मेवाड़ की रानी कर्णावती के साथ 13,000 नारियों ने जौहर कर लिया था आज

8 March History

  • गुजरात के बहादुर शाह ने 1534 में चित्तौढ़गढ़ को लूटा।
  • इंग्लैंड के राजा विलियम तृतीय की मौत के बाद 1702 में महारानी ऐनी ने सत्ता संभाली।
  • ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स ने महिलाओं के मताधिकार से संबंधित विधेयक को 1907 में ठुकरा दिया।
  • काम के लिए बेहतर वेतन, कम घंटे और वोट देने का अधिकार को लेकर 1908 में न्यूयॉर्क में कई महिलाओं ने एक रैली में हिस्सा लिया।
  • अमेरिकी सोशलिस्ट पार्टी ने 1909 में पहली बार राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था।
  • कोपनहेगेन (डेनमार्क) में 1910 में हुए महिलाओं के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 08 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस तय करने का प्रस्ताव रखा।
  • यूरोप में 1911 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया।
  • स्पेन की राजधानी मैड्रिड में 1921 में पार्लियामेंट से बाहर निकलते वक्त राष्ट्रपति एडवर्डो दातो की हत्या।
  • महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में शुरू किया।
  • द्वितीय विश्व शुद्ध के दौरान 1942 में जापानी सेना ने वर्मा के रंगून पर कब्जा किया।
  • एअर इंडिया इंटरनेशनल की 1948 में स्थापना।
  • इराक के गवर्निंग काउंसिल द्वारा एक नए संविधान पर 2004 में हस्ताक्षर किए गए।
  • रूस ने ईरान मामले पर अपना प्रस्ताव 2006 में वापस लिया।
  • फ़िल्म फ़ेयर आफ़ फ़ुटपाथ ने 2008 में काहिरा इंटरनेशनल फ़ेस्टीवल फ़ॉर चिल्ड्रेन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • भारत के अग्रणी गोल्फ ख़िलाड़ी ज्योति रंधावा ने 2009 में थाइलैंड ओपन ख़िताब जीता।
  • उत्तर कोरिया ने 2013 में दक्षिण कोरिया के साथ सभी शांति समझौतों को समाप्त कर दिया।

8 मार्च को जन्मे व्यक्ति 

  • ‘गाँधी स्मारक निधि’ के प्रथम अध्यक्ष, गाँधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री गोपी चन्द भार्गव का 1889 में जन्म।
  • प्रसिद्ध मराठी लेखक हरी नारायण आप्टे का 1864 में जन्म।
  • भारतीय राजनीतिज्ञ और ब्रिटिश भारत के उड़ीसा प्रान्त के मुख्यमंत्री विश्वनाथ दास का 1889 में जन्म।
    भारतीय कलाकार दामेर्ला रामाराव का 1897 में जन्म।
  • प्रसिद्ध फिल्म गीतकार साहिर लुधियानवी का 1921 में जन्म हुआ।
  • राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का 1953 में जन्म।
  • भारतीय अभिनेता फ़रदीन ख़ान का 1975 में जन्म हुआ।
  • भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर का 1989 में जन्म हुआ।
  • भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के दस सर्वश्रेष्ठ वॉलीबॉल खिलाड़ियों में से एक जिम्मी जॉर्ज का 1955 में जन्म।

