शशि थरूर जैसे नेताओं-बुद्धिजीवियों को आखिर कितने पाकिस्तान चाहिए ?

अगर आप थरूर  के बयान को इतिहास की नज़र से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि ये भाषा, बंटवारे की भाषा है.

भारत की राजनीति में आज एक नए शब्द का आविष्कार हुआ है. और वो शब्द है ‘हिंदू पाकिस्तान’. इस शब्द का डिज़ाइन कांग्रेस के नेता और बुद्धिजीवी शशि थरूर ने तैयार किया है. उन्होंने दो शब्दों का राजनीतिक मिश्रण तैयार किया है. हिंदू और पाकिस्तान. ये दोनों शब्द विरोधाभासी हैं. 1947 में पाकिस्तान के निर्माण की वजह से हिंदुस्तान के दो टुकड़े हो गए थे. पाकिस्तान की नींव में लाखों हिंदुओं की लाशें हैं लेकिन शशि थरूर ने इन दोनों शब्दों को राजनीति के गोंद से जोड़ दिया है. आपको याद होगा वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले एक और राजनीतिक शब्द Trend कर रहा था. भगवा आतंकवाद. हिंदू पाकिस्तान भी भगवा आतंकवाद से मिलता जुलता शब्द है. और हमें ये लगता है कि अब 2019 के लोकसभा चुनाव तक ये शब्द राजनीति में बार-बार उछाला जाएगा इसीलिए आज हम ‘हिंदू पाकिस्तान’ के राजनीतिक एजेंडे का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे. ताकि आप इस पूरी राजनीति को अच्छी तरह समझ सकें. शशि थरूर ने ये कहा है कि अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिला, तो भारत, हिंदू-पाकिस्तान बन जाएगा .                      

अगर आप इस बयान को इतिहास की नज़र से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि ये भाषा, बंटवारे की भाषा है. ये वही भाषा है जिसका प्रयोग मोहम्मद अली जिन्ना और उनके समर्थकों ने किया था. यानी शशि थरूर जैसे नेताओं के बयान और मुहम्मद अली जिन्ना की Two Nation Theory का DNA एक जैसा नज़र आता है. हम इस DNA को Decode करेंगे लेकिन सबसे पहले आप कांग्रेस के नेता शशि थरूर का वो बयान सुनिए जिसके बाद ये सारा विवाद पैदा हुआ है. हालांकि इसके बाद शशि थरूर ने इस बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया

जो पार्टी, ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे लगाने वालों का समर्थन करती है, जो पार्टी ‘छीन के लेंगे आज़ादी’ के नारे लगाने वालों के साथ खड़ी होती है जिसे अफज़ल गुरु के प्रति सहानुभूति है, उसी पार्टी के नेता शशि थरूर ने ये बयान दिया है. और कहा है कि भारत, हिंदू-पाकिस्तान बन जाएगा. ये बहुत चुभने वाली बात है. आखिर ऐसे नेताओं और बुद्धिजीवियों को कितने पाकिस्तान चाहिएं? शशि थरूर को बहुत पढ़ा लिखा और संभ्रांत व्यक्ति माना जाता है, वो कई बड़े पदों पर रहे हैं. और उन्हें भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के इतिहास की अच्छी खासी जानकारी है. लेकिन ऐसा लगता है कि इस विषय पर उनकी जानकारी में सुधार करने की ज़रूरत है. आज हम उन्हें कुछ ऐतिहासिक जानकारियां देंगे.

भारत की आबादी में करीब 80 फीसदी हिंदू हैं. भारत में 100 करोड़ से ज़्यादा हिंदू रहते हैं. क्या सिर्फ एक चुनाव में जीत या हार से रातों-रात हिंदुओं का DNA बदल सकता है? क्या बीजेपी के चुनाव जीतने से 100 करोड़ हिंदू एक झटके में पाकिस्तानियों की तरह कट्टर बन सकते हैं? इस पर कोई भी यकीन नहीं कर सकता. क्योंकि हिंदू धर्म, पूरी दुनिया का सबसे सहनशील धर्म है. ये बात खुद भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कही थी.

