रहा।

    Clive Defence of Arcot. Illustration for The New Popular Educator (Cassell, 1891).

    अंग्रेजों ने वहां अपना समुद्री बेड़ा भेजने की तैयारी आरंभ कर दी। १४ मार्च १७५७ को चंद्रनगर पर आक्रमण हुआ और एक ही दिन के बाद फ्रांसीसियों ने हथियार डाल दिए। वाटसन ने नदी की ओर से और क्लाइव ने दूसरी ओर से फ्रांसीसियों पर आक्रमण किया। सिराजुद्दौला इस लड़ाई में खुलकर भाग न ले सका। अब्दाली के आक्रमण के कारण वह फ्रांसीसियों की सहायता और अंग्रेजों से लड़ाई करने में संभवत: समर्थ न था।

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    चंद्रनगर की लड़ाई के बाद क्लाइव को ज्ञात हुआ कि सिराजुद्दौला से उसके अपने ही आदमी असंतुष्ट हैं; और उनमें उसका सेनापति मीरजाफर प्रमुख हैं। क्लाइव ने इससे लाभ उठाने का निश्चय किया। फलस्वरूप मीरजाफर और अंग्रेजों के बीच एक गुप्त समझौता हुआ। जिसके अनुसार कलाइव ने पीरजाफर को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दिला देने का वादा किया। इसके लिये मीर जाफर को कलकत्ता में हुए कंपनी की हानि और सैनिक व्यय के लिये १० लाख पाउंड, कलकत्ते के अंग्रेज निवासियों को २ लाख पाउंड और अरमीनियन व्यापारियों को ७० हजार पाउंड देने की बात ठहरी। अमीचंद ने, जिसने अंग्रेजों और मीरजाफर के बीच समझौता कराया था, नवाब से उसके खजाने का 5 प्रतिशत कमीशन माँगा। और इस बात का उललेख संधिपत्र में किए जाने का आग्रह किया। फलत: क्लाइव ने दो संधिपत्र तैयार कराए। एक असली दूसरा नकली। नकली संधिपत्र में अमीचंद की शर्ते लिख दी गई थीं। नकलीवाले संधिपत्र पर अंग्रेज गवर्नर का हस्ताक्षर बनाकर उसे दिखाया गया। मीरजाफर ने लड़ाई में तटस्थ रहने का वादा किया। यह निश्चय हुआ कि लड़ाई के मैदान में मौजूद रहते हुए भी वह अलग रहेगा।

    अंग्रेजी सेना ने क्लाइव के नेतृत्व में सिराजुद्दौला के खिलाफ कार्रवाई की और परिणामस्वरूप प्लासी की लड़ाई हुई। प्लासी में सिराजुद्दौला की हार हुई और अंग्रेजों ने मीरजाफर को बंगाल को नवाब बना दिया। इस प्रकार क्लाइव के कारण अंग्रेज बंगाल के मालिक बन गए। ईस्ट इंडिया कंपनी को १५ करोड़ पौंड मिले। क्लाइव को उसमें से २ लाख ३४ हजार पौंड दिया गया और मीरजाफर ने भी उसे तीस हजार पौंड सालाना की जागीर दूसरे रूप से दी।

    १७५९ में राजकुमार अली गौहर ने, जो आगे चलकर शाहआलम के नाम से शासक हुआ, दिल्ली से भागकर अवध में शरण ली। वह अपनी शक्ति बढ़ाने के लिये बिहार और बंगाल पर भी कब्जा करना चाहता था। उसने पटना को घेर लिया। नवाब के प्रतिनिधि रामनारायण ने उसका मुकाबला तब तक किया जब तक कलकत्ता से अंग्रेजों की सहायता नहीं पहुँची। नवाब ने चौबीस परगना की भूमि, जो इस सहायता के लिये रख छोड़ी गई थी, क्लाइव को दे दी। यह रकम ३० हजार पौंड की थी जो कंपनी किराए के रूप में अदा किया करती थी।Image result for प्लासी का युद्ध

    १७५९ में डच लोगों ने मीरजाफर के लड़के से साजिश कर अंग्रेजों को बंगाल से निकालने की योजना बनाई और फलस्वरूप उन्होंने सात जहाज नागापट्टम से रवाना किए ; मगर जब वे हुगली के पास पहुँचे तो नवाब की ओर से उन्हें अपनी सेना उतारने की मनाही मिली। फलत: डच और अंग्रेजों में झड़प हुई, जिसमें डचों को जान और माल का नुकसान हुआ।

