महाभारत-2019 /  मनमोहन जैसी एंटी-इन्कम्बैंसी नहीं मोदी के खिलाफ, 20-25 सीटों का नुकसान संभव

करण थापर प्रेसिडेंट, इन्फोटेन्मेंट टेलीविजन प्रा.लि.करण थापर प्रेसिडेंट, इन्फोटेन्मेंट टेलीविजन प्रा.लि.

  • वरिष्ठ पत्रकार करण थापर के मुताबिक- अगर 80-90 सीटें कम आईं तो हो सकता है कि एनडीए सरकार बनाने का दावा पेश न करे
  • \’एेसे में विपक्ष खिचड़ी सरकार बना सकता है लेकिन वह डेढ़-दो साल से ज्यादा नहीं चल पाएगी\’

वरिष्ठ पत्रकार करण थापर मानते हैं मौजूदा हालात में लगता है कि मोदी सरकार फिर बन जाएगी। यदि खिचड़ी सरकार बनी तो वह डेढ़-दो साल से ज्यादा नहीं चल पाएगी। 2019 के लोकसभा चुनावों के विभिन्न मुद्दों पर  अनिरुद्ध शर्मा से उनकी बातचीत के मुख्य अंश :

सवाल: मोदी को हरा पाना नामुमकिन है?
जवाब: फिलहाल देश में जो माहौल है, उसमें लगता है कि बीजेपी को 20-25 सीटों की निजी कमी हो सकती है और ये कमी वह अपने नए पुराने घटक दलों से पूूरा कर लेगी और मोदी की सरकार फिर से बन जाएगी। यदि अगले कुछ महीनों में राजनीतिक माहौल बदला और सीटें 80-90 तक कम आईं तो हो सकता है कि सबसे बड़ा दल होते हुए भी 1989 में राजीव गांधी की तरह शायद एनडीए एक बार फिर सरकार बनाने का दावा पेश न करे। हो सकता है ऐसे में विपक्ष एक खिचड़ी सरकार बना ले, लेकिन अंदाजा और तजुर्बा कहता है कि वह शायद डेढ़-दो साल से ज्यादा नहीं चल सकेगी।

सवाल: भाजपा के पास क्या मुद्दे होंगे?
जवाब: 2019 के आम चुनाव की स्थिति 2014 से अलग है, मोदी सरकार के खिलाफ वैसी एंटी-इन्कम्बैंसी नहीं है, जो मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ टूजी, काॅमनवेल्थ गेम्स की वजह से थी। इस सरकार की लोकप्रियता में खास कमी नहीं आई है।

सवाल: इस चुनाव में कांग्रेस के पास मोदी सरकार के खिलाफ क्या मुद्दे हैं?
जवाब: कांग्रेस रफाल मुद्दा तो लाएगी ही और उन वायदों को भी याद दिलाएगी, जिन्हें मोदी सरकार पूरा नहीं कर सकी।

सवाल: यूपी में सपा-बसपा गठबंधन हाेने पर भाजपा प्रदर्शन दोहरा पाएगी?
जवाब: लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का एक सफल गठबंधन बनेगा और उस स्थिति में बीजेपी वहां पिछला प्रदर्शन दोहरा पाए, ये मुश्किल है। सही नंबर बता पाना तो संभव नहीं पर सीटें निश्चित ही कम होंगी। कांग्रेस नेतृत्व करे तो तमाम राज्यों के क्षेत्रीय दलों के साथ असरदार गठबंधन हो सकता है।

सवाल: भाजपा जो सीटें गंवाएगी, उसकी पूर्ति कहां से और कैसे कर पाएगी?
जवाब: भाजपा यूपी, राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि उत्तर भारतीय राज्यों में जो सीटें गंवाएगी, वह उसकी भरपाई नॉर्थ-ईस्ट, पश्चिम बंगाल और कुछ हद तक ओडिशा से करेगी। लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं है कि दक्षिण के राज्यों से भाजपा को कुछ हासिल होगा।

सवाल: विपक्ष आरोप लगाता है कि मोदी सरकार में सांप्रदायिकता बढ़ी है?

जवाब: सांप्रदायिकता तो निश्चित ही बढ़ी है। मॉब लिंचिंग के बहुत से मौकों पर मोदी भी चुप रहे, इससे कट्‌टरपंथी ताकतों को बल मिला।

सवाल: अभी तक सरकार में भ्रष्टाचार का कोई बड़ा मामला नहीं आया है?
जवाब: रफाल का आरोप लगा है लेकिन उसके भी कोई सुबूत सामने नहीं आए हैं। तुलनात्मक रूप से कहा जा सकता है कि मौजूूदा सरकार भ्रष्टाचार मुक्त है। मेरे शब्दों पर ध्यान दीजिए, मैं कह रहा हूं ‘तुलनात्मक रूप से…’।

सवाल: नोटबंदी और जीएसटी को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: जीएसटी का फैसला काफी दिनों से अपेक्षित था, यह एक जरूरी सुधार था, पिछली सरकार भी एेसा करना चाहती थी। लेकिन नोटबंदी का फैसला बिल्कुल असफल रहा, इससे देश को नुकसान हुआ।

सवाल: मोदी सरकार की दो बड़ी कामयाबी और दो असफलताएं बताइए?
जवाब: उपलब्धियां तो नहीं गिना पाऊंगा, इसमें सबका दृष्टिकोण अलग-अलग होता है। जैसा कि मैंने कहा कि नोटबंदी इस सरकार की सबसे बड़ी विफलता रही, इसे ब्लैक मनी, फेक करेंसी और टेरर फंडिंग जैसे मुद्दों का हल बताते हुए लागू किया गया था, आज सरकार इस मुद्दे पर चर्चा तक नहीं करती। हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने एक लेख में इन सब मुद्दों की चर्चा तक न करके नोटबंदी की एक अलग ही किस्म से व्याख्या की।

सवाल: दलित, सवर्ण विवाद की स्थिति को आप कैसे देखते हैं? इसका कोई हल है? चुनाव पर इसका क्या असर होगा?
जवाब: ये पहली सरकार है, जिसमें दलित सांसद सबसे अधिक संख्या में चुन कर आए पर रोहित वेमूला जैसे मामले भी सामने आए। चुनाव पर इसका असर रहेगा। दोनों पक्ष इसकी अपनी तरह से व्याख्या करेंगे।

सवाल: सरकार जो भी आंकड़े दे रही है चाहे जीडीपी के हों, रोजगार के हों या अन्य, विपक्ष उन्हें झूठा बता रहा है। क्या वास्तव में देश में आंकड़ों की बाजीगरी चल रही है?
जवाब: मुझे नहीं लगता कि जीडीपी जैसे आंकड़ों पर सरकार बाजीगरी कर सकती है। जीडीपी तय करने के नए तरीके पर विवाद हो सकता है लेकिन हेरफेर की गुंजाइश कम है।

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