20 अक्टूबर 1927 को महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ी की साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडिया’ में एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था ‘मैं हिंदू क्यों हूं ?’ इस लेख में हिंदू धर्म  के बारे में महात्मा गांधी ने लिखा है कि अध्ययन करने पर जिन धर्मों को मैं जानता हूं, उनमें मैंने हिंदू धर्म को सबसे अधिक सहिष्णु पाया है. हिंदू धर्म में सैद्धांतिक कट्टरता नहीं है. हिंदू धर्म के अनुयायी ना सिर्फ दूसरे धर्मों का आदर कर सकते हैं बल्कि वो सभी धर्मों की अच्छी बातों को पसंद कर सकते हैं और उन्हें अपना सकते हैं. अहिंसा सभी धर्मों में है लेकिन हिंदू धर्म में इसकी उच्चतम अभिव्यक्ति और प्रयोग हुआ है. Image result for कितने पाकिस्तान

ये शब्द महात्मा गांधी के हैं. ये समझना मुश्किल है कि कांग्रेस पार्टी के नेता महात्मा गांधी को अपना पूज्य आदर्श पुरुष बताते हैं लेकिन उन्हें हिंदू धर्म के बारे में कही गई महात्मा गांधी की इन बातों पर कोई विश्वास ही नहीं है?

हमें लगता है कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए किसी को भी धर्म या मज़हब का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे समाज और देश में विभाजन होता है . कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है उसके मूल में बंटवारे का भाव है . उन्होंने कुछ काल्पनिक राजनीतिक परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए ये कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों को मिलने वाली बराबरी खत्म हो जाएगी . भारत, हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा. यानी भारत एक कट्टर हिंदू देश बन जाएगा. ये वैसी ही भाषा है. जैसी पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना इस्तेमाल करते थे. इसी तरह के बंटवारे वाले विचार अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद के भी थे.

कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह, संजय निरुपम, सलमान खुर्शीद, गुलाम नबी आज़ाद, सैफुद्दीन सोज़ और मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं ने कई ऐसे बयान दिए, जो भारत को कमज़ोर करते हैं. मीठे शब्द बोलकर आतंकवादियों का सम्मान करना, भारत की सेना पर सवाल उठाना, आतंकवादियों की मौत पर आंसू बहाना, कश्मीर पर भारत की सेना के खिलाफ बयानबाज़ी करना. ये सब बंटवारे वाली सोच को दर्शाते हैं. ये बंटवारे की भाषा है. ज़रा सोचिए कि क्या आप एक और बंटवारे के लिए तैयार हैं ? देश से प्यार करने वाला हर इंसान यही कहेगा कि ऐसा कभी नहीं होना चाहिए. लेकिन हमारे देश के कुछ नेताओं को हिंदुस्तान में भी पाकिस्तान नज़र आता है. और वो बंटवारे की भाषा बोलते हैं.Image result for कितने पाकिस्तान

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी आज एक विवादित बयान दिया है . उन्होंने शरीयत अदालतों का समर्थन किया है. सबसे पहले आप हामिद अंसारी के इस बयान को सुनिए. फिर हम आपको मुहम्मद अली जिन्ना और सर सैयद अहमद खां के ऐतिहासिक बयान भी दिखाएंगे. इससे आपको समझ में आ जाएगा कि आखिर बंटवारे की भाषा क्या होती है ?

बड़े आश्चर्य की बात है कि जो लोग खुद को Scholar, बुद्धिजीवी और Secular बताते हैं वो उस कानून के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं. जिससे ट्रिपल तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसी कुरीतियां चलती आई हैं और उनके ज़रिए महिलाओं का शोषण होता है. ख़ासतौर पर जब इस तरह की बातें भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति कह रहे हैं तो ये बहुत चिंता की बात है.

Personal Law यानी अपना कानून. ये बुद्धिजीवी गैंग का बहुत प्रिय शब्द है. आज से करीब 73 वर्ष पहले मुहम्मद अली जिन्ना ने भी अपनी संस्कृति और अपनी भाषा के नाम पर ही पाकिस्तान की मांग की थी.

