महान् हिन्दी उपन्यासकार चतुरसेन शास्त्री का निधन हुआ था आज

2 फ़रवरी का इतिहास

2 फरवरी का दिन भी भारतीय इतिहास में काफी महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। इसी दिन साल 1949 में भारतीय न्यूज एजेंसी प्रेस ट्र्स्ट ऑफ इंडिया की स्थापना की गई। इसके अलावा 2 फरवरी के दिन देश में प्रशासनिक सुधारों के लिए साल 1844 में पिट्स नियामक अधिनियम को लागू किया गया। 2 फरवरी की तारीख ,भारतीय इतिहास में और भी बहुत सारी ऐतिहासिक घटनाओं को ग्वाह बनीं, इसके साथ ही इस दिन कई ऐसी शख्सियत ने जन्म लिया, जिन्होंने दुनिया में आकर अपनी एक अलग पहचान बनाई वहीं कई महान व्यक्ति इस दिन दुनिया को अलविदा भी कह गए। तो आइए जानते हैं 2 फरवरी के दिन देश-दुनिया के महत्वपूर्ण इतिहास के बारे में –

2 February History

  • भारत में दीव (गोआ, दमन और दीव) के पास पुर्तग़ाल व तुर्की के बीच 1509 में युद्ध हुआ।
  • चीन के शैन्सी प्रांत में 1556 में आये जबरदस्त भूकंप में करीब लाखों लोगों की मौत हुई।
  • चार्ल्स प्रथम 1626 में इंग्लैंड के सम्राट बने।
  • देश में प्रशासनिक सुधारों के लिए 2 फरवरी, साल 1844 में पिट्स नियामक अधिनियम को लागू किया गया।
  • शंभूनाथ पंडित 1862 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के पहले भारतीय न्यायाधीश बने।
  • यूनान ने 1878 में तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
  • रशिया ने 1892 में कैलिफ़ोर्निया में ‘फ़र ट्रेडिंग कॉलोनी’ की स्थापना की।
  • 1901 में क्वीन विक्टोरिया का अंतिम संस्कार हुआ।
  • न्यूयार्क में 1913 में ‘ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल’ की ओपनिंग हुई।
  • फ़्रांस ने 1920 में मैमेल पर कब्ज़ा किया।
  • जेम्स जॉयस का लिखा उपन्यास ‘यूलिसिस’ 1922 में पहली बार प्रकाशित किया गया।
  • हंगरी ने 1939 में सोवियत संघ के साथ संबंध समाप्त किये।
  • प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की स्थापना 2 फरवरी साल 1949 को की गई।
  • भारत ने 1952 में मद्रास में पहला टेस्ट क्रिकेट जीता।
  • अखिल भारतीय खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन 1953 में किया गया।
  • पाकिस्तान ने ‘कश्मीर समझौते’ के लिए 1966 में एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया।
  • सीरिया ने 1982 में हामा पर आक्रमण किया।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश एवं रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन द्वारा 1992 में शीत युद्ध की समाप्ति की घोषणा।
  • चीन तथा सं.रा. अमेरिका के बीच 1997 में वस्त्र व्यापार विवाद को समाप्त करने हेतु समझौता।
  • महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम 2 फरवरी, साल 2006 से 200 जिलों में अधिसूचित किया गया था।
  • अंतर्राष्ट्रीय पैनल (आईपीसीसी) ने 2007 में ग्लोबल वार्मिंग पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।
  • 2 फरवरी साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने 122 संस्थाओं को 2 जी स्पैक्ट्रम के आवंटन को अवैध घोषित किया था।
  • 2 फरवरी साल 2013 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक एनआरआई वैज्ञानिक को पुरस्कृत किया , जिसने पीआरके और लेसिक लेजर अपवर्तक सर्जिकल तकनीकों  के लिए मार्ग  प्रशस्त किया था।

2 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति 

भारत में 2 फरवरी के दिन कुछ ऐसे लोगों ने जन्म लिया, जिन्होंने दुनिया में आकर बहुत बड़ा नाम किया , उनके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं –

