समझें एक मिनट में सरल भाषा में:क्या होता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन

बजट की पाठशाला:कैपिटल गेन टैक्स. क्या है कैपिटल गेन टैक्स और ये कितना लगता है और किस चीज पर लगता है? इन सब सवालों का जवाब जानें

कैपिटल गेन टैक्स. क्या है कैपिटल गेन टैक्स और ये कितना लगता है और किस चीज पर लगता है? इन सब सवालों का जवाब जानें बजट की पाठशाला में. कैपिटल गेन टैक्स वो टैक्स है जो सरकार आपसे वसूलती है अगर आपको मुनाफा होता है. कैपिटल गेन टैक्स दो तरह का होता है, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म. इन पर टैक्स की दर भी अलग-अलग होती है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में स्टॉक मार्केट को सरकार ने पिछले साल ही शामिल किया था.  à¤²à¥‰à¤¨à¥à¤— टर्म कैपिटल गेन के लिए इमेज परिणाम

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स
अगर आपने कोई शेयर खरीदा या फिर किसी म्युचुअल फंड में पैसा लगाया और उसे एक साल के भीतर ही उसे बेच दिया तो उससे होने वाली कमाई पर लगेगा 15 फीसदी टैक्स.
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स
अगर आपने कोई भी शेयर या म्यूचुअल फंड एक साल से ज्यादा होल्ड करके रखते हैं तो आप 1 लाख रुपये तक तो मुनाफा कमा सकते हैं. 1 लाख रुपये के ऊपर जो भी आपका मुनाफा होगा उसपर आपको 10 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.
लंबी अवधि में किसी भी चल या अचल संपत्ति पर मिलने वाले प्रॉफिट पर लगने वाले टैक्‍स को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स कहा जाता है. 2018 से यह पहली बार स्‍टॉक मार्केट पर लगा है. इससे पहले यह प्रॉपर्टी समेत कई चीजों पर लगता रहा है. अलग-अलग सेगमेंट के हिसाब से लॉन्‍ग टर्म का कैलकुलेशन अलग-अलग होता है.
2018 के बजट में सरकार ने किया बदलाव
1 फरवरी को बजट में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स पर सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं. स्‍टॉक मार्केट से 1 साल की अवधि से ज्‍यादा वक्‍त में हुई 1 लाख रुपए से ज्‍यादा की कमाई पर सरकार 10 फीसदी के रेट से लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलेगी. इसके बाद अब शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड, दोनों से कमाई होने पर आपको 10 फीसदी का टैक्‍स देना होगा.शेयर मार्केट से पहले सरकार घर, संपत्ति, जेवर, कार, बैंक एफडी, एनपीएस और बॉन्ड आदि की बिक्री से हासिल हुए मुनापे पर कैपिटल गेन टैक्‍स वसूलती रही है. जो लोग ज्यादा पैसा कमाते हैं, सरकार उनसे टैक्स भी ज्यादा लेती है. इक्विटी, इक्विटी म्युचुअल फंड में वे ही लोग पैसा लगाते हैं जिनकी कमाई बहुत है और तमाम खर्चे करने के बाद अच्छी बचत हो जाती है. ऐसे में सरकार इस तरह के निवेश से होने वाली कमाई पर भी टैक्स लेती है. इस टैक्स को कैपिटल गेन टैक्स कहते हैं.कैपिटल गेन टैक्स दो तरह का होता है, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म. इन पर टैक्स की दर भी अलग-अलग होती है.

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