रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने संभाला राफेल मोर्चा, कांग्रेस पर हमला

विपक्ष द्वारा लगातार यह बात उठाई जा रही थी कि रक्षा विभाग से संबंधित राफेल विमान के मुद्दे पर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण क्यों कुछ नहीं बोल रहीं। शुक्रवार को सीतारमण ने जवाब देते हुए कांग्रेस पर हमला बोला।

हाइलाइट्स

  • शुक्रवार को रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल डील पर विपक्ष के हमलों का जवाब दिया
  • कांग्रेस ने सवाल उठाया था कि राफेल डील पर रक्षामंत्री की जगह अरुण जेटली क्यों बयान दे रहे हैं
  • केंद्र सरकार ने सफाई दी थी कि जेटली ने कुछ वक्त तक रक्षा मंत्रालय भी संभाला था, इसलिए वह मामले पर बोले
  • अब सीतारमण ने राहुल गांधी द्वारा पूछे गए विभिन्न सवालों के जवाब दिए

नई दिल्ली : राफेल डील पर गरमाई सिसायत को शांत करने की कोशिश में सरकार ने अब कमान रक्षामंत्री  निर्मला सीतारमण को सौंप दी है। दरअसल, विपक्ष द्वारा लगातार यह बात उठाई जा रही थी कि रक्षा विभाग से संबंधित राफेल के मुद्दे पर रक्षामंत्री क्यों कुछ नहीं बोल रहीं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को भी लोकसभा शुरू होने से पहले डील पर कुछ सवाल उठाए थे और कहा था कि वह चाहेंगे कि पीएम मोदी की जगह सीतारमण आज इन सवालों के जवाब दें।रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में राफेल डील पर हुई चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने विमानों की संख्या के बारे में वास्तविक स्थिति बताई और कीमत के बारे में खुलासा किया।

हमने जहाज कम नहीं किए, बल्कि 18 फ्लाईअवे जहाजों को 36 तक पहुंचाया 
निर्मला सीतारमण ने कहा- आपके 18 फ्लाईअवे जहाजों को हमने 36 तक पहुंचाया और बाकी जहाजों की खरीद के लिए भी हमने आरएफपी भेज दी है। जब भी कभी आपातकालीन खरीद की जाती है, तब यह केवल 2 स्क्वॉड्रन की होती है। 1982 में जब पाकिस्तान सोवियत यूनियन से एफ-16 खरीद रहा था, तब भारत सरकार ने फैसला किया था कि मिग-23 एमएफ की दो स्क्वॉड्रन लायक विमान खरीदे जाएंगे। 1985 में भी दो स्क्वॉड्रन बनाने लायक मिराज फ्रांस से खरीदे गए थे। 1987 में दो स्क्वॉड्रन लायक मिग-29 विमान सोवियत यूनियन से खरीदे गए थे। भारतीय वायुसेना आमतौर पर सरकार को यही सुझाव देती है कि दो स्क्वॉड्रन खरीदे जाएं, ताकि उनके लिए तत्काल व्यवस्था की जा सके।इन्होंने (यूपीए सरकार ने) जब डील की थी, तब 18 विमान तैयार हालत में मिलने थे। बाकी 108 विमान 11 साल की अवधि में बनाए जाने थे। 2006 के बाद 2014 तक आप 18 जहाज भी हासिल नहीं कर सके? हमने डील में फ्लाईअवे विमानों की संख्या कम नहीं की। इसकी संख्या 18 से बढ़ाकर 36 की। हमें इस साल सितंबर में पहला और 2022 तक आखिरी राफेल मिल जाएगा। यूपीए के वक्त एक बेसिक राफेल की कीमत 737 करोड़ थी। हमें यह 9% कम रेट पर 670 करोड़ रुपए में मिलेगा। सेब की तुलना संतरे से ना करें।’’

जेटली के बोलने पर साधा था निशाना
इससे पहले बुधवार को राफेल के मामले पर राहुल गांधी ने नए फैट्स की बात कहकर बहस का समय मांगा था। फिर राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक ऑडियो क्लिप का जिक्र कर सीधे तौर पर पीएम मोदी पर हमला बोला था। बाद में सरकार की ओर से अरुण जेटली ने मोर्चा संभालते हुए टेप को फर्जी बताया और कहा कि राहुल गांधी को लड़ाकू विमान और ऑफसेट की सामान्य जानकारी भी नहीं है।

इसके बाद विपक्ष यह कहकर केंद्र पर हमलावर होता रहा कि राफेल के मुद्दे पर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण की जगह वित्त मंत्री क्यों सफाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा आम थी। हालांकि, बीजेपी ने इस पर तर्क दिया था कि जेटली कुछ वक्त तक रक्षामंत्री रहे थे और इस नाते उन्होंने सरकार का पक्ष रखा था, लेकिन विपक्ष के लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए शुक्रवार को सीतारमण सामने आईं।

कांग्रेस पर हमलावर सीतारमण
अपने भाषण की शुरुआत में निर्मला ने कांग्रेस पर हमला बोला और पूछा कि अपने शासन काल में वह राफेल विमान की डील क्यों पूरी नहीं कर पाई थी। उन्होंने कहा कि सरकार और वह राफेल पर हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं। लेकिन कांग्रेस राफेल के असली तथ्यों से डर रही है।

