महाशक्ति चीन में एक करोड गरीब महिलायें लगाती हैं देह व्यापार

कद्दावर चीन का कड़वा सच, खड़ी हो चुकी है एक करोड़ सेक्स वर्कर्स की ‘इंडस्ट्री’जब से चीन एक बाजार इकोनॉमी वाले देश में तब्दील हुआ है, तब से यहां गरीबी, असमानता और तमाम बुराइयां भी बढ़ी हैं. एक आंकड़े के अनुसार चीन में फिलहाल एक करोड़ से ज्यादा सेक्स वर्कर्स हैं.

हम सबके सामने चीन की जो तस्वीर सामने आती है, वो आमतौर उस खुशनुमा चीन की होती है, जहां साफ सुथरी सड़कें हैं. ऊंची इमारते हैं. चमक-दमक और बड़ी इंडस्ट्रीज के साथ ढेर सारा पैसा कमाते हुए चाइनीज लोग. क्या इसके बीच आप सोच सकते हैं कि वहां जितनी तेजी से इकोनॉमी बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से वेश्यावृत्ति भी फलने-फूलने लगी है.
हैरान मत होइएगा. दरअसल चीन आमतौर पर जो तस्वीर बाहरी दुनिया को दिखाता है, वो उससे एकदम अलग है. वहां गरीबी भी है और गरीबी के कारण पैदा हो रही असमानताएं और अपराध भी. गरीबी के कारण चीन की बहुत सी महिलाएं और लड़कियां वेश्यावृत्ति में आ रही हैं. बेशक प्रोस्टिट्यूशन चीन में अवैध है लेकिन हकीकत ये है कि चीन की बढ़ती असमानता इसे तेजी से बढ़ा रही है.
एक आंकड़ा कहता है कि चीन में फिलहाल करीब एक करोड़ महिलाएं इस धंधे में हैं. उनमें से कुछ पड़ोसी देशों से यहां आईं या लाई गईं सुनहरे भविष्य के सपनों के साथ. लेकिन बाद में उन्होंने इस धंधे में शामिल हो गईं.

चीन में कहां फलफूल रही है वेश्यावृत्ति

चीन का बढ़ता भ्रष्टाचार, बड़े वर्ग की अमीरी और अपराधियों का सिंडिकेट प्रोस्टिट्यूशन के साथ गलबहियां कर रहा है. कुछ इस धंधे को ग्राहक बनकर बढ़ा रहे हैं तो कुछ इसे चला रहे हैं. ये चीन के आलीशान जगहों में फ्लैट्स में चलता है तो कहीं कहीं हेयर सैलून, नाइट क्लब्स, होटलों, स्पा और मसाज केंद्रों की आड़ में. लेकिन ये तय है कि चीन में वेश्यावृत्ति धड़ल्ले से चल रही है.

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चीनी रिसर्चर ने किताब के जरिए सामने लाई स्याह सच्चाई 

जिस तरह हमारे यहां पुलिस की वसूली के जरिए कई अवैध धंधे फलते फूलते हैं. चीन कोई अलग नहीं है. कुछ समय पहले चीन की एक महिला पत्रकार लीजिया झांग ने चीन में इंडस्ट्री का रूप ले रही वेश्यावृत्ति पर गहन रिसर्च किया.

चीन की रिसर्चर और पत्रकार झांग ने इस पर “लोटस” नाम से किताब लिखी, जिसमें चीन में बढ़ती वेश्यावृत्ति की परतें खोली गई हैं (फाइल फोटो)

लीजिया झांग चीन की एक जानी मानी पत्रकार और रिसर्चर हैं. कुछ दिनों पहले उन्होंने चीन में वेश्यावृत्ति पर लोटस नाम से एक किताब लिखी. उन्होंने चीनी महिलाओं से संबंधित एक वेबसाइट www.followcn.com पर ये बताया कि उन्होंने ये किताब क्यों लिखी है. बकौल उनके, “हमारे फैमिली एल्बम में मेरी दादी का एक ही फोटोग्राफ था, वो भी उनके युवा दौर का, जिसमें वो किसी फिल्म स्टार सरीखी दिखती हैं. 1998 में जब वो डेथबेड पर थीं, तब मुझे मालूम हुआ कि हमारी प्यारी दादीं एक प्रोस्टीट्यूट थीं.”