  • भारत की एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमारी अमृत कौर का जन्म 1889 में हुआ।
  • अमेरिकन एक्टर चार्ल्स कोरोल का जन्म 1890 में हुआ।
  • दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार आन्दोलन के संगठक मोटूरि सत्यनारायण का जन्‍म 1902 में हुआ
  • उपन्‍यसकार, दार्शनिक और पटकथाकार लेखक एयन रैंड का जन्‍म 1905 में हुआ।
  • देश के जाने-माने लेखक, कवि और स्‍तंभकार खुशवंत सिंह का जन्‍म 1915 में हुआ।
  • राजनेता दसरथ देब का जन्म 2 फरवरी , 1916 में हुआ।
  • महिला अभिनेत्री फराह फॉसेट का 2 फरवरी , 1947 को जन्म हुआ।
  • भारतीय अभिनेत्री शमिता शेट्टी का जन्‍म 1979 में हुआ।

2 फ़रवरी को हुए निधन

2 फरवरी के दिन ऐसे शख्सियत की मौत हो गई , जिनकी चर्चा युगों-युगों तक होती रहेगी , हम उनके बारे आपको नीचे बता रहे हैं –

  • 1907 में पिरोयॉडिक टेबल बनाने वाले रूस के दिग्‍ग्‍ज केमिस्‍ट दिमित्री मेंदेलीव का निधन हुआ था।
  • 1958 में मद्रास के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी बलुसु संबमूर्ति का निधन हुआ था।
  • 1960 में हिन्दी साहित्य के एक महान् उपन्यासकार चतुरसेन शास्त्री का निधन हुआ था।आचार्य चतुरसेन शास्त्री (26 अगस्त 1891 – 2 फ़रवरी 1960) हिन्दी भाषा के एक महान उपन्यासकार थे। इनका अधिकतर लेखन ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है। इनकी प्रमुख कृतियां गोली, सोमनाथ, वयं रक्षाम: और वैशाली की नगरवधू इत्यादि हैं। आभा इनकी पहली रचना थी।Image result for चतुरसेन शास्त्री

    जीवन परिचय

    आचार्य चतुरसेन शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के चांदोख में हुआ था। इनका अधिकांश लेखन ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित था। आचार्य चतुरसेन के उपन्यास रोचक और दिल को छूने वाले होते है। यह बचपन से ही आर्य समाज से प्रभावित थे और इन्होंने अनाज मंडी शाहदरा का घर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड को दान कर दिया था, जिसमें आजकल विशाल लाइब्रेरी है।Image result for चतुरसेन शास्त्री

    कृतियाँ

    चतुरसेन शास्त्री हिन्दी के उन साहित्यकारों में हैं जिनका लेखन-क्रम साहित्य की किसी एक विशिष्ट विधा में सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होने ने लगभग पचास वर्ष के लेखकीय जीवन में 177 कृतियों का सृजन किया।वे मुख्यत: अपने उपन्यासों के लिए चर्चित रहे हैं। उन्होंने अपनी किशोरावस्था से ही हिन्दी में कहानी और गीतिकाव्य लिखना आरंभ कर दिया था। बाद में उनका साहित्य-क्षितिज फैलता गया और वे उपन्यास, नाटक, जीवनी, संस्मरण, इतिहास तथा धार्मिक विषयों पर लिखने लगे।शास्त्रीजी अध्येता ही नहीं, कुशल चिकित्सक भी थे। उन्होंने आयुर्वेद संबंधी लगभग एक दर्जन ग्रंथ लिखे। व्यवसाय से वैद्य होने पर भी उन्होंने साहित्य-सर्जन में गहरी रुचि बनाए रखी।Image result for चतुरसेन शास्त्री

