उपनेता प्रतिपक्ष माहरा के साथ ‘बदसलूकी’ पर कांग्रेस का हंगामा, गेट के बाहर धरना

देहरादून,। उपनेता प्रतिपक्ष करण माहरा के साथ ‘बदसलूकी’ के आरोप को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बुधवार को सदन से लेकर सड़क तक अपना विरोध जताया। उप नेता प्रतिपक्ष करण माहरा ने विधानसभा परिसर में प्रवेश के दौरान पुलिस कर्मियों पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए इसे विशेषाधिकार हनन का मामला बताया और आरोपित पुलिस इंस्पेक्टर के निलंबन की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर गेट के समक्ष सड़क पर धरने पर बैठ गए।

सूचना मिलने पर नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इंदिरा हृदयेश समेत तमाम अन्य कांग्रेसी विधायक भी विधानसभा की कार्यवाही से वाकआउट कर विधानसभा गेट पर धरनास्थल पर पहुंचे। हालांकि इस मामले में पहले पुलिस व सुरक्षाकर्मियों का कहना था कि विधायक नहीं, बल्कि उनके साथ आए लोगों के पास मांगे गए थे। इस मसले पर दिन भर चले मान-मनौवल के बाद देर शाम आरोपित इंस्पेक्टर के माफी मांगने पर कांग्रेसियों ने धरना समाप्त किया।कांग्रेसी विधायक

बुधवार सुबह विधानसभा सत्र शुरू होने से ऐन पहले विधानसभा गेट पर उप नेता प्रतिपक्ष और विधायक करण महारा धरने पर बैठ गए। उनका आरोप था कि सुबह जब वह विधानसभा गेट पर पहुंचे तब पुलिस कर्मियों ने उनके वाहन को रोका और उनसे पास मांगा। जब उन्होंने पास दिखाया तो उनसे वाहन का पास मांगा गया और वाहन से नीचे उतरने को कहते हुए उनसे बदसूलकी की गई। इसके बाद जब वह इसके विरोध करते हुए बैठने लगे तो पुलिस कर्मियों ने फिर उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।इस दौरान शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी उन्हें मनाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माने। उप नेता प्रतिपक्ष के साथ बदसलूकी की बात सुन कर अन्य कांगे्रसी विधायकों ने आरोपित पुलिस कर्मी के निलंबन की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। इस पर एसएसपी निवेदिता कुकरेती कांग्रेसी विधायकने कांगे्रसी विधायकों को मनाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माने। तब तक सदन की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्‍होंने पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद उन्‍होंने सदन से वाकआउट कर दिया। कांग्रेसी विधानसभा गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। वहीं, जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम स्व अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर रखे जाने का संकल्प सदन के पटल रखा गया। संकल्प सर्व सहमति से पास हुआ। सकंल्प भारत सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद सदन की कार्रवाई गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हो गई।

बता दें कि रानीखेत के विधायक करन माहरा ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से कहासुनी भी हुई। इस बीच कांग्रेसी विधायक, प्रदेश अध्यक्ष व विधायक प्रीतम सिंह अन्य भी धरने पर बैठ गए। उन्‍होंने पुलिस कर्मी को सस्‍पेंड करने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने इसे विधायक के विशेषाधिकार हनन का मामला बताया और इस पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। इस पर ठोस कार्रवाई का आश्वासन न मिलने की बात कहते हुए उन्होंने अन्य विधायकों के साथ सदन से वाकआउट कर दिया और विधानसभा गेट के बाहर धरना स्थल पर पहुंच गए। मामला बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष ने पहले मार्शल, फिर विधानसभा सचिव जगदीश चंद्र और फिर संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत को कांग्रेसी विधायकों के पास भेजा।

फिर धरने पर बैठकर खाने लगे मूंगफली

कुछ ही देर में उनके समर्थन में सभी कांग्रेसी विधायक गेट पर पहुंचकर धरने पर बैठ गए। वहीं कुछ देर बार वे वहां बैठकर मूंगफली खाने लगे।

कांग्रेसी विधायक

संसदीय कार्यमंत्री ने कांग्रेसी विधायकों को आरोपित पुलिस कर्मी को लाइन हाजिर कर मामले की जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बावजूद कांग्रेसी विधायक निलंबन की मांग पर अड़े रहे। दोपहर बाद विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व विधायक प्रीतम सिंह को वार्ता के लिए बुलाया। कांग्रेसी विधायकयहां घटना की सीसी फुटेज देखी गई। यह सीसी फुटेज मुख्यमंत्री कार्यालय भी भेजी गई। देर शाम आइजी गढ़वाल अजय रौतेला और एसएसपी निवेदिता कुकरेती आरोपित पुलिस इंस्पेक्टर महेश लखेड़ा को लेकर कांग्रेसी विधायकों से मिले। इंस्पेक्टर द्वारा माफी मांगने के बाद यह प्रकरण समाप्त हुआ।

सत्र के लिए जाते मंत्री और विधायक

सत्र के लिए जाते मंत्री और विधायक।

वहीं आज रखे जाने वाले विधेयकों में 19 सितंबर को पारित न्यायालय शुल्क (उत्तराखंड संशोधन)  विधेयक और उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964) अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश संशोधन विधेयक। 20 सितंबर को पारित उत्तराखंड माल एवं सेवाकर (संशोधन) विधेयक, उत्तरखंड (उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959) संशोधन विधेयक, उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्राविधान विधेयक और उत्तराखंड सेवा निवृति  लाभ (संशोधन) विधेयक अधिनियम बनेंगे। इसके अलावा  सदन के पटल पर उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001 संशोधन अध्यादेश आएगा। यह अध्यादेश सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट के बाद निवेशकों को पर्वतीय जनपदों में आकर्षित करने के लिए लाया था। इसके तहत 12.5 एकड़ भूमि खरीद पर राजस्व नियमावलियों का सरलीकरण किया गया है। लोकसेवा  आयोग के सप्तदश  वार्षिक प्रतिवेदन और सेवा का अधिकार अधिनियम के अधीन उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखा जाएगा।

उधर, कैबिनेट ने जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नामकरण वाजपेयी के नाम पर करने का निर्णय लिया था। शीतकालीन सत्र के लिए बुधवार की कार्यसूची के अनुसार जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नाम परिवर्तित करने संबंधी संकल्प मुख्यमंत्री प्रस्तुत करेंगे। बुधवार को सदन में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2001) (संशोधन) विधेयक 2018 और उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पेश किए जाएंगे।

इसके अलावा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के वार्षिक प्रत्यावेदन सदन के पटल पर रखे जाएंगे। वहीं, विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति ने सत्र के लिए छह दिसंबर के कार्यक्रम भी तय कर दिए हैं। इस दिन उत्तराखंड विनियोग (वर्ष 2018-19 का प्रथम अनुपूरक) विधेयक 2018 पर विचार एवं पारण भी होगा।

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