ये क्या ‘खिचड़ी’ पक रही है ?

पिछले दो तीन दिनों से” खिचड़ी ” का चर्चा ” ज़ेरे बहस ” है । कोई कह रहा है कि भाजपा  ने 5 हजार लोगों के लिये बनाई थी ” खिचड़ी ” । तो कोई कुछ और संख्या बता रहा है ।  ” खिचड़ी ” भारत , पाकिस्तान , बंग्लादेश , नेपाल समेत आस -पास के मुल्कों के लोगों में किसी के लिये प्रिय , किसी के लिये जल्दबाजी में बनाया जाने वाला भोजन है । तो ” खिचड़ी ” धार्मिक पर्वों , लोक मान्यताओं , त्यौहारों का भी ब्यंजन है । अपने पहाड में माघ के महीने में तो ” खिचड़ी का एक त्यौहार ही होता है । बडी श्रद्धा से मनाते हैं ” खिचड़ी संग्रान ” । मेरे गांव में पौष के महीने के किसी भी मंगलवार या शनिवार को मां काली के मंदिर में उडद की स्वादिष्ट खिचडी बनती है । सबसे पहले मां भगवती को अर्पित की जाती है और सब एक साथ मिल -बैठ कर पत्तल में खिचड़ी खाते हैं । रात्रि को यह आयोजन होता है .। अपने देश में कुछ आश्रमों में खिचड़ी ही बनती है । ” खिचडी ” भिन्न- भिन्न प्रकार की होती है साहब ! साधारण खिचड़ी जो हम जैसे साधारण लोग खाते हैं। जरा सा चावल , जरा सी दाल , थोड़ा सा नून , तेल ,हल्दी सब मिला दी ।एक भगोने में रखा और चूल्हे पर रख दी । थोडी देर में पकने पर खा ली । ये हुयी हम साधारण लोगों की खिचड़ी । पर जो लोग शोकीन होते हैं वे ” साधारण लोगों की तरह साधारण खिचड़ी नहीं खाते । हम साधारण लोग खिचड़ी इस लिये खाते हैं कि कम संसाधनों और कम समय में खिचड़ी ही हमारा सहारा है । बीमारी में भी डाक्टर खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं। पर जो सम्पन्न लोग खिचड़ी को और भी जायकेदार बनाना चाहते हैं वे खिचड़ी के साथ चार आवश्यक ब्यंजन जोड कर खाते हैं । कहते हैं ना – खिचड़ी के चार यार , घी , पापड , दही अचार .।

