येदियुरप्पा ने ली शपथ, बीजेपी को ‘रूठे’ लिंगायत विधायकों से उम्मीद

22 साल बाद देवगौड़ा-वजुभाई फिर आमने सामने, लोग शेयर कर रहे कहानी

बीजेपी को कांग्रेस व जेडीएल के नाराज बताए जा रहे लिंगायत विधायकों से भरोसा।

हाइलाइट्स

  • बीजेपी को कांग्रेस-जेडीएस के नाराज बताए जा रहे लिंगायत विधायकों से समर्थन की उम्मीद।
  • कांग्रेस, जेडीएस के लिंगायत MLA वोकलिंगा कुमारस्वामी के नेता बनने से नाराज बताए जा रहे।
  • अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा देने के कार्ड के बावजूद लिंगायतों ने कांग्रेस नहीं, बीजेपी का दिया साथ।
  • लिंगायत समुदाय के बड़े नेता येदियुरप्पा के पक्ष में बीजेपी इन विधायकों को साधने की कोशिश में जुटी।
नई दिल्ली/बेंगलुरु : कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला की तरफ से सरकार बनाने का निमंत्रण मिलने के बाद गुरुवार को बीजेपी विधायक दल के नेता येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है।Image result for येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली बीजेपी के पास बहुमत साबित करने के लिए विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन आंकड़ों को पक्ष में करने के लिए खास योजना है। बीजेपी को विपक्षी दलों के उन लिंगायत विधायकों से उम्मीद है जो कांग्रेस-जेडीएस के पोस्ट पोल गठबंधन से नाराज बताए जा रहे हैं क्योंकि इसका मुखिया वोकलिंगा समुदाय के कुमारस्वामी को बनाया गया है ।
12 लिंगायत विधायक जा सकते हैं येदियुरप्पा के साथ

बताया जा रहा है कांग्रेस  और जेडीएस के करीब दर्जन भर लिंगायत विधायक अपने समुदाय से आने वाले सबसे बड़े नेता येदियुरप्पा के नाम के पीछे जा सकते हैं। कांग्रेस की तरफ से अल्पसंख्यक समुदाय का कार्ड चलने के बावजूद लिंगायत समुदाय ने चुनावों में बड़े पैमाने पर बीजेपी का साथ दिया। कर्नाटक में वोकलिंगा और लिंगायत समुदाय के तबसे अदावत चली आ रही है जब 2007 में बीजेपी के साथ कार्यकाल बंटवारे के गठबंधन के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया था। 

बीजेपी के 222 सीटों (2 सीटों पर चुनाव बाकी हैं) में से 104 सीटें है। उसे अपना बहुमत साबित करने के लिए अभी 8 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में पार्टी की तरफ से विपक्षी दलों के जिन विधायकों को लुभाने की कोशिश की गई है उन्हें ट्रस्ट वोट के समय येदियुरप्पा के लिए वोटिंग करने को कहा जा सकता है।
बीजेपी तर्क दे रही है कि लोगों ने कांग्रेस के खिलाफ वोट किया है और जेडीएस काफी अंतर से तीसरे स्थान पर है। इस विधानसभा चुनाव में 60 प्लस सीटों का फायदा होने के बाद बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह सरकार बनाने में पीछए नहीं हटेगी। बीजेपी ने यह भी तर्क दिया है कि 1996 में कैसे गुजरात की बीजेपी सरकार को गिराया गया, शकंरसिंह वाघेला मुख्यमंत्री बने लेकिन सरकार चल नहीं पाई।

बीजेपी को कांग्रेस व जेडीएल के नाराज बताए जा रहे लिंगायत विधायकों से भरोसा।

कर्नाटक: बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

कानून मंत्री और बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस को जनादेश को समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री मोदी पर हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देने का आरोप लगाने वाले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भी निशाने पर लिया।