“ये मेरे शॉकिंग बात थी, जिसने इसके बारे में मेरी उत्सुकता जगा दी. मैने जगह जगह चीन में वेश्यावृत्ति की जड़ें तलाशनी शुरू कीं. शहरों में मुझे वो महिलाएं मिलीं, जो चमकदार नियोन लाइट्स के नीचे मेकअप में खड़ी रहती थीं, उसकी ड्रेस झीनी सी होती थी, कुछ मसाज पार्लर से तो कुछ हैयर सैलून या फिर बाथहाउस से अपना धंधा कर रही होती थीं. ये सभी जगहें वेश्यालय हैं.”

“मैने इस पर नॉवेल लिखने का फैसला किया. इसके लिए मैं जगह जगह जगह घूमी और एनजीओ की मदद ली. तब मुझको पता चला कि चीन में तो प्रोस्टिट्यूशन एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले चुका है.”

बढ़ते पैसे ने महिलाओं को उपभोग का सामान बना दिया
झांग लिखती हैं, “मैं इसके लिए चीन की मार्केट इकोनॉमी को जिम्मेदार ठहराऊंगी, जिस तरह चीन का मार्केट इकोनॉमी का रूपांतरण हुआ, जिसमें महिलाओं के कंधे पर भी भारी बोझ आ गया और वो इसकी शिकार भी बनती चली गई. अचानक पैसा आने से चीन में महिलाओं का उपभोग करने वाला एक नया वर्ग भी पैदा हो गया.”

कम्युून का ताना बाना टूट चुका है
1949 में जब चीन कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई थी तो उसने तमाम चकलाघर बंद कर दिया और वेश्यावृत्ति को गैरकानूनी घोषित कर दिया. लेकिन तब ये माना गया कि चीन में एक ऐसे कम्युन का निर्माण होगा, जिसमें हर कोई मेहनत करेगा और हर किसी को सरकार घर से लेकर खाने तक की गारंटी देगी.लेकिन ये तानाबाना पिछले कुछ दशकों में छिन्न भिन्न हो चुका है.

चीन की बड़ी आबादी के सामने रोजी-रोटी का संकट
अब चीन में बहुत बड़ी आबादी ऐसी है, जिसके सामने जीवन गुजारने और रोजी-रोटी का संकट है. आमतौर पर गरीब घर की महिलाएं, लड़कियां जीवनयापन और घर चलाने के लिए इस पेश में आ रही हैं.
चीन से ही जुड़ी एक और वेबसाइट www.efe.com इसी से जुड़ी एक स्टोरी में हैयर सैलून चलाने वाली सेक्स वर्कर होंग शी (काल्पनिक नाम) से बात करती है. जिसमें वो बताती है कि वो चीन के एक गांव से ताल्लुक रखने वाली सिंगल मदर है. उसके सामने सबसे बड़ी समस्या अपने दो बच्चों के साथ पेरेंट्स को पालने की है, लिहाजा उसको इस धंधे में उतरना पड़ा.

china brothalsचीन के आलीशान शहरों के अपार्टमेंट के फ्लैट्स भी प्रोस्टिट्यूशन के ठिकाने हैं (सांकेतिक तस्वीर)

वो जब शुरू में बीजिंग आई तो उसे कई लड़कियों के साथ एक बिल्डिंग के बेसमेंट में रखा गया. एक बार वो पुलिस के द्वारा पकड़ी भी गई. लेकिन जब वो छूटकर आई तो उसने अपना हैयरसैलून खोला और अब एक और महिला साथी के साथ सेक्स वर्कर का काम कर रही है. बीजिंग के बाहरी इलाके में जब उसने अपना हेयरसैलून खोला था तो ये छोटा था लेकिन अब उसने इसे बड़ा कर लिया है. उसके पास आने वाले ग्राहकों में ज्यादातर पैसे वाले होते हैं. कुछ पुलिस वालों से भी जान पहचान हो गई है. वो भी कुछ पैसे लेकर मदद कर देते हैं. अक्सर उनके कस्टमर्स में पुलिस वाले भी होते हैं.