    शास्त्रीजी अपनी शैली के अनोखे लेखक थे, जो अपने कथा-साहित्य में भी इतिहास, राजनीति, धर्मशास्त्र, समाजशास्त्र और युगबोध से सम्पृक्त विविध विषयों को दृष्टि में रखकर लिखते थे।उन्होंने उपन्यासों के अलावा और भी बहुत कुछ लिखा है। उन्होने प्राय: साढ़े चार सौ कहानियाँ लिखीं हैं। गद्य-काव्य, धर्म, राजनीति, इतिहास, समाजशास्त्र के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर भी उन्होंने अधिकारपूर्वक लिखा है। रचनाकारों ने तिलस्मी एवं जासूसी उपन्यास लिखे जो कि उन दिनों अत्यन्त लोकप्रिय हुए।Image result for चतुरसेन शास्त्री

    आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 32 उपन्यास, 450 कहानियां और अनेक नाटकों का सृजन कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। ऐतिहासिक उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने कई अविस्मरणीय चरित्र हिन्दी साहित्य को प्रदान किए। सोमनाथ, वयं रक्षाम:, वैशाली की नगरवधू, अपराजिता, केसरी सिंह की रिहाई, धर्मपुत्र, खग्रास, पत्थर युग के दो बुत, बगुला के पंख उनके महत्त्वपूर्ण उपन्यास हैं। चार खंडों में लिखे गए सोना और ख़ून Image result for सोना और खूनके दूसरे भाग में 1857 की क्रांति के दौरान मेरठ अंचल में लोगों की शहादत का मार्मिक वर्णन किया गया है। Image result for सोना और खूनगोली उपन्यास में राजस्थान के राजा-महाराजाओं और दासियों के संबंधों को उकेरते हुए समकालीन समाज को रेखांकित किया गया है। Image result for चतुरसेन शास्त्रीअपनी समर्थ भाषा शैली के चलते शास्त्रीजी ने अद्भुत लोकप्रियता हासिल की और वह जन साहित्यकार बने।

    इनकी प्रकाशित रचनाओं की संख्या 186 है, जो अपने ही में एक कीर्तिमान है। Image result for चतुरसेन शास्त्रीआचार्य चतुरसेन मुख्यत: अपने उपन्यासों के लिए चर्चित रहे हैं। इनके प्रमुख उपन्यासों के नाम हैं-

    1. वैशाली की नगरवधू
    2. वयं रक्षाम
    3. सोमनाथImage result for चतुरसेन शास्त्री
    4. मन्दिर की नर्तकी
    5. रक्त की प्यास
    6. सोना और ख़ून (चार भागों में)
    7. आलमगीर
    8. सह्यद्रि की चट्टानें
    9. अमर सिंह
    10. हृदय की परखImage result for चतुरसेन शास्त्री

    इनकी सर्वाधिक चर्चित कृतियाँ ‘वैशाली की नगरवधू’, ‘वयं रक्षाम’ और ‘सोमनाथ’ हैं। हम यहाँ ‘वैशाली की नगरवधू’ की विस्तृत चर्चा करेंगे, जो कि इन तीनों कृतियों में सर्वश्रेष्ठ है। यह बात कोई इन पंक्तियों का लेखक नहीं कह रहा, बल्कि स्वयं आचार्य शास्त्री ने इस पुस्तक के सम्बन्ध में उल्लिखित किया है – मैं अब तक की अपनी सारी रचनाओं को रद्द करता हूँ, और वैशाली की नगरवधू को अपनी एकमात्र रचना घोषित करता हूँ। भूमिका में उन्होंने स्वयं ही इस कृति के कथानक पर अपनी सहमति दी है –यह सत्य है कि यह उपन्यास है। परन्तु इससे अधिक सत्य यह है कि यह एक गम्भीर रहस्यपूर्ण संकेत है, जो उस काले पर्दे के प्रति है, जिसकी ओट में आर्यों के धर्म, साहित्य, राजसत्ता और संस्कृति की पराजय, मिश्रित जातियों की प्रगतिशील विजय सहस्राब्दियों से छिपी हुई है, जिसे सम्भवत: किसी इतिहासकार ने आँख उघाड़कर देखा नहीं है।