‘बिक’ ना जाएं इसलिए रिजॉर्ट में कैद किए गए कांग्रेस-जेडीएस के विधायक

congress and jds mla head to resorts not house

इसी बस में ले जाए गए विधायक
कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस और जेडीएस अपने नवनियुक्त विधायकों को बचाने में लगी हैं। दोनों ही दलों को डर है कि बीजेपी कहीं उनके विधायकों को खरीद न ले इसलिए उन्हें एक अलग रेजॉर्ट में रखा गया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने, कांग्रेस और जेडीएस के उस आरोप को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके विधायकों को बीजेपी ने 100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया है।
डीके शिवकुमार बने ‘संकटमोचन’
गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के संकटमोचक बने डीके शिवकुमार इस बार फिर उसी भूमिका में हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें एमएलए की खरीद-फरोख्त रोकने की जिम्मेदारी सौंप दी है। कांग्रेस विधायकों को ईगलटन रिजॉर्ट भेजा जा सकता है। यह वही रिजॉर्ट है जहां पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के विधायकों को रखा गया था। तब भी विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगे थे। रिजॉर्ट 2006 के दौरान भी चर्चा में आया था, जब कुमारस्वामी ने पिता देवेगौड़ा को नाराज कर बीजेपी के साथ सरकार बनाई थी। अपने समर्थक विधायकों के साथ वे इसी रिजॉर्ट में ठहरे थे।

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इसी रिजॉर्ट में रखे गए विधायक

रिजॉर्ट में बुक कराए गए 100 कमरे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने ईगलटन रिजॉर्ट में अपने विधायकों को रखने के लिए 100 से ज्यादा कमरे बुक कराए हैं। यहीं जेडीएस के विधायकों को भी भेजा जा सकता है। यह कदम कर्नाटक में सरकार बनने तक के लिए उठाया गया है। बता दें कि मंगलवार को ही केरल टूरिजम के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया, जिससे तहलका मच गया था। ट्वीट में कहा गया था कि कर्नाटक में उठापटक के बाद हम सभी विधायकों को केरल के सुरक्षित और खूबसूरत रिजॉर्ट में आमंत्रित करते हैं। हालांकि बाद में इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया।

सौ करोड़ का ऑफर, बीजेपी ने नकारे आरोप
जेडीएस के विधायक एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया था कि उनके विधायकों को बीजेपी की तरफ से 100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। उन्होंने पूछा था कि प्रधानमंत्री बताएं कि उन्हें इतने रुपये कहां से मिले? यह काला धन है या सफेद धन है। इस पर बीजेपी कर्नाटक के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायक खुद बीजेपी के संपर्क में हैं। 100 करोड़ रुपये ऑफर की बात झूठ है।

 तीन सबसे अमीर विधायक कांग्रेस के, 1015 करोड़ की संपत्ति के साथ एम नागाराजू  हैं टॉप पर,नव-निर्वाचित विधायकों को लेकर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्मस (ADR)- इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है.

कर्नाटक चुनाव: तीन सबसे अमीर विधायक कांग्रेस के, 1015 करोड़ की संपत्ति के साथ ये हैं टॉप पर

कर्नाटक में वोटों की गिनती के बाद से ही शुरू हुआ नाटक अभी खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा है. लगभग 48 घंटे के सियासी उतार-चढ़ाव के बाद प्रदेश में आखिरकार बीजेपी की सरकार बन गई है. बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा ने आज सीएम पद की शपथ ले कर कुर्सी संभाल ली है. इस बीच नव-निर्वाचित विधायकों को लेकर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्मस (ADR)- इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है.

ADR ने कर्नाटक में नव-निर्वाचित विधायकों के हलफनामों की समीक्षा कर रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नव-निर्वाचित विधायकों में 97 परसेंट (215) विधायक करोड़पति हैं. सबसे अमीर विधायकों की सूचि में टॉप पर कांग्रेस के तीन विधायक हैं.

ये हैं सबसे अमीर विधायक
रिपोर्ट के मुताबिक होसकोट से चुनाव जीतने वाले एम नागाराजू 1015 करोड़ की संपत्ति के साथ पहले नंबर पर हैं. इसके बाद 840 करोड़ की संपत्ति के मालिक डीके शिवकुमार अमीर विधायकों की फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर हैं. उन्होंने कनकपुरा सीट से जीत हासिल की है. बात करें कर्नाटक के तीसरे सबसे अमीर विधायक की तो यह बाजी भी कांग्रेस ने ही मारी है. इस स्थान पर सुरेश बीएस हैं. इन्होंने हलफनामें में बताया है कि इनके पर कुल 416 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

कांग्रेस के 99% विधायक करोड़पति
रिपोर्ट की मानें तो कर्नाटक के नव-निर्वाचित विधायकों में 97 परसेंट विधायक करोड़पति हैं. इस हिसाब से हर विधायक की औसत संपत्ति 35 करोड़ है. ADR के रिपोर्ट के हवाले से NDTV की एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कांग्रेस के 99 परसेंट नव-निर्वाचित विधायक करोड़पति हैं. जिनमें हर विधायक की औसत संपत्ति 60 करोड़ है.