क्या हैं चीन में इसके कानून
वैसे तो चीन का कानून किसी भी महिला के पास कंडोम मिलने पर उसे प्रोस्टिट्यूट मान लेता है लेकिन उसे इसके लिए 500 से लेकर 5000 यूआन की पेनाल्टी देनी होती है या फिर 10 से 15 दिन जेल में बिताने होते हैं. हालांकि जेल जाने वाली महिलाओं के लिए रिफ्रेशर कोर्स चलाए जाते हैं लेकिन लगता नहीं कि उससे कोई फायदा होता भी है.

चीन में आनलाइन और टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी ये धंधा धड़ल्ले से फलफूल रहा है (सांकेतिक तस्वीर)

कैसे फलफूल रहा है ये धंधा
चीन में मोबाइल के जरिए टैक्स्ट मैसेज और आनलाइन के जरिए भी ये धंधा फलफूल रहा है. चीन की सड़कों पर भी प्रोस्टिट्यूशन के धंधे में लगी महिलाएं खड़ी दीख जाएंगी. वो अपना विजिटिंग कार्ड देती हैं या फिर कुछ होटल्स ऐसे हैं जहां उनके विजिटिंग कार्ड टेबल्स पर लगे मिल जाते हैं. यानि ये पूरा धंधा अंडरग्राउंड तो है लेकिन योजनाबद्ध तरीके से चल रहा है.

विदेशी लड़कियां भी बड़े पैमाने पर इस धंधे में
जिस तरह चीन की इकोनामी बढ़ रही है. उनका पैसा बढ़ रहा है. सेक्स वर्कर के पास आने वाले ग्राहक भी बढ़ रहे हैं. चीन की महिलाएं और लड़कियां अगर अपनी गरीबी और घरेलु हिंसा के कारण इस धंधें में आ रही हैं तो चीन के पडोसी देशों की लड़कियां बड़े पैमाने पर ये काम करती मिल जाएंगी. कुछ यहां स्वैच्छा से आती हैं तो कुछ शादी या फिर मॉडल बनाने का झांसा देकर सिंडिकेट या गैंग के जरिए लाई जाती हैं. इसमें उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, जापान, पाकिस्तान, म्यांमार और कुछ अफ्रीकी देशों की लड़कियां शामिल हैं.

ये वो लड़कियां हैं, जिन्हें एक गैंग म्यांमार से ये सपना दिखाकर लाया गया कि उन्हें मॉडल बनाया जाएगा. लेकिन जब वो चीन पहुंची तो पता लगा कि वो प्रोस्टिट्यूशन कराने वाले रैकेट की गिरफ्त में आ चुकी हैं (सांकेतिक तस्वीर)

इतालवी फोटोग्राफर ने भी देखीं ये स्याह हकीकत
कुछ समय पहले एक इतालवी फोटोग्राफर चीन आया और उसने जगह जगह चीन में फलते फूलते प्रोस्टिट्यूशन को देखा. इसकी ढेर सारी फोटोएं खींचीं, जो आसानी से इंटरनेट पर तलाशी जा सकती हैं. हालांकि इस दिशा में कुछ एनजीओ भी काम कर रहे हैं लेकिन नए और आर्थिक तौर पर ताकतवर होते चीन में वेश्यावृत्ति उन तमाम बुराइयों सरीखी सच्चाई है, जो पैसे और उससे बढ़ती असमानता के साथ यहां पैर पसार चुकी है.

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