सबरीमाला मन्दिर में प्रवेश कर गयीं आक्रमणकारी महिलाएं थीं ईसाई और वामपंथी

कल सबरीमाला मन्दिर में दो आक्रमणकारी ईसाई हैं और वामपंथी महिलाएं प्रवेश कर गयीं। कई महीनों तक हमारी असंख्य माताएँ, बहनें, बेटियां मन्दिर की रक्षा के लिए डटी रहीं, पर कल पुरुष वेश में छल से घुस गयीं दोनों। इनके पास कोई पूजन सामग्री नहीं थी सो किसी को शक भी नहीं हुआ। इन्होंने कोई पूजा पाठ नहीं किया क्योंकि पूजा तो इनको करना ही नहीं था। दोनों ईसाई हैं और वामपंथी, इनका लक्ष्य था मन्दिर को भ्रष्ट करना, सो इन्होंने कर दिया। à¤šà¤¿à¤¤à¥à¤° में ये शामिल हो सकता है: पाठ
ठीक से देखें तो पिछले सौ-दो सौ सालों में सनातन पर हुआ यह सबसे बड़ा प्रहार है। किसी युग में इसी तरह गजनवी, गोरी, सिकन्दर लोदी, बाबर, औरंगजेब या टीपू मन्दिरों को भ्रष्ट करते थे।
मन्दिर का भ्रष्ट होना कोई बड़ी चिंताजनक बात नहीं, सनातन को ऐसे असंख्य आक्रमणों का अनुभव है। हमारे किसी मंदिर पर यह प्रथम आक्रमण नहीं। हम पुनरुद्धार करना जानते हैं, हम शुद्धिकरण जानते हैं, हम सबरीमाला को भी शुद्ध कर लेंगे।
आपको पता है काशी विश्वनाथ मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए इमेज परिणामकितनी बार तोड़ा गया है? मेरी जानकारी के अनुसार लगभग पाँच बार… सम्भव है यह संख्या और बड़ी हो। आप जानते हैं वामपंथी इतिहासकारों द्वारा महिमामण्डित रजिया सुल्तान ने भी काशी विश्वनाथ को तोड़ा था? महादेव मंदिर बार-बार तोड़ा गया, हमनें हर बार पुनर्निर्माण किया।
आप जानते हैं मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि मन्दिर कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के लिए इमेज परिणामकितनी बार तोड़ा गया? दसों बार… गजनवी ने तोड़ा, तो कुछ वर्षों बाद जिज्जी नामक एक गुमनाम व्यक्ति ने मंदिर का निर्माण कराया। फिर सिकन्दर लोदी ने तोड़ दिया, तो ओरछा नरेश बीरसिंह बुन्देला ने बनवाया। 1669 में फिर तोड़ दिया गया… फिर बना।सबरीमाला मंदिर के लिए इमेज परिणाम
हम यूँ ही आज तक नहीं बचे हुये हैं। हमारे बाद जन्मी असंख्य सभ्यताएं समाप्त हो गईं। सनातन के साथ का कोई धर्म नहीं बचा है आज भूमि पर, सबको साम्प्रदयिक तलवारें लील गयीं। और कितनी आसानी से लील गयीं इसका उदाहरण देख लीजिए-
किसी युग में पारसी सबसे कुशल योद्धा हुआ करते थे, और फारस का डंका बजता था विश्व भर में। उस फारस पर सातवीं शताब्दी में अरबी आक्रमण हुआ, और मात्र सौ वर्षों में फारस से पारसी धर्म फारस से पारसी धर्म के लिए इमेज परिणामपूर्णतः समाप्त हो गया। जी हाँ! मात्र सौ वर्षों में…
यह मात्र फारस की बात नहीं! यूनान, मिश्र, मध्यएशिया की बौद्ध संस्कृति, सब समाप्त हो गए, और वह भी मात्र एक एक प्रहार में… हम हजार वर्ष की परतन्त्रता और हजार प्रहारों के बाद भी पूरी शक्ति और सम्मान के साथ स्थापित हैं।
क्यों? कैसे?
हम इसलिए स्थापित हैं क्योंकि हमारे अंदर पुनरुद्धार की जिद्द थी। हमारे अंदर बार-बार उठ खड़े होने का साहस था। वे हमारे मन्दिरों को बार-बार तोड़ते रहे, हम उन्हें बार बार खड़ा करते रहे।