भाजपा के 98% विधायक करोड़पति
वहीं, बात करें भाजपा के नव-निर्वाचित करोड़पति विधायकों की तो वह कांग्रेस से एक कदम पीछे यानी कि 98 परसेंट पर हैं. जबकि इन विधायकों की औसत संपत्ति 17 करोड़ है. लिस्ट में सबसे अमीर भाजपा विधायक उदय बी गरुदाचर हैं. इनकी संपत्ति 196 करोड़ है.

तीसरे नंबर पर जेडीएस
जेडीएस में 95 परसेंट नव-निर्वाचित विधायक करोड़पति हैं. रिपोर्ट की मानें तो जेडीएस अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी के पास 167 करोड़ की संपत्ति है.

कांग्रेस ने विधायकों से ली लिखित सहमति
कुमारस्वामी ने एक के बाद एक ताबड़तोड़ विधायकों के साथ बैठक की। उधर, कांग्रेस ने अपने हर एक विधायक से कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लिखित सहमति ली।

22 साल बाद देवगौड़ा-वजुभाई फिर आमने सामने, लोग शेयर कर रहे कहानी

राज्यपाल वजुभाई वाला-पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा राज्यपाल वजुभाई वाला-पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा
 कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार को आ गए, लेकिन किसी भी दल को स्‍पष्‍ट बहुमत न मिलने से यहां सरकार बनाने को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई है. जहां एक ओर बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने की बात कह रही है. वहीं, कांग्रेस और जेडीएस भी अपनी दावेदारी पक्‍की करने में जुटी हैं.

खैर, इस खींचतान के बीच वॉट्सऐप पर एक मैसेज शेयर किया जा रहा है, जिसके मुताबिक 22 साल बाद पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और राज्यपाल वजुभाई वाला फिर से आमने सामने हैं. इस मैसेज को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राममाधव ने अपनी फेसबुक वॉल पर भी शेयर किया है.

राममाधव के शेयर किए मैसेज के मुताबिक, ‘वॉट्सऐप पर एक रोचक तथ्‍य मुझे मिला है. कांग्रेस के कर्म उसका पीछा करते हुए 22 साल बाद कर्नाटक आए हैं. ये बात 1996 की है जब गुजरात की बीजेपी सरकार को राज्‍यपाल कृष्‍णपाल सिंह की सिफारिश के बाद हटा दिया गया था.”उस वक्‍त गुजरात में बीजपी की सरकार थी. लेकिन बीजेपी नेता शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. इसके बाद बीजेपी की सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना पड़ा. इस दौरान विधानसभा में बहुत हंगाम हुआ. इस पर स्‍पीकर ने पूरे विपक्ष को एक दिन के लिए सस्‍पेंड कर दिया.’

‘इसके बाद राज्यपाल ने विधानसभा को भंग करने की सिफारिश राष्‍ट्रपति से कर दी. राष्‍ट्रपति ने इस सिफारिश पर तत्कालीन प्रधानमंत्री देवेगौड़ा से राय ली और विधानसभा भंग करने का आदेश दे दिया. 22 साल पहले ये फैसला देवगौड़ा ने लिया था. उस वक्‍तम वजुभाई वाला गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष थे. देवेगौड़ा के इस फैसले से बीजेपी को सत्ता गवानी पड़ी थी.’

एक बार फिर आमने सामने देवगौड़ा और वजुभाई

एक बार फिर कर्नाटक में ऐसी स्थिति बनी है कि देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी के पास मुख्यमंत्री बनने का मौका है. लेकिन इसका फैसला वजुभाई वाला को करना है. इस वजह से सोशल मीडिया में ऐसा कहा जा रहा कि 22 साल बाद कांग्रेस के कर्म उसका पीछा करते हुए कर्नाटक में आ गए हैं.

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