    आचार्य चतुरसेन की पुस्तक वयं रक्षाम: Image result for ‘वयं रक्षाम’का मुख्य पात्र रावण है न कि राम। यह रावण से संबन्धित घटनाओं का ज़िक्र करती है और उनका दूसरा पहलू दिखाती है। इसमें आर्य और संस्कृति के संघर्ष के बारे में चर्चा है। आर्य संस्कृति के बारे में यह कुछ इस प्रकार बताती है-

    उन दिनों तक भारत के उत्तराखण्ड में ही आर्यों के सूर्य-मण्डल और चन्द्र मण्डल नामक दो राजसमूह थे। दोनों मण्डलों को मिलाकर आर्यावर्त कहा जाता था। उन दिनों आर्यों में यह नियम प्रचलित था कि सामाजिक श्रंखला भंग करने वालों को समाज-बहिष्कृत कर दिया जाता था। दण्डनीय जनों को जाति-बहिष्कार के अतिरिक्त प्रायश्चित जेल और जुर्माने के दण्ड दिये जाते थे। प्राय: ये ही बहिष्कृत जन दक्षिणारण्य में निष्कासित, कर दिये जाते थे। धीरे-धीरे इन बहिष्कृत जनों की दक्षिण और वहां के द्वीपपुंजों में दस्यु, महिष, कपि, नाग, पौण्ड, द्रविण, काम्बोज, पारद, खस, पल्लव, चीन, किरात, मल्ल, दरद, शक आदि जातियां संगठित हो गयी थीं।Image result for ‘वयं रक्षाम’वयं रक्षाम: से

    आचार्य चतुरसेन शास्त्री के भी अपने लेखन के संबंध में कुछ ऐसे ही वक्तव्य मिल जाते हैं। ‘सोमनाथ’ के विषय में उन्होंने लिखा है कि कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के उपन्यास ‘जय सोमनाथ’ को पढ़ कर उनके मन में आकांक्षा जागी कि वे मुंशी के नहले पर अपना दहला मारें; और उन्होंने अपने उपन्यास ‘सोमनाथ’ की रचना की। ‘वयंरक्षाम:’ की भूमिका में उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने कुछ नवीन तथ्यों की खोज की है, जिन्हें वे पाठक के मुँह पर मार रहे हैं। परिणामत: नहले पर दहला मारने के उग्र प्रयास में ‘सोमनाथ’ अधिक से अधिक चामत्कारिक तथा रोमानी उपन्यास हो गया है; और अपने ज्ञान के प्रदर्शन तथा अपने खोजे हुए तथ्यों को पाठकों के सम्मुख रखने की उतावली में, उपन्यास विधा की आवश्यकताओं की पूर्ण उपेक्षा कर वे ‘वयंरक्षाम:’ और ‘सोना और ख़ून’ में पृष्ठों के पृष्ठ अनावश्यक तथा अतिरेकपूर्ण विवरणों से भरते चले गए हैं। किसी विशिष्ट कथ्य अथवा प्रतिपाद्य के अभाव ने उनकी इस प्रलाप में विशेष सहायता की है। ये कोई ऐसे लक्ष्य नहीं हैं, जो किसी कृति को साहित्यिक महत्व दिला सकें अथवा वह राष्ट्र और समाज की स्मृति में अपने लिए दीर्घकालीन स्थान बना सकें। ‘सोना और ख़ून’ लिखते हुए चतुरसेन शास्त्री, कदाचित् इतिहास की रौ में ऐसे बह गए कि भूल ही गए कि वे उपन्यास लिख रहे हैं, अत: सैकड़ों पृष्ठ इतिहास ही लिखते चले गए। इससे उपन्यास तत्व की हानि होती है; क्योंकि उपन्यास मात्र इतिहास नहीं है। ‘वैशाली की नगरवधू’ तथा अन्य अनेक ऐतिहासिक उपन्यास लिखने का लक्ष्य एक विशेष प्रकार के परिवेश का निर्माण करना भी हो सकता है; किंतु इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि अनेक लोग ‘वैशाली की नगरवधू’ में स्त्री की बाध्यता और पीड़ा देखते हैं। वैसे इतिहास का वह युग, एक ऐसा काल था, जिसमें साहित्यकार को अनेक आकर्षण दिखाई देते हैं। महात्मा बुद्ध, आम्रपाली, सिंह सेनापति तथा अजातशत्रु के आसपास हिन्दी साहित्य की अनेक महत्त्वपूर्ण कृतियों ने जन्म लिया है। उसमें स्त्री की असहायता देखी जाए, या गणतंत्रों के निर्माण और उनके स्वरूप की चर्चा की जाए, वात्सल्य की कथा कही जाए, या फिर मार्क्सवादी दर्शन का सादृश्य ढूँढा जाए – सत्य यह है कि वह परिवेश कई दृष्टियों से असाधारण रूप से रोमानी था।

