रमजान में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन रोक, पर आतंकियों के ग्रेनेड हमले से मंसूबे साफ

सीज़फायर से कश्मीर में शांति आएगी?

लश्‍कर-ए-तैयबा के प्रवक्‍ता डॉ. अब्‍दुल्ला गजनवी ने बयान जारीकर गृहमंत्री के बयान को नाटक बता डाला. लश्‍कर ने साफ कर दिया कि सुरक्षाबलों पर उनके हमले जारी रहेंगे.

खास बातें

नई दिल्‍ली : जम्‍मू और कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती की गुजारिश पर भले ही गृह मंत्रालय ने रमजान के पवित्र महीने में ऑपरेशन ऑल आउट पर अल्‍पविराम लगा दिया हो, लेकिन बीते 24 घंटों में आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर दो हमले कर अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं. वहीं लश्‍कर-ए-तैयबा ने भी बयान जारी कर कहा है कि न हमले पहले रुके थे और न अब रुकेंगे. रमजान के महीने में सुरक्षा बलों पर हमले जारी रहेंगे. सुरक्षाबल जल्‍द हमारे क्रोध को देखेंगे. वहीं आतंकियों के इस रुख के बावजूद गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि आतंकी यदि सुरक्षा बलों पर हमला करते हैं  या निर्दोष लोगों के जीवन की रक्षा के लिए आवश्‍यक होने पर सुरक्षाबलों के पास जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रहेगा. सरकार उम्‍मीद करती है कि हर कोई इस पहले में सहयोग करेगा. मुस्लिम भाइयों और बहनों को रमजान को शांतिपूर्ण और बिना कठिनाइयों के पालन करने में मदद करें.

बटमालू में पहला और शोपियां में दूसरा हमला
गृह मंत्रालय द्वारा आपरेशन ऑल-आउट पर रोक लगाने का फैसला सामने आने के कुछ ही घंटों बाद आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर पहला हमला कर अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं. पहला हमला श्रीनगर के बटमालू इलाके में हुआ. सुरक्षाबल के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार बटमालू के पिचमानी सिक्‍योरिटी लाइन में सीआरपीएफ की 115वीं बटालियन के जवानों को कानून-व्‍यवस्‍था बरकरार रखने की ड्यूटी में तैनात किया गया था. बुधवार (16 मई) शाम करीब 4.15 बजे अज्ञात आतंकियों ने इन जवानों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया. गनीमत रही कि इस हमले में सीआरपीएफ के जवानों सहित कोई हताहत नहीं हुआ.

जवानों ने आतंकियों पर कार्रवाई करते हुए जवाबी फायरिंग की, लेकिन अफरा-फतरी का फायदा उठाते हुए आतंकी मौके से फरार होने में सफल हो गए. सूत्रों के अनुसार श्रीनगर के बटमालू में हुए हमले के चं‍द मिनटों बाद आतंकियों ने शोपियां के अमसीपोरा में सुरक्षाबलों पर दूसरा हमला कर दिया.

इस बार हमला पैरा ट्रूप के कमांडो पर किया गया था. इस हमले में भी कोई जवान या स्‍थानीय नागरिक हताहत नहीं हुआ है. आतंकियों के इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाल लिया. सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच लंबे समय तक गोलियां चलती रही. आखिर में आंतकी मौके से फरार होने में सफल रहे.

लश्‍कर ने कहा, जारी रहेंगे सुरक्षा बलों पर हमले
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को ट्वीट कर जानकारी दी कि रमजान के पावन महीने में सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन नही चलाने के निर्देश दिए गए हैं. जिससे शांति प्रिय मुसलमानों को रमजान में शांतिपूर्ण माहौल मिल सके. गृहमंत्री के इस ट्वीट के आने के कुछ घंटों बार लश्‍कर-ए-तैयबा के प्रवक्‍ता डा अब्‍दुलला गजनवी ने बयान जारीकर गृहमंत्री के बयान को नाटक बता डाला. लश्‍कर ने साफ कर दिया कि सुरक्षाबलों पर उनके हमले जारी रहेंगे. हमलों को रोकना कश्‍मीर में जान गंवाने वाले उनके साथियों के साथ विश्‍वासघात होगा. लश्‍कर प्रवक्‍ता ने कहा कि हमलों को न पहले रोका गया है और न अब रोका जाएगा.कश्मीर

सीज़फायर से कश्मीर में शांति आएगी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कश्मीर दौरे के दो दिन पहले गृह मंत्रालय ने कश्मीर में ‘सीज़फायर’ का एलान किया है. ये सीज़फायर मुसलमानों के पाक महीने रमज़ान को देखते हुए लगाया गया है.लगातार कई ट्वीट करके गृह मंत्रालय ने बताया कि ये फैसला इसलिए लिया गया है ताकि रमज़ान के दौरान मुस्लिमों को शांति भरा माहौल मुहैया कराया जा सके.इस एलान के कुछ दिन पहले ही कश्मीर ने भारी हिंसा और हत्याओं का दौर देखा है, जिसे लेकर राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सर्व दलीय बैठक बुलाई थी.