सीतारमण ने कहा कि यूपीए चाहती ही नहीं थी कि रक्षा सौदा हो। अगर यूपीए वाली डील होती तो विमान आने में 11 सालों का समय लग जाता। उन्होंने बताया कि सितंबर 2019 में देश को पहला राफेल विमान मिल जाएगा और 2022 तक सभी 36 राफेल विमान देश को मिल जाएंगे। सीतारमण ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कमीशन न मिलने के चलते डील नहीं की थी।

सीतारमणका पूरा बयान

बोफोर्स से कांग्रेस की सरकार गई थी, राफेल मोदी सरकार को दोबारा वापस लेकर आएगा!रक्षा मंत्रालय पिछले 4 सालों में बिना दलाल के चली है, बोफोर्स एक स्कैम हैं, राफेल स्कैम नहीं है !4 साल तक यह सरकार बिना किसी करप्शन के चली है, इसीलिए मोदी सरकार से कहीं न कहीं बेचैनी हो रही है!मैंने ऑफसेट पार्टनर, कीमत और अन्य सभी सवालों के जवाब दिए हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही बात करनी होगी! राफेल की कई देशों के लिए अनाधिकारिक कीमत की बात हो रही है, इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है ! दाम का खुलासा करना सौदे की प्रक्रिया और शर्तों का उल्लंघन होता लेकिन कांग्रेस के लोग इस बात को समझ नहीं रहे हैं!

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को माना कि संवेदनशीलता के चलते एयरक्राप्ट के दाम को सार्वजनिक करना ठीक नहीं है!सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को पढ़ते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 25 में कहा गया कि सरकार ने एयरक्राफ्ट की कीमत नहीं बताई क्योंकि यह संवेदनशील मुद्दा है। यह दो देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन होता। पैराग्राफ 26 में कहा गया कि एयरक्राफ्ट की कीमत सार्वजनिक करने का कोई औचित्य नहीं है। पैराग्राफ 33 में कहा गया कि डील में सरकार की भूमिका कहीं भी ऐसी नहीं दिख रही कि सरकार ने किसी को कमर्शल फायदा पहुंचाने की कोशिश की है।सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 34 में कहा गया कि सभी तथ्यों की जांच के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि डील में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। किसी का व्यक्तिगत धारणा के आधार जांच नहीं की जा सकती है।’

कांग्रेस राफेल के अलग-अलग दाम बताकर लोगों को गुमराह कर रही हैःराफेल सौदे के लिए कुल 74 बैठकें की गई उसके बाद जाकर सौदा फाइनल हुआ। 526 करोड़ की तुलना 1600 करोड़ से करना सेब की तुलना संतरे से करने जैसा हैःकांग्रेस राफेल विमानों की कीमत प्रति विमान 526 करोड़ किस आधार पर बता रही है? कांग्रेस हर बार राफेल के अलग-अलग दाम बताती हैः रक्षा मंत्री ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर बेसिक एयरक्राफ्ट के दाम की तुलना हथियारों से लैस विमानों की दाम से क्यों की जा रही है?राफेल का बेसिक दाम हमने प्रति एयरक्राफ्ट 670 करोड़ बताया है !राफेल की कीमत भी क्या कांग्रेस जानते हैं, जनआक्रोश रैली में अलग दाम बताए, हैदराबाद में अलग। कांग्रेस पार्टी को हमें बताने से पहले अपना होमवर्क करना चाहिए !मुझ पर आरोप लगाया कि मैं एआईएडीएमके सदस्यों के पीछे डरकर छिपकर बैठी हूं। आज जब मैंने उनका नाम लिया तो उन्हें सफाई देने के लिए मौका चाहिए !इस सदन में अगर यह जवाब के लिए गंभीर होते तो क्या विपक्ष की सीट पर बैठकर फोटो खींचते, एक-दूसरे को कागज पास करते रहे। इस सदन में वित्त मंत्री के ऊपर जहाज उड़ाते रहे !मैंने बार-बार कहा कि कीमतों की बुनियादी जानकारी साझा की जा सकती है, लेकिन हम इसे पूरी तरह से ओपन नहीं कर सकते। हम डिबेट के लिए तैयार हैं, हम जवाब देने के लिए तैयार हैं: मैं याद दिलाना चाहती हूं कांग्रेस को कितनी बार आपने कहा कि यह देश हित में है और सुरक्षा से जुड़ा है और हम इसकी गोपनीयता की रक्षा करेंगे: यह कांग्रेस का कितना गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव है कि एक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पाकिस्तान ही मदद मांगने चले गए कि इस मोदी सरकार को हटाने में मदद करिए: आपने एयरफोर्स चीफ को झूठा बोला, आपने प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री के लिए भी यही कहा। कांग्रेस के सीनियर नेता जो इस सदन के सदस्य भी हैं: यह पूरा कैंपेन भ्रामक है और झूठ की बुनियाद पर खड़ा है। मैं जब भी जवाब देने के लिए प्रस्तुत हुई, इन्होंने कभी सुनना नहीं चाहा:

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