रानी लक्ष्‍मीबाई की सेना के दुर्गा दल की सेनापति झलकारी बाई का जन्‍म हुआ था आज

इतिहास में 22 नवंबर यानि आज के दिन कई महत्वपूर्ण घटी जिनमें अंग्रेजो के खिलाफ आजादी की जंग छेड़ने वाली रानी लक्ष्‍मीबाई की सेना की मुख्‍य सदस्‍य झलकारी बाई का जन्म और कई घटनाएँ शामिल है। उन्हीं घटनाओं के बारें मे हम जानेंगे।

22 November History

  • सन 1943 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान को हराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट, ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और चीनी शासक च्यांग काई शेक के बीच मंत्रणा हुई।
  • अमेरिका के रिचमंड हिल्स में 1950 में हुयी रेल दुर्घटना में ७९ लोगों की मृत्यु हो गई।
  • डलास (टेक्सास) में 1963 में सं.रा. अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ़, केनेडी की हत्या।
  • संयुक्त राष्ट्र ने 1967 में 242वां प्रस्ताव पारित करके इजरायल को जमीन वापस करने का निर्देश दिया।
  • मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने के प्रस्ताव को 1968 में लोकसभा से स्वीकृति मिली।
  • भारत और पाकिस्तान ने 1971 में एक दूसरे की हवाई सीमाओं का उल्लंघन किया और दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष शुरू हुआ।
  • जुआन कार्लोस 1975 में स्पेन के राजा बने।
  • सन 1989 को आज ही के दिन मंगल, शुक्र, शनि, यूरेनस, नेप्च्यून और चंद्रमा एक ही सीध में आये।
  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर द्वारा 1990 में त्यागपत्र की घोषणा।
  • भारत की डायना हेडेन 1997 में विश्व सुंदरी बनी।
  • बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 1998 में ढाका की अदालत में आत्मसमर्पण किया।
  • पाकिस्तान व ईरान पर 2000 में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिबंध।
  • मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजन के विरोध में 2002 में नाइजीरिया में भड़के दंगे में सैंकड़ों लोग मारे गये।
  • हिन्दी के प्रख्यात कवि कुंवर नारायण को वर्ष 2005 के ज्ञानपीठ पुरस्कार हेतु चुना गया।
  • भारत और वैश्विक कंसोर्टियन के छह अन्य देशों ने 2006 में सूर्य की तरह ऊर्जा पैदा करने वाले प्राथमिक फ़्यूजन रिएक्टर की स्थापना करने के लिए पेरिस में ऐतिहासिक समझौता किया।
  • ब्रिटेन में अवैध प्रवासी की समस्या पर काबू पाने के लिए 2007 में कड़ी घोषणायें की गईं।
  • भारती क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने 2008 में अपना पद छोड़ने की धमकी दी।

22 नवंबर को जन्मे व्यक्ति

  • दुनिया की मशहूर ट्रेवल कंपनी थॉमस कुक एंड संस के संस्‍थापक थॉमस कुक का जन्‍म 1808 में हुआ था.
  • अंग्रेजो के खिलाफ आजादी की जंग छेड़ने वाली रानी लक्ष्‍मीबाई की सेना की मुख्‍य सदस्‍य झलकारी बाई का जन्‍म 1830 में हुआ था. Jhalkaribai Statue at Gwalior.jpgग्वालियर में घुड़सवार के रूप में झलकारी बाई की प्रतिमा
  • झलकारी बाई(२२ नवंबर १८३० – ४ अप्रैल १८५७झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को धोखा देने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया। उन्होंने प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झाँसी की रानी के साथ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अद्भुत वीरता से लड़ते हुए ब्रिटिश सेना के कई हमलों को विफल किया था। यदि लक्ष्मीबाई के सेनानायकों में से एक ने उनके साथ विश्वासघात न किया होता तो झांसी का किला ब्रिटिश सेना के लिए प्राय: अभेद्य था। झलकारी बाई की गाथा आज भी बुंदेलखंड की लोकगाथाओं और लोकगीतों में सुनी जा सकती है। भारत सरकार ने २२ जुलाई २००१ में झलकारी बाई के सम्मान में एक डाक टिकटImage result for झलकारी बाई जारी किया है, उनकी प्रतिमा और एक स्मारक अजमेरराजस्थान में निर्माणाधीन है, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनकी एक प्रतिमा आगरा में स्थापित की गयी है, साथ ही उनके नाम से लखनऊ में एक धर्मार्थ चिकित्सालय भी शुरु किया गया है।