इस बैठक के बाद मुफ्ती समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार से ‘ऑपरेशन ऑल ऑउट’ रोकने की अपील की थी. ये ऑपरेशन सुरक्षाबल कई महीनों से कश्मीर में चला रहे थे.ऑपरेशन ऑल ऑउट के तहत कम से कम 200 चरमपंथी मारे गए थे.हांलाकि इस घोषणा में ये साफ़ कर दिया गया है कि हमला होने पर या लोगों की जान बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई का अधिकार सेना अपने पास सुरक्षित रखेगी.अलगाववादी सीज़फायर की मांग का विरोध कर चुके हैं. लेकिन राजनीति से जुड़े कई लोग इसे शांति स्थापित करने के मौके तौर पर देखते हैं.कश्मीर

एकतरफा सीज़फायर

पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, “सभी राजनीतिक पार्टियों (बीजेपी को छोड़, जो इसका विरोध करती रही है) की मांग पर केंद्र ने एकतरफा सीज़फायर का एलान किया है. अगर चरमपंथी अब नरम रुख नहीं अपनाते तो यहां के लोगों के असल दुश्मन साबित होंगे.”उन्होंने सीज़फायर के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर पर लिखा, “केंद्र ने इसका नाम नॉन-इनिशिएटिव ऑफ कॉम्बेट ऑपरेशन्स दिया है. उन्हें वाजपेयी के ज़माने में भी इसे यही नाम दिया था. लेकिन ये अभी भी एकतरफा सीज़फायर ही है. एक गुलाब जिसे नाम कुछ और दे दिया गया है….”

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने फैसले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने ऑल पार्टी मीटिंग में विपक्षी दलों की भागीदारी की भी सराहना की और इस घोषणा को अमली जामा पहनाने पर सहमति के लिए उनका शुक्रिया कहा.महबूबा समेत दूसरे नेताओं ने वाजपेयी के समय को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से उनके सिद्धांत “डॉक्टरिन ऑफ पीस” का अनुसरण करने को कहा.कश्मीर

पहले हुए सीज़फायरों का हाल

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के दौरान केंद्र सरकार ने रमज़ान के महीने में चरमपंथियों के खिलाफ सीज़फायर का एलान किया था. लेकिन बीजेपी की क्षेत्रीय ईकाई ने इस फैसले का विरोध किया था.इस घोषणा के कुछ ही घंटो बाद शोपिया ज़िले में गोलीबारी शुरु हो गई थी.

पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, “जंगलों में छिपे हुए चरमपंथियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी कर दी थी जिसके बाद सुरक्षाबलों ने उनकी घेराबंदी कर ली. लेकिन चरमपंथी भागने में कामयाब रहे थे. जिसके बाद उन्हें खोजने के लिए अभियान चलाया गया.”पाकिस्तान मूल के चरमपंथी कमांडर मुश्ताक ज़रगर ने सीज़फायर के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा था कि “सशस्त्र संघर्ष ही एकमात्र विकल्प है.”एक साल तक चले ऑपरेशन ऑल ऑउट के दौरान चरमपंथियों की ढाल बने दर्जनों आम नागरिकों की मौत हुई.कश्मीर

सीज़फायर से महबूबा को राहत

राजनीतिक विज्ञान में रिसर्च करने वाले पीर शौकत कहते हैं, “सीज़फायर की ये घोषणा महबूबा मुफ्ती के लिए राहत लेकर आई है क्योंकि उन्हें एक ऐसे कमज़ोर शख्स के तौर पर देखा जा रहा था जिन्हें दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार नज़रअंदाज़ कर देती है.”हिंसा-ग्रस्त अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां और त्राल के लोग इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.शोपिंया के एक युवा राहिल ने मुठभेड़ वाली जगह हो रहे प्रदर्शनों में अपने भाई और एक रिश्तेदार को खो दिया था. राहिल कहते हैं कि वो सीज़फायर की घोषणा से खुश हैं. लेकिन उन्हें और कई लोगों को सरकार के इस फैसले पर संदेह भी है.वो कहते हैं, “लेकिन हमने ऐसी घोषणाओं के अंजाम देखे हैं. अगर इन्हें ठीक से लागू किया जाए को ज़मीन पर अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं.”

त्राल के एक कैब ड्राइवर फारुक अहमद कहते हैं, “एक हमला होगा और ये घोषणा ओंधे मुंह गिरेगी. वो जंगलों में चरमपंथियों को ढूंढ रहे हैं. हर घर की तलाशी ली जा रही है. यहां तक कि आज भी जब सीज़फायर की बात कही गई तो शोपियां में चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ चल रही थी. मुझे नहीं लगता कि ये एक ठोस कदम साबित होगा.”

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