राफेल पर ‘इंटरनल नोट’ : संसद में हंगामा; रक्षा मंत्री ने दिया जवाब, NAC का मुद्दा उठाया

राफेल डील पर संसद में रक्षा मंत्री ने दिया जवाब।  |

नई दिल्ली : राफेल सौदे पर लीक रिपोर्ट की गूंज शुक्रवार को संसद में भी सुनाई पड़ी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को जवाब देने के लिए आगे आना पड़ा। रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को इस मामले में हंगामा करने की जगह उसे यह देखना चाहिए कि उसके तत्कालीन रक्षा मंत्री ने क्या कहा था। बता दें कि राफेल सौदे पर ‘इंटरनल नोट’ लीक होने पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। रक्षा मंत्री ने समाचार पत्र की रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र को अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन रक्षा मंत्री की राय भी लेनी चाहिए थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस रिपोर्ट की सत्यता एवं तथ्य के बारे में उनके कोई संपर्क नहीं किया और न ही उनकी राय ली गई। सीतारमन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने ‘सेलेक्टिव तरीके’ से अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है। दरअसल, समाचार पत्र ने रक्षा मंत्रालय की पूरी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है लेकिन टाइम्स नाउ के पास रक्षा मंत्रालय की वह पूरी रिपोर्ट है और यह रिपोर्ट एक दूसरा पक्ष रखती है जिसे समाचार पत्र ने नजरंदाज किया है।  राफेल सौदे से जुड़े रक्षा मंत्री का यह ‘इंटरनल नोट’फ़ोटो का कोई वर्णन उपलब्ध नहीं है. समाचार पत्र द हिंदू में प्रकाशित हुआ है और इस रिपोर्ट को आधार बनाकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस नोट से उनकी बात सही साबित हुई कि प्रधानमंत्री निजी तौर राफेल डील पर चर्चा में शामिल थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल विमानों की खरीद को लेकर डील के बातचीत में खुद पीएमओ शामिल था और समानांतर बातचीत कर रहा था। रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के एक असहमति पत्र (Dissent note) का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि इसमें चेताया गया था कि भारतीय नेगोशिएशन टीम से इतर किसी के भी इसमें समानांतर तौर पर शामिल होने से डील की नेगोशिएशन प्रभावित हो सकती है और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस बारे में ‘सलाह’ दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह नोट 24 नवंबर, 2015 को तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के ध्‍यानार्थ लाया गया था।लोकसभा में सीतारमण ने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय के इस नोट पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जवाब दिया है।’ रक्षा मंत्री ने इस नोट पर हंगामा करने पर पूछा कि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक एनएसी चल रहा था। क्या यह प्रधानमंत्री कार्यालय में दखल नहीं था? यह क्या था?

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रक्षा मंत्रालय ने इसको लेकर आपत्ति जताई कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांस के साथ समानांतर बातचीत की जिससे इस बातचीत में रक्षा मंत्रालय का पक्ष कमजोर हुआ। दरअसल समाचार पत्र में रक्षा मंत्रालय की जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है उसमें पत्र का निचला हिस्सा नहीं है। जबकि रक्षा मंत्रालय की नोटिंग के अंतिम पैरे में कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और फ्रांस के राष्ट्रपति का कार्यालय केवल इस डील की प्रगति की निगरानी कर रहा है लेकिन हाथ से लिखे गए इस नोटिंग को रिपोर्ट में जगह नहीं दी गई है। इसमें यह कहीं नहीं लिखा है कि इस डील के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ओर फ्रांस की सरकार के बीच समानांतर बातचीत चल रही थी। इसमें यही लिखा है कि दो सरकारें केवल इस राफेल डील की प्रगति की निगरानी कर रही हैं।  इस रिपोर्ट का निचला हिस्सा पढ़ने से इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर पेश होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार को नीचा दिखाने या उसे शर्मसार करने के लिए यह रिपोर्ट लीक की गई। क्या अखबार ने यह रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले यह सुनिश्चित किया कि उसे पूरा नोट सौंपा गया है। क्या उसने सरकार पर गंभीर आरोप लगाने वाली इस रिपोर्ट की सच्चाई जानने के लिए रक्षा मंत्रालय या रक्षा मंत्री से संपर्क किया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा है कि इस बारे में समाचार पत्र ने उनकी राय जानने की कोशिश नहीं की।