8 मार्च को हुए निधन 

  • 1535 में मेवाड़ की रानी रानी कर्णावती का निधन।रानी कर्णावती चित्तौड़गढ़ की एक महान रानी और शासक थी। रानी कर्णावती राणा संग्राम सिंह से शादी हुई थी जिन्हें मेवार की राजधानी चित्तौड़गढ़ के सिसोदिया वंश के राणा सांगा के नाम से जाना जाता था। रानी कर्णावती दो महान राजा राणा विक्रमादित्य और राणा उदय सिंह की माता और महाराणा प्रताप की दादी थी।मेवाड़ के कीर्तिपुरुष महाराणा कुम्भा के वंश में पृथ्वीराज, संग्राम सिंह, भोजराज और रतनसिंह जैसे वीर योद्धा हुए। आम्बेर के युद्ध में राणा रतनसिंह ने वीरगति पाई। इसके बाद उनका छोटा भाई विक्रमादित्य राजा बना।उस समय मेवाड़ पर गुजरात के पठान राजा बहादुरशाह तथा दिल्ली के शासक हुमाऊं की नजर थी। यद्यपि हुमाऊं उस समय शेरशाह सूरी से भी उलझा हुआ था। विक्रमादित्य के राजा बनते ही इन दोनों के मुंह में पानी आ गया, चूंकि विक्रमादित्य एक विलासी और कायर राजा था। वह दिन भर राग-रंग में ही डूबा रहता था। इस कारण कई बड़े सरदार भी उससे नाराज रहने लगे।पहले मुगल बादशाह बाबर ने 1526 में दिल्ली के सिंहासन पर कब्ज़ा कर लिया था। मेवाड़ के राणा सांगा ने उनके खिलाफ राजपूत शासकों का एक दल का नेतृत्व किया। लेकिन अगले वर्ष खानुआ की लड़ाई में वे पराजित हुये। उस युद्ध में राणा सांगा को गहरे घाव हो गये जिसकें वजह से शीघ्र ही उनकी मृत्यु हो गई।उनके पीछे उनकी विधवा रानी कर्णावती और उनके बेटे राजा राणा विक्रमादित्य और राणा उदय सिंह थे। रानी कर्नावती ने अपने बड़े पुत्र विक्रमजीत हाथो मे राज्य का पदभार संभालने को दिया।

    लेकिन् इतना बड़ा राज्य संभल ने के लिये अभी विक्रमजीत की उम्र कम थी। इस बीच, गुजरात के बहादुर शाह द्वारा दूसरी बार मेवाड पर हमला किया गया था। जिनके हाथ विक्रमजीत को पहले हार मिली थी। रानी के लिए यह बहुत चिंता का मामला था।

    1534 में बहादुरशाह ने मेवाड़ पर हमला कर दिया। कायर विक्रमादित्य हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। ऐसे संकट के समय राजमाता कर्मवती ने धैर्य से काम लेते हुए सभी बड़े सरदारों को बुलाया। उन्होंने सिसोदिया कुल के सम्मान की बात कहकर सबको मेवाड़ की रक्षा के लिए तैयार कर लिया।सबको युद्ध के लिए तत्पर देखकर विक्रमादित्य को भी मैदान में उतरना पड़ा। मेवाड़ी वीरों का शौर्य, उत्साह और बलिदान भावना तो अनुपम थी; पर दूसरी ओर बहादुरशाह के पास पुर्तगाली तोपखाना था। युद्ध प्रारम्भ होते ही तोपों की मार से चित्तौड़ दुर्ग की दीवारें गिरने लगीं तथा बड़ी संख्या में हिन्दू वीर हताहत होने लगे। यह देखकर विक्रमादित्य मैदान से भाग खड़ा हुआ।

    इस युद्ध के बारे में एक भ्रम फैलाया गया है कि रानी कर्मवती ने हुमाऊं को राखी भेजकर सहायता मांगी थी तथा हुमाऊं यह संदेश पाकर मेवाड़ की ओर चल दिया; पर उसके पहुंचने से पहले ही युद्ध समाप्त हो गया। वस्तुतः हुमाऊं स्वयं मेवाड़ पर कब्जा करने आ रहा था; पर जब उसने देखा कि एक मुसलमान शासक बहादुरशाह मेवाड़ से लड़ रहा है, तो वह सारंगपुर में रुक गया।

    उधर विक्रमादित्य के भागने के बाद चित्तौड़ में जौहर की तैयारी होने लगी; पर उसकी पत्नी जवाहरबाई सच्ची क्षत्राणी थी। अपने सम्मान के साथ उन्हें देश के सम्मान की भी चिन्ता थी। वह स्वयं युद्धकला में पारंगत थीं तथा उन्होंने शस्त्रों में निपुण वीरांगनाओं की एक सेना भी तैयार कर रखी थी।

