शहीद-श्रद्धांजलिः बारात की जगह जुलूस, बजे देशभक्ति गाने, तिरंगा ले पहुंचे दूल्हा-दुल्हन व बाराती

 गुजरात के वडोदरा में एक कपल ने अनोखी शादी की है। शादी के तीन पहले हुए पुलवामा हमले से दुखी कपल ने अपनी शादी समारोह के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। शादी में फिल्मी गानों की जगह देशभक्ति के गीत बजे तो बाराती हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए।वडोदरा:अपनी शादी को लेकर हर किसी के सपने होते हैं। वह शादी को यादगार बनाने के लिए तमाम प्रयास करते हैं। महीनों से शादी की तैयारियों की जाती हैं। ऐसी ही तैयारी गुजरात के वडोदरा में रहने वाले ऑटो रिक्शा ड्राइवर और वडोदरा सेंट्रल जेल में सुपरवाइजर महेश विरार की भी थी। उन्होंने अपनी शादी एक अनाथ लड़की दीपिका चौहान से करने का फैसला लिया। दोस्त उनकी शादी में नागिन डांस करने को बेकरार थे। घरवाले बारात निकालने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पुलवामा अटैक में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए महेश ने अपनी शादी का पूरा प्लान बदल दिया।

महेश की शादी के दिन दिन पहले हुए पुलवामा अटैक ने उन्हें हिलाकर रख दिया। महेश ने फैसला लिया कि वह अपनी शादी में बारात नहीं, बल्कि शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए जुलूस निकालेंगे। उनकी शादी तय तिथि को हुई। इसमें बाराती शामिल हुए, लेकिन यह बारात शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए जुलूस की शक्ल में निकाली गई। दुल्हन हाथों में जयमाल नहीं, तिरंगा लेकर आई तो स्टेज पर भी दोनों तिरंगा और पोस्टर लेकर ही बैठे।
बजे देशभक्ति के गीत, हाथों तिरंगा लेकर पहुंचे बाराती
महेश की शादी के इस जुलूस में फिल्मी गानें नहीं बजे, बल्कि देशभक्ति गीत बजाए गए। हर एक बाराती के हाथ में तिरंगा था। ‘मेरा रंग दे बसंती चोला…’ और ‘कर चले हम फिदा जान और तन साथियों…’ जैसे गानों के बीच लोग भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। यह अनोखी बारात जिधर से गुजरी, लोग इसमें हाथों में झंडा लेकर शामिल हो गए।

पोस्टर बैनर लेकर दी शहीदों को श्रद्धांजलि
इस अनोखी बारात में कई बारातियों के हाथ में पोस्टर और बैनर भी थे, जिनके जरिए वे शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे। इनमें लिखा था, ‘कौन कहता है कि भारत में सिर्फ 1427 शेर बचे हैं। 13 लाख शेर तो बॉर्डर पर तैनात हैं।’

शहीदों के परिवारों को गिफ्ट्स और कैश
महेश ने कहा, ‘हम स्लम में रहते हैं इसलिए जानते हैं कि जब कोई सीआरपीएफ का जवान शहीद होता है तो उसके परिवार पर क्या गुजरती है। उनके परिवारवालों को संघर्ष करना पड़ता है। जो दुखों को पहाड़ उनके ऊपर टूटता है उसे हम कम नहीं कर सकते लेकिन उन्हें श्रद्धांजलि दे सकते हैं इसलिए हमने अपनी शादी इस तरह से करने का फैसला लिया। हमने यह भी फैसला लिया है कि शादी में हमें जो भी गिफ्ट्स और कैश मिला है, वह सब हम शहीदों के परिवार को दे देंगे।’

शादी में 700 की जगह पहुंचे 1700 लोग
तुलसीवाडी रोड स्थित रमदेव पीर चाल में रहने वाले महेश के पिता दिनेश ने कहा कि वह आंगनबाड़ी केंद्रों पर खाना सप्लाई करने का काम करते हैं। इस बारात में सात सौ लोगों के खाने का इंतजाम किया गया था। जुलूस को देखकर कई लोग इसमें शामिल हो गए और लगभग एक हजार लोग अतिरिक्त आ गए। हम डर गए कि अब सारे लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल पाएगा लेकिन सभी को खाना हो गया कोई कमी नहीं हुई। यहां तक कि उन्हें शादी में उम्मीद से ज्यादा व्यवहार मिला है।

  • स्टेज पर तिरंगा और पोस्टर लेकर बैठा कपलशहीदों को श्रद्धांजलिः बारात की जगह निकला जुलूस, हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए दूल्हा-दुल्हन और बाराती

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