पाकिस्तान के समर्थन में मुहम्मद अली जिन्ना ने कहा था किसी परिभाषा या राष्ट्र के किसी परीक्षण से हिंदू और मुसलमान दो प्रमुख राष्ट्र हैं. हम 10 करोड़ लोगों का देश हैं और इससे भी अधिक हम एक खास संस्कृति और सभ्यता, भाषा और साहित्य, कला, स्थापत्य, नामों, मूल्यों, कानूनों, नैतिक नियमों, वेशभूषा, कैलेंडर, इतिहास, परंपराओं, दृष्टिकोणों और इरादों वाले राष्ट्र हैं. संक्षेप में, जीवन पर और जीवन के बारे में हमारा अपना विशिष्ट दृष्टिकोण है. इसलिए अंतर्राष्ट्रीय विधि के सभी मानकों पर हम एक अलग राष्ट्र हैं.’ Image result for कितने पाकिस्तान

अब आप मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा पर गौर कीजिए. क्या ये वही भाषा नहीं है जो कांग्रेस के कुछ नेता, बुद्धिजीवी और कुछ मज़हबी पैरोकार इस्तेमाल करते हैं.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद खां ने भी 28 दिसंबर 1887 को एक भाषण में कहा था .

प्रतिनिधि सरकार यानी लोकतांत्रिक सरकार हिंदुस्तान के लिए उचित नहीं है. इसलिए कि अगर वोट लिए गए तो मुसलमान, मुसलमान को और हिंदू, हिंदुओं को वोट दे देंगे . ऐसी स्थिति में तीन चौथाई और एक चौथाई का अनुपात होगा. मुसलमानों को अंग्रेज़ सरकार पर पूरा भरोसा रखना चाहिए वही उनके अधिकारों की रक्षा कर सकती है और उन्हें कार्यपालिका में प्रभावशाली प्रति-निधित्व प्रदान कर सकती है. ये भी बंटवारे की भाषा है. ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस के नेताओं को जिन्ना और सर सैयद अहमद खां जैसे अलगाववादी विचारधारा वाले नेताओं से ही प्रेरणा मिलती है.

और सबसे दुर्भाग्य की बात ये है कि इस तरह के बयान ‘निजी राय’ के नाम पर दिए जाते हैं. कांग्रेस पार्टी भी ये कहकर विवादित बयानों से पल्ला झाड़ लेती है कि ये तो उनका ‘निजी बयान’  है . ये समझना बहुत मुश्किल है कि अगर सलमान खुर्शीद, दिग्विजय सिंह, संजय निरुपम ,गुलाम नबी आज़ाद और सैफुद्दीन सोज़ के बयान भी कांग्रेस के बयान नहीं है तो फिर आखिर कांग्रेस पार्टी है क्या ? आखिर एक ही पार्टी में निजी बयानों वाले इतने सारे नेता एक साथ कैसे हो सकते हैं ?

और सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि आखिर देश की सबसे पुरानी पार्टी आखिर चाहती क्या है? आखिर ये नेता हाफिज़ सईद से चरित्र प्रमाण पत्र क्यों लेना चाहते हैं? पाकिस्तानी बम बारूद पर कांग्रेसी फूल क्यों समर्पित किए जाते हैं? ये समझना बहुत मुश्किल है.

आज भारत और पाकिस्तान, अलग-अलग देश हैं. भारत का विभाजन, भारत के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान था लेकिन आज भी भारत विकास कर रहा है. भारत के बारे में कहा जाता है कि भारत Superpower बनेगा. पाकिस्तान में भले ही भारत से नफरत की राजनीति की जाती है लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के नेता भारत की तारीफ करने पर मजबूर हो जाते हैं. ये बहुत बड़ा विरोधाभास है कि भारत के नेता, भारत को हिंदू-पाकिस्तान कह रहे हैं, जबकि पाकिस्तान के नेता किसी भ्रम में नहीं हैं. वो भारत की नैतिकता, उदारता और शक्ति को अच्छी तरह पहचानते हैं.

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