मेरठ से हिंदुओं के पलायन पर लखनऊ-दिल्ली तक हड़कंप

मेरठ में पलायन मुद्दा : स्टंट दिखाकर डराते हैं और मकान बेचने को करते हैं मजबूर
मेरठ के प्रहलादनगर में असामाजिक तत्वों की गुंडागर्दी और पुलिस की घोर लापरवाही खुफिया विभाग की जांच में सामने आई है। ऐसे हालात दो-चार दिन में नहीं बने, बल्कि यह लंबे समय से चल रहा है। यहां लोग लगातार छेड़छाड़, स्टंटबाजी और अराजकता होने की शिकायत कर रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। खुफिया विभाग ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

खुफिया विभाग ने प्रहलादनगर में जाकर जांच पड़ताल की। स्थानीय लोगों और महिलाओं से बातचीत की। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 20 साल में प्रहलादनगर छोटा और आसपास का इलाका बड़ा होता गया। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने यहां मकान खरीदने शुरू कर दिए, तो दूसरे समुदाय के लोग अपने मकान बेचकर जाने लगे। इसको देखते हुए प्रहलादनगर की समिति बनी, जिसके अध्यक्ष सुनील चड्डा हैं। समिति ने फैसला लिया कि प्रहलादनगर में कोई मकान अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति को नहीं बेचा जाएगा। समिति ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बेचे मकान वापस खरीदे और तय किया किया यदि किसी को जाना है, तो वह पहले समिति को आकर बताएगा।

दस मकान समिति ने खरीदवाए 
खुफिया विभाग की जांच में सामने आया है कि प्रहलादनगर समिति की सहमति से दस मकान खरीदे गए। करीब 20 साल से प्रहलादनगर में ऐसा ही चल रहा है। इसके बावजूद मकान बेचने वालों की संख्या बढ़ती गई, लेकिन आकर बसने वालों की संख्या घटी। आखिर समिति भी कब तक मकान खरीदती। इसके चलते पूरी प्लानिंग के साथ प्रहलादनगर मामले को उठाया गया। पंचम तल तक मामला पहुंचा, तब जाकर पुलिस-प्रशासन की आंख खुली।

जिम्मेदार पुलिस, कार्रवाई पर चुप्पी 
प्रहलादनगर लिसाड़ीगेट थाने से एकदम सटा हुआ है। इसके बावजूद यहां के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पुलिस हर त्यौहार से पहले दोनों समुदाय के लोगों की मीटिंग कर समस्याएं सुलझाने का दावा करती है। सवाल यह है कि अगर समस्याएं सुलझाई थीं, तो ऐसी नौबत क्यों आई कि मामला पंचम तल तक पहुंच गया। इस मामले में पुलिस चुप्पी साधे है।

अल्पसंख्यकों से नहीं, बाहरी लोगों से दिक्कत
प्रहलादनगर में भाजपा पार्षद जितेंद्र पाहवा, पूर्व पार्षद इंद्रजीत कथूरिया, भावेश मेहता (नमो एप पर शिकायत करने वाला), रामकुमार, विनोद, आमोद वैद्य समेत करीब 50 लोगों से बातचीत की गई। सभी ने एक जैसी ही बात बताई। इनका कहना है कि यह मामला पलायन का नहीं है। मामला असामाजिक तत्वों की मौजूदगी, छेड़छाड़, स्टंटबाजी और फायरिंग का है। इनका कहना है कि प्रहलादनगर के चारों तरफ अल्पसंख्यक लोग रहते हैं, लेकिन उनसे कोई दिक्कत नहीं है। लिसाड़ी रोड का ट्रैफिक यहां से गुजरता है। बाहरी लोग आकर गुंडागर्दी करते हैं। इसके चलते ही लोग यहां से घरों को बेचकर जा रहे हैं। पुलिस ने एक बार भी उनकी समस्या पर सुनवाई नहीं की।

प्रहलादनगर में गुंडागर्दी की हदें पार, सामने आई पुलिस की घोर लापरवाही, ऐसे हुआ खुलासाप्रहलादनगर के लोगों से बात करते विधायक सोमेंद्र तोमर

प्रहलादनगर के लोगों से बात करते विधायक सोमेंद्र तोमर

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