राफेल मामले में केंद्र की आपत्तियों पर फैसला सुरक्षित, एजी ने सुको से कहा, ‘सीएजी रिपोर्ट से 3 पेज गायब’

राफेल डील पर सरकार ने पेश किए दस्तावेज,अटॉर्नी जनरल ने कहा, गोपनीय दस्तावेज को साक्ष्य अधिनियम के तहत साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही ऐसे काग़ज़ों को पब्लिश ही किया जा सकता है.इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप दस्तावेज़ों के विशेषाधिकार की बात कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्टमें फैसला सुरक्षित

अटार्नी जनरल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जो काग़ज़ दिये हैं उन्हें सबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि वो चोरी किये गए है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गोपनीय दस्तावेज को साक्ष्य अधिनियम में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही ऐसे काग़ज़ों को पब्लिश ही किया जा सकता है.

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट दायर करने में सरकार से चूक हुई है, उसमे तीन पेज गायब है. वो इन पेज को भी रिकॉर्ड पर लाना चाहते है. अटारनी जनरल ने लीक हुई पेजों को रिव्यू पिटीशन से हटाने की मांग की.सरकार का दावा है कि ये प्रिविलेज्ड डॉक्यूमेंट है.अटॉर्नी जनरल ने कहा- रक्षा मंत्रालय से लीक दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका से हटाया जाए, क्योंकि उन दस्तावेजों पर भारत सरकार का अधिकार है. गोपनीय दस्तावेज को साक्ष्य अधिनियम में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता. इन कागजों को जो याचिकाकर्ता ने दिये हैं उन्हें सबूत नहीं माना जा सकता क्योंकि वो चोरी किये गए है. कागजों में राफेल की कीमत बताई गयी है जो सौदे के शर्तों का उल्लंघन है.इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप दस्तावेज़ों के विशेषाधिकार की बात कर रहे हैं. लेकिन, इसके लिए आपको सही तर्क पेश करने होंगे.

>> राफेल डील पर सरकार के द्वारा जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, उसपर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

>> सुनवाई के दौरान अरुण शौरी ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने एफिडेविट में दस्तावेजों के असली होने की बात स्वीकारी है. जिसके लिए हम उन्हें शुक्रिया कहेंगे. अटॉर्नी जनरल ने दाखिल किए गए एफिडेविट में कहा कि फोटो कॉपी के माध्यम से राफेल डील के दस्तावेजों को लीक किया गया.

> जस्टिस जोसेफ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि जिन दस्तावेजों के बारे में बात हो रही है. हम उनके बारे में जानते ही नहीं हैं. उन दस्तावेजों में ऐसा क्या है जिसे हम भी नहीं देख सकते हैं. इसपर अटॉनी जनरल ने कहा कि उन दस्तावेजों को देखा जा सकता है. इस डील में साफ है कि ये सरकारों के बीच का सौदा है, इसलिए दाम बताना उचित नहीं है.
>> प्रशांत भूषण ने कहा कि 2जी में भी ऐसा ही हुआ था. किसी अंजान व्यक्ति ने पूर्व सीबीआई डॉयरेक्टर रंजीत सिन्हा के घर का एंट्री रजिस्टर दिया था. भूषण ने 2जी और कोल घोटाले के संबंध में आरोपियों की बैठकों का भी जिक्र किया. हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को मामने से इंकार कर दिया है.
>> केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जरनल ने कहा कि राफेल दो सरकारों के बीच का मामला है. इसलिए हमनें कैग को कहा था कि रिपोर्ट में दाम का जिक्र न करें.
>> इसपर प्रशांत भूषण ने कहा कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है, इसलिए सरकार यह चाहती है कि कोर्ट इसमें दखल न दें.
>> सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने तर्क देते हुए कहा कि अगर दस्तावेज चोरी हुए थे, तो सरकार ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई. अपनी जरुरतों के अनुसार सरकार इन दस्तावेजों का खुलासा करती रही है. सरकार को ये कैसे पता कि कैग रिपोर्ट में क्या होगा?
>> सुप्रीम कोर्ट में तर्क देते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है.
>> इसपर जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि जिन संस्थानों में ऐसा नियम है और अगर उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो जानकारी देनी पड़ती है.
>> सुनवाई के दौरान जस्टिस एसके कौल ने अटॉनी जनरल से कहा कि आप विशेषाधिकार की मांग कर रहे हैं. लेकिन आप दस्तावेज बदल रहे हैं.
>> इसपर अटॉनी जनरल ने कहा कि डॉक्यूमेंट्स दूसरी पार्टी ने पेश किए हैं, हमने नहीं.
>> राफेल पर सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने अटॉनी जनरल से कहा कि कैग की जो रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी. उनमें कुछ कागजात नहीं थे. रिपोर्ट के शुरुआती तीन पन्ने गायब थे. चीफ जस्टिस ने कहा कि आपको सही तर्क पेश करने होंगे.वकील एमएल शर्मा- अगर दस्तावेज गोपनीय है तो सरकार ने अभी तक उक्त मामले में ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत केस क्यों नहीं दर्ज कराया?

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मामले में अभी जांच चल रही है.

याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि – ये दस्तावेज और काग़ज़ तो पहले से ही पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं, जिन दस्तावेजों की चोरी की बात कही जा रही है वो सभी कागजात पब्लिक में पहले से पडे है अगर एक बार डाक्यूमेंट पब्लिक में हैं तो उसे कैसे ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट में माना जाएगा.

प्रशांत भूषण ने कहा कि भारत सरकार ने खुद रक्षा मंत्रालय की फाइलों में से ये सूचना अपनी भरोसेमंद मीडिया को लीक की थी. असल मे भारत सरकार की प्राथमिक चिंता राष्ट्र सुरक्षा नहीं बल्कि उन सरकारी अधिकारियों को सुरक्षित करना है जो राफेल डील से संबंधित सौदेबाजी की प्रक्रिया में शामिल थे.

फाइल में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे छिपाया जा सके. आरटीआई के आने के बाद जानकारियों की दुनिया में एक क्रांति आई है. भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों में संवेदनशील विभागों को भी जानकारियां सार्वजनिक करनी पड़ती है.

सरकार द्वारा फाइल की गई सीएजी रिपोर्ट में 10 तरह की रक्षा खरीद का विवरण है. केवल राफेल से संबंधित जानकारी को संशोधित किया गया है, ऐसा क्यों ?

नवंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया था कि सीएजी रिपोर्ट संशोधित की गई है, यहां सवाल उठता है कि सरकार को कैसे पता था कि सीएजी रिपोर्ट को संशोधित किया गया?

वकील प्रशांत भूषण ने प्रेस काउंसिल एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्रोत का खुलासा नहीं किया जा सकता है. उन्होंने 2जी और कोयला घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ दिया, जिसमें कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अपने स्रोत को न बताने की अनुमति दी थी.

प्रशांत भूषण – इसका राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना देना नहीं है. सरकार ने राफेल डील की प्रक्रिया में गड़बड़ी की है जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर छुपाना चाहती है.

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