मांस कारोबार से फैल रही नफरत, बने कारगर नीति: हाईकोर्ट

गोकशी पर दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा कि प्रदेश में मांस के कारोबार से नफरत फैल रही है। यह कारोबार धार्मिक भावनाओं से जुड़कर शाकाहारियों व मांसाहारियों के बीच लगातार नफरत की वजह बना हुआ है। दोनों ही पक्ष मिलकर भारत को बनाते हैं। कोई भी धर्म नफरत को मान्यता नहीं देता। सरकार को कारगर नीति बनानी चाहिए। भविष्य के नागरिकों के लिए हमें ऐसे रास्ते खोजने होंगे, जो इस नफरत से हो रहे नुकसान को सुधार सके।
जस्टिस अताउर रहमान मसूदी ने याचिकाकर्ता हरदोई के विमल शुक्ला को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। विमल का कहना था कि गोकशी के मामले में उन पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। इस मामले में जमानत स्वीकार हुई तो गोकशी के एक और मामले में गैंगस्टर एक्ट लगा दिया गया। तब उसने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने कहा कि दंड से पहले मवेशियों के प्रबंधन की नीति भी बननी चाहिए।

प्रत्येक हजार लोगों पर बनाए एक गोशाला
हाईकोर्ट ने सरकार से उम्मीद करते हुए कहा कि प्रदेश में हर एक हजार लोगों की आबादी पर एक गोशाला होनी चाहिए। प्रत्येक परिवार को एक गाय गोद लेने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए ताकि उनके रखरखाव का खर्च निकायों पर बोझ न बने।

सभी निकायों में बने वधशालाएं
मवेशियों का उचित प्रबंधन करने के लिए सभी निकायों, नगरीय क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों में वधशालाएं बनाई जाएं।
साथ खा सकते हैं, पूजा नहीं कर सकते
दंड निर्धारण में दिमाग का उपयोग तो करते
हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि अप्रैल 2016 में सरकार ने गायों के संरक्षण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया। उसमें उसे दिमाग का उपयोग करना चाहिए था। अब जिस प्रकार के मामले आ रहे हैं, उसके बारे में दंड निर्धारित करने से पहले पता होना चाहिए था। हालांकि अब भी देर नहीं हुई है। सरकार कदम उठाए और नागरिकों के मूल अधिकारों का संरक्षण करे।

कोर्ट ने कहा- ऐसे तो गैंगस्टर एक्ट से सुरक्षा व व्यवस्था कायम नहीं हो सकती
जस्टस अताउर रहमान मसूदी ने कहा कि विमल के आपराधिक इतिहास में केवल गोकशी के एक जैसे दो मामले शामिल हैं। इनका अभी ट्रायल भी पूरा नहीं हुआ। ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिससे साबित हो की वह पहले भी किसी अपराध में दोषी करार दिया जा चुका है। ऐसे व्यक्ति के लिए यह विकट हालात होंगे कि उस पर गैंगस्टर एक्ट लगा दिया जाए, लेकिन बाद में वह लंबित मामले में ही निर्दोष निकले।

हाईकोर्ट ने विमल को एक मामले में जमानत दे दी तो प्रदेश सरकार को इसके खिलाफ सक्षम अदालत में अपील करनी चाहिए थी। इस पर फैसला अदालत करती, लेकिन अफसरों ने हाईकोर्ट के आदेशों के लिए खुला असम्मान प्रदर्शित करते हुए इस आदेश के उद्देश्य को ही पराजित कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार से गैंगस्टर एक्ट जैसे विशेष कानून के जरिए समाज में सुरक्षा और व्यवस्था नहीं लाई जा सकती। सरकार का यह कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करे, संविधान ने इसकी गारंटी दी है।

खान-पान के आधार पर नहीं बांटता संविधान
‘हिंदू धर्म किसी व्यक्ति को खाने-पीने की आदतों की वजह से धर्म को मानने से नहीं रोकता। इस्लाम, ईसाई और सिख धर्म में भी यही होता है। किसी को शाकाहारी बनने पर धर्म से अलग नहीं किया जाता। हमारा संविधान धर्म को मानने की अनुमति देता है, लेकिन आबादी को उसके खान-पान की आदतों की वजह से वर्गीकृत नहीं करता।’

प्रतिबंधित मवेशी खाकर क्या जन्नत मिलेगी
किसी अधिनियम में किसी मवेशी को अगर मारने पर पाबंदी है, तब भी उसका मांस खाने पर एक हिंदू, हिंदू कहलाना बंद नहीं हो जाएगा। न ही मुस्लिम, सिख या ईसाई उसका मांस खाकर जन्नत पा जाएंगे। इतिहास में ऐसा कभी नहीं सुना गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *