राहुल के ‘सम्मान’ में अब महासचिव हरीश रावत का भी  इस्तीफ़ा

“प्रेरणा देने की क्षमता केवल श्री राहुल गाँधी में है, उनके हाथों में बागडोर रहे तो यह संभव है कि हम 2022 में राज्यों में हो रहे चुनाव में वर्तमान स्थिति को बदल सकते हैं और 2024 में भाजपा और श्री नरेंद्र मोदी को परास्त कर सकते हैं।”

लोकसभा चुनाव 2019 में मिली करारी शिक़स्त के बाद से ही कॉन्ग्रेस में इस्तीफ़ों का दौर लगातार जारी है। राहुल गाँधी के त्यागपत्र के बाद पार्टी के एक और दिग्गज़ नेता ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। असम के प्रभारी व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कॉन्ग्रेस महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।

हरीश रावत के अनुसार, “लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी की हार और संगठनात्मक कमज़ोरी के लिए हम पदाधिकारीगण उत्तरदायी हैं। असम में पार्टी द्वारा अपेक्षित स्तर का प्रदर्शन न कर पाने के लिए प्रभारी के रूप में मैं उत्तरदायी हूँ। मैंने अपनी कमी को स्वीकारते हुए अपने महामंत्री के पद से पूर्व में ही त्यागपत्र दे दिया है।”

इसके आगे उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम करने के लिए मेरी स्थिति के लोगों के लिए पद आवश्यक नहीं है, मगर प्रेरणा देने वाला नेता आवश्यक है। प्रेरणा देने की क्षमता केवल श्री राहुल गाँधी में है, उनके हाथों में बागडोर रहे तो यह संभव है कि हम 2022 में राज्यों में हो रहे चुनाव में वर्तमान स्थिति को बदल सकते हैं और 2024 में भाजपा और श्री नरेंद्र मोदी को परास्त कर सकते हैं। इसलिए लोकतांत्रिक शक्तियाँ व सभी कॉन्ग्रेसजन, श्री राहुल गाँधी को अध्यक्ष पद पर देखना चाहते हैं।

राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफ़ा देने की जानकारी हरीश रावत ने फेसबुक पर भी शेयर की।

हाल ही में देहरादून में बुलाई गई कॉन्ग्रेस की समीक्षा बैठक में भी फूट देखने को मिली थी। इसमें कॉन्ग्रेस के हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इंदिरा हरदेश और पूर्व प्रदेश किशोर उपाध्याय समेत पार्टी के सभी पूर्व और वर्तमान विधायक भी मौजूद थे। ख़बर के अनुसार, कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जब प्रदेश कार्यालय पहुँचे, तो उन्हें रिसीव करने कोई भी बड़ा नेता नहीं पहुँचा था। इस बात से नाराज हरीश रावत बिना प्रदेश अध्यक्ष से मिले ही सीधे मीटिंग हॉल में पहुँच गए।

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