    प्रारंभिक जीवन

    झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को झांसी के पास के भोजला गाँव में एक निर्धन कोली परिवार में हुआ था। झलकारी बाई के पिता का नाम सदोवर सिंह और माता का नाम जमुना देवी था। जब झलकारी बाई बहुत छोटी थीं तब उनकी माँ की मृत्यु के हो गयी थी और उसके पिता ने उन्हें एक लड़के की तरह पाला था। उन्हें घुड़सवारी और हथियारों का प्रयोग करने में प्रशिक्षित किया गया था। उन दिनों की सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा तो प्राप्त नहीं हो पाई, लेकिन उन्होनें खुद को एक अच्छे योद्धा के रूप में विकसित किया था। झलकारी बचपन से ही बहुत साहसी और दृढ़ प्रतिज्ञ बालिका थी। झलकारी घर के काम के अलावा पशुओं के रखरखाव और जंगल से लकड़ी इकट्ठा करने का काम भी करती थी। एक बार जंगल में उसकी मुठभेड़ एक तेंदुए के साथ हो गयी थी और झलकारी ने अपनी कुल्हाड़ी से उस जानवर को मार डाला था। एक अन्य अवसर पर जब डकैतों के एक गिरोह ने गाँव के एक व्यवसायी पर हमला किया तब झलकारी ने अपनी बहादुरी से उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर दिया था। उसकी इस बहादुरी से खुश होकर गाँव वालों ने उसका विवाह रानी लक्ष्मीबाई की सेना के एक सैनिक पूरन कोरी से करवा दिया, पूरन भी बहुत बहादुर था और पूरी सेना उसकी बहादुरी का लोहा मानती थी। एक बार गौरी पूजा के अवसर पर झलकारी गाँव की अन्य महिलाओं के साथ महारानी को सम्मान देने झाँसी के किले में गयीं, वहाँ रानी लक्ष्मीबाई उन्हें देख कर अवाक रह गयी क्योंकि झलकारी बिल्कुल रानी लक्ष्मीबाई की तरह दिखतीं थीं (दोनो के रूप में आलौकिक समानता थी)। अन्य औरतों से झलकारी की बहादुरी के किस्से सुनकर रानी लक्ष्मीबाई बहुत प्रभावित हुईं। रानी ने झलकारी को दुर्गा सेना में शामिल करने का आदेश दिया। झलकारी ने यहाँ अन्य महिलाओं के साथ बंदूक चलाना, तोप चलाना और तलवारबाजी की प्रशिक्षण लिया। यह वह समय था जब झांसी की सेना को किसी भी ब्रिटिश दुस्साहस का सामना करने के लिए मजबूत बनाया जा रहा था।

    स्वाधीनता संग्राम में भूमिकाImage result for झलकारी बाई

    लार्ड डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति के चलते, ब्रिटिशों ने निःसंतान लक्ष्मीबाई को उनका उत्तराधिकारी गोद लेने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि वे ऐसा करके राज्य को अपने नियंत्रण में लाना चाहते थे। हालांकि, ब्रिटिश की इस कार्रवाई के विरोध में रानी के सारी सेना, उसके सेनानायक और झांसी के लोग रानी के साथ लामबंद हो गये और उन्होने आत्मसमर्पण करने के बजाय ब्रिटिशों के खिलाफ हथियार उठाने का संकल्प लिया। अप्रैल १८५८ के दौरान, लक्ष्मीबाई ने झांसी के किले के भीतर से, अपनी सेना का नेतृत्व किया और ब्रिटिश और उनके स्थानीय सहयोगियों द्वारा किये कई हमलों को नाकाम कर दिया। रानी के सेनानायकों में से एक दूल्हेराव ने उसे धोखा दिया और किले का एक संरक्षित द्वार ब्रिटिश सेना के लिए खोल दिया। जब किले का पतन निश्चित हो गया तो रानी के सेनापतियों और झलकारी बाई ने उन्हें कुछ सैनिकों के साथ किला छोड़कर भागने की सलाह दी। रानी अपने घोड़े पर बैठ अपने कुछ विश्वस्त सैनिकों के साथ झांसी से दूर निकल गईं।Image result for झलकारी बाई

