मोदी के बाद प्रताप चंद्र सारंगी के लिए बजीं सबसे ज्यादा तालियां

शपथ ग्रहण के दौरान मोदी के बाद इस मंत्री के लिए बजीं सबसे ज्यादा तालियां, जानिए वो कौन हैं
गुरुवार शाम जब नरेंद्र मोदी के साथ उनकी सरकार के 57 मंत्रियों ने शपथ ली तो एक शख्स ऐसे भी थे जिनके मंच पर आते ही तालियों की गड़गड़ाहट तेज़ हो गई.

नई दिल्‍ली :ऐसे समय में जब देश के चुनावी परिदृश्‍य में धनबल और बाहुबल का जोर है प्रताप चंद्र सारंगी जैसे व्‍यक्ति का सांसद चुनकर आना भारतीय लोकतंत्र में जनता के विश्‍वास को मजबूत करता है। ओडिशा की बालासोर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर आए सारंगी को नरेंद्र मोदी सरकार में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग राज्य मंत्री भी बनाया गया है। सारंगी ने इसे अपना सौभाग्‍य समझा है।शपथ ग्रहण के दौरान मोदी के बाद इस मंत्री के लिए बजीं सबसे ज्यादा तालियां, जानिए वो कौन हैं

शपथ ग्रहण के दौरान मोदी के बाद इस मंत्री के लिए बजीं सबसे ज्यादा तालियां, जानिए वो कौन हैं शपथ ग्रहण के दौरान मोदी के बाद इस शख्स के लिए बजी सबसे अधिक तालियां, जानें वो कौन हैं गुरुवार शाम जब नरेंद्र मोदी के साथ उनकी सरकार के 57 मंत्रियों ने शपथ ली तो एक शख्स ऐसे भी थे जिनके मंच पर आते ही तालियों की गड़गड़ाहट तेज़ हो गई. राष्ट्रपति भवन में मौजूद आठ हज़ार लोगों ने इस 64 साल के बुज़ुर्ग का ज़ोरदार तरीके से अभिवादन किया.

साधारण कपड़े पहने, कमज़ोर से दिखने वाले, बाल बिखरे हुए और लंबी दाढ़ी वाले इस शख्स का नाम प्रताप चंद्र सारंगी है जो ओडिशा के बालासोर से पहली बार सांसद चुनकर आए हैं. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें राज्य मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई. ये दूसरी बार था जब सारंगी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे थे. हाल ही में ट्विटर पर उनकी एक तस्वीर काफी वायरल हुई जिसमें वो दिल्ली आने से पहले अपने साधारण से घर में एक साधारण से दिख रहे बैग में कुछ कपड़े रखते देखे गए.प्रताप चंद्र सारंगी के लिए इमेज परिणाम

साधारण व्यक्तित्व

ओडिशा में सारंगी एक सीधे-साधे विनम्र, स्वतंत्र विचारों वाले राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं. सारंगी का जन्म नीलिगिरी से सटे गोपीनाथपुर गांव के एक गरीब परिवार में 4 जनवरी 1955 में हुआ. मोदी की तरह सारंगी भी युवावस्था में संन्यासी बनने की राह पर निकल पड़े थे.एक बार एक टेलीविजन इंटरव्यू में सारंगी को पूछा गया था कि वह अविवाहित या ब्रह्मचारी हैं. उन्होंने तुरंत जवाब दिया अविवाहित लेकिन ब्रह्मचारी नहीं. इंटरव्यू में सारंगी ने बताया कि 28 साल की उम्र में वो आध्यात्म की ओर जाने के लिए बेलूड़ मठ के रामकृष्ण मिशन से जुड़ना चाहते थे. स्वामी आत्मस्थानंद से मिलने में भी वह सफल रहे, लेकिन उन्होंने सारंगी से पूछा लिया कि क्या उनपर कोई आश्रित है.सारंगी ने उन्हें बताया कि उनकी एक बूढ़ी और विधवा मां हैं जो उनपर आश्रित हैं. इस पर स्वामी जी ने सुझाव दिया कि वह मां की देखभाल करें. इसके बाद सारंगी आजीवन अविवाहित रहे और पिछले साल उनकी मां के निधन होने तक उनकी देखभाल करते रहे.