रक्षा मंत्री ने संसद के बाहर मीडियाकर्मियों से कहा कि एक समाचार पत्र रक्षा सचिव की ओर से लिखे गए फाइल नोटिंग को प्रकाशित करता है तो उसकी पत्रकारिता की नैतिकता यह भी मांग करती है कि उसे तत्कालीन रक्षा मंत्री का जवाब भी प्रकाशित करना चाहिए। इस रिपोर्ट में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का बयान भी नहीं है। पर्रिकर का बयान भी रक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट में है लेकिन उनकी बात को समाचार पत्र में जगह नहीं दी गई है।

मुझे निर्मला सीतारमण से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं: एन राम

हिन्‍दू ग्रुप के चेयरमैन एन राम ने कहा, “मुझे निर्मला सीतारमण से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए. अब वे मुसीबत में हैं और पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं. उनको मेरी यही सलाह है, आप लेन-देन में शामिल नहीं हैं, आप उसे बचाने का बोझ अपने ऊपर क्‍यों ले रही हैं जिसे बचाया नहीं जा सकता.

राफेल डील पर पीएम मोदी के असहमति नोट पर प्रतिक्रिया देते हुए हिन्‍दू ग्रुप के चेयरमैन एन राम ने कहा, “स्‍टोरी अपने आप में पूरी है क्‍योंकि हमने इसमें मनोहर पर्रिकर की भूमिका की बात नहीं की है और इसके लिए जांच की जरूरत है.”
हिंदू ग्रुप के चेयरमैन एन राम ने कहा, “मनोहर पर्रिकर ने ऐसा नहीं कहा कि वे मॉनिटरिंग कर रहे हैं. पीएमओ और फ्रेंच राष्‍ट्रपति का ऑफिस मॉनिटरिंग कर रहे थे. यह मॉनिटरिंग नहीं होती, इसे डील पर बातचीत करने वाली भारतीय टीम के पीछे से समानांतर बातचीत करना कहा जाएगा.”

अंग्रेजी समाचार पत्र हिंदू ग्रुप के चेयरमैन एन राम ने राफेल डील पर सामने आई चिट्ठी को लेकर कहा, “मनोहर पर्रिकर की भूमिका की जांच अलग से होनी चाहिए ताकि पता लगाया जा सके कि उनसे इस बारे में पूछा गया था या नहीं. उन्‍होंने सफाई दी है कि वो बातचीत से जुड़े हुए थे. लेकिन वह कोई स्‍टैंड नहीं ले रहे हैं.”

 पूर्व रक्षा सचिव का बयान, कहा- रक्षा मंत्रालय ने कीमत पर नहीं जताई थी कोई आपत्ति

वहीं मोहन कुमार ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि जो कुछ भी सामने आया है, उसका कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है.

राफेलः पूर्व रक्षा सचिव का बयान, कहा- रक्षा मंत्रालय ने कीमत पर नहीं जताई थी कोई आपत्तिवहीं मोहन कुमार ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि जो कुछ भी सामने आया है, उसका कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है.

राफेल डील पर नए सिरे से राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. रिपोर्ट में पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमार की नोटिंग का जिक्र है. वहीं जी मोहन कुमार ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि जो कुछ भी सामने आया है, उसका कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है. बता दें कि राफेल डील के समय जी मोहन रक्षा सचिव थे.

नोट में कीमत के बारे में ही नहीं कई और अहम बातों का भी जिक्र था
द हिंदू की रिपोर्ट आने के बाद राफेल समझौते के समय रक्षा सचिव रहे जी मोहन कुमार का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा है, उस नोट का कीमत से कोई लेना-देना नहीं था. वह सिर्फ सोवरेन गारंटी, सामान्य नियमों और शर्तों के बारे में था. उस नोट में सिर्फ कीमत के बारे में ही नहीं बल्कि कई और अहम बातों का भी जिक्र था. दरअसल शुक्रवार को अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिस वक्त रक्षा मंत्रालय राफेल फाइटर जेट लीड को लेकर काम कर रहा था उसी वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय फ्रांस की सरकार के साथ डील कर रही थी जिसकी वजह से समझौते की मेज पर भारत का पक्ष कमजोर पड़ गया.

‘इंटरनल नोट’ पर लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘हम इसकी जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति की मांग करते हैं। जेपीसी से सबकुछ साफ हो जाएगा। अब हम कोई सफाई नहीं चाहते। हमने पीएम और अन्य से बहुत सफाई सुन चुके हैं।’

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