* खिचड़ी का जिक्र न सिर्फ खाने के अर्थ में होता है । बल्कि कई अर्थों में भी होता है ।यूं तो खिचड़ी सबसे सुपाच्य भोजन होता है । पर तब ” खिचड़ी चर्चा में और भी ज्यादा जेरे बहस होती है । जब देखने , खाने में , स्वाद में , कहीं ” खिचड़ी ” होती तो नहीं है । पर जब ” खिचड़ी सियासत के अर्थ में प्रयोग होती है तो कहा जाता है ” क्या खिचड़ी पक रही है “? 56 तरह की खिचड़ी के लिए इमेज परिणामसबसे सुपाच्य भोजन ” खिचड़ी ” जब सियासत में पकती है तब मायने होता है कि गोया कोई अनहोनी हो रहा है । या बिना तालमेल का ” कुछ ” हो रहा है । गरीब की , मजबूरी की , बीमार की ” खिचड़ी ” सियासत में जब पकती है ” तो चर्चा में भी होती है और यूं लगता है कि ” ये खिचड़ी कोई गुल खिलाने के लिये पक रही है ।
* खिचड़ी के कई किस्से हैं मसलन ” बीरबल की खिचड़ी — " बीरबल की खिचड़ी के लिए इमेज परिणाम
खिचड़ी का एक और किस्सा है ।
एक बार लखनऊ के एक नवाब साहब हैदराबाद के एक नवाब साहब के मेहमान बनकर हैदराबाद गये । हैदराबाद के नवाब साहब ने बहुत आदर खादिर की । तमाम तरह के ब्यंजन भोजन में परोसें । जितने दिन लखनऊ के नवाब साहब हैदराबाद के नबाब साहब के मेहमान रहे हर दिन , रात , सुबह शाम किसम किसम के ब्यंजन परोसे गये । अब जब लखनऊ के नवाब साहब विदा हुये तो उन्होंने भी हैदराबाद के नबाब साहब को आमंत्रित किया कि आप लखनऊ जरुर आइयेगा । और मेरे घर पर तसरीफ फरमाइगा ।एक बार इत्तेफ़ाकन हैदराबाद के नबाब साहब लखनऊ पहुंचे । और उन नवाब साहब के घर पहुंचे जिन्होंने नवाब साहब को आमंत्रित किया था । लखनऊ के नवाब साहब ने गर्म जोशी से इस्तकबाल किया , स्वागत किया । अब जब खाने का वक्त आया और टेबल पर बैठे . तो लखनऊ के नवाब साहब ने  नौकरों को हुक्म दिया कि नवाब साहब आये हैं ” खिचड़ी लाइये “। अब हैदराबाद के नवाब हैरान । चेहरे पर अजीब सी स्याही । ना भौं सिकुड़ने की स्थिति । बोले तो कुछ नहीं। लखनऊ के नवाब साहब मन ही मन मुस्कराये । सारे मनो भाव समझ गये हैदराबाद के नवाब  के । अब जब दर्जन भर नौकर चांदी की बडी -बडी थालियों मे चांदी की कटोरियों में ढक कर भोजन लाये और हैदराबाद के नवाब साहब के आगे गर्मा गर्म खिचड़ी रखी । हर कटोरी में अलग -अलग किस्म की खिचड़ी । हर कटोरी के साथ अलग चम्मच . । लखनऊ के नवाब साहब ने हैदराबाद के नवाब साहब से निवेदन किया कि ” नवाब साहब बिस्मिल्लाह कीजिए । शुरु कीजिएगा । खिचड़ी का नाम सुनते ही मन टूटा था । पर खिचड़ी में खुशबू बहुत अच्छी थी .। लखनऊ के  नवाब साहब हैदराबाद के  नवाब के लिए इमेज परिणामटूटे मन से एक चम्मच मुंह में डाला तो अवाक रह गये । इतनी स्वादिष्ट कि पूछो नहीं। पर खिचड़ी में चावल नहीं थे । दो चम्मच एक कटोरी से खिचड़ी खाने के बाद दूसरी कटोरी मेजबान लखनऊ के नवाब साहब ने आगे की । इसका स्वाद और खुशबू भी लाजवाब । पर इसमें भी चावल नहीं . बाकी दुनिया की बेहतरीन से बेहतरीन चीजें। चावल तो नहीं पर चावल की तरह कुछ -कुछ । आखिर हैदराबाद के नबाब साहब से रहा नहीं गया । मन की बात कह दी । नवाब साहब खिचड़ी का नाम सुनते ही मेरा मन खराब हो गया था पर इतनी स्वादिष्ट खिचड़ी जिन्दगी में खायी नहीं। और चावल भी नहीं। चावल जैसा कुछ कुछ है । पर ये है क्या ! लखनऊ के नवाब साहब ने कहा -नवाब साहब अभी आपने दो कटोरियों से ही एक- एक चम्मच खिचड़ी खायी है . अभी तो 56 तरह की खिचड़ी का स्वाद और लेना है । हैदराबाद के नवाब ने कुछ खिचड़ी की कटोरियों से खिचड़ी का स्वाद चखा । हर कटोरी की खिचड़ी का स्वाद उम्दा , एक दूसरे से अलग। बेहतरीन , लाजवाब ।

आखिर हैदराबाद के नवाब साहब से रहा नहीं गया । कुछ ही कटोरियों से खिचड़ी खाई । पेट भर गया । चेहरे पर गजब की संतुष्टि , । और हैरानी भी। आखिर पूछ ही लिया लखनऊ के मेजबान नवाब साहब से , कि नवाब साहब वाकई खिचडी लाजवाब हैं। पर ये चावल की जगह खिचडी में क्या इस्तेमाल हुआ है? लखनऊ के नवाब ने विनम्रता से कहा -नवाब  साहब, जब से सुना था कि आप हैदराबाद से लखनऊ तसरीफ़ फरमा सकते हैं तो दुनिया के अलग -अलग मुल्कों से बादाम मंगवाये गये । दर्जनों नौकरों को हुक्म दिया गया कि बादामों को चावल की शक्ल में काशीदगरी से बनाना है । सबकी बारीकी , लम्बाई , मोटाई एक सी हो । और हिन्दुस्तान की सर जमीं के मसाले और हर जगह खिचड़ी में इस्तेमाल हो सकने वाली सबसे बेहतरीन खाने वाले अन्न , फल, फ्रूडस, वगैरा -वगैरा इस्तेमाल हों
** खिचड़ी खाने के बाद हैदराबाद के नवाब  को मानना पडा ” वाकई खिचड़ी गजब ” है ।

—क्रांति भट्टKranti Bhatt's Profile Photo, Image may contain: 1 person

 

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