रवि डबराल की पुस्तक ‘लालच वासना लत’ लॉन्च

देहरादून 07 फरवरी ! लेखक रवि डबराल की पृष्ठभूमि उत्तराखंड राज्य है लेखक जो शैक्षिक रूप से उच्च योग्य तथा पेशे से एक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी व्यापारी हैं ने एक उपन्यास लिखा है। वह भौतिक दुनिया के रहस्यों के बारे में जानते हैं और साथ ही साथ दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने जनवरी 2019 में ‘लालच वासना लत’ नामक अपनी उपन्यास लॉन्च किया है।
यह पुस्तक भारत में नोशन प्रेस से प्रकाशित की गई है और पेपरबैक अब सभी प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफार्मों जैसे कि नोशनप्रेस.कॉम, अमेजन.इन, अमेजन.कॉम, अमेजन.सीओ.यूके, फ्लिपकार्ट.कॉम, इन्फिबीम.कॉम, आदि पर उपलब्ध है। ई-पुस्तक अमेजन-किंडल, कोबो, गूगल प्ले, आईबुक्स, इत्यादि पर उपलब्ध है। पुस्तक भारत में प्रमुख बुकस्टोर्स पर भी उपलब्ध है। अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में बिकने वाली इस पुस्तक की कीमत क्रमशः रूपये 299 और रूपये 335 है। े
यह दूसरी पुस्तक है, जिसे डबराल ने लिखा है, लेकिन इस लॉन्च के बारे में विशेष उत्साह है, क्योंकि इस बार वह अपने पाठकों को कहानी की काल्पनिक शैली के साथ जोड़ते हैं, भौतिकवाद और आध्यात्मिक दुनिया के बीच विचरण और चित्रण करते हुए।
मनोविज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिकता में उनकी तीव्र जिज्ञासा उन्हें विभिन्न लेखन शैलियों की खोज करने के लिए सुसज्जित करती है, जो उनकी पूर्व गैर-काल्पनिक पुस्तक ‘‘एक स्वस्थ, समृद्ध और सुखी जीवन का रहस्य‘‘ में परिलक्षित होती है। अपनी कॉर्पोरेट और आध्यात्मिक यात्रा और अनुभवों को साझा करते हुए, डबराल ‘‘दोषों पर कैसे विजय पाई जाए” का एक मजबूत संदेश देतें है।
‘लालच वासना लत’
यह उपन्यास एक खोजी पत्रकार की यात्रा को दर्शाता है, जो भ्रष्ट भौतिक संसार के रहस्यों को रोमांचकारी रूप से उजागर करता है। भ्रष्ट राजनेताओं, लालची व्यापारियों, कठपुतली मीडिया, असंवेदनशील पुलिस और यहां तक कि एकपक्षपातपूर्ण न्यायपालिका के अधीन इस समाज में, क्या इस पत्रकार को सत्य साबित करने में सफलता मिल पायेगी? क्या वह इन लालची और खतरनाक लोगों के बीच जीवित रह पायेगा? क्या उसे एक सूखे पत्ते की तरह कुचल दियाजायेगा? या फिर, क्या वह हिमालय के आश्रमों में साधनारत आध्यात्मिक योगियों की सहायता से इन शक्तिशाली लोगों का सामना कर पायेगा?
भौतिकवाद, आधुनिक पीढ़ी का मूल मंत्र है, जिसका आदर्श वाक्य ‘खाना, पीना और आनंद लेना’ है। यह दर्शन ‘लालच, वासना और लत’ को जन्म देता है, जो कि हमारे भीतर के दोष हैं। इसके विपरीत, आध्यात्मिकता ‘गुण, मूल्यऔर नैतिकता’ में विश्वास करती है तथा एक ‘संतुष्ट, तनावमुक्त और उद्देश्यपूर्ण जीवन’ जीने के लिए प्रेरित करती है।
लेखक रवि डबराल के बारें में
लेखक रवि डबराल ‘शिक्षा, कॉर्पोरेट और सामाजिक सेवाओं के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार’ के अंतर्राष्ट्रीय विजेता हैं। रवि 25 से अधिक शैक्षिक और पेशेवर योग्यतायें रखते हैं। वे 7 अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के फेलो सदस्य हैं।
उत्तराखंड से रवि की पृष्ठभूमि, जो भारत में एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थान हैय अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, कानून, वाणिज्य, आदि में कई योग्यतायेंय दो दशकों से अधिक कमोडिटी ट्रेडिंग में अनुभवय रचनात्मक लेखन में कईपाठ्यक्रमय व्यापार, मनोविज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिकता में रवि की गहरी दिलचस्पी के कारण उनके लेखन में विषयवस्तु पर गहरी पकड़ देखने को मिलती है। वे पाठकों की हर तरह की रूचि को ध्यान में रखते हुए‘भौतिकवाद बनाम आध्यात्मिकता’ के क्षेत्र में फिक्शन और नॉन-फिक्शन, दोनों तरह की पुस्तकें लिखने में माहिर हैं। Image result for ‘लालच वासना लत’
अपने लेखन के माध्यम से, रवि जोर देते हैं कि कैसे आध्यात्मिक गुण जैसे कि ‘मूल्य, नैतिकता और संस्कार’, एक स्वस्थ (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक) जीवन जीने के लिए आज के भौतिकवादी और गतिशील दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रवि का प्रमुख उद्देश्य दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाना है – और वह अपने कॉर्पोरेट और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से, दोनों के बीच संतुलन बना के, अपने लेखन के द्वारा पाठकों को प्रेरित करना चाहते हैं। छात्रों और युवा पीढ़ी में अपने लेखन के माध्यम से ऊंचे आदर्श और नैतिक गुण पैदा करना रवि का सपना है।
कृपया लेखक डबराल की विस्तृत प्रोफाइल देखें, जिसमें उनकी उपलब्धियों का उल्लेख है ़ उनका फोटोग्राफ ़ किताब ‘लालच वासना लत’ का कवर इस नोट के साथ संलग्न है।
लेखक डबराल जानकारी साझा करने के लिए 1ः 1 बातचीत तथा विचार विमर्श के लिए उपलब्ध हैः
ऽ उनकी जीवन यात्रा और पृष्ठभूमि जिसने उन्हें एक लेखक बनने के लिए प्रेरित किया
ऽ व्यक्तिगत – आत्म-सुधार के लिए योगदान और सुझाव
ऽ जमीनी स्तर – सामाजिक सुधारों में योगदान, विशेष रूप से किसानों के उत्थान के लिए
ऽ छात्रों और युवा पीढ़ी में कैसे ऊंचे आदर्श और नैतिक गुण पैदा करना।
ऽ भौतिकवाद बनाम आध्यात्मिकता की अवधारणा और रोजमर्रा की जिंदगी में तनाव मुक्त और खुशहाल जीवन जीने के लिए कैसे इनका उपयोग करें।
ऽ शिक्षा, आध्यात्मिक, सामाजिक, पर्यावरण, कानूनी, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्रों पर लेखक के विचार।

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