हम सबरीमाला को भी शुद्ध कर लेंगे। कोई व्यय नहीं, हम मात्र पंचगव्य से धो कर शुद्धि कर सकते हैं। यह बीस हजार वर्ष पुरानी परम्परा है, दो डायनों के कुकर्म से नहीं टूटेगी।
पर इस घटना ने हमें वर्तमान की चुनौतियों का दर्शन तो करा ही दिया है। इस घटना ने बता दिया है कि हमारी स्वतन्त्रता कितनी झूठी है। पूरे केरल की सभी सनातनी स्त्रियों के विरोध के बाद भी सुप्रीम कोर्ट और केरल की वामपंथी सरकार मिल कर हमारे मन्दिर को अपवित्र कर देती है, यह है हमारी धार्मिक स्वतंत्रता…
और इसमें विधर्मी सहयोग देख लीजिए। केरल की हमारी माताएँ बहनें जब मन्दिर की रक्षा के लिए आंदोलन करती हैं और मीलों लम्बी मानव श्रृंखला बनाती हैं, तो उसके अगले दिन ही ईसाई और मुस्लिम महिलाएं मन्दिर में प्रवेश के लिए आंदोलन शुरू कर देती हैं… और इस देश का कानून उनसे यह नहीं पूछता कि हिन्दुओं के तीर्थस्थल में प्रवेश के लिए वे क्यों आन्दोलन कर रही हैं। उन आक्रमणकारी महिलाओं से यह कोई नहीं पूछता कि जब सभी सनातनी स्त्रियां स्वयं मन्दिर में प्रवेश के विरुद्ध हैं तो ये नीच विधर्मी स्त्रियां क्यों मन्दिर भ्रष्ट कर रही हैं?
भइया! सनातन पर आज भी उतने ही प्रहार हो रहे हैं जितने मध्यकाल में हो रहे थे। अंतर बस यह है कि पहले पश्चिम से आने वाले असुर थे, अब वामपंथी हैं। तब बाबर-औरंगजेब थे, अब सुप्रीम कोर्ट है।
मित्र पहचानिए समय को, पहचानिए विधर्मी षडयन्त्रों को, पहचानिए आक्रमण के नए अस्त्रों को… धर्म की रक्षा सत्ता नहीं करती, धर्म की रक्षा प्रजा करती है। इन धार्मिक आतंकवादियों से रक्षा का एक ही मन्त्र है “घृणा”, उसी से हमारी रक्षा हो सकती है। धर्मनिरपेक्षता का ढोंग छोड़िये, धर्म से निरपेक्ष नहीं हुआ जा सकता। यदि कोई धर्मनिरपेक्षता का ज्ञान लेकर आये तो पूछिये कि हमारे मन्दिर को अपवित्र करने के लिए वह विधर्मी महिलाएं क्यों आंदोलन कर रही थीं? जो ईसाई आज तक किसी स्त्री को पोप या विशप नहीं बनाए, उनकी महिलाएं किस मुह से नारीवाद बघार रही हैं?हमने तो स्त्री ही नहीं किन्नरों तक को महमण्डलेश्वर बनाया है, फिर नारीवाद के नाम पर हमपर आक्रमण क्यों हो रहा है?
राजनीति से ऊपर उठिए, मोदी और राहुल, अखिलेश जैसे हजारों आये और इसी मिट्टी में मिल गए। कई हजार वर्षों पुराना राष्ट्र है यह। मोदी-राहुल महत्वपूर्ण नहीं हैं, महत्वपूर्ण है भारत, और महत्वपूर्ण है सनातन। क्योंकि भारत वहीं तक है जहाँ तक सनातन है। जहाँ से सनातन समाप्त हो जाता है वह खण्ड भारत नहीं रहता, पाकिस्तान, बंग्लादेश, अफगानिस्तान हो जाता है…
विपत्ति के इस काल मे भी यदि निरपेक्षता का ढोंग करते रहे, तो जो सभ्यता हजार वर्षों के इस्लामिक प्रहार से भी नहीं मरी वह मात्र सौ वर्ष के ईसाई प्रहार से मर जाएगी।
और हाँ! भगवान अय्यप्पा का घर पवित्र कर लेंगे हम…

सर्वेश तिवारी श्रीमुख भाई चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, मुस्कुराते हुएकी पोस्ट 
गोपालगंज, बिहार।

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