    बंगाल का गवर्नर

    १७६० ई. में क्लाइव इंग्लैंड वापस लौटा। उस समय क्लाइव के पास ३० लाख पौंड सालाना की रकम मिलने की व्यवस्था थी। इंग्लैंड पहुँचने पर उसे बैरन ऑव प्लासी की उपाधि मिली। उसने बड़ी जायदाद खरीदी और अपने मित्रों को पार्लमेंट का सदस्य बनवाया।१७६४ में फिर क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बनाकर भेजा गया और मई, १७६५ में क्लाइव दुबारा कलकत्ता आया। इस समय उसके सामने दो समस्याएँ थीं। एक राजनीतिक और दूसरी प्रशासकीय। राजनीतिक समस्या मुगल बादशाहों, अवध राज्य तथा बंगाल के नवाव से संबंध रखती थी। प्रशासकीय समस्या कं पनी के नौकरों की मुनाफाखोरी की थी।Image result for प्लासी का युद्ध

    क्लाइव को भारत आने पर ज्ञात हुआ कि पुराने गवर्नर वाँसीटार्ट ने अवध का राज्य मुगल बादशाह को वापस दे देने का वादा किया है। क्लाइव ने अवध के नवाब शुजाउद्दौला के पास  प्रस्ताव भेजा कि यदि वह पचास लाख रूपए कंपनी को देना स्वीकार करे तो इलाहाबाद प्रांत को छोड़कर उसकी रियासत उसे वापस कर दी जाएगी। तदनुसार, इलाहाबाद मुगल बादशाह को देकर उसके बदले क्लाइव ने बंगाल की दीवानी माँगी। मुगल बादशाह ने फरमान जारी कर बंगाल के नवाब के अधिकार  कम कर दिए  और कंपनी को अधिकार दे दिया।

    क्लाइव के भारत आने के पहले कंपनी के डाइरेक्टरों ने एक आदेश जारी कर कंपनी के नौकरों को भेंट लेने की मनाही कर दी थी। क्लाइव ने बंगाल पहुंचते ही समस्त सिविल और फौजी अफसरों से एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए, जिससे भेंट लेना नाजायज हो गया। बंगाल पहुंच कर क्लाइव ने देखा कि बहुत से पदों पर नए लोग काम कर रहे हैं और वे नाजायज मुनाफा उठा रहे हैं। क्लाइव ने व्यापार की नीति में परिवर्तन किया और  लाभ कंपनी के नौकरों में बाँट दिया।  नीति का जिसने विरोध किया उसे  हटा दिया और अन्य लोगों को मद्रास से लाकर उनकी जगह रखा।

    बंगाल की गवर्नरी से पहले उसने कं पनी के भत्ते के संबंध में नए कानून बनाए थे मगर वे कार्यवित न हो सके थे। क्लाइव ने बंगाल पहुंचते ही इस कानून को जारी किया। इस कानून के अनुसार सैनिक अफसरों को बंगाल और बिहार में उसी समय भत्ता मिल सकता था जब वे छावनी से बाहर हों। मुंगेर और पटना केंद्र में रहने वाले अफसरों को भत्ता मिलता था। इस प्रकार एक अफसर को तीन, छह और बारह रूपए प्रति दिन भत्ता मिलता था। सिविल अफसरों की भाँति जब सैनिक अफसरों ने भी इस कानून के विरोध में नौकरी से इस्तीफा देने की ठानी तब क्लाइव ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया और उसके स्थान मद्रास से बुलाकर अफसर रखे। जो लोग विद्रोह पर तैयार हुए उन्हें दबा दिया। मीरजाफर ने अपनी वसीयत में ७० हजार पौंड क्लाइव के लिये लिखे थे। उनको क्लाइव ने उन लोगों के नाम कर दिया जो युद्ध में घायल हुए थे।

    फरवरी, १७६७ में क्लाइव ने अंतिम बार भारत छोड़ा मगर जाने से पूर्व ईस्ट इंडिया कंपनी की नींब मजबूत कर दी। इंग्लैंड जाने पर उनके ऊपर भ्रष्टाचार का मुकदमा चला, किंतु उससे वह बरी कर दिया गया और अपनी सेवाओं के लिये वजीफा दिया गया।

  • ब्रिटिश अमेरिका के उपनिवेश आयरलैंड ने 1774में दास प्रथा पर प्रतिबंध लगाया। वह ऐसा करने वाली पहला उपनिवेश था।
  • कनाडा के वैंकूवर शहर में 1886 को आग लगने के कारण लगभग 1,000 इमारत जलकर खाक हुयी।
  • अमेरिकी कांग्रेस ने 1888 में श्रम विभाग का गठन किया।
  • अमेरिका में पहली बार 1927 में स्टेचू आफ लिबर्टी के दाहिने हाथ से अमेरिकी ध्वज प्रदर्शित किया गया।
  • इंग्लैंड और फ्रांस ने 1932 में शांति संधि पर हस्ताक्षर किया।
  • स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने 1943 में पनडुब्बी द्वारा जर्मनी से टोक्यो की यात्रा शुरू की।
  • नाजी जर्मनी ने 1944 में V-1 बमों से हमला शुरू किया।
  • संयुक्त राष्ट्र के सैनिकों ने 1951 में प्योंगयांग उत्तर कोरिया पर कब्जा कर लिया।
  • 72 वर्षों तक अपने नियंत्रण में रखने के बाद ब्रिटेन ने 1956 में स्वेज नहर का नियंत्रण मिस्र को सौंपा।
  • राजकुमार नरोत्तम सिंह 1960 में  कंबोडिया के राष्ट्रपति बने थे।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 1976 में सोवियत संघ की इजराइल पर प्रस्ताव लाकर वोटिंग करवाने की मांग खारिज कर दी।
  • इजरायल के सुरक्षा बल लेबनान से 1978 में हटे।
  • किम कैंपबेल कनाडा की पहली महिला प्रधानमंत्री 1993 में बनीं।
  • फ्रांस ने 1995 को घोषणा की कि वे दक्षिण प्रशांत में आठ और परमाणु परीक्षण करेगा।
  • दिल्ली के उपहार सिनेमाघऱ में 1997 को आग लगने से 59 लोगों की मृत्यु हो गई तथा 100 से अधिक लोग घायल हो गए।
  • पहले अंतर-कोरिया शिखर सम्मेलन में 2000 को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति किम जुंग प्योंगयांग में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग इल से मिले।
  • नेपाल शाही परिवार हत्याकांड में 2001 को दीपेन्द्र की प्रेमिका देवयानी का जांच आयोग के समक्ष गवाही से इन्कार।
  • 1972 के एंटी बैलिस्टिक मिसाइल समझौते की समय सीमा 2002 में समाप्त।
  • डेनियल अखमितोव कजाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री 2003 में नियुक्त।
  • लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में 2004 को राष्ट्रपति जोसेफ़ कबीला के ख़िलाफ़ तख्ता पलट का प्रयास विफल। ईराक के विदेश उपमंत्री बासम सालिह कुन्बा की हत्या।
  • ईरान 2009 के अन्त से 25 वर्षों के लिए भारत को तरल प्राकृतिक गैस का निर्यात करने पर 2005 में सहमत।
  • पॉप गायक माइकल जैक्सन को 13 साल के बच्चे के यौन उत्पीड़न मामले में 2005 को बरी कर दिया गया था।
  • नाइजीरिया और कैमरून ने 2006 में सीमा विवाद पर समझौता किया।
  • टेलिकॉम मलेशिया (टीम) ने 2008 में आइडिया सेलुलर कम्पनी की 15% हिस्सेदारी ख़रीदी।
  • चीन और ताइवान ने 2008 में विमान सेवा शुरू करने के सम्बन्ध में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये।

13 जून को जन्मे व्यक्ति

  • क्रांतिकारी गणेश दामोदर सावरकर का जन्म 1879 में हुआ।
  • हिंदी सिनेमा जगत् के मशहूर गीतकार प्रेम धवन का जन्म 1923 में हुआ।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के आठवें महासचिव बान की मून का जन्म 1944 में हुआ।
  • न्यूजीलैंड के क्रिकेटर क्रिस केयर्न्स का जन्म 1970 में हुआ।

13 जून को हुए निधन –

  • तीसरे सप्तक की एकमात्र कवयित्री कीर्ति चौधरी का निधन 2008 में हुआ।
  • प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक मेहदी हसन का निधन 2012 में हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध लेखक, उपन्यासकार, नाटककार, आलोचक तथा व्यंग्यकार मुद्राराक्षस का निधन 2016 में हुआ।

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