सबसे संपन्न उम्मीदवारों को हराया

तटीय ओडिशा की राजनीति में जाने माने चेहरे, सारंगी ने ओडिशा के दो सबसे अमीर उम्मीदवारों के खिलाफ साइकिल पर घूम-घूमकर चुनाव प्रचार किया. जहां राज्य के कांग्रेस प्रमुख निरंजन पटनायक के बेटे नवज्योति पटनायक के पास 104 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है, वहीं बीजेडी के सांसद रवीन्द्र जेना की संपत्ति लगभग 72 करोड़ रुपए है.अपने चुनावी हलफनामे में सारंगी ने 1.5 लाख रुपए की चल संपत्ति और 15 लाख रुपए की अचल संपत्ति घोषित की थी. उनकी आमदनी का ज़रिया पेंशन और खेती है और उन पर सात आपराधिक मामले दर्ज़ हैं.प्रताप चंद्र सारंगी स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक कार्यों जैसे शिक्षा और शराब विरोधी अभियान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने बालासोर और मयूरभंज जिलों में गण शिक्षा मंदिर योजना के तहत आदिवासी गांवों में संस्कार केंद्र खोले थे.

बजरंग दल और वीएचपी से जुड़े रहे

सारंगी ने ओडिशा बजरंग दल के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया है और उससे पहले वह राज्य में विश्व हिन्दू परिषद के एक वरिष्ठ सदस्य भी रहे हैं. चुनाव अभियान के दौरान चिटफंड घोटाला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे के साथ सारंगी ने घर-घर जाकर प्रचार किया. जिसकी वजह से वह एक कड़े मुकाबले में 12,956 वोटों से जीत गए.Pics: ये हैं 'ओडिशा के मोदी', Modi Cabinet के इन मंत्री की तस्वीरें ही इनके बारे में बताने को काफी हैं

सारंगी दो बार चुनकर ओडिशा विधानसभा भी पहुंच चुके हैं. 2004 में वह बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर चुने गए और बाद में 2009 में बालासोर लोकसभा क्षेत्र में आने वाले नीलिगिरी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी चुने गए.

‘ओडिशा के मोदी’ सारंगी बोले- मेरे लिए राजनीति देश की सेवा करने का माध्‍यम है

अगर मोदी मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों को उनकी खूबियों के आधार पर आंका जाए तो प्रताप चंद्र सारंगी सबसे गरीब मंत्री ठहरेंगे। उनकी जमापूंजी कुल 13 लाख रुपये है। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद सारंगी ने कहा, ‘मैं भाग्‍यशाली हूं कि पीएम मोदी ने मुझ पर भरोसा किया। मेरे लिए राजनीति देश की सेवा करने का माध्‍यम है। हमारी पार्टी का सिद्धांत है- देश पहले, पार्टी उसके बाद और हम सबसे बाद में। मैं मोदी जी और आम जनता का विश्‍वास जीतने की पूरी कोशिश करूंगा।’

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मोदी के करीबी माने जाते हैं 
एकदम साधारण वेशभूषा और सामान्य जनजीवन वाले प्रताप सारंगी चुनाव जीतने के बाद से ही काफी चर्चा बटोर रहे हैं। उन्हें ‘ओडिशा का मोदी’ भी कहा जा रहा है।
सांसद चुने जाने से पहले प्रताप चंद्र सारंगी ओडिशा के नीलगिरी विधानसभा से 2004 और 2009 में विधायक चुने जा चुके हैं। इससे पहले वह 2014 के लोकसभा चुनाव में भी खड़े हुए थे लेकिन तब उन्‍हें हार मिली थी। प्रताप सारंगी को नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। बताया जाता है कि मोदी जब भी ओडिशा आते हैं तो सारंगी से मुलाकात जरूर करते हैं। सफेद दाढ़ी, सिर पर सफेद कम बाल, साइकिल और बैग उनकी पहचान है। गरीब परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले प्रताप सारंगी का जन्‍म नीलगिरी में ही गोपीनाथपुर गांव में हुआ।
बीजेडी के रबिन्द्र कुमार जेना को हराया चुनाव 
बता दें कि प्रताप चंद्र सारंगी ने बीजेडी के रबिन्द्र कुमार जेना को 12,956 वोटों से हराया है। बालासोर सीट से 1951, 1957 और 1962 में कांग्रेस को कामयाबी मिली थी। 1967 में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकली और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को मिली। साल 1971 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर इस सीट पर कब्जा जमा लिया। 1977 में फिर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यहां से जीती। इसके बाद के दो चुनावों 1980 और 1984 में यहां से कांग्रेस जीत हासिल की। 1991 और 1996 में भी इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। 1989 में इस सीट से जनता दल को कामयाबी मिली। 1998 के चुनाव में बीजेपी यहां से पहली बार जीती और इसके बाद 1999, 2004 में उसने अपनी कामयाबी को दोहराया। 2009 में कांग्रेस के श्रीकांत कुमार जेना चुनाव जीते थे। 2014 में यहां बीजेडी के रबींद्र कुमार जेना जीते थे।

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