    जब राजमाता कर्मवती ने जौहर की बात कही, तो जवाहरबाई ने दुर्ग में एकत्रित वीरांगनाओं को ललकारते हुए कहा कि जौहर से नारीधर्म का पालन तो होगा; पर देश की रक्षा नहीं होगी। इसलिए यदि मरना ही है, तो शत्रुओं को मार कर मरना उचित है। सबने ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष कर इसे स्वीकृति दे दी।

    इससे पुरुषों में भी जोश आ गया। सब वीरों और वीरांगनाओं ने केसरिया बाना पहना और किले के फाटक खोलकर जवाहरबाई के नेतृत्व में शत्रुओं पर टूट पड़े। महारानी तोपखाने को अपने कब्जे में करना चाहती थी; पर उनका यह प्रयास सफल नहीं हो सका। युद्धभूमि में सभी हिन्दू सेनानी खेत रहे; पर मरने से पहले उन्होंने बहादुरशाह की अधिकांश सेना को भी धरती सुंघा दी।

    यह 8 मार्च, 1535 का दिन था। हिन्दू सेना के किले से बाहर निकलते ही महारानी कर्मवती के नेतृत्व में 13,000 नारियों ने जौहर कर लिया।  यह चित्तौड़ का दूसरा जौहर था। बहादुरशाह का चित्तौड़ पर अधिकार हो गया; पर वापसी के समय मंदसौर में हुमाऊं ने उसे घेर लिया। बहादुरशाह किसी तरह जान बचाकर मांडू भाग गया। इन दोनों विदेशी हमलावरों के संघर्ष का लाभ उठाकर हिन्दू वीरों ने चित्तौड़ को फिर मुक्त करा लिया।

    रानी कर्णावती ने चित्तौड़गढ़ के सम्मान की रक्षा में मदद करने के लिए अन्य राजपूत शासकों से अपील की। शासकों ने सहमति व्यक्त की लेकिन उनकी एकमात्र शर्त यह थी कि विक्रमजीत और उदय सिंह को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए युद्ध के दौरान बुंदी जाना चाहिए।

    कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को एक राखी भेजी, और उन्हें एक भाई का दर्जा देते हुए सहायता के लिए अपील की।

    रानी कर्णावती अपने बेटों को बुंदी को भेजने के लिए राजी हो गयी और उन्होंने अपनी भरोसेमंद दासी पन्ना से कहा कि उनके साथ रहना और उन्हें अच्छी तरह से देखभाल करना। और पन्ना ने यह जवाबदेही स्विकार कर ली।

    हुमायूं, जो बंगाल के आक्रमण की तैयारी पर था राणी कर्णावती को सहायता देने का आश्वासन दिया इस प्रकार उसे हर रक्षा बंधन को याद किया जाता है।

    यह सच है कि हुमायूं ने राखी को स्वीकार कर लिया और चित्तौड़ की तरफ चले। लेकिन वह समय पर वहां पहुंचने में नाकाम रहे। अपने आगमन से पहले बहादुर शाह चित्तौड़गढ़ में प्रवेश किया।

    रानी कर्णावती यह हार समझने लगी। तब उन्होंने और अन्य महान महिलाओं ने खुद को आत्मघाती आग (जोहर) में आत्महत्या कर ली। जबकि सभी पुरुषों ने भगवा कपड़े लगाए और मौत से लड़ने के लिए निकल गए। हुमायूं ने बहादुर शाह को पराजित किया और कर्नावती के पुत्र विक्रमादित्य सिंह को मेवाड़ के शासक के रूप में बहाल कर दिया।

  • 1957 में भारत के प्रसिद्ध राष्ट्रीय नेता बाल गंगाधर खेर का निधन।
  • 2015 में आउटलुक के संस्थापक एवं प्रसिद्ध पत्रकार विनोद मेहता का निधन।

8 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव 

  • अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस

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