    झलकारी बाई का पति पूरन किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गया लेकिन झलकारी ने बजाय अपने पति की मृत्यु का शोक मनाने के, ब्रिटिशों को धोखा देने की एक योजना बनाई। झलकारी ने लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने और झांसी की सेना की कमान अपने हाथ में ले ली। जिसके बाद वह किले के बाहर निकल ब्रिटिश जनरल ह्यूग रोज़ के शिविर में उससे मिलने पहँची। ब्रिटिश शिविर में पहुँचने पर उसने चिल्लाकर कहा कि वो जनरल ह्यूग रोज़ से मिलना चाहती है। रोज़ और उसके सैनिक प्रसन्न थे कि न सिर्फ उन्होने झांसी पर कब्जा कर लिया है बल्कि जीवित रानी भी उनके कब्ज़े में है। जनरल ह्यूग रोज़ जो उसे रानी ही समझ रहा था, ने झलकारी बाई से पूछा कि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए? तो उसने दृढ़ता के साथ कहा,मुझे फाँसी दो। जनरल ह्यूग रोज़ झलकारी का साहस और उसकी नेतृत्व क्षमता से बहुत प्रभावित हुआ और झलकारी बाई को रिहा कर दिया गया। इसके विपरीत कुछ इतिहासकार मानते हैं कि झलकारी इस युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुई। एक बुंदेलखंड किंवदंती है कि झलकारी के इस उत्तर से जनरल ह्यूग रोज़ दंग रह गया और उसने कहा कि “यदि भारत की १% महिलायें भी उसके जैसी हो जायें तो ब्रिटिशों को जल्दी ही भारत छोड़ना होगा”।

    ऐतिहासिक एवं साहित्यिक उल्लेख

    मुख्यधारा के इतिहासकारों ने झलकारी बाई के योगदान को बहुत विस्तार नहीं दिया गया है, लेकिन आधुनिक स्थानीय लेखकों ने उन्हें गुमनामी से उभारा है। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल (२१-१०-१९९३ से १६-०५-१९९९ तक) और श्री माता प्रसाद ने झलकारी बाई की जीवनी की रचना की है। इसके अलावा चोखेलाल वर्मा ने उनके जीवन पर एक वृहद काव्य लिखा है, मोहनदास नैमिशराय ने उनकी जीवनी को पुस्तकाकार दिया है और भवानी शंकर विशारद ने उनके जीवन परिचय को लिपिबद्ध किया है। Image result for झलकारी बाईराष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने झलकारी की बहादुरी को निम्न प्रकार पंक्तिबद्ध किया है –

    जा कर रण में ललकारी थी, वह तो झाँसी की झलकारी थी।
    गोरों से लड़ना सिखा गई, है इतिहास में झलक रही,
    वह भारत की ही नारी थी।
  • भारत की प्रथम महिला चिकित्सक रुक्माबाई का जन्‍म 1864 में हुआ था.
  • भारत के प्रसिद्ध उद्योगपतियों में से एक वालचंद हीराचंद का जन्‍म 1882 में हुआ था.
  • ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम’ में महात्मा गाँधी के सिद्धांतों से प्रभावित होकर खादी का प्रचार करनेवाली एक ब्रिटिश सैन्‍य अधिकारी की पुत्री मीरा बेन का जन्‍म 1892 में हुआ था.
  • भारतीय स्वतंत्रता सेनानी शहीद लक्ष्मण नायक का जन्म 1899 में हुआ।
  • वरिष्ठ भारतीय स्वतंत्रता सेनानी शांति घोष का जन्म 1916 में हुआ।
  • समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का जन्म 1939 में हुआ।
  • नौकायन में भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ियों में गिने जानेवाले पुष्पेन्द्र कुमार गर्ग का जन्म 1963 में हुआ।
  • 22 नवंबर को हुए निधन
  • प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा कट्टर सिक्ख नेता तारा सिंह का निधन 1967 में हुआ।
  • मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव का निधन 2016 में हुआ।
  • हिन्दी और भोजपुरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार विवेकी राय का निधन 2016 में हुआ।

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