सावधानःऑनलाइन सामान खरीद में इन पांच गलतियों से होता है भारी नुकसान

ऑनलाइन शापिंग करते वक्त कुछ सावधानियों को बरतने की जरूरत होती है, जिससे हम किसी फ्रॉड का शिकार ना हो जाएं

Online सामान खरीदते हैं तो कभी ना करें ये 5 गलतियां, हो सकता है भारी नुकसान

फाइल फोटो
 टेक्नोलॉजी के आने से हमारी खरीदारी करने का तरीका भी बदल गया है. ऑनलाइन खरीदारी ने चीज़ों को इतना आसान कर दिया कि सब्जी से लेकर एयरकंडीशनर तक हम घर बैठे बस एक क्लिक कर खरीद सकते हैं. इससे ना सिर्फ हमारा समय बच रहा है बल्कि बेकार की परेशानियों से भी निजात मिल गई है. ग्राहकों के बढ़ते क्रेज और जरूरत को देखते हुए कंपनियां भी अपने एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट्स लॉन्च करने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं.
कई प्रोडक्ट्स को तो केवल ऑनलाइन ही खरीदा जा सकता है, क्योंकि कुछ कंपनियां अपने प्रोडक्ट रिटेल शॉप में नहीं बेचतीं. तो इसका मतलब यही है कि आपको चाहे अनचाहे ऑनलाइन शॉपिंग करनी ही पड़ेगी. मगर ऑनलाइन शापिंग करते वक्त कुछ सावधानियों को बरतने की जरूरत होती है, जिससे हम किसी फ्रॉड का शिकार ना हो जाएं.
आकर्षक ऑफर पर यकीन ना करें

ऑनलाइन शॉपिंग में आकर्षक ऑफर से बचें

सबसे पहले कहीं भी खरीदारी करने से पहले यह सुनिश्चित कर लीजिए कि आप किसी ऐसे लिंक्स पर क्लिक तो नहीं कर रहे हैं, जो आपको बिना किसी वजह से ई-मेल भेजते हैं या लिंक्स पर जाने के बाद आपको चकित कर देने वाले आकर्षक ऑफर मिल रहें हैं. अक्सर ये हमें भ्रमित कर हमारी जानकारियां चुराने का माध्यम बन जाते हैं. किसी भी लिंक पर जाने से पहले उसकी शर्तो को पढ़ लें और बिना मतलब के लिंक को विजिट ना करें.
फेक वेबसाइट को ऐसे पहचाने
वेबसाइट सिक्योर है या नहीं इस बात की जानकारी होना बेहद ज़रूरी है. अगर वेबसाइट के URL की शुरुआत में ग्रीन कलर का लॉक है या फिर उसमें https नहीं है तो वो वेबसाइट सिक्योर नहीं है. इस तरह की वेबसाइट से क्रेडिट/डेबिट कार्ड या बैंक से जुड़ी निजी जानकारी चोरी की जा सकती है और आपके अकाउंट के हैक होने का खतरा रहता है.
बैंक स्टेटमेंट चेक करें
ऑनलाइन शॉपिंग करने के बाद निश्चिंत हो जाना आपको कभी-कभी महंगा पड़ सकता है, इसलिए ज़रूरत है कि आप अपने बैंक स्टेटमेंट की वक्त-वक्त पर जांच करते रहें. अगर आपको जांच के दौरान किसी भी अनियमित गतिविधि या अज्ञात वित्तीय व्यवहार के संकेत मिलें, तो बिना कोई देर किए तुरंत इसकी रिपोर्ट कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए.

एक ही कार्ड का इस्तेमाल करें
ऑनलाइन शॉपिंग के लिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि एक ही कार्ड का इस्तेमाल करें, ताकि अकाउंट चेक करते समय दिक्कतों का सामना ना करना पड़े और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तुरंत पता चल जाए. अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड दोनों हैं और पैसे की दिक्कत नहीं, तो ऐसे में हमें उलझन हो जाती है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें या डेबिट कार्ड का.
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल होता है सेफ
डेबिट कार्ड की जगह क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना चाहिए, क्योंकि बैंक क्रेडिट कार्ड के साथ जो गारंटी देता है, वह डेबिट कार्ड के साथ नहीं मिलती है. कई लोगों की आदत कहें या कामचोरी, वह अपने तमाम पासवर्ड को याद करके रखते हैं. लेकिन यह छोटी-सी कामचोरी की आपको कभी-कभी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है

ऑनलाइन शॉपिंग में रखें इन बातों का भी ध्यान, बचेंगे ठगे जाने से

कई सर्वेक्षणों से पता चला है कि ई-कॉमर्स कंपनियों से ग्राहकों को एक तिहाई उत्पाद नकली मिल रहे हैं 

 आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करने में ठगी के शिकार हो सकते हैं. दरअसल तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन शॉपिंग नकली उत्पादों की बिक्री के भी मौके बढ़ा रही है. यही वजह है कि ऑनलाइन खरीदारों के लिए नकली उत्पाद एक बड़ी समस्या बन गए हैं. कई सर्वेक्षणों से पता चला है कि ई-कॉमर्स कंपनियों से ग्राहकों को एक तिहाई उत्पाद नकली मिल रहे हैं.
लोकल सर्किल्स की ओर से किये गए हालिया सर्वेक्षण से पता चलत है कि 6,923 ऑनलाइन खरीदारों में से 38 फीसदी खरीदारी को पिछले ईकॉमर्स साइट से नकली उत्पाद बेचे गए. ऑनलाइन खरीदारी करने वाले 12 फीसदी खरीदारों ने कहा कि उन्हें स्नैपडील से फर्जी उत्पाद प्राप्त हुए, 11 प्रतिशत ने अमेजॉन का हवाला दिया, और 6 फीसदी ने फ्लिपकार्ट का हवाला दिया.
मार्केट रिसर्च प्लेटफॉर्म वेलोसिटी एमआर द्वारा किए गए एक अन्य सर्वेक्षण से पता चला है कि पिछले छह महीनों में ऑनलाइन खरीदारी करते समय तीन ऑनलाइन खरीदारों में से एक को नकली उत्पाद प्राप्त हुए हैं. यह सर्वेक्षण 3,000 खरीदारों के बीच किया गया था.
इतना ही नहीं इन सर्वेक्षणों के अनुसार, परफ्यूम से ब्रांडेड जूते और फैशन परिधान तक नकली बेचे गए. इसलिए, यदि आप ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन हैं, तो खरीदारी करने से पहले आपको सावधानी बरतनी चाहिए. 
1. ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर बिक रहे उत्पाद से तुलना करें

असली और नकली में फर्क करने का एक तरीका यह है कि ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर उत्पाद के बारे में जानकारी हासिल की जाए. आप यहां उत्पाद के मॉडल नंबर के जरिे उसके बारे में जानकारी ले सकते हैं. यदि आप ऑनलाइन मोबाइल फोन खरीद रहे हैं, तो बॉक्स के ऊपर छपे आईएमईआई नंबर को भी देखें और उत्पाद को खरीदने से पहले इसे ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट से मिलायें.
टेक्नोपाक के अध्यक्ष और एमडी अरविंद सिंघल के मुताबिक, नकली उत्पादों की समस्या सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में है. ई-कॉमर्स साइट बाजार के मॉडल पर काम करती हैं और लाखों थर्ड पार्टी विक्रेताओं के साथ यह जांचना मुश्किल होता है कि क्या वे असली उत्पाद बेच रहे हैं.

cashless

2-क्या उत्पाद असली या नकली है, इसकी गारंटी दी जा रही है?
अमेजॉन पर आपको कुछ उत्पादों के खिलाफ ‘अमेजॉन फुलफील्ड’ टैग मिलेगा. इस उत्पाद को थर्ड पार्टी विक्रेताओं की तरफ से पेश किया जाता है. लेकिन इस आइटम को आपको अमेजॉन पूर्ति केंद्र (फुलफिलमेंट सेंटर) से भेजा जाता है. इस मामले में, इन उत्पादों की बिक्री का काम अमेजॉन द्वारा किया जाता है. इसी तरह, फ्लिपकार्ट पर, आपको कुछ उत्पादों के खिलाफ ‘फ्लिपकार्ट आश्वासित’ टैग मिलेगा.
3. विक्रेता और उत्पाद की रेटिंग जरूर चेक करें
खरीदारी करते समय नकली उत्पाद का पता लगाना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है. यदि आप किसी उत्पाद के बारे में आशंकित हैं, तो सबसे पहले आप विक्रेता की रेटिंग और उत्पाद की समीक्षा को देख सकते हैं. उत्पाद की विश्वसनीयता के लिए ये रेटिंग और समीक्षा दोनों उपयोगी टूल हैं.
3. रिटर्न पॉलिसी
यह एक और प्वाइंट है, जिस पर आपको ध्यान देने की जरूरत है. एक स्पष्ट रिटर्न पॉलिसी उपभोक्ता के आत्मविश्वास को बढ़ाती है. उसे लगता है कि वह जो प्रोडक्ट खरीद रहा है वह वास्तविक है.
4.भारी छूट के झांसे में न आएं
ऑनलाइन बेवसाइट्स पर सौदर्य प्रसाधन, परफ्यूम जैसे उत्पादों पर भारी छूट मिलती रहती है. इसके लालच में न फंसें, क्योंकि ज्यादातर ऐसे उत्पादों पर साफ रिटर्न पॉलिसी नहीं होती है. LocalCircles के सर्वे के मुताबिक 34 फीसदी ऑनलाइन खरीदारों का कहना है कि उन्हें परफ्यूम और खुशबू से जुड़े उत्पाद नकली मिले हैं.
5.अगर खरीद लिया है नकली सामान तो क्या करें? 
अगर आपने नकली सामान खरीद लिया है तो बैठकर सोचने से कुछ नहीं होने वाला है. आप प्रोडक्ट की वापसी या धनवापसी के लिए विक्रेता की पहचान करें. एक स्वतंत्र ब्रांड सलाहकार हरीश एचवी कहते हैं, “उपभोक्ताओं को ईकॉमर्स वेबसाइट को सूचित करना चाहिए और उन्हें ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहना चाहिए. संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर इसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उठाया जाना चाहिए.

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