MCLR लोन का क्या होगा
आपको मालूम है कि बैंक अलग-अलग तरह के लोन पर कई तरह से ब्याज दरों की गणना करते हैं। मसलन, मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड रेट यानी एमसीएलआर के साथ जुड़े लोन के मामले में ईएमआइ घटने की संभावना है। लेकिन इसके लिए आपको लोन रिसेट डेट का इंतजार करना पड़ेगा। इस मामले में कुछ बैंक छह महीने की और कुछ एक साल की रिसेट डेट तय करते हैं। ऐसे में आपको ब्याज दरों में कमी के फायदे उठाने के लिए रिसेट डेट का इंतजार करना पड़ेगा।
बेस रेट से बेहतर एमसीएलआर
अब बात करते हैं बेस रेट से जुड़े होम लोन के बारे में। अगर आपका होम लोन बेस रेट या बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर) से जुड़ा हुआ है तो आपको तत्काल एमसीएलआर आधारित होम लोन में शिफ्ट कर लेना चाहिए क्योंकि एमसीएलआर और एक्सटर्नल बेंचमार्क आधारित व्यवस्था में ज्यादा पारदर्शिता होती है।
नया लोन लेने वालों के लिए
अगर आप नया होम लेना चाहते हैं तो आपको भी एमसीएलआर आधारित लोन के पक्ष में फैसला करना चाहिए या फिर आपको एक्सटर्नल बेंचमार्क आधारित व्यवस्था का इंतजार करना चाहिए। बैंक अप्रैल, 2019 में इसकी घोषणा करेंगे। नए होम लोन ग्राहकों को प्रधानमंत्री आवास योजना में भी लोन लेने पर विचार करना चाहिए। सरकार ने इसकी अवधि मार्च, 2019 से बढ़ाकर मार्च, 2020 कर दी है।

ऐसे होगा आपका फायदा
फर्ज कीजिए कि आपने 20 साल के लिए 8.8 फीसद की ब्याज दर पर 30 लाख रुपये का होम लोन लिया है तो आपकी मौजूदा ईएमआइ 26607.10 रुपये बैठ रही है। अब ब्याज दरों में कटौती के बाद यह घटकर 8.55 फीसद हो जाएगी और 20 साल के इसी लोन पर आपकी ईएमआइ घटकर 26129.71 रुपये हो जाएगी। इस तरह आपको हर महीने लोन की किस्त पर 477.39 पैसे की बचत होगी।

बैंक कैसे तय करते हैं रेट
आपको बता दें कि अप्रैल, 2019 से बैंकों को अपनी ब्याज दरें तय करने के मामले में चार एक्सटर्नल बेंचमार्क में से किसी एक का इस्तेमाल करना होगा। ये चार बेंचमार्क इस प्रकार हैं

1- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का रेपो रेट जो इस समय 6.25 फीसद है

2- केंद्र सरकार की 91 दिन के ट्रेजरी बिल की ब्याज दर

3- केंद्र सरकार की 182 दिन के ट्रेजरी बिल की ब्याज दर

4- फाइनेंशियल बेंचमार्क प्राइवेट लिमिटेड की बाजार आधारित ब्याज दर

बेंचमार्क के बाद बैंक लेते हैं मार्जिन

इस बेंचमार्क ब्याज दर पर बैंक अपनी मार्जिन जोड़कर ग्राहक के लिए अंतिम ब्याज दर तय करते हैं। इस मामले में बैंकों को छूट मिली हुई है। इसी आधार पर विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों में अंतर पाया जाता है। बेंचमार्क ब्याज दर पर अधिकतम मार्जिन को कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं है, लेकिन मौजूदा समय में बैंक बेंचमार्क पर दो से तीन फीसद तक का मार्जिन रखकर चलते हैं। इस आधार पर ग्राहक के लिए ब्याज दर (रेपो रेट 6.25+मार्जिन 2-3 फीसद) 8.25 से 9.25 के बीच बैठेगी।

रिजर्व बैंक सभी क्षेत्रों के लिये पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा: गवर्नर

 रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र के लिये नकदी की कमी नहीं हो। रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर बाजार को आश्चर्यचकित कर दिया। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद होने वाले पारंपरिक संवाददाता सम्मेलन में दास ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम लगातार नकदी की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी क्षेत्र को नकदी की कमी नहीं हो।’’ चालू वित्त वर्ष में अब तक खुले

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र के लिये नकदी की कमी नहीं हो। रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर बाजार को आश्चर्यचकित कर दिया। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद होने वाले पारंपरिक संवाददाता सम्मेलन में दास ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम लगातार नकदी की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी क्षेत्र को नकदी की कमी नहीं हो।’’ चालू वित्त वर्ष में अब तक खुले बाजार में हस्तक्षेप के जरिये डाली गयी नकदी 2.36 लाख करोड़ रुपये पहुंच गयी है। केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर 0.25 प्रतिशत कम कर 6.25 प्रतिशत कर दी। साथ ही मौद्रिक नीति के बारे में अपना दृष्टिकोण को भी ‘नपी-तुली कठोरता’ वाले से नरम कर ‘तटस्थ‘ कर दिया है। रिजर्व बैंक ने खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को भी कम किया है। चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति अनुमान को कम कर 2.8 प्रतिशत किया गया है। दिसंबर, 2018 में यह 2.2 प्रतिशत रही थी। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही के खुदरा मुद्रास्फीति अनुमान को भी कम कर 3.2-3.4 प्रतिशत कर दिया इसके साथ ही 2019- 20 की तीसरी तिमाही के लिये मुद्रास्फीति अनुमान 3.9 प्रतिशत रखा गया है। इस बारे में दास ने कहा कि यह अनुमान मानसून के सामान्य रहने तथा कच्चे तेल के दाम को लेकर कोई नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होने की संभावना पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि मुद्रास्फीति का अनुमान कम करते समय बजट में किये गये विभिन्न प्रस्तावों और राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से आगे निकलने की आशंका को भी ध्यान में रखा गया है। डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि आरबीआई वास्तविक ब्याज दर लक्ष्य नहीं रखता। अंतरिम लाभांश भुगतान के बारे में दास ने कहा कि यह कानूनी प्रावधान है और निदेशक मंडल की 18 फरवरी को प्रस्तावित अगली बैठक में राशि तथा समय के बारे में निर्णय किया जाएगा तथा यह सरकार को तय करना है कि वह उसे कैसे खर्च करती है। सरकार को बढ़े हुए राजकोषीय घाटे के संशोधित लक्ष्य को हासिल करने के लिये अंतरिम लाभांश की काफी जरूरत है। दास ने यह भी कहा कि आरबीआई को बजट में जतायी गयी संभावना के अनुरूप जीएसटी संग्रह में तेजी की उम्मीद है। इसमें 18 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। आचार्य ने कहा कि आरबीआई के फंसे कर्ज से संबंधित 12 फरवरी 2018 के परिपत्र में संशोधन का कोई प्रस्ताव विचारार्थ नहीं है।