    उनकी प्रमुख कृतियां हैं-

    उपन्यास

    वैशाली की नगरवधू, सोमनाथ , वयंरक्षामः, गोलीRelated image, सोना और खून (तीन खंड), रक्त की प्यास, हृदय की प्यास, अमर अभिलाषा, नरमेघ, अपराजिता, धर्मपुत्र

    नाटक

    राजसिंह, छत्रसाल, गांधारी, श्रीराम, अमर राठौर , उत्सर्ग, क्षमा

    गद्यकाव्य

    हृदय की परख, अंतस्तल, अनुताप, रूप, दुःख, मां गंगी, अनूपशहर के घाट पर, चित्तौड़ के किले में, स्वदेश

    आत्मकथा

    मेरी आत्मकहानी

    कहानी संग्रह

    हिन्दी भाषा और साहित्य का इतिहास (सात खंड), अक्षत, रजकण, वीर बालक, मेघनाद, सीताराम, सिंहगढ़ विजय, वीरगाथा, लम्बग्रीव, दुखवा मैं कासों कहूं सजनी, कैदी, आदर्श बालक, सोया हुआ शहर, कहानी खत्म हो गई, धरती और आसमान, मेरी प्रिय कहानियां

    एकांकी संग्रह

    राधाकृष्ण, पांच एकांकी, प्रबुद्ध, सत्यव्रत हरिश्चंद्र, अष्ट मंगल

    अन्य

    आरोग्य शास्त्र, अमीरों के रोग, छूत की बीमारियां, सुगम चिकित्सा, काम-कला के भेदImage result for चतुरसेन शास्त्री (आयुर्वेदिक ग्रंथ), सत्याग्रह और असहयोग, गोलसभा, तरलाग्नि, गांधी की आंधी (पराजित गांधी), मौत के पंजे में जिन्दगी की कराह (राजनीति), ।

    इनके अतिरिक्त शास्त्रीजी ने प्रौढ़ शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्म, इतिहास, संस्कृति और नैतिक शिक्षा पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं।

  • 1978 में मलयाली भाषा के एक प्रसिद्ध साहित्यकार गोविंद शंकर कुरुप का निधन हुआ था।
  • 2007 में भारतीय फ़िल्म व टेलीविजन अभिनेता विजय अरोड़ा का निधन हुआ था।
  • 1982 में प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया का निधन हुआ था।
  • 2 फरवरी , साल 2011 में भारत के सबसे प्रभावशाली रक्षा विश्लेषक कृष्णस्वामी सुब्रह्मण्यम का निधन।
  • अभिनेता फिलिप सीमोर हॉफमैन का 2 फरवरी साल 2014 में निधन।
  • पाकिस्तान के उपन्यासकार इंतजार हुसैन का 2 फरवरी साल 2016 को निधन।

2 फरवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

2 फरवरी के दिन को राष्ट्रीय और अंतराष्टीय उत्सव के रुप में भी मनाते हैं –

  • वर्ल्ड वेटलैंड्